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कोडीन कफ सिरप घोटाला,मी लार्ड ने मामले से खुद को अलग कर डाला

जमानत के लिए हाईकोर्ट को पटाने की कोशिश, जज ने मामले से खुद को अलग किया, कहा- अदालत के लिए काला दिन

  •  75 आरोपियों की जमानत पर होना था फैसला, हो गया बड़ा कांड
  •  जज बोले- जमानत याचिकाओं पर अब कोई और जज की कोर्ट करे सुनवाई
  •  दुबई में छिपे शुभम जायसवाल का पिता है आरोपी भोला
  •  यूपी की सियासत गर्म, विपक्षी दलों ने योगी सरकार पर लगाए तीखे आरोप

इलाहाबाद। यूपी में 900 करोड़ रुपए के बहुचर्चित कोडीन कफ सिरप कांड के सरगना शुभम जायसवाल और 75 आरोपियों की जमानत के लिए शुभम के पिता भोला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज को पटाने की कोशिश की। इससे नाराज जज ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर जमानत की पूरी फाइलें चीफ जस्टिस को भेज दी। जज ने इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के इतिहास का सबसे काला दिन बताया है। इस मामले के सामने आने के बाद यूपी की सियासत गर्म हो गई है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने कोडीन कफ सिरप मामले के मुख्य आरोपी भोला जायसवाल समेत 75 आरोपियों की जमानत याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद जज ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे हाईकोर्ट के इतिहास का काला दिन करार दिया। न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए न्यायाधीश ने सभी याचिकाओं को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजकर किसी अन्य पीठ को सौंपने का निर्देश दिया।

क्या कहा हाईकोर्ट ने

अदालत ने कहा कि फैसला सुरक्षित रखने से पहले न्यायाधीश तक निजी पहुंच बनाने की कोशिश न्यायिक व्यवस्था की गरिमा पर गंभीर आघात है। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसे में फैसला किसी के पक्ष में आता है, तो निष्पक्षता पर अनावश्यक संदेह पैदा हो सकता है। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष रूप से होता हुआ दिखना भी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि लंबित मामले में न्यायाधीश तक निजी संपर्क का प्रयास न्यायिक आचरण, अधिवक्ता नैतिकता और संवैधानिक स्वतंत्रता के खिलाफ है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रत्येक नागरिक की संवैधानिक गारंटी है और इसे प्रभावित करने की कोशिश न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला है। इसलिए इन मामलों को दोबारा इस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध न करने का निर्देश दिया गया है। मामले के आरोपियों ने पहले प्राथमिकी रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ खंडपीठ का रुख किया था, लेकिन सभी याचिकाएं खारिज हो गई थीं। इसके बाद अदालत ने अग्रिम जमानत की मांग भी ठुकरा दी थी। अब गिरफ्तार आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी, जिसके दौरान यह अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया।

शुभम का पिता है भोला

भोला प्रसाद, कोडीन कफ सिरप गैंग के सरगना शुभम जायसवाल का पिता है। शुभम फरार है। उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। कोडीन कफ सिरफ केस में करीब 75 से ज्यादा आरोपियों ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। इनकी एक साथ सुनवाई के लिए कोर्ट ने गुरुवार तारीख 30 जुलाई और समय सुबह 10 बजे तय की थी। आरोपियों के वकीलों के साथ ही राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और एजीए प्रथम परितोष कुमार मालवीय भी मौजूद थे। सुनवाई शुरू होते ही कोर्ट ने कहा- आरोपियों द्वारा पीठासीन न्यायाधीश तक पहुंच बनाने और संपर्क के प्रयास किए गए। यदि ऐसे आचरण को नजरअंदाज किया गया तो यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता की जड़ों को कमजोर करेगा और आम जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास डगमगा जाएगा। जज कृष्ण पहल ने कहा- यदि ऐसे हालात में फैसला उस पक्ष में आता, जिसकी दलीलों में दम दिखाई देता था तो निर्णय की कानूनी मजबूती के बावजूद यह संदेह पैदा हो सकता था कि फैसला न्यायिक विवेक के बजाय किसी बाहरी प्रभाव या अनुचित प्रयास का परिणाम है।

