
- वेल्थ ट्रैकर इंडिया 2026 की रिपोर्ट में खुलासा
- अंबानी की 153% और अदानी की 625% बढ़ी दौलत
- एक अदानी पर 2% टैक्स लगा दें तो 2 साल तक पूरे देश को मुफ्त में स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी
- सरकार को संपत्ति कर से मिल सकता है सालभर में 10 लाख करोड़ से ज्यादा
- इन धनकुबेरों से ज्यादा टैक्स भारत का मध्यमवर्ग देता है
- लेकिन मोदी सरकार इन पर टैक्स नहीं लगाएगी, क्योंकि उन्हीं की बदौलत बची है भाजपा की कुर्सी

नई दिल्ली। कोविड की महामारी, अमेरिका के टैरिफ वॉर और भारत की अर्थव्यवस्था पर लाख संकट के बावजूद देश के पांच सबसे अमीर परिवारों की संपत्ति में 2019 से 2025 के बीच 400 फीसदी का इजाफा हुआ है। यह जानकारी वेल्थ ट्रैकर इंडिया 2026 नाम की रिपोर्ट में दी गई है। यह रिपोर्ट ‘सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी’ के ‘टैक्स द टॉप, क्लोज द गैप’ अभियान ने जारी की है।
सरकार इन अमीरों पर टैक्स क्यों नहीं लगाती?
इस बीच, मध्यमवर्गीय परिवारों की मासिक आय घटकर 25 हजार रह गई। भारत में युवाओं की औसत बेरोजगारी 15 प्रतिशत से ज्यादा हो गई और स्नातक तक शिक्षित युवाओं की बेराजगारी तो इससे भी अधिक है। वेल्थ ट्रैकर इंडिया की रिपोर्ट 2026 में यह भी कहा गया है कि भारत के कुछ सबसे ज्यादा अमीर 1688 परिवारों पर अगर संपत्ति का कर लगाया जाए ता देश को सालाना 10 लाख करोड़ की आमदनी हो सकती है। इस स्टडी में साफ कहा गया है कि एक हजार करोड़ से अधिक की दौलत के मालिक इन अमीरों पर टैक्स लगाया जाना चाहिए, क्योंकि इनके पास भारत की 57 प्रतिशत से अधिक संपत्ति है, वहीं देश के सबसे निचले 50 प्रतिशत आबादी की संपत्ति केवल 2.4 प्रतिशत है। स्टडी यह भी कहती है कि भारत में सबसे अमीर 1 प्रतिशत आबादी देश के 40 फीसदी दौलत पर कब्जा कर बैठी है और यह 166 लाख करोड़ रुपए के बराबर है। यह दौलत भारत के जीडीपी के 50 प्रतिशत हिस्से के बराबर है।

टैक्स लगाएं तो कितना पैसा मिलेगा?
स्टडी में यह कहा गया है कि अगर इन सबसे अमीर परिवारों और घरानों पर 2 से 6 फीसदी प्रगतिशील कर लगा दिया जाए तो सरकार को जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए हर साल 10.6 लाख करोड़ रुपए मिल सकते हैं। इससे केंद्र सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में खर्च हो रही रकम को जीडीपी के मुकाबले 1 फीसदी बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसी पैसे से केंद्र सरकार भारत के बुजुर्गों को हर महीने 12 हजार रुपए की पेंशन भी दे सकती है।
इनकी बढ़ी आमदनी
स्टडी में कहा गया है कि रिलायंस इंडस्ट्री के मालिक मुकेश अंबानी की दौलत 2019 से 2025 के बीच 153 प्रतिशत बढ़ी है। अगर अंबानी पर 2% संपत्ति कर लगा दिया जाए तो सरकार के पास इतना पैसा जमा हो जाएगा कि वह देश में 10वीं के हर छात्र को एक लैपटॉप गिफ्ट कर सकती है। 2019 से 2025 तक के इन सात साल में भारत के दूसरे सबसे अमीर गौतम अदानी की संपत्ति में 625 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इन पर अगर 2% संपत्ति कर लगाया जाए ता पूरे भारत में लोगों को दो साल तक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा पूरी तरह से मुफ्त दी जा सकती है। भारत के 8 करोड़ परिवारों को मुफ्त में हवा साफ करने वाले एयर प्यूरीफायर बांटे जा सकते हैं।
