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पीएम के क्षेत्र से दीपक यादव,निक्की जायसवाल,किशन महाराज,विजय सोनपापड़ी,रामु,शिवम जैसे जुआड़ियों का बोलबाला, आदमपुर,जैतपुरा, लोहता रोहनियां के थाना प्रभारियों का हो गया मुँह काला

थाना आदमपुर क्षेत्र से मुकीम गंज में दीपक की सजती है जुए की दुकान,अपराधी भाई भी सम्भालता है जुएखाने की कमान,रोज 50 लाख से ज्यादा का वारा न्यारा

मोहित अग्रवाल जी एक नजर इधर भी

  • थाना जैतपुरा के कमलगढहा मोहल्ले में निक्की जायसवाल का सजता है जुए का फड़ ,झांसी से बुकी आते है लगाते है पैसा
  • जैतपुरा थाने का कुलदीप सिपाही/दीवान देता है निक्की को प्रोटेक्शन,इस सिपाही का कथित तौर पर dcp काशी तक कनेक्शन
  • लोहता थाने के कोटवा क्षेत्र से गेट नम्बर 4 के पास गौरव सिंह पिंचु का पार्टनर विजय सोनपापड़ी ने नए जगह जमाया जुए का डेरा
  • कोटवा में विजय के नए जगह पर 25 से 30 लाख का रोज होता है जुआ 
  • रोहनियां थाने के क्षेत्र में खुलासपुर व उदयराज पुर में रामु व शिवम चतुर्वेदी ने बनाया जुए का सिंडिकेट,थाना है सेट
  • धर्म और अध्यात्म की नगर काशी में कथित जुए के अड्डों का जाल!जिम्मेदार काट रहे माल
  • वाराणसी में कानून का इकबाल या जुआ संचालकों का कथित दबदबा?

वाराणसी/प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में यदि अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जुआ संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह महज कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि स्थानीय पुलिस की जवाबदेही की भी परीक्षा है। मुकीमगंज, कमलगढ़हा और कोटवा जैसे इलाकों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सवाल सीधा है—यदि इन स्थानों पर नियमित रूप से जुए के फड़ सजने की शिकायतें सही हैं, तो संबंधित थाना प्रभारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? और यदि जानकारी है, तो प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही?

दीपक यादव, निक्की जायसवाल, किशन महाराज और विजय सोनपापड़ी रामु सिंह, शिवम चतुर्वेदी जैसे नामों को लेकर जुए के कथित नेटवर्क की चर्चाएं सामने आ रही हैं। लेकिन सार्वजनिक रूप से उठ रहे सवालों का जवाब देना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी अवश्य है।

 

1. आदमपुर थाना क्षेत्र: मुकीमगंज में कथित जुए के फड़ पर सवाल  

मुकीमगंज इलाके को लेकर आरोप है कि यहां दीपक यादव के ठिकाने पर नियमित रूप से जुए का फड़ सजता है। शिकायतों में यह भी दावा किया जा रहा है कि उसके भाई की भी कथित तौर पर इस गतिविधि में भूमिका है।

प्रमुख सवाल और जांच के बिंदु:

  •  क्या मुकीमगंज में किसी स्थान पर नियमित रूप से जुआ संचालित हो रहा है?
  •  प्रतिदिन लगभग 50 लाख रुपये से अधिक के लेन-देन का जो दावा किया जा रहा है, उसकी वित्तीय और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच हुई है?
  •  यदि किसी स्थान पर लगातार लोगों की आवाजाही और बड़े पैमाने पर नकदी के लेन-देन की शिकायतें मिल रही हैं, तो स्थानीय पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
  •  क्या पुलिस ने संदिग्ध ठिकानों की निगरानी, छापेमारी और वित्तीय लेन-देन की जांच की है?
  • प्रतिदिन 50 लाख रुपये के कथित कारोबार का दावा बेहद गंभीर है। ऐसे मामलों में उनकी अनदेखी भी नहीं होनी चाहिए। पुलिस को तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

2. जैतपुरा थाना क्षेत्र: कमलगढ़हा में किसके संरक्षण में सजता है कथित फड़?

