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चन्दौली के बद्रीनाथ सर्जिकल सेंटर डॉक्टर की लापरवाही से नवजात की चली गयी जान, धरती का भगवान बना शैतान

नवजात की मौत से मचा हड़कंप.....ऑपरेशन से वाराणसी तक… आखिर क्या छिपाता रहा अस्पताल.....?

  • बद्रीनाथ सर्जिकल सेंटर की कार्यप्रणाली पर फिर उठे गंभीर सवाल | परिजनों का सनसनीखेज आरोप—लापरवाही से बिगड़ी नवजात की हालत, इलाज के नाम पर 50 हजार और शव देने के नाम पर एक लाख रुपये लेने का दावा….!

अचूक संघर्ष  चकिया, चन्दौली। में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिला संयुक्त चिकित्सालय से दो किलो मीटर स्थित बद्रीनाथ अस्पताल/सर्जिकल सेंटर में प्रसव के बाद नवजात शिशु की मौत के मामले ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मृत नवजात के पिता ने अस्पताल और संबंधित चिकित्सकीय प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की है। आरोपों में कथित चिकित्सकीय लापरवाही, नवजात को परिजनों से दूर रखना, इलाज के नाम पर धनराशि लेना और शव सौंपने के नाम पर भारी रकम मांगने जैसे गंभीर दावे किए गए हैं।

मामले को लेकर ग्राम भदौलीया, थाना बबुरी निवासी अर्जुन पुत्र राजेन्दर ने शिकायत में पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए संबंधित चिकित्सक एवं अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसकी पत्नी किरन देवी का प्रसव 25 अगस्त 2026 को बद्रीनाथ अस्पताल में कराया गया।

ऑपरेशन के दौरान लापरवाही का आरोप….!

शिकायत के अनुसार अस्पताल में स्वयं को चिकित्सक बताने वाले विकास द्वारा महिला का ऑपरेशन किया गया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान कथित लापरवाही के कारण नवजात की हालत बिगड़ गई।

शिकायतकर्ता का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान उन्हें बच्ची होने की जानकारी दी गई, लेकिन गंभीर हालत बताकर नवजात को परिजनों से नहीं मिलवाया गया। इसके बाद बच्चे के उपचार के नाम पर उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कही गई।

इलाज के नाम पर अलग-अलग जगहों पर भुगतान का दावा….!

परिजनों की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नवजात के उपचार के नाम पर निर्भयदास बाबा कीनाराम अस्पताल में 30 हजार रुपये तथा बद्रीनाथ अस्पताल में 20 हजार रुपये लिए गए।

इसके बाद शिकायतकर्ता के मुताबिक, परिजनों को पूरी जानकारी दिए बिना नवजात को इलाज के लिए वाराणसी भेज दिया गया। वहां करीब पांच दिनों तक इलाज चलने के बाद शिशु को मृत घोषित किए जाने का दावा किया गया।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि शिकायतकर्ता के अनुसार शव सौंपने के नाम पर भी एक लाख रुपये लिए गए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है और इनकी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

आखिर परिजनों से बच्चे को क्यों रखा गया दूर….!

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि नवजात की हालत इतनी गंभीर थी तो अस्पताल प्रबंधन द्वारा परिजनों को बच्चे की स्थिति की स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई? परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान न तो बद्रीनाथ अस्पताल में और न ही कीनाराम अस्पताल में उन्हें नवजात को देखने दिया गया।

यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल चिकित्सकीय लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि मरीज के परिजनों को सूचना देने, उपचार की पारदर्शिता और अस्पताल की जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करता है।

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर भी उठे सवाल…!

घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहा है। यदि किसी निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद नवजात की मौत हुई है और परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही तथा आर्थिक शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, तो क्या विभाग इसकी तत्काल जांच कराएगा..!

खासकर तब, जब शिकायत में अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल के पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता, ऑपरेशन की अनुमति, मेडिकल रिकॉर्ड, मरीज की केस शीट, रेफरल रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

सीएमओ बोले—घटना की जानकारी नहीं थी….!  

मामले को लेकर जब सीएमओ चन्दौली से बात की गई तो उन्होंने कहा कि घटना की उन्हें अभी जानकारी नहीं थी। उन्होंने फिलहाल मामले पर कोई बयान देने से इनकार किया।

सीएमओ के इस बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि शिकायत सामने आने के बाद विभाग मामले की जांच के लिए क्या कदम उठाता है और अस्पताल के संचालन एवं संबंधित चिकित्सकीय प्रक्रिया की जांच होती है या नहीं।

जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई….!

फिलहाल यह मामला परिजनों की शिकायत और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। नवजात की मौत की वास्तविक वजह, ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं, उपचार के दौरान क्या-क्या किया गया तथा धनराशि लिए जाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है—इन सभी बिंदुओं का स्पष्ट जवाब मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल के दस्तावेज, भुगतान की रसीदों और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

लेकिन घटना ने चकिया में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर जरूर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की जांच और अस्पताल प्रबंधन के आधिकारिक पक्ष पर टिकी हैं।

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