मनमोहन सरकार के नक्शेकदम पर मोदी सरकार!,जनता का खून पी रहे गद्दार
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा है कि अभी ई20 यानी पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल पर एक्सपेरिमेंट चल रहा है

मनमोहन सिंह सरकार के भ्रष्टाचार, निराशा, अवसाद एवं जनता के प्रति जवाबदेह ना होने की मानसिकता से ऊब कर मतदाताओं ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनवाई थी. बीते बारह साल वाला दौर एक बार फिर खुद को दोहराता नजर आने लगा है. केंद्र की मोदी सरकार अब खुद को बेहद मजबूत मानते हुये अपने को लोकतंत्र से ऊपर मानने लगी है. उसे लगता है कि उसका फैसला ही आखिरी फैसला है. इस सरकार में जनता के प्रति कोई जवाबदेही या जिम्मेदारी नजर नहीं आ रही है. एक बड़े वर्ग में निराशा और अवसाद बढ़ता जा रहा है.
इथेनॉल ब्लैंडेड मामले में सरकार भ्रष्ट तरीके से आगे बढ़ रही है. सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा है कि अभी ई20 यानी पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल पर एक्सपेरिमेंट चल रहा है. यानी आम जनता की गाढ़ी कमाई से खरीदे गये वाहन सरकार के लिये एक्सपेरिमेंट औजार बन गये हैं. क्या सरकार को नहीं पता कि एक-दो फीसदी एलिट को छोड़ दिया जाये तो वाहन का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर भारतीय अपने खून पसीने की कमाई का पाई पाई जोड़कर एक वाहन खरीदते हैं? सरकार उनके मेहनत की कमाई पर अपने लोगों को आसामी बनाने के लिये एक्सपेरिमेंट कर रही है.

क्या मोदी सरकार और पेट्रोलियम मंत्रायल की यह जिम्मेदारी नहीं बनती थी कि वह एक्सपेरिमेंट करने और उसके नतीजे आने के बाद ई20 को लागू करे. इस मामले में नितिन गडकरी की दिलचस्पी समझ में आती है कि एथेनॉल के खेल में उनके लड़कों की कंपनियां इनवाल्व हैं,लेकिन क्या केवल इसी आधार पर देश के एक बड़े वर्ग नुकसान पहुंचाया जा सकता है? 2023 से पहले की बनी कारों एवं अन्य वाहनों का इंजन ई20 के अनुरूप डिजाइन नहीं किये गये हैं. ऐसे में एक बड़ी आबादी को अपने वाहन के मामले में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इंजन में खराबी आ रही है. माइलेज कम हो रहा है. कारों की लाइफ कम होती जा रही है.
सरकार के पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के फैसले से किसी को एतराज नहीं है, लेकिन इसके लिये एक समय सीमा तय की जानी चाहिये थी. साथ ही ई20 के अनुरूप डिजाइन वाली कारों की बिक्री अनिवार्य किया जाना चाहिये था, लेकिन सरकार ने ऐसा करने की बजाय आम लोगों की कारों पर ही एक्सपेरिमेंट करना शुरू कर दिया. इथेनॉल ब्लेंडिंग से केवल उद्योगपतियों, नेताओं के रिश्तेदारों एवं सरकार को फायदा हो रहा है. आम जनता पूरी तरह घाटे में है. किसान भी घाटे में है, जिसकी आमदनी बढ़ाने के नाम पर इथेनॉल ब्लेंडिंग को ओके किया गया था.
मोदी सरकार आम आदमी की बात सुनने और मानने को तैयार नहीं है. उसे ऐसा लग रहा है कि वह अब कभी सत्ता से बाहर नहीं होगी, क्योंकि वह सांसद-विधायक खरीदने के हुनर में पारंगत हो चुकी है. उसे भूलना नहीं चाहिये कि कभी कांग्रेस की सरकार को भी ऐसा ही लगता था, लेकिन जनता ने उसे ऐसे बियावान में पहुंचा दिया है, जहां से वापस जनता का भरोसा जीतना आसान नहीं है. भाजपा भी अब उसी राह पर है, जिससे जनता निराश हो रही है. अवसाद में जा रही है. भ्रष्टाचार तक तो ठीक था, लेकिन मोदी सरकार अब आम आदमी की जेब पर भी डाका डालने लगी है.




