चंदा चोरी के बाद अब राम मंदिर में घूस का खेला रिश्वत लेकर 125 कर्मचारियों की एंट्री का नया बवेला

- योगी सरकार के लिए बन सकता है बड़ा झमेला
- चंदा चोरी के आरोपी अविनाश शुक्ला ने पूछताछ में उगला राज
- मामला दबाने के लिए नियुक्तियों के दसतावेज किए गायब
- किसने, कितनी रिश्वत ली- जांच कर रही है अयोध्या पुलिस
- राम मंदिर ट्रस्ट की संपत्तियों की भी होगी जांच
- चंदा चोरी के आरोपियों के घर बुलडोजर चलाने की तैयारी
- सड़कों पर उतरे वकील, अखिलेश ने योगी सरकार को घेरा
अयोध्या। अयोध्या में राम मंदिर से चढ़ावे की चोरी का मामला अभी सुलगा हुआ है कि इसी मामले की जांच करने वाली अयोध्या पुलिस को घूसखोरी के सुराग मिले हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर में घूस लेकर 125 कर्मचारियों की भर्ती की गई। पुलिस ने अब राम मंदिर में विभिन्न पदों पर नियुक्तियों में रिश्वतखोरी के संगीन आरोपों की जांच शुरू कर दी है।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच करने के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गुरुवार दोपहर 3 बजे मंदिर पहुंची। अयोध्या में एसआईटी आरोपियों से पूछताछ कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी अब मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव की भूमिका की जांच कर रही है। इससे पहले, एसआईटी ने 6 दिन जांच की थी। उधर, अयोध्या पुलिस सुबह करीब 11 बजे राम मंदिर पहुंची। करीब दो घंटे तक जांच की। जिस कमरे में चढ़ावे की गिनती होती है, उसे देखा। इस बीच, अयोध्या के 500 वकीलों ने गुरुवार सुबह 11.45 बजे सड़क पर उतरकर चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए नारेबाजी की। प्रशासन ने चढ़ावा चोरी के आरोपियों के नए घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। अयोध्या विकास प्राधिकरण ने ऐसे घरों की पहचान कर ली है, जिनका नक्शा पास नहीं है या जिन्होंने नियम तोड़े।
अविनाश शुक्ला से पूछताछ में भेद खुला
अयोध्या पुलिस को राम मंदिर में घूसखोरी कर कर्मचारियों को भती करने की बात तब पता चली, जब पुछताछ में आरोपी अविनाश शुक्ला ने यह भेद खोला। उसके बयानों ने जांचकर्ताओं को ट्रस्ट के एक ऐसे सदस्य की भूमिका की जांच करने के लिए प्रेरित किया, जिसका नाम पूछताछ के दौरान बार-बार सामने आया था। अब पुलिस उन आरोपों की जांच कर रही है कि राम मंदिर प्रतिष्ठान में विभिन्न पदों पर लगभग 125 कर्मचारियों की भर्ती की गई, जिसके लिए उम्मीदवारों ने कथित तौर पर नौकरी पाने के लिए रिश्वत दी थी। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या मंदिर में नियुक्तियों की आड़ में एक संगठित भर्ती रैकेट चल रहा था। इस जांच के निष्कर्षों के उस विस्तृत जांच रिपोर्ट का मुख्य हिस्सा बनने की उम्मीद है, जिसे विशेष जांच दल द्वारा तैयार किया जा रहा है।

गायब कर दिए भर्ती के सारे दस्तावेज
सूत्रों ने बताया कि रिकॉर्ड की जांच के दौरान, पुलिस को अब तक कई भर्ती किए गए लोगों के लिए नियुक्ति पत्र, औपचारिक सेवा अनुबंध या रोजगार से संबंधित अन्य दस्तावेज नहीं मिले हैं। इसने जांचकर्ताओं को भर्ती प्रक्रिया की अधिक विस्तार से जांच करने और उस अधिकारी की पहचान करने के लिए प्रेरित किया है जिसके निर्देश पर ये नियुक्तियां कथित तौर पर की गई थीं। पुलिस ट्रस्ट के उस सदस्य से पूछताछ करने की भी तैयारी कर रही है, जिसके इशारे पर ये नियुक्तियां किए जाने का संदेह है। जांचकर्ताओं ने उन लोगों की सूची प्राप्त कर ली है जिन्हें नियुक्त किया गया था और वे उनके दस्तावेजों, रोजगार रिकॉर्ड और उन परिस्थितियों को सत्यापित करने की प्रक्रिया में हैं जिनमें उनकी नियुक्ति हुई थी। पुलिस भर्ती किए गए लोगों के साथ-साथ कथित भर्ती नेटवर्क में शामिल होने के संदेह वाले अन्य लोगों के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच करेगी। जांचकर्ता इस बात का विश्लेषण करेंगे कि क्या नियुक्तियों से पहले या बाद में पैसे का आदान-प्रदान हुआ और बैंकिंग चैनलों तथा अन्य वित्तीय रिकॉर्ड के माध्यम से कथित धन के प्रवाह का पता लगाएंगे।

