योगीराज:बीजेपी किसान मोर्चा के नेता राम प्रकाश सिंह ने किसानों की जमींन पर डाला डाका,सत्ता के विधायक बने आका
शासन-प्रशासन के अफसरों ने दिया भूमाफिया राम प्रकाश सिंह उर्फ बीरू का साथ,पीड़ित का शोषण हो रहा आज

- जितेंद्र मिश्रा का दर्द पूछिये कि आखिर कौन है जिम्मेदार,बेचारे मारे मारे फिरते है गली गली
- योगी भूमाफिया पर क्या खाक करेंगे कार्यवाही,राम प्रकाश सिंह उर्फ बीरू सिंह बीजेपी नेता चाट रहा अवैध जमीन की मलाई

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जमीनों से जुड़े विवाद एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। चोलापुर थाना क्षेत्र के सुलेमानपुर-शिवरामपुर से सामने आए एक भूमि विवाद में एक बुजुर्ग व्यक्ति ने करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित जितेंद्र प्रसाद मिश्रा का आरोप है कि रामप्रकाश सिंह उर्फ बीरू ने उनकी जमीन से संबंधित लेनदेन में उनके साथ धोखाधड़ी की और लंबे समय से वह न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब और पुलिस की जांच इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण होगी।करोड़ों की जमीन और न्याय की तलाश जितेंद्र प्रसाद मिश्रा के मुताबिक, जमीन से संबंधित विवाद को लेकर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। उनका दावा है कि **जितेंद्र मिश्रा बनाम रामप्रकाश सिंह** मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 417, 420, 467 और 468 जैसी धाराओं से संबंधित मुकदमे की कार्यवाही हुई है। इस दावे की वर्तमान न्यायिक स्थिति और धाराओं की आधिकारिक पुष्टि न्यायालयीन अभिलेखों से की जानी आवश्यक है।पीड़ित का कहना है कि संपत्ति से जुड़े विवाद के बाद वह लगातार अधिकारियों और पुलिस के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिली।
सत्ता के रसूख का भी लगाया आरोप


जितेंद्र प्रसाद मिश्रा का आरोप है कि रामप्रकाश सिंह स्वयं को भाजपा किसान मोर्चा का जिला अध्यक्ष बताकर राजनीतिक प्रभाव का हवाला देता है और स्थानीय स्तर पर विधायक एवं मंत्री से करीबी संबंध होने का रौब दिखाता है।इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि किसी राजनीतिक पद या प्रभाव का इस्तेमाल किसी नागरिक के अधिकारों को प्रभावित करने के लिए किया गया है, तो यह गंभीर जांच का विषय होना चाहिए।
पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
पीड़ित ने स्थानीय पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि आरोपी का पुलिसकर्मियों से करीबी संबंध है और इसी वजह से उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई
नहीं होती।जितेंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया कि स्थानीय थाने और चौकियों पर आरोपी की पुलिसकर्मियों से नजदीकी दिखाई देती है तथा कथित तौर पर शराब और मुर्गे की पार्टियां तक आयोजित होती हैं।इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक भूमि विवाद नहीं, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाएगा। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो पुलिस और संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष स्पष्ट करने का पूरा अधिकार है।
क्या कई और लोग भी हैं पीड़ित?जितेंद्र प्रसाद मिश्रा का दावा है कि वह अकेले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र में कई अन्य लोग भी जमीन से जुड़े विवादों में रामप्रकाश सिंह से प्रभावित हुए हैं।उनका आरोप है कि एक कथित गिरोह सीधे-सादे लोगों के साथ जमीन के सौदों में अनुचित तरीके से व्यवहार करता है तथा बैनामा अथवा समझौते के बाद भुगतान को लेकर विवाद पैदा होते हैं।इन दावों की सत्यता जानने के लिए प्रशासन को संबंधित जमीनों के दस्तावेज, रजिस्ट्री रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े साक्ष्य और न्यायालय में लंबित मामलों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।भाजपा किसान मोर्चा के पद को लेकर भी सवाल
मामले में रामप्रकाश सिंह के भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष होने के दावे का भी उल्लेख किया गया है। यदि यह पद वर्तमान में उनके पास है, तो पार्टी संगठन को भी उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।किसी राजनीतिक संगठन से जुड़े व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगने मात्र से उसे दोषी नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि आरोपों के समर्थन में दस्तावेज अथवा न्यायालयीन रिकॉर्ड मौजूद हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक स्थिति सार्वजनिक होना जरूरी है।पीड़ित का सवाल—आखिर न्याय कब मिलेगा?
जितेंद्र प्रसाद मिश्रा का दर्द सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसमें एक व्यक्ति अपनी ही संपत्ति से जुड़े विवाद में न्याय पाने के लिए कार्यालय-दर-कार्यालय भटकता रहता है।उनका कहना है कि यदि उनके पास दस्तावेज और न्यायालयीन रिकॉर्ड हैं तो प्रशासन उनकी शिकायत की निष्पक्ष जांच कराए और यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण शहर में भूमि विवादों पर प्रशासन की निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण है।जमीन की कीमतों में लगातार वृद्धि के बीच भू-माफिया और अवैध कब्जे से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक है, बल्कि कानून-व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।अब देखना यह होगा कि
चोलापुर पुलिस और वाराणसी प्रशासन इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच करते हैं या यह मामला भी शिकायतों और प्रार्थना-पत्रों के ढेर में दबकर रह जाता है

भाजपा जिला उपाध्यक्ष पद के लिये राम प्रकाश ने 5 लाख का कथित रूप से चढ़ाया चढ़ावा
भाजपा की कथनी व करनी में हमेशा अंतर होता है।केवल बाते अच्छी अच्छी करते है फिर पलटी मार जाते है। सूत्रों की माने तो भूमाफिया का तमगा लिए घूम रहा छिछोरा भाजपा नेता किसान मोर्चा ने अपने उपाध्यक्ष बनने के लिये जिले के एक बड़े नेता को कथित रूप से 5 लाख भेजवाये है।आपको बताते चले कि भाजपा नेता किसान मोर्चा राम प्रकाश सिंह उर्फ बीरू सिंह गरीब किसान का जमीन धोखे से कब्जा कर लिया,जब पीड़ित किसान जिसकी उम्र 70 साल के आसपास है जब पैसा मांगा तो राम प्रकाश ने गाली देते हुए जान से मारने की धमकी दिया।इस प्रकरण में चोलापुर थाने में इसके खिलाफ धारा 419,420,467,468, 471केस दर्ज है ,लगभग आधा दर्जन मुकदमे दर्ज है। इस दुष्ट लम्पट उदण्ड भाजपा नेता राम प्रकाश ने और लोगो के जमीन भी कब्जा किया है। अब ऐसे लोग भाजपा के पदाधिकारी बनेंगे तो भाजपा का राम ही मालिक है।वैसे भी बीजेपी बेहया जनता पार्टी बन चुकी है तो राम प्रकाश सिंह जैसे चोर चांडाल ही संगठन की शोभा बढाएंगे।




