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ट्रम्प के आगे नरेंद्र हुए फिर से सरेंडर

अमेरिका के आगे फिर झुका भारत- रूस से गैस नहीं लेगा, तेल कंपनियों को सब्सिडी बंद करने की तैयारी; तेल-गैस के दाम में होगी भारी बढ़ोतरी

– तेल कंपनियों पर मोदी सरकार की देनदारी बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपए हुई
– इतना पैसा सरकार के पास नहीं तो सब्सिडी बंद करने की तैयारी
– पीएम के किफायत बरतने के संदेश के पीछे का सार- चौतरफा बढ़ेगी महंगाई
– अमेरिका की धमकियों के आगे झुकने की वजह एक बार फिर- अदानी का केस

नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध और भारत में तेल, गैस और खाद के संकट को सुलझाने के बजाय भारत न केवल अमेरिका के कहने पर हालात को और उलझा रहा है, बल्कि आने वाले दिनों में यह अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का भी काम कर रहा है। इसका सबसे पहला कारण तो यह है कि भारत ने रूस से प्रतिबंधित गैस खरीदने से मना कर दिया है। इसी प्राकृतिक गैस से खाद बनाने का काम होता है। दूसरा अहम कारण यह है कि युद्ध के कारण भारत के तेल पूल घाटे के बेतहाशा रुप से बढ़ने पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार तेल कंपनियों को दी जाने वाली सब्सिडी बंद करने की तैयारी कर रही है। अगर ऐसा होता है तो देश में ईंधन के दाम अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाएंगे।

इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना में एक जनसभा के दौरान लोगों को कार पूल करने, तेल की खपत कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन के साधनों का उपयोग करने और किफायत बरतने का आह्वान किया था। पीएम के इस संदेश को भारत में गहराते तेल संकट के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी बड़ी कीमत आम नागरिकों को ईंधन के बढ़े हुए खर्च के रूप में चुकानी पड़ सकती है।

अमेरिकी दबाव में ऊर्जा की आत्मनिर्भरता छोड़ी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने बजाय रूस जैसे परंपरागत स्रोतों से तेल और गैस लेने की अपनी रणनीतिक आत्मनिर्भरता का कायम रखने के, अमेरिका के कहने पर रूसी गैस की खरीद को बीच में ही रद्द कर इस बात की ओर साफ इशारा दिया है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे झुक गया है। अमेरिका ने रूसी गैस पर पाबंदी लगा रखी है। इसी को देखते हुए भारत ने रूस से एलएनजी से भरा टैंकर बुक करवाने के बाद भी खरीद को बीच में ही रद्द कर दिया। भारत के इस फैसले के कारण भारत आ रहा एक रूसी टैंकर अब बीच समंदर में ही फंसा हुआ है। मार्च 2026 तक भारत के इंपोर्ट में पश्चिम एशियाई तेल की हिस्सेदारी घटकर महज 26.3% रह गई है। इसके चलते भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में बड़ा बदलाव करना पड़ा है। भारत अब अमेरिका और वेनेजुएला जैसे देशों से तेल खरीद रहा है। वहीं, हॉर्मूज के रास्ते पश्चिम एशिया से भारत आने वाले तेल और गैस का हिस्सा अब 26 फीसदी से भी कम रह गया है। इससे पहले भी भारत ने अमेरिकी दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था। ईरान से भी इसी तरह भारत ने तेल का आयात बंद किया था, क्योंकि अमेरिका ऐसा नहीं चाहता था। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की इन्हीं कमजोरियों को देखते हुए विपक्ष हमेशा सरकार परे समझौता करने का आरोप लगाता रहा है।

शैडो टैंकर बुक किया था

भारत ने एलएनजी खरीदने के लिए रूस के जिस टैंकर को बुक किया था, वह शैडो टैंकर था। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने रूस पर चोरी-छिपे गैस बेचने पर पाबंदी लगा दी है। बताया जाता है कि दिल्ली में तेल और गैस के ऐसे कई सौदागर बिचौलिए बनकर सरकारी तेल और गैस एजेंसियों से सस्ते में सौदा कराने का झांसा देते हैं। इससे पहले भारत ने ईरान के एक शैडो तेल टैंकर को बिटक्वॉइन में 20 मिलियन डॉलर का भुगतान कर बुक किया था, लेकिन वह पेमेंट ईरान की आईआरजीसी तक पहुंचा ही नहीं। हॉर्मूज से गुजरते समय जब टैंकर पर फायर किया गया, तब जाकर राज खुला। इस बार भी यही होने के संकेत हैं। भारत ने रूस से शैडो टैंकर से चोरी-छिपे लाए जाने वाले गैस को बुक किया। लेकिन अमेरिकी उपग्रहों ने यह चोरी पकड़ ली। रूस के जिस पोर्टोवाया प्लांट से यह गैस आ रही थी, उस पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं। कुनपेंग नाम का यह विशाल टैंकर मध्य अप्रैल में गुजरात के दाहेज टर्मिनल के लिए निकला था। कागजों में इसे गैर-रूसी बताया गया था, लेकिन सैटेलाइट ट्रैकिंग में इसकी असलियत सामने आ गई। अब यह टैंकर बिना किसी तय मंजिल के सिंगापुर के पास समंदर में खड़ा है।

