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भाजपा विधायक के कुकर्मी भतीजे गौरव के द्वारा देह व्यापार के साथ जुआ का काला कारोबार, क्या सिगरा पुलिस बनी हिस्सेदार?

डीजीपी साहब एक नजर इधर भी

  • सिगरा में कथित जुए का अड्डा, खाकी की निगरानी पर सवाल
  • भाजपा विधायक के भतीजे पर जुए का संचालन और अनैतिक गतिविधियों के गंभीर आरोप
  • अदिति गेस्ट हाउस के लाइसेंस पर सवाल, फिर भी धड़ल्ले से संचालन का दावा
  • कुबेर कॉम्प्लेक्स के सामने रोजाना करोड़ों के दांव का दावा, पुलिस की नजर क्यों नहीं
  • गेस्ट हाउस में कथित अनैतिक गतिविधियों की शिकायतों से प्रशासनिक निगरानी कठघरे में
  • कई लोगों के नाम उछले, आरोपों की जांच, जिम्मेदारों की भूमिका स्पष्ट करने की मांग
  • सिगरा पुलिस की सक्रियता पर सवाल अवैध धंधा है तो कार्रवाई क्यों नहीं

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सिगरा थाना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कथित जुए के संचालन और एक गेस्ट हाउस में कथित अनैतिक गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप भाजपा के पिंडरा विधायक अवधेश सिंह के भतीजे गौरव सिंह पिंचू से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
स्थानीय सूत्रों के दावों के अनुसार सिगरा में कुबेर कॉम्प्लेक्स के सामने वाली गली में बड़े पैमाने पर जुए का कथित कारोबार संचालित हो रहा है। यहां प्रतिदिन भारी रकम के दांव लगाए जाने और करोड़ों रुपये तक का लेन-देन होने की चर्चा है। इतनी बड़ी रकम के कथित खेल का दावा यदि सही है तो यह सवाल स्वाभाविक है कि सिगरा पुलिस की स्थानीय सूचना तंत्र और निगरानी व्यवस्था आखिर कर क्या रही है।
मामला यहीं नहीं रुकता। सिगरा स्थित अदिति गेस्ट हाउस को लेकर भी उसके लाइसेंस और वैधानिक अनुमतियों पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि आवश्यक अनुमति के बिना इसका संचालन किया जा रहा है और परिसर का इस्तेमाल कथित तौर पर ऐसी गतिविधियों के लिए हो रहा है जिनकी वैधता संदिग्ध है।
यानी सवाल एक कथित जुए के अड्डे का ही नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क का है जिसके बारे में स्थानीय स्तर पर चर्चाएं और शिकायतें सामने आ रही हैं।

 

सड़क से गली तक दांव का कथित खेल

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक सिगरा के व्यस्त इलाके में कथित जुए का संचालन कोई छिपी हुई गतिविधि नहीं है। कुबेर कॉम्प्लेक्स के सामने वाली गली में बड़े पैमाने पर जुआ खेले जाने के दावे किए जा रहे हैं। दावों में रोजाना लगभग एक करोड़ रुपये तक के जुए का उल्लेख किया गया है। यह आंकड़ा कितना सही है, इसका निर्धारण जांच के बाद ही संभव है। लेकिन यदि रकम का एक अंश भी वास्तविक है तो मामला सामान्य जुए की शिकायत से कहीं बड़ा हो जाता है। पुलिस के लिए जांच का रास्ता भी साफ है मौके की निगरानी, सीसीटीवी फुटेज, संदिग्ध लेन-देन, मोबाइल लोकेशन, गवाहों के बयान और पूर्व शिकायतों की पड़ताल।

 

