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सोशल मीडिया पर मोदी सरकार करना चाहती है एकाधिकार,अभिव्यक्ति की आजादी पर चौतरफा हो रहा प्रहार

सोशल मीडिया सेंसरशिप- पोस्ट पसंद नहीं आई तो सीधे लिखने वाले को ब्लॉक करेगी मोदी सरकार, या तो माफी मांगो या फिर हमेशा के लिए बाहर

* आलोचनाओं से डरी नरेंद्र मोदी सरकार, बंद करना चाहती है आवाज

* सरकार लाने जा रही है नया कानून, प्रस्ताव लोगों की समीक्षा के लिए रखा

* इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने सरकार के कदम को बताया- सेंसरशिप

* डिजिटल प्लैटफॉर्म को माननी पड़ेगी सरकार की हर बात, वरना कानूनी कार्रवाई

* पोस्ट करने वाले की जानकारी डिजिटल प्लैटफॉर्म से लेगी सरकार

नई दिल्ली/लखनऊ। जी हां, आपने सही पढ़ा। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जल्द ही एक ऐसा कानून लाने जा रही है, जिसमें अगर आपकी सोशल मीडिया पोस्ट पसंद नहीं आई, या फिर उसमें सरकार की कोई आलोचना हो तो उसे लिखने वाले को हमेशा के लिए ब्लॉक कर दिया जाएगा। सरकार उस व्यक्ति को सोशल मीडिया पर पोस्ट बदलने और माफी मांगने का एक मौका देगी। उससे चूके तो सोशल मीडिया से हमेशा के लिए बाहर होने का खतरा है।

इससे पहले मोदी सरकार ने आईटी कानून में बदलाव कर सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म- जैसे ट्विटर एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक और मैसेंजर सर्विस से आपतिजनक पोस्ट को 36 घंटे से लेकर 3 घंटे में हटाने का प्रावधान रखा था। अब सरकार उसी कानून का दायरा बढ़ाते हुए उसमें ऐसे यूजर को भी शामिल करने की फिराक में है, जो सोशल मीडिया और यू-ट्यूब पर आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करते हैं। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन जैसे स्वतंत्र अभिव्यक्ति के समर्थक समूहों ने इसे सोशल मीडिया सेंसरशिप का नाम दिया है। फिलहाल केंद्र सरकार ने नए कानून का प्रस्ताव लोगों की आपत्तियों और सुझाव के लिए 14 अप्रैल तक के लिए रखा है। इसके बाद कानून को कैबिनेट की मुहर के बाद संसद में पारित कर लागू कर दिया जाएगा।

क्या है नए कानून में

सोमवार 30 मार्च 2026 को सामने आए नए कानून के प्रस्ताव में कहा गया है कि केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्रालय न केवल सोशल मीडिया पर समाचार देने वालों, बल्कि ऐसे लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकेगा, जो लोगों में भ्रामक, अपमानजनक और झूठे कंटेंट परोसते हैं। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसे किसी पोस्ट पर सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म से पहले यह जानकारी लेगी कि पोस्ट को लिखा किसने है? जैसे ही सरकार को जानकारी मिलती है, तुरंत वह अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाएगा। इसके लिए नियमों का हवाला दिया जाएगा, लेकिन यह नहीं बताया जाएगा कि आखिरकार लिखने वाले ने कौन सा नियम तोड़ा है। उन्होंने बताया कि सरकार कानून बनाने के साथ ही इससे जुड़े नियमों को भी अंतिम रूप देने में जुटी है। अधिकारी के मुताबिक, सरकार के पास ताकत है और वह लोगों को यह दिखाना चाहती है। इससे पहले केंद्र सरकार ने आईटी कानून 2000 की धारा 79 में किसी सोशल मीडिया यूजर की फेक न्यूज, आपत्तिजनक पोस्ट या अपमानजनक/दुर्भावना से लिखी गई पोस्ट के लिए डिजिटल प्लैटफॉर्म्स को वैधानिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया था। सरकार अभी तक ऐसे डिजिटल प्लैटफॉर्म्स से पहले आग्रह करती है कि वह ऐसे पोस्ट को हटा लें। लेकिन अब केंद्र सरकार यूजर्स और डिजिटल प्लैटफॉर्म्स दोनों को कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराना चाहती है। नया कानून एक बार लागू हो जाने के बाद सभी डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए यह जरूरी हो जाएगा कि वे सरकार की बात को मानें।

सरकारी दलील- कानून और स्पष्ट होगा

केंद्र सरकार ने यह कहते हुए प्रस्तावित कानून का समर्थन किया है कि इससे पुराने कानून में कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण और प्रक्रियागत पक्ष को साफ तौर पर देखने में मदद मिलेगी। सरकार का यह भी कहना है कि इससे न केवल वैधानिक सुनिश्चितता कायम होगी, बल्कि कानून का पालन करने को भी मजबूती मिलेगी। प्रस्तावित कानून के अनुसार, अगर सोशल मीडिया पर किसी कंटेंट के खिलाफ केंद्र के किसी मंत्रालय की समिति के पास शिकायत आएगी तो उसे लिखने वाले को पोस्ट हटाने, बदलने या उस पर माफी मांगने को कहा जा सकता है। कानून के प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि सभी डिजिटल प्लैटफॉर्म्स को सरकार की सलाह, गाइडलाइन और मानक संचालन प्रक्रिया को अपनाना ही होगा, वरना सरकार बाद में उनका कोई बचाव नहीं करेगी। यानी डिजिटल प्लैटफॉर्म्स को धारा 79 के तहत दी जाने वाले सरकारी छूट खत्म हो जाएगी। ऐसे में डिजिटल प्लैटफॉर्म्स पर भी केंद्र सरकार कानूनी कार्रवाई कर सकेगी।