मंदिर ट्रस्ट की संपत्ति की भी होगी जांच
एसआईटी अपनी जांच का दायरा बढ़ाकर ट्रस्ट से जुड़ी संपत्तियों की जांच भी कर रही है। सूत्रों का कहना है कि जांचकर्ता यह सत्यापित कर रहे हैं कि क्या मंदिर ट्रस्ट से जुड़ने के दौरान उनकी संपत्ति में कोई अनुपातहीन वृद्धि हुई है और क्या ऐसी किसी संपत्ति को दान की राशि के गबन या कमीशन के लिए भर्ती करने वाले संदिग्ध रैकेट से जोड़ा जा सकता है। गिरफ्तार आरोपी अनुकल्प मिश्रा और लव कुश मिश्रा, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं, भी भर्ती प्रक्रिया में अपनी कथित भूमिका के लिए जांच के दायरे में आ गए हैं। पुलिस ने कहा कि इन दोनों ने नियुक्तियों को सुविधाजनक बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई हो सकती है और वे यह जांच कर रहे हैं कि क्या वे इस बड़ी साजिश में शामिल थे। सूत्रों का कहना है कि दोनों आरोपी ट्रस्ट के एक सदस्य के रिश्तेदार हैं।
आरोपियों के घर चलेगा बुलडोजर
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पहली बार राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा- पूरी गलती गोपाल राव की है। वे राजनीति कर रहे हैं। वो सबको उलझा देते हैं। वो राम की परंपरा नहीं मानते। गोपाल राव राम मंदिर के निर्माण प्रभारी और ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य थे। मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं। चढ़ावा चोरी के आरोपियों के खिलाफ सरकार सख्त एक्शन लेने जा रही है। प्रशासन ने आरोपियों के नए घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी शुरू कर दी है।
उन आरोपियों के घर रडार पर हैं, जो उन्होंने मंदिर में नौकरी के बाद बनवाए। आरोपी लवकुश मिश्रा का शहादतगंज में बन रहा मकान और अनुकल्प मिश्रा का कौशल पुरी स्थित मकान पर बुलडोजर चल सकता है। अयोध्या विकास प्राधिकरण इन्हें नोटिस भेज सकता है।
जो चोरी करेगा, उस पर कार्रवाई होगी : केशव मौर्य
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- अखिलेश यादव जो कर रहे हैं, उससे सपा और रसातल में जा रही है। राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए जिन लोगों ने परम तपस्वियों की तरह काम किया है, उनमें चंपत राय सहित तमाम लोग शामिल हैं। उन सबको इस घटना से पीड़ा है। लेकिन, इस विषय को जितना चर्चा का विषय बनाया जा रहा है, उसका कोई औचित्य नहीं है। जो चोरी करेगा या गलत करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होती है और होगी। उधर, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाते हुए कहा कि श्री राम मंदिर में इतने बड़े-बड़े घोटाले हो गए मोदी जी, आपको पता कैसे नहीं चला? सच तो ये है कि आपको सब कुछ पता था, लेकिन आप धृतराष्ट्र बने रहे। और जब देश के सामने सच आने लगा, तो आपने लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए फर्जी एसआईटी बना दी।
भाजपा को न चंदा, न वोट- अखिलेश का तीखा हमला