अदिति गेस्ट हाउस के कागज सामने आएं

अदिति गेस्ट हाउस को लेकर उठे सवालों का सबसे आसान जवाब दस्तावेजों से मिल सकता है। गेस्ट हाउस के पास संचालन का वैध लाइसेंस है या नहीं? भवन का स्वीकृत उपयोग क्या है? अग्निशमन विभाग की अनुमति है या नहीं? पुलिस सत्यापन और अन्य आवश्यक अनुमतियां पूरी हैं या नहीं? संबंधित निकाय में इसका पंजीकरण किस श्रेणी में है? यदि सभी दस्तावेज वैध हैं तो संबंधित विभाग को स्थिति स्पष्ट करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। लेकिन यदि आवश्यक अनुमति के बिना संचालन का आरोप सही पाया जाता है तो सवाल यह होगा कि इतने समय तक संबंधित विभागों ने कार्रवाई क्यों नहीं की। प्रशासन को केवल बयान जारी करने के बजाय दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने रखनी चाहिए।

जुए के साथ कथित अनैतिक गतिविधियों का आरोप

गेस्ट हाउस को लेकर स्थानीय स्तर पर कथित अनैतिक गतिविधियों के आरोप भी लगाए जाते हैं। ऐसे आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं और इन्हें केवल चर्चाओं के आधार पर सच नहीं माना जा सकता। यही कारण है कि पुलिस और प्रशासन के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। यदि अवैध गतिविधियां चल रही हैं तो केवल संचालक ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण या सुविधा उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। किसी भी प्रतिष्ठान को राजनीतिक पहचान अथवा प्रभाव के कारण जांच से बाहर नहीं रखा जा सकता।

कई नाम सामने, भूमिका की जांच जरूरी

स्थानीय सूत्रों ने गौरव सिंह पिंचू के साथ कुछ अन्य लोगों के नाम भी लिए जा रहे हैं। इनमें रोशन सिंधी, राजू रफीक और विक्की सोन पापड़ी के नाम बताए जा रहे हैं। हालांकि इन व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उनकी भूमिका को अपराध के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि पुलिस के पास इनके संबंध में कोई शिकायत या ठोस सूचना आती है तो जांच में इनकी भूमिका भी स्पष्ट की जानी चाहिए। किसी व्यक्ति का नाम चर्चा में आ जाना अपराध का प्रमाण नहीं है। लेकिन गंभीर आरोप सामने आने के बाद जांच न करना कहीं न कहीं आरोपों की पुष्टि को मजबूत बनाता है।

सिगरा पुलिस की ‘निगरानी’ पर बड़ा सवाल

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल सिगरा पुलिस से जुड़ा है। स्थानीय स्तर पर जुए के बड़े अड्डे की चर्चा है, लोग स्थान तक बता रहे हैं और भारी रकम के दांव लगाए जाने के आरोप हैं तो स्थानीय पुलिस की सूचना व्यवस्था को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? यदि पुलिस को जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई, कभी औचक निरीक्षण हुआ, किसी टीम ने मौके की निगरानी की, कोई शिकायत दर्ज हुई। क्या पुलिस ने गेस्ट हाउस के दस्तावेजों की जांच की इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए। क्योंकि पुलिस की विश्वसनीयता केवल अपराध होने के बाद गिरफ्तारी से नहीं बनती। अपराध को पनपने से रोकना भी उसकी जिम्मेदारी है।

राजनीतिक रिश्ते जांच की ढाल नहीं बन सकते

आरोप जिस व्यक्ति से जुड़े बताए जा रहे हैं, उनका राजनीतिक परिवार से संबंध होने के कारण मामला और संवेदनशील हो जाता है। यदि आरोप गलत हो तो पुलिस को जांच कर संबंधित व्यक्ति को बेवजह बदनाम करने की साजिश पर रोक लगानी चाहिए। यदि सही है तो तब राजनीतिक संबंध किसी भी कार्रवाई के रास्ते में नहीं आने चाहिए। कानून की नजर में व्यक्ति का परिचय नहीं, उसका कृत्य महत्वपूर्ण होना चाहिए। यही कसौटी पुलिस और प्रशासन की निष्पक्षता की असली परीक्षा होगी।