जैतपुरा थाना क्षेत्र के कमलगढ़हा मोहल्ले को लेकर निक्की जायसवाल के नाम से कथित जुए का फड़ संचालित होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यह भी दावा है कि झांसी सहित दूसरे स्थानों से बुकी यहां आते हैं और पैसा लगाते हैं।

यदि बाहरी शहरों से लोगों के आने और बड़े स्तर पर रकम लगाए जाने की शिकायतें सही हैं, तो मामले की जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पुलिस को यह पता लगाना चाहिए कि गतिविधियों का वास्तविक स्वरूप क्या है, पैसा कहां से आता है और कहां जाता है।

जैतपुरा पुलिस से सीधे सवाल:

– कमलगढ़हा में जुए के कथित फड़ को लेकर मिली शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
– दूसरे जिलों से आने वाले कथित बुकी की पहचान और गतिविधियों की जांच की गई या नहीं?
– क्या किसी भी शिकायत के आधार पर निगरानी अथवा छापेमारी की गई?
– क्या क्षेत्रीय पुलिस अधिकारियों ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा की?

3. कुलदीप नामक पुलिसकर्मी पर संरक्षण देने के आरोप—जांच जरूरी

इस मामले में कुलदीप नामक सिपाही या दीवान पर कथित तौर पर निक्की जायसवाल को संरक्षण देने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। उसके वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक कथित संपर्कों को लेकर भी चर्चा है।
ये आरोप गंभीर हैं, लेकिन इनकी पुष्टि किसी दस्तावेज, स्वतंत्र साक्ष्य या आधिकारिक जांच से होनी चाहिए। केवल कथित संपर्कों के आधार पर किसी पुलिसकर्मी या वरिष्ठ अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
फिर भी, यदि किसी पुलिसकर्मी पर अवैध गतिविधि को संरक्षण देने की शिकायत मिलती है, तो विभागीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कॉल रिकॉर्ड, शिकायतों का विवरण, कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज और अन्य वैध साक्ष्य उपलब्ध होने पर उनकी नियमानुसार जांच की जा सकती है।

सवाल यह है कि क्या पुलिस विभाग अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कराने के लिए तैयार है? कानून का पालन कराने वाली व्यवस्था में किसी कर्मचारी को आरोपों से ऊपर नहीं माना जा सकता, लेकिन दोष तय करने का आधार भी ठोस सबूत ही होना चाहिए।

4. लोहता थाना क्षेत्र: कोटवा में नए ठिकाने को लेकर चर्चा

लोहता थाना क्षेत्र के कोटवा में गेट नंबर-4 के पास एक अन्य कथित जुआ अड्डे को लेकर भी आरोप सामने आए हैं। शिकायतों में गौरव सिंह उर्फ पिंचु के साथ विजय सोनपापड़ी की साझेदारी का दावा किया जा रहा है। यह भी आरोप है कि पहले से चर्चित गतिविधियों के बाद अब एक नए स्थान पर जुए का फड़ शुरू किया गया है।

कोटवा में प्रतिदिन 25 से 30 लाख रुपये के कथित जुए का दावा भी किया जा रहा है। इतनी बड़ी रकम के दावे की पुष्टि स्वतंत्र जांच के बिना नहीं की जा सकती। लेकिन यदि स्थानीय नागरिकों की ओर से इस संबंध में शिकायतें दी गई हैं, तो उनका सत्यापन होना चाहिए।

लोहता पुलिस के सामने प्रमुख प्रश्न:

– क्या कोटवा में गेट नंबर-4 के पास जुए की गतिविधियों की शिकायत मिली है?
– क्या संबंधित स्थान की जांच या छापेमारी की गई?
– प्रतिदिन लाखों रुपये के कथित लेन-देन के दावे के समर्थन में कोई साक्ष्य है?
– क्या आसपास के निवासियों से पूछताछ कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया गया?
– यदि शिकायतों में तथ्य मिलते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

5. किशन महाराज का नाम भी चर्चा में—भूमिका स्पष्ट करना जरूरी

जुए के कथित नेटवर्क को लेकर किशन महाराज का नाम भी चर्चाओं में लिया जा रहा है। लेकिन उनकी वास्तविक भूमिका के बारे में पुलिस को विशिष्ट शिकायतों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित व्यक्तियों के बयान के आधार पर जांच करनी चाहिए।

