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शहाबगंज ब्लॉक में मनरेगा घोटाले का बड़ा खेल,घोटालेबाज कब जाएंगे जेल

ब्लॉक प्रमुख निधि से कराए जा रहे कार्यों में फर्जी मस्टर रोल, कागजों पर सैकड़ों मजदूर, मौके पर गिनती भर श्रमिक

अचूक संघर्ष शहाबगंज/चंदौली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में विकास कार्य कराना है। लेकिन चंदौली जनपद के शहाबगंज ब्लॉक में यह योजना अब भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का पर्याय बनती जा रही है।

ब्लॉक के कई गांवों—बनरसिया, बड़ौरा, बेन, दुन्नू, ईलिया, घोरसारी, हड़ौरा, हाता, जेगुरी, केरायगां, खखरा, खिलची रजदिहा, मसोई, मुबारकपुर, पचपरा और रोहाखी—में ब्लॉक प्रमुख निधि से कराए जा रहे मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए मस्टर रोल भरे जा रहे हैं, जिसमें सैकड़ों मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई जाती है, जबकि मौके पर गिनती के मजदूर ही काम करते नजर आते हैं। आरोप यह भी है कि मजदूर कहीं और काम करते हैं, लेकिन उनकी हाजिरी किसी दूसरे कार्यस्थल पर दिखाई जाती है।

कागजों में सैकड़ों मजदूर, जमीन पर सन्नाटा

ग्रामीणों के अनुसार कई गांवों में मनरेगा के तहत तालाब खुदाई, मिट्टी पटाई, खड़ंजा और नाली निर्माण जैसे कार्य दिखाए जा रहे हैं। सरकारी पोर्टल और मस्टर रोल में 100 से 300 तक मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होती है, लेकिन मौके पर वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई देती है।

ग्रामीण रामकिशुन ने बताया,

“कागजों में सैकड़ों मजदूर काम करते दिखाए जाते हैं, लेकिन जब मौके पर जाइए तो मुश्किल से 10-15 लोग मिलते हैं। बाकी सब केवल रिकॉर्ड में हैं।”

एक अन्य ग्रामीण राजेंद्र ने कहा,
“मनरेगा का पैसा गरीब मजदूरों के लिए आता है, लेकिन यहां अधिकारियों और ठेकेदारों की जेब भरने का माध्यम बन गया है।”

फर्जी सॉफ्टवेयर से मस्टर रोल भरने का आरोप

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि फर्जी सॉफ्टवेयर और पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल कर ऑनलाइन मस्टर रोल तैयार किए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार एक ही मजदूर की तस्वीर को कई बार अपलोड कर अलग-अलग लोगों की उपस्थिति दर्ज की जाती है। इससे ऐसा दिखाया जाता है कि बड़ी संख्या में मजदूर कार्य कर रहे हैं।

स्थानीय युवक सुनील ने आरोप लगाया,

“एक ही फोटो को बार-बार लगाकर हाजिरी भरी जाती है। अगर तकनीकी जांच हो जाए तो पूरा घोटाला सामने आ जाएगा।”

मजदूर कहीं और, काम कहीं और

मनरेगा कार्यों में सबसे बड़ा आरोप यह है कि जिन मजदूरों के नाम से भुगतान निकाला जा रहा है, वे वास्तव में उस कार्यस्थल पर काम ही नहीं कर रहे होते।

ग्रामीणों का कहना है कि कई मजदूर दूसरे जिलों या निजी कार्यों में लगे रहते हैं, लेकिन उनकी हाजिरी मनरेगा साइट पर दिखाई जाती है।

बीडीओ, जेई और ठेकेदार की मिलीभगत के आरोप

क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे खेल में ब्लॉक स्तर के अधिकारी, तकनीकी सहायक, जेई और ठेकेदार शामिल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर फर्जी भुगतान संभव नहीं है।