पैसा न होने का सरकारी बहाना
वैल्थ ट्रैकर इंडिया ने एक बयान में कहा कि भारत में केंद्र सरकार हमेशा यह बहाना बनाती है कि उसके पास लोगों की बेहतरी के लिए पैसा नहीं है। इस कमी के कारण वह जनकल्याणकारी कार्यक्रम नहीं चला पा रही है। बयान में कहा गया है कि सरकार का यह बहाना नहीं चलेगा, क्योंकि सरकार कॉर्पोरेट के टैक्स कम कर रही है और उस मध्यम वर्ग के लिए टैक्स बढ़ा रही है, जो कि महंगाई में पिसा जा रहा है। यही वर्ग हर रोज कमरतोड़ मेहनत कर किसी तरह अपना गुजारा चला रहा है और देश को कॉर्पोरेट्रस से ज्यादा टैक्स देता है। बयान में यह भी कहा गया है कि भारत सरकार ने बीते 11 साल में 19.6 लाख करोड़ रुपए का लोन लिया है। सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटिबिलिटी के निदेशक अनिर्बान भट्टाचार्य कहते हैं, यहां दो अलग भारत हैं। एक ऐसा भारत, जहां अमीरों के पास लाखों करोड़ रुपए हैं, वहीं आज एक दूसरा भारत भी है, जो कर्ज में डूबा हुआ है। यही वह भारत है, जो कड़ी मेहनत से अपना गुजारा कर रहा है। इसमें हाशिए पर खड़े वे वर्ग भी शामिल हैं, जो किसी तरह खुद को जिंदा रखे हुए हैं। अनिर्बान का कहना है कि भारत में अमीर और गरीब के बीच की खाई जितनी चौड़ी होगी, संविधान में लिखित एक भारत का विचार उतना ही फीका पड़ता जाएगा।
धनकुबेरों पर टैक्स जरूरी
टैक्स द टॉप अभियान में हिस्सेदार राज शेखर कहते हैं कि आज भारत के सबसे अमीर धनकुबेरों पर टैक्स लगाना सबसे जरूरी है। इन पर संपत्ति कर लगाकर देश को अपनी जनता के जीवनस्तर को सुधारने के लिए पैसा मिलेगा, जिसकी आज सरकार को सबसे ज्यादा जरूरत है। इससे देश में व्याप्त वह असमानता भी दूर होगी, जो लोकतंत्र को खतरे में डाले हुए है। वैल्थ ट्रैकर इंडिया 2026 के लेखक और शोधकर्ता जैकब जोशी का हालांकि, यह भी कहना है कि अमीरों पर संपत्ति कर कोई जादुई छड़ी तो नहीं है, लेकिन इससे गरीबों को उनका अधिकार जरूर वापस दिलवाया जा सकता है।
भारत में बढ़ी आर्थिक असमानता
वर्ल्ड इनइक्वलिटी की लेटेस्ट रिपोर्ट में भारत, दक्षिण अफ्रीका और रूस के बाद दुनिया की तीसरी सबसे ज़्यादा असमान सोसायटी बन गया है। कुछ ही देशों में इससे ज़्यादा असमानता दिखती है, इनमें साउथ अफ्रीका में सबसे अमीर 1 प्रतिशत लोग कुल दौलत के लगभग 54 प्रतिशत हिस्से को कंट्रोल करते हैं; रूस में, 47 प्रतिशत से ज़्यादा; मेक्सिको, कोलंबिया और ब्राज़ील में, हर जगह लगभग 38 प्रतिशत; और US में 35 प्रतिशत दौलत पर एक फीसदी लोगों का कब्जा है।
किन देशों में कम आर्थिक असमानता?
इसके रूस और साउथ अफ्रीका व अमेरिका जैसे देशों के विपरीत, नीदरलैंड्स में आर्थिक असमानता काफी कम है, जहां टॉप 1 प्रतिशत लोगों के पास कुल संपत्ति का सिर्फ़ 14 प्रतिशत हिस्सा है, इसके बाद इंडोनेशिया में 20 प्रतिशत, डेनमार्क और ब्रिटेन में लगभग 21 प्रतिशत, इटली में 22 प्रतिशत और न्यूज़ीलैंड में 23 प्रतिशत है।