प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन स्थानों पर वास्तव में जुआ संचालित होने की पुष्टि हुई है और किन मामलों में अभी केवल शिकायतें या अपुष्ट सूचनाएं हैं।

रोहनियां थाना के अंतर्गत खुलासपुर व उदयराजपुर में जुए का कथित नेटवर्क

रोहनियां थाने के अंतर्गत खुलासपुर व उदयराजपुर गाँव मे रामु सिंह व शिवम चतुर्वेदी ने अपने जुएखाने के अड्डे आबाद किये है यहां भी 30 से 40 लाख का जुए का काला कारोबार हो रहा है और स्थानीय पुलिस कथरी ओढ़ के देशी घी पी रही है।सूत्रों की माने तो इन दोनों की थाने से सेटिंग अनन्त हॉस्पिटल के डॉक्टर आलोक शर्मा ने कराई है,क्योंकि ये भी इस गलीच धंधे का पार्टनर है।

6. चार थाना क्षेत्र, एक बड़ा सवाल—जवाबदेही किसकी?

आदमपुर, जैतपुरा रोहनियां और लोहता थाना क्षेत्रों को लेकर सामने आए आरोपों ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यदि अलग-अलग इलाकों में नियमित रूप से जुए के फड़ संचालित होने की शिकायतें आती हैं, तो उनकी जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित थाना पुलिस के साथ-साथ पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारियों की भी है।
लेकिन केवल आरोपों के आधार पर थाना प्रभारियों को दोषी ठहराना भी उचित नहीं होगा। वास्तविक स्थिति का पता शिकायतों के रिकॉर्ड, पुलिस कार्रवाई, स्वतंत्र साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच से ही चलेगा।

प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना चाहिए:

– चारो थाना क्षेत्रों में जुए से संबंधित कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं?
– कितने स्थानों पर छापेमारी हुई और कितने मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए?
– कथित बड़े लेन-देन की जांच के लिए क्या कदम उठाए गए?
– क्या किसी पुलिसकर्मी पर संरक्षण देने की शिकायत मिली है?
– यदि मिली है, तो जांच किस अधिकारी को सौंपी गई है?

7. पुलिस कमिश्नरेट से मांग: आरोपों की निष्पक्ष जांच हो  

वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट को चाहिए कि वह इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराए। जरूरत पड़ने पर संबंधित थाना क्षेत्रों से अलग अधिकारी को जांच सौंपी जाए, ताकि किसी संभावित हित-संघर्ष की आशंका न रहे।

जांच में आरोप सही पाए जाने पर जुआ संचालित करने वालों और किसी भी प्रकार का अवैध संरक्षण देने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो। वहीं, यदि किसी व्यक्ति पर लगाए गए आरोप गलत पाए जाते हैं, तो उसकी स्थिति भी स्पष्ट की जाए।

वाराणसी में कानून का राज दिखना चाहिए, केवल दावे नहीं

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की पहचान धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से है। यहां कानून-व्यवस्था को लेकर उठने वाले सवालों का समयबद्ध और पारदर्शी जवाब मिलना जरूरी है।

मुकीमगंज, कमलगढ़हा खुलासपुर,उदयराजपुर और कोटवा में कथित जुए के अड्डों, लाखों रुपये के संभावित लेन-देन और पुलिसकर्मियों पर लगाए गए संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सवाल किसी व्यक्ति विशेष को पहले से दोषी घोषित करने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि कानून सभी पर समान रूप से लागू हो।

अब गेंद पुलिस कमिश्नरेट के पाले में है—शिकायतों की जांच होगी, साक्ष्य सामने आएंगे और कार्रवाई तथ्यों के आधार पर होगी, या ये सवाल भी जवाब के इंतजार में रह जाएंगे? वाराणसी की जनता को आरोप-प्रत्यारोप नहीं, पारदर्शी जांच और कानून के निष्पक्ष पालन का भरोसा चाहिए।

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