यह सेंसरशिप का विस्तारित रूप- आईएफएफ

अभिव्यक्ति के अधिकारों की पैरवी करने वाले संगठन इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने केंद्र सरकार के नए प्रस्तावित कानून की यह कहते हुए आलोचना की है कि यह सरकार के सेंसरशिप का एक विस्तारित रूप है। एक बयान में संगठन ने कहा कि असल में इस तरह का कदम सरकार का नहीं, बल्कि उसके अधीन अफसरों के हाथ में सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति के अधिकारों को देना है। इससे लोगों के डिजिटल अधिकारों और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ेगा। संगठन का यह भी कहना है कि केंद्र ने शिकायतों को सुनने और कार्रवाई करने का अधिकार अपने मंत्रालयों के अधीनस्थ कमेटियों को दे दिया है, जिससे सोशल मीडिया यूजर्स को मिले संरक्षण को नुकसान होगा।

सरकार आलोचनाओं से डर गई

केंद्र सरकार आईटी कानून में एक और बदलाव का कदम एक ऐसे समय में उठा रही है, जब सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वाले पोस्ट को हटाने और ऐसे कंटेंट बनाने वाले यूजर्स का खाता बंद करने के आदेशों की बाढ़ आ गई है। केंद्र सरकार ने यहां तक कि सटायर, यानी मजाकिया और कार्टून बनाने वाले यूजर्स के भी खाते बंद किए हैं। उधर, आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि सरकार नए कानून में मुख्य रूप से फेक न्यूज और एआई से तैयार डीपफेक कंटेंट पर ध्यान दे रही है। हालांकि, सरकार ने बीते दिनों कुछ स्वतंत्र मीडिया आउटलेट और फैक्ट चेकर्स के फेसबुक पेज तक को बंद करने के आदेश बिना कारण बताए दिए हैं।

ट्विटर एक्स ने दी कानूनी चुनौती

सोशल मीडिया पर माइक्रोब्लॉगिंग प्लैटफार्म ट्विटर एक्स ने केंद्र सरकार द्वारा 12 अकाउंट को बंद करने के आदेश को कानूनी चुनौती दी है। केंद्र आईटी मंत्रालय ने 19 मार्च 2026 को आईटी एक्ट 2000 के 69ए के तहत 12 खातों को बंद करने का आदेश दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट में 30 मार्च को मामले की सुनवाई हुई। माना जा रहा है कि कोर्ट इस मामले में सरकार को यह आदेश दे सकती है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लैटफॉर्म पर कंटेंट को कैसे निगमित किया जाए। इस मामले में एक्ट के वकीलों का मुख्य ध्यान केंद्र सरकार के ब्लॉकिंग आदेश के कारणों पर टिका रहा। उनका कहना था कि धारा 69ए के तहत केंद्र सरकार ने 12 खातों को बंद करने के लिए जो कारण बताए, वे आदेश को जायज नहीं ठहराते। उन्होंने हाईकोर्ट में कहा कि सरकार देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा, जनभावनाओं और अन्य बाहरी देशों से रिश्तों को प्रभावित करने वाले कंटेंट को ही हटवा सकती है। वकीलों को कहना है कि सरकारी आदेश इनमें से किसी में भी फिट नहीं बैठते। एक्स के वकीलों ने यह भी कहा कि समूचे खाते को ही बंद करने के बजाय किसी विशेष पोस्ट पर कार्रवाई करनी चाहिए। इसके अलावा यूजर्स को भी सुनवाई का हक दिया जाना चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट में एक्स यूजर डॉ. निमो यादव अपना केस लेकर गए हैं, जिनके अकाउंट को केंद्र सरकार के आदेश पर बंद कर दिया गया है।

एआई बताकर ब्लॉक करवा दिया

केंद्र सरकार के आईटी मंत्रालय ने एक्स यूजर डॉ. निमो यादव के अकाउंट को पीएम नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए एआई के इस्तेमाल से अपमानजनक कंटेंट बताते हुए ब्लॉक करने के आदेश दिए हैं। अब एक्स ने वही आदेश सीधे दिल्ली हाईकोर्ट में लाकर पेश कर दिया। याचिकाकर्ता प्रतीक शर्मा ने भारत सरकार के आदेश में एक्स यूजर डॉ. निमो यादव के पोस्ट में उन तस्वीरों, वीउियो और कंटेंट को भी रखा, जिसके बारे में केंद्र सरकार का दावा है कि इन्हें एआई से तैयार किया गया और ऐसा करने का मकसद पीएम मोदी की छवि को धूमिल करना था। वैसे धारा 69ए के तहत जारी आदेश को गोपनीय माना जाता है। केंद्र सरकार ने 20 फरवरी 2026 के आदेश में साफ कर दिया था कि एआई तकनीक के द्वारा तैयार किसी भी कंटेंट को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते समय यह बताना होगा कि यह एआई से बना है।

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