‘करोड़ों के जुए’ का दावा, जांच कितनी गहरी होगी

रोजाना करोड़ों रुपये के जुए के दावे को केवल सनसनी के रूप में छोड़ देना भी उचित नहीं होगा। यदि इतनी बड़ी रकम के लेन-देन का आरोप है तो आर्थिक जांच की जरूरत होगी। पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां बैंकिंग लेन-देन, डिजिटल भुगतान, संदिग्ध खातों, नकदी की आवाजाही और मौके से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जांच करे। जुआ केवल मौके पर बैठे खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहता। बड़े पैमाने पर संचालन का दावा है तो आयोजक, पैसा लगाने वाले, रकम पहुंचाने वाले और कथित संरक्षण देने वालों की कड़ियां भी सामने आनी चाहिए। जांच तय करेगी कि करोड़ों की चर्चा के पीछे कोई आर्थिक नेटवर्क किसका है। मामले में प्रशासन के पास अदिति गेस्ट हाउस वैध दस्तावेजों की जांच के साथ ही संचालित हो रहे जुए अथवा अन्य अवैध गतिविधियों के आरोप की जांच की जानी चाहिए। जांच में अवैध गतिविधियां सामने आती हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। जुए के कथित अड्डे को लेकर भी पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए कि उसे क्या जानकारी मिली, उसने क्या जांच की और उसका निष्कर्ष क्या रहा।
खामोशी से न आरोप खत्म होते हैं और न सवाल। बल्कि चुप्पी सवालों को और गहरा करती है।

 

काशी में ‘कानून सबके लिए बराबर’ का सवाल

वाराणसी में पुलिस अपराध नियंत्रण को लेकर लगातार अभियान चलाने का दावा करती है। ऐसे में सिगरा जैसे प्रमुख क्षेत्र में यदि इतने गंभीर आरोप सामने आते हैं तो उनकी जांच प्राथमिकता पर होनी चाहिए। क्योंकि मामला केवल एक गली या एक गेस्ट हाउस तक सीमित नहीं है। यह सवाल कानून के राज की धारणा से जुड़ा है। अगर कोई आम व्यक्ति अवैध जुआ चलाए तो पुलिस कार्रवाई करे और वही आरोप किसी राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्ति पर लगे तो जांच ठंडी पड़ जाए ऐसी धारणा पुलिस की साख के लिए बेहद नुकसानदेह होगी।

अब गेंद पुलिस के पाले में

गंगानगर से लेकर सिगरा तक शहर में सार्वजनिक जगहों के कथित दुरुपयोग और अवैध गतिविधियों के आरोप समय-समय पर उठते रहे हैं। लेकिन इस मामले में पुलिस के सामने जांच के लिए पर्याप्त स्पष्ट सवाल मौजूद हैं। अदिति गेस्ट हाउस के दस्तावेजों की जांच हो।
कथित जुए के स्थान पर निगरानी और सत्यापन हो।
सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल हो। कथित आर्थिक लेन-देन की जांच हो। जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका तथ्य और साक्ष्य के आधार पर स्पष्ट की जाए। सबसे महत्वपूर्ण पूरी जांच राजनीतिक दबाव से मुक्त दिखाई दे। क्योंकि काशी की पुलिस के सामने अब असली परीक्षा यही है कि वह आरोपों के शोर से ऊपर उठकर सच तक पहुंचती है या फिर मामला भी उन तमाम शिकायतों की तरह फाइलों में दब जाता है। जनता को अब बयान नहीं, नतीजा चाहिए।

* गौरव सिंह पिंचू पर सिगरा में कथित बड़े पैमाने पर जुआ संचालित कराने के आरोप
* अदिति गेस्ट हाउस के वैध लाइसेंस और अनुमतियों की जांच की मांग
* रोजाना भारी रकम के दांव लगाए जाने का स्थानीय सूत्रों का दावा
* गेस्ट हाउस को कथित अनैतिक गतिविधियों से जोड़कर भी लगाए गए आरोप
* कुछ अन्य लोगों की कथित भूमिका की भी जांच की मांग
* पुलिस और प्रशासन से निष्पक्ष जांच तथा दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग

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