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में एक सनसनीखेज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर तीखा हमला बोला है। अयोध्या के ‘मंदिर राम निवास’ के पंच प्रमुख हरिशंकर साफरीवाला के साथ मीडिया के सामने आए अखिलेश ने चंपत राय पर मंदिर और उसके चढ़ावे पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया। सपा प्रमुख ने कहा कि यूपी के हर विभाग में खुली वसूली चल रही है और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर सिर्फ घोटाला हुआ है। अखिलेश ने कहा, ‘प्रभु श्री राम के चढ़ावे में डकैती से ऊपर भी अगर दुनिया में कोई शब्द बना हो, तो आज वो इस्तेमाल होना चाहिए। जनता ने जो अपनी गाढ़ी कमाई से गुप्तदान दिया, उसका कोई हिसाब-किताब नहीं दिया जा रहा है। ये सब बातें और कारनामे इनकी रोजाना की प्रैक्टिस में शुमार हैं, लेकिन अब इनकी यह प्रैक्टिस पकड़ी गई है। प्रभु श्रीराम इन्हें इस पाप के लिए कभी माफ नहीं करेंगे और भगवान खुद ही इनका हिसाब करेंगे। ’ अखिलेश ने यह भी कहा कि जो लोग विपक्ष पर या उनके ऊपर भगवान के नाम पर सवाल उठाते हैं, अब समाजवादी पार्टी उनके खिलाफ ‘पर्ची’ छपवाने का काम करेगी। अखिलेश ने मर्यादा पुरुषोत्तम का जिक्र करते हुए कहा, ‘मर्यादा का पहला नाम प्रभु श्री राम है और दूसरा नाम हमारा ‘संविधान’ है। लेकिन यह सरकार संविधान और लोकतंत्र दोनों के साथ खुला खिलवाड़ करने की तैयारी में है। जो बात ये लोग जनता के वोट से हासिल नहीं कर पा रहे हैं, उसे अब सांसदों को तोड़कर पूरा करने की कोशिश की जा रही है।’
कांग्रेस ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। कांग्रेस महासचिव (संगठन) और पब्लिक अकाउंट्स कमेटी चेयरमैन केसी वेणुगोपाल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। चिठ्ठी में वेणुगोपाल ने कहा है कि अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी ने पूरे देश को झकझोर दिया है। करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के नाम पर अपनी मेहनत की कमाई दान की थी, लेकिन इस आस्था के साथ विश्वासघात हुआ है। उन्होंने कहा कि अयोध्या राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सार्वजनिक भूमि पर हुआ और इसके संचालन के लिए भारत सरकार की ओर से एक सार्वजनिक ट्रस्ट का गठन किया गया। ऐसे में मंदिर प्रशासन और उसकी जवाबदेही पूरी तरह केंद्र सरकार के दायरे में आती है। कांग्रेस का आरोप है कि कथित चोरी को लेकर समय-समय पर कई चेतावनियां सामने आईं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया। जिम्मेदार लोगों ने जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे करोड़ों रुपये के कथित गबन को संरक्षण मिला।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- अखिलेश यादव जो कर रहे हैं, उससे सपा और रसातल में जा रही है। राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए जिन लोगों ने परम तपस्वियों की तरह काम किया है, उनमें चंपत राय सहित तमाम लोग शामिल हैं। उन सबको इस घटना से पीड़ा है। लेकिन, इस विषय को जितना चर्चा का विषय बनाया जा रहा है, उसका कोई औचित्य नहीं है। जो चोरी करेगा या गलत करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होती है और होगी। उधर, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाते हुए कहा कि श्री राम मंदिर में इतने बड़े-बड़े घोटाले हो गए मोदी जी, आपको पता कैसे नहीं चला? सच तो ये है कि आपको सब कुछ पता था, लेकिन आप धृतराष्ट्र बने रहे। और जब देश के सामने सच आने लगा, तो आपने लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए फर्जी एसआईटी बना दी।