 

पहले ही खारज हो चुकी है केस रद्द करने की मांग

कोडीन कफ सिरप मामले में सबसे पहले आरोपियों ने केस रद्द किए जाने के लिए याचिकाएं दाखिल की थीं, मगर इन याचिकाओं को हाईकोर्ट की तीन अलग-अलग खंडपीठों, लखनऊ बेंच की एक खंडपीठ ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि मामले में विवेचना किए जाने का पर्याप्त आधार है। इसके बाद आरोपियों ने अग्रिम जमानत पाने के लिए अर्जियां दाखिल की थीं। इन अग्रिम जमानत याचिकाओं पर भी हाईकोर्ट से किसी भी वादी को राहत नहीं मिली और गिरफ्तारियां जारी रहीं। इसके बाद नियमित जमानत के लिए याचिकाएं दाखिल की गईं। इनमें भी चार आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट की अलग-अलग पीठों द्वारा खारिज की जा चुकी हैं।

 

काशी के 28 कारोबारियों पर दर्ज है मुकदमा

अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला जायसवाल सहित काशी के 28 दवा कारोबारियों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप है कि 100 करोड़ की 89 लाख शीशी प्रतिबंधित कफ सिरप खरीदी और बेची गई। काशी के ही 93 मेडिकल स्टोर के नाम पर 84 लाख शीशी प्रतिबंधित कप सिरप खरीदी-बेची गई है। जिस मेडिकल स्टोर के नाम पर कारोबार दिखाया गया, उनमें से ज्यादातर मौके पर नहीं मिले। बाद में बंगाल और बांग्लादेश तक फैले इस अवैध कारोबार के नेटवर्क के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि 9 बंद फर्मों को कफ सिरप बेचा गया। इनमें मेसर्स सृष्टि फार्मा, जीटी इंटरप्राइजेज, शिवम फार्मा, हर्ष फार्मा, डीएसए फार्मा, महाकाल मेडिकल स्टोर, निशांत फार्मा, वीपीएम. मेडिकल एजेंसी और श्री बालाजी मेडिकल के नाम शामिल हैं। आयुक्त के मुताबिक, सिर्फ कोडीन युक्त सिरप की खरीद-बिक्री के लिए ही फर्जी फर्में बनाई गईं। सोनभद्र, जौनपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, चंदौली समेत अन्य जनपदों में भी शुभम जायसवाल के खिलाफ केस दर्ज हैं।

इस पूरे मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीखा सियासी घमासान छिड़ गया है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि जांच एजेंसियां छोटे-मोटे कारोबारियों को बलि का बकरा बना रही हैं, जबकि इस सिंडिकेट को संरक्षण देने वाले ‘सफेदपोश’ नेताओं और बड़े अफसरों पर आज तक हाथ नहीं डाला गया है। समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया है कि 900 करोड़ रुपए के इस नेटवर्क में शामिल कई बड़े नेताओं, रसूखदार सफेदपोशों और प्रशासनिक अधिकारियों के नाम सामने आने के बावजूद उन पर कोई कानूनी शिकंजा क्यों नहीं कसा गया? विपक्ष का आरोप है कि एसआईटी की कार्रवाई केवल खुदरा विक्रेताओं, छोटे दवा कारोबारियों और फुटकर दुकानदारों तक सीमित कर दी गई है ताकि असली मास्टरमाइंड्स को बचाया जा सके। दूसरी ओर योगी सरकार का पक्ष है कि स्पेशल टास्क फोर्स और एसआईटी किसी भी दोषी को बख्श नहीं रही हैं। 12 मुख्य आरोपियों के खिलाफ 40,000 पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया जा चुका है और 100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं।

दुबई में बैठा मास्टरमाइंड

सिंडिकेट का मुख्य सरगना शुभम जायसवाल इस समय दुबई में छिपा बैठा है। हालांकि उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो चुका है, लेकिन उसके प्रत्यर्पण की कागजी प्रक्रिया परवान नहीं चढ़ पा रही है, जिसे लेकर राजनीतिक दल सरकार की मंशा पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

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