भारत ने रूस को अमेरिकी शर्त की बात बताई

30 अप्रैल को रूस के उप-ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन भारत आए थे। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाली गैस नहीं खरीदेगा। असल में अमेरिका में अदानी विवाद के चलते भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक आत्मनिर्भरता इतनी कमजोर हो चुकी है कि वह चाहते हुए भी अमेरिकी धमकी को अनदेखा नहीं कर पा रहा है। अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल आयात करने की छूट 16 मई तक बढ़ाई है। तेल और गैस मंत्रालय के एक बेहद करीबी सूत्र का कहना है कि भारत इस छूट को और आगे बढ़ाने का अमेरिका से कोई अनुरोध करने के मूड में नहीं है। मार्च-अप्रैल 2026 में भारतीय तेल पूल में कच्चे तेल की आमद $113.5 से $126 प्रति बैरल के बीच रही। कच्चे तेल के भाव में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत के तेल आयात बिल पर सालाना 14 बिलियन डॉलर का इजाफा होता है। ऐसे में माना जा रहा है कि अभी तक सरकार का तेल कंपनियों पर करीब 2 लाख करोड़ रुपए का बकाया हो गया है। इसका असर महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपए की कीमत पर साफ नजर आ रहा है।

तेल कंपनियों को और पैसा नहीं

केंद्र सरकार भारतीय तेल और गैस कंपनियों पर 2 लाख करोड़ रुपए के बकाए को देखते हुए तेल कंपनियों को सब्सिडी के रूप में हर साल सब्सिडी देना बंद करने की तैयारी कर रही है। साल 2025-26 में मोदी सरकार ने देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपए की सब्सिडी दी थी। लेकिन पश्चिम एशिया संकट के बाद से सब्सिडी की रकम बढ़कर दो लाख करोड़ रुपए हो चुकी है, जबकि अभी आधा साल भी नहीं गुजरा है। अगर केंद्र सरकार तेल कंपनियों की सब्सिडी बंद करती है तो देश में तेल और गैस के दाम इतने ज्यादा बढ़ जाएंगे कि देश के 30 करोड़ मध्यमवर्ग और 50 करोड़ निम्न आय वर्ग के लिए इन्हें खरीदना नानमुमकिन सा हो जाएगा। माना जा रहा है कि इसी को ध्यान में रखकर मोदी सरकार देश में किफायत का माहौल पहले ही तैयार कर रही है, ताकि बाद में महंगाई बढ़ने पर कोई सत्ताविरोधी माहौल न पैदा हो।

इसलिए पकड़ाया रूसी जहाज
पश्चिम एशिया में तेल का संकट खड़ा होने के बाद तेल उत्पादक देशों से बड़ी संख्या में चोरी के तेल से भरे टैंकर से सप्लाई का खेल शुरू हुआ है। ये टैंकर अपनी मूल पहचान छिपाकर इस्तेमाल किए जाते हैं। हर 10 टैंकर में से 3 चोरी का तेल और गैस बेचते हैं। गहरे समंदर में इन तेल टैंकरों का तेल किसी और टैंकर में शिफ्ट किया जाता है। लेकिन एलएनजी टैंकरों के साथ यह मुमकिन नहीं होता, क्योंकि उनमें गैस भरी होती है। अमेरिकी उपग्रहों की मदद से ट्रैकिंग के कारण एलएनजी जहाजों की आवाजाही को छिपाना बहुत मुश्किल होता है। इसमें कानूनी कार्रवाई और जोखिम का खतरा कहीं ज्यादा है। भारत सरकार ने देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और फर्टिलाइजर जैसी ज़रूरी चीजों की सप्लाई को लेकर बड़ा भरोसा जताया है। आने वाले खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक और रिफाइनरियों के अच्छे से चलने का हवाला देते हुए सरकार ने कहा है कि सप्लाई में कोई कमी नहीं आएगी।

 

अमेरिका से आएगी गैस, सब्सिडी होगी बंद
पेट्रोलियम मंत्रालय अगले एक सप्ताह के भीतर 10 लाख रुपये से अधिक आय वाले घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी की सब्सिडी बंद करने का फैसला किया है। वर्तमान में हर माह प्रत्येक सिलिंडर में साढ़े 12 रुपये की सब्सिडी मिलती है। अब तीनों आयल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को मैसेज भेजना शुरू कर दिया है। सबसे अधिक उपभोक्ता इंडेन के हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले महीने अमेरिका के एक्सपोर्टर्स के साथ सप्लाई के लिए सालाना कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं। अभी तक सब्सिडी की गणना सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस के आधार पर होती है। यह वेस्ट एशिया से एलपीजी सप्लाई के लिए एक स्टैंडर्ड रेट है। लेकिन अब, सरकारी तेल कंपनियों के अधिकारी चाहते हैं कि इस फॉर्मूले में अमेरिका के बेंचमार्क प्राइस और अटलांटिक महासागर के पार से आने वाले शिपमेंट के भारी-भरकम फ्रेट की लागत को भी शामिल किया जाए। अमेरिका से एलपीजी तभी भारत के लिए सस्ती पड़ती है, जब सऊदी CP के मुकाबले दाम में इतनी छूट हो कि शिपिंग का खर्चा निकल जाए। अमेरिका से शिपिंग का खर्चा सऊदी अरब से आने वाले शिपमेंट के मुकाबले लगभग चार गुना ज्यादा होता है। पिछले महीने, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अमेरिका से सालाना 2.2 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी आयात करने के लिए एक साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट 2026 के लिए है।

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