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प्रदर्शनकारी बच्चों को अंधा करने को मोदी सरकार ने आयरलैंड से मंगवाया पैलेट गन,बहुत ही गंदा है पीएम का मन

दर्जनों छात्रों के शरीर छलनी हुए, राहुल गांधी ने पत्रकारों को दिए सबूत

  •  राहुल ने प्रेस के सामने मिलवाया साहिल को, साहिल की एक आंख चली गई
  •  जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन आजमा चुकी है सरकार
  •  मोदी सरकार आरोप मानने को तैयार नहीं, कहा- जांच कर रहे
  •  संयुक्त राष्ट्र में हो गई भारत की शिकायत, मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने पैलेट गन से छर्रे बरसाए। शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने खुद पत्रकारों को इसके सबूत पेश किए। हालांकि, नरेंद्र मोदी सरकार अभी भी इसे मानने को राजी नहीं है। उसका कहना है कि वह फिलहाल आरोपों को जांच कर रही है।

 

क्या है पैलेट गन?

पैलेट गन (एक तरह की छर्रे वाली बंदूक) की चर्चा भारत में पहले भी रही है, जब कश्मीर में इसका इस्तेमाल शुरू किया गया। इस पर संयुक्त राष्ट्र ने इस पर चिंता जताई थी और इस्तेमाल रोकने के लिए कहा था। संयुक्त राष्ट्र ने इससे इंसानी शरीर में होने वाले नुकसान को लेकर फिक्र जताई थी। कश्मीर से पहले इस गन का इस्तेमाल ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर हो चुका है।

भीड़ के खिलाफ पैलेट गन

पैलेट गन का बड़ा पैमाने पर इस्तेमाल, खासतौर से भीड़ को काबू करने में ब्रिटेन ने किया। भीड़ के खिलाफ पैलेट-फायरिंग शॉटगन का इस्तेमाल सबसे पहले 1970 में उत्तरी आयरलैंड में दंगों के दौरान ब्रिटिश सेना ने किया। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने द ट्रबल्स (नागरिक अशांति) के दौरान काइनेटिक इम्पैक्ट राउंड (शुरुआत में रबर और बाद में प्लास्टिक बैटन/पैलेट राउंड) विकसित किए।

इजरायल और भारत में पैलेट गन

इजरायल ने 1987–1993 के दौरान विरोध प्रदर्शनों को काबू करने के लिए पैलेट गन को अपनाया। भारत में 2010 में जम्मू-कश्मीर में अर्धसैनिक बलों ने पहली बार 12-गेज पंप-एक्शन शॉटगन का इस्तेमाल किया, जिनसे सैकड़ों छोटे लेड/मेटल पैलेट निकलते थे। इसके अलावा भी दुनिया के कुछ हिस्सों से इस गन का इस्तेमाल हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र क्या कहता है?

संयुक्त राष्ट्र पैलेट गन के इस्तेमाल से होने वाले अत्यधिक और स्थायी शारीरिक नुकसान (विशेष रूप से आंखों में गंभीर चोट) के कारण इसका कड़ा विरोध करता है। संयुक्त राष्ट्र इसे भीड़ नियंत्रण के लिए अत्यंत खतरनाक और अनुचित मानता है। नागरिकों पर पैलेट गन का इस्तेमाल कई अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन का उल्लंघन और मानवाधिकारों के खिलाफ है। पैलेट गन से गंभीर शारीरिक नुकसान हो सकता है। खासतौर से आंख में इसके लगने से अंधापन हो सकता है। इसके कारतूस से निकलने वाले सैकड़ों छोटे धातु (सीसे या लोहे) के छर्रे हवा में तेजी से फैलते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर और अनियंत्रित नुकसान होता है। पैलेट गन के छर्रे सीधे आंख की पुतली और नाजुक हिस्सों को चीर देते हैं, जिससे हमेशा के लिए अंधापन हो सकता है। इन छर्रों की गति इतनी तेज होती है कि वे इंसानी खाल को आसानी से छेद देते हैं। ये छर्रे मांस में फंस जाते हैं और नुकसान करते हैं।

क्या बताया राहुल गांधी ने?

शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचाब भी मौजूद थे, जिनकी आंख प्रदर्शन के दौरान लगी गंभीर चोटों के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। राहुल गांधी ने कहा कि 20 जुलाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सुरक्षा बलों ने पैलेट गन (छर्रों) का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि साहिल तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस की बर्बर कार्रवाई में उनकी एक आंख की रोशनी जाने की नौबत आ गई है। साहिल लोचाब दिल्ली के नजफगढ़ के रहने वाले हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हैं। वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में हाथ बटाने के लिए पार्ट-टाइम कार भी चलाते हैं। साहिल एसएससी दिल्ली कांस्टेबल भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और 2024-25 में हुए पेपर लीक से प्रभावित हुए थे। 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित ‘संसद मार्च’ में साहिल पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग लेकर शामिल हुए थे। इसी दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। साहिल को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने सर्जरी कर उनकी आंख से धातु के टुकड़े व छर्रे बाहर निकाले। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी दाहिनी आंख की रोशनी वापस आने की संभावना बेहद कम है।

तिरंगा लेकर खड़े थे साहिल, एक आंख गंवाई

राहुल ने कहा, ”सरकार कह रही है कि पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ जबकि उस समय पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया जब यह युवक देश का तिरंगा लेकर खड़ा था। इसकी आंख को नुकसान पहुंचा है और इसे दिखाई नहीं दे रहा है।” राहुल गांधी ने कहा, ”ये हमारे भविष्य हैं और ऐसे हजारों युवाओं पर पैलेट गन चलाई गई है, लाठियां चलाई गई हैं, उन्हें मारा और पीटा गया है। ये पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।” उन्होंने कहा कि पेपर लीक से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और सरकार को झूठ बोलना बंद करना पड़ेगा। राहुल गांधी ने कहा, ”सरकार ने हमारे भविष्य पर आक्रमण किया है। भविष्य, यानी युवा, सिर्फ तीन चीजें कह रहा है। पहली मांग है कि शिक्षा मंत्री को बर्खास्त किया जाए। दूसरी मांग है कि लाठी चलाने वालों और छात्रों की पिटाई करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो। तीसरी मांग है कि प्रधानमंत्री युवाओं से माफी मांगें।” उन्होंने कहा, ”धर्मेंद्र प्रधान एक अपराधी शिक्षा मंत्री हैं। उन्हें हटना होगा। वह हमारी ध्वस्त हो चुकी शिक्षा व्यवस्था के प्रतीक हैं। उन्हें जाना होगा।” राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष छात्रों की मांगों के साथ खड़ा है और पेपर लीक जैसे मामलों में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

अपराधी हैं भारत के शिक्षा मंत्री- राहुल

साहिल की आंख डैमेज हो गई है। उनकी आंख से दिखाई नहीं दे रहा है। ये हमारे हिंदुस्तान के फ्यूचर हैं। ऐसे हजारों युवाओं पर पैलेट गन चलाई गई है। लाठी चलाई गई है। मारा गया है। पीटा गया है। साहिल का फिजिकल डैमेज हुआ है। मैं कह नहीं सकता कि उनकी आंख बचेगी या नहीं बचेगी। उनकी कोई गलती नहीं है। राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान को एक ‘अपराधी’ शिक्षा मंत्री तक बता दिया जिन्हें हटाना होगा। उन्होंने भारत की शिक्षा व्यवस्था के ‘पतन का प्रतीक’ करार दिया। राहुल ने कहा, उन्हें जाना ही होगा। हजारों लोगों के विरोध प्रदर्शन का कारण वो ही हैं। उन्हें जाना ही होगा। सरकार को झूठ बोलना बंद करना पड़ेगा। सरकार ने हमारे फ्यूचर पर आक्रमण किया है और फ्यूचर क्या कह रहा है? फ्यूचर सिर्फ तीन चीजें कह रहा है। पहली बात जो एजुकेशन मिनिस्टर है, जिसके कारण ये हुआ है, जिसके कारण ये बाहर निकले हैं। पीसफुल प्रोटेस्ट किए। जिसके कारण पेपर लीक हो रहा है। उसको हटाया जाए। दूसरी मांग कि ये कि जो हमारे फ्यूचर पे गोली चलाए हैं। लाठी मारे हैं। उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। तीसरी मांग कि पीएम नरेंद्र मोदी जो पूरे सिस्टम के ऑपरेटर हैं। वो ऐसे हजारों युवाओं से माफी मांगें, जिन पर हमले किए गए थे।

 

संयुक्त राष्ट्र में भेजी शिकायत

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने दिल्ली पुलिस की प्रदर्शनकारी युवाओं पर ज्यादती के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में बाकायदा लिखित शिकायत दर्ज की है। अपनी शिकायत में साकेत गोखले से कहा कि न केवल पैलेट गन, बल्कि दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और सुरक्षा बलों ने अपनी सीमा से बाहर जाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बिजली का झटका देने वाले स्टन गन, कीलों वाली लाठियां तक इस्तेमाल कीं। साकेत ने इसे संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार नियमों का घोर उल्लंघन बताया है। अब संयुक्त राष्ट्र इस मामले में भारत सरकार से जवाब मांग सकता है। अगर भारत सरकार इस पर जवाब नहीं देती है तो इसे मानवाधिकार उल्लंघन का मामला मानकर भारत सरकार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

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