एक स्थानीय निवासी ने कहा,

“अगर अधिकारी ईमानदारी से जांच करें तो एक दिन में पूरा खेल बंद हो जाएगा, लेकिन यहां तो सबकी मिलीभगत है।”

ब्लॉक प्रमुख निधि के कार्यों पर उठ रहे सवाल

मनरेगा के तहत ब्लॉक प्रमुख निधि से कराए जा रहे कार्यों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के चलते नियमों की अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ कार्य केवल कागजों में पूरे दिखा दिए जाते हैं, जबकि जमीन पर अधूरे या नाम मात्र के कार्य मिलते हैं।

एक ग्रामीण ने बताया,

“काम कम होता है और भुगतान ज्यादा दिखाया जाता है। इसी में सबसे बड़ा खेल होता है।”

राजनीतिक संरक्षण से बढ़ रहे हौसले?

क्षेत्र में चर्चा है कि राजनीतिक दबाव और संरक्षण के कारण जिम्मेदार अधिकारी खुलकर कार्रवाई नहीं कर पा रहे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक दलों से जुड़े प्रभावशाली लोगों के कारण शिकायतों को दबा दिया जाता है। यही वजह है कि भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है।
एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा,
“जब तक राजनीतिक संरक्षण रहेगा, तब तक मनरेगा घोटाले बंद नहीं होंगे। अधिकारी भी दबाव में काम करते हैं।”

ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश

लगातार सामने आ रही अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि गरीब मजदूरों का हक छीना जा रहा है।

सरकार की मंशा पर फिर रहा पानी

प्रदेश और केंद्र सरकार लगातार ग्रामीण विकास और रोजगार की बात करती हैं। मनरेगा के जरिए करोड़ों रुपये गांवों में भेजे जाते हैं ताकि गरीब परिवारों को काम मिल सके।

लेकिन शहाबगंज ब्लॉक में सामने आ रहे आरोप सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

यदि मजदूरों को काम ही नहीं मिलेगा और कागजों पर भुगतान होता रहेगा, तो योजना का उद्देश्य पूरी तरह विफल हो जाएगा।

बीडीओ का बयान

जब इस संबंध में ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) दिनेश सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा,
“मामले की शिकायत मिली है। जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

क्या कहता है कानून?

मनरेगा योजना में फर्जी मस्टर रोल, फर्जी भुगतान और सरकारी धन के दुरुपयोग को गंभीर अपराध माना जाता है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ—
विभागीय कार्रवाई
एफआईआर
धन वसूली
निलंबन
जैसी कार्रवाई हो सकती है।

जांच की मांग तेज

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
लोगों का कहना है कि—
प्रत्येक गांव के कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन हो।
मस्टर रोल और भुगतान की जांच कराई जाए।
फर्जी सॉफ्टवेयर और तकनीकी अनियमितताओं की जांच हो।
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

जनता पूछ रही— आखिर जिम्मेदार कौन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मौके पर मजदूर नहीं हैं तो फिर मस्टर रोल कैसे भर रहे हैं? यदि कार्य नहीं हुआ तो भुगतान किस आधार पर हुआ? और यदि शिकायतें लगातार मिल रही हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
इन सवालों का जवाब अब प्रशासन और संबंधित विभागों को देना होगा।

क्या मनरेगा बन गई भ्रष्टाचार की योजना?

शहाबगंज ब्लॉक में लगातार सामने आ रहे मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मनरेगा अब रोजगार योजना कम और भ्रष्टाचार का माध्यम ज्यादा बनती जा रही है?
यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीण विकास की यह महत्वाकांक्षी योजना गरीबों तक पहुंचने के बजाय भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ती रहेगी।

अब प्रशासन की परीक्षा

अब निगाहें जिला प्रशासन और शासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि निष्पक्ष जांच हुई तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई ही इस भ्रष्टाचार पर रोक लगा सकती है। अन्यथा मनरेगा में फर्जी मस्टर रोल, कागजी मजदूर और सरकारी धन के बंदरबांट का खेल यूं ही चलता रहेगा।

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