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सरकारी दावों पर सवाल! नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ पर मचा बवाल

चन्दौली:बेसिक शिक्षा विभाग बदहाल

  • प्राथमिक विद्यालय तलरा में निर्धारित समय तक लटका रहा ताला,
  • बेसिक शिक्षा विभाग में अव्यवस्थाओ का बोलबाला
  • स्कूल पहुंचे बच्चे करते रहे इंतजार,शिक्षक मजा काट रहे अपरम्पार
  • प्रधानाध्यापक पर ग्रामीणों के गंभीर आरोप, जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन

राजकुमार सोनकर चकिया, चंदौली।सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, शिक्षकों की जवाबदेही तय करने और बच्चों को बेहतर शैक्षिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयास करने का दावा करती है। लेकिन जब किसी विद्यालय के निर्धारित समय तक नहीं खुलने की शिकायत सामने आती है, तो इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है। चंदौली जनपद के चकिया विकासखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय तलरा में समय से विद्यालय नहीं खुलने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर बहस शुरू हो गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक, विद्यालय खुलने के निर्धारित समय तक मुख्य गेट पर ताला लटका रहा और पढ़ने के लिए पहुंचे बच्चों को इंतजार करना पड़ा। ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक गोरखनाथ पर नियमित रूप से देर से विद्यालय पहुंचने का आरोप लगाया है। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल समय की पाबंदी का मामला नहीं होगा, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और सरकारी शिक्षा व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारी से भी जुड़ा गंभीर प्रश्न होगा।

निर्धारित समय तक बंद रहा विद्यालय, बच्चों की पढ़ाई पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि प्राथमिक विद्यालय तलरा में निर्धारित समय पर शिक्षण कार्य शुरू नहीं हो सका। स्कूल जाने की उम्र में बच्चों के लिए प्रत्येक दिन की पढ़ाई महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि विद्यालय समय पर नहीं खुलता और बच्चों को गेट के बाहर इंतजार करना पड़ता है, तो इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और विद्यालय के प्रति रुचि पर पड़ सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बच्चे समय से विद्यालय पहुंच रहे हैं, तो उन्हें पढ़ाई के लिए इंतजार क्यों करना पड़े?
सरकारी विद्यालयों में गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चे बड़ी संख्या में शिक्षा प्राप्त करते हैं। उनके अभिभावक उम्मीद करते हैं कि विद्यालय में नियमित कक्षाएं चलेंगी, शिक्षक समय पर पहुंचेंगे और बच्चों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाया जाएगा। विद्यालय खुलने में देरी की शिकायतें इन उम्मीदों को कमजोर करती हैं।
हालांकि, विद्यालय बंद रहने की अवधि, उस समय शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति और शिक्षण कार्य प्रभावित होने की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

प्रधानाध्यापक पर गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच जरूरी

ग्रामीणों ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक गोरखनाथ पर देर से आने के साथ कथित तौर पर दबंग रवैया अपनाने के आरोप भी लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि शिकायत करने पर प्रधानाध्यापक कथित रूप से कहते हैं कि खंड शिक्षा अधिकारी भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते और वह इसी तरह देर से आते रहेंगे।
यदि ग्रामीणों के इस दावे की पुष्टि होती है, तो यह विभागीय अनुशासन और जवाबदेही के लिहाज से गंभीर मामला होगा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रधानाध्यापक का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। इसलिए आवश्यक है कि शिक्षा विभाग सभी तथ्यों की जांच करे और संबंधित शिक्षक को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
किसी भी कर्मचारी की जवाबदेही उसके पद, प्रभाव या व्यक्तिगत संबंधों से नहीं, बल्कि नियमों और उसके कार्य के आधार पर तय होनी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विद्यालय के खुलने के समय, उपस्थिति पंजिका और वास्तविक शिक्षण कार्य का सत्यापन कराया जाए, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।

आधा दर्जन शिक्षकों की तैनाती, फिर भी व्यवस्था पर सवाल

ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय तलरा में प्रधानाध्यापक गोरखनाथ के अलावा पांच अन्य शिक्षकों की तैनाती बताई गई है। इनमें सहायक अध्यापक रामजन्म, रामाश्रय मिश्र, यश कुमार जायसवाल, प्रतिमा और अश्वनी कुमार के नाम शामिल हैं।
विद्यालय में शिक्षकों की तैनाती का उद्देश्य बच्चों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में यह जांचना आवश्यक है कि विद्यालय में सभी शिक्षक निर्धारित समय पर उपस्थित थे या नहीं और कक्षाओं का संचालन नियमानुसार हो रहा था या नहीं।
यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जिस समय विद्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगे होने की शिकायत सामने आई, उस समय विद्यालय में तैनात शिक्षक कहां थे और शिक्षण कार्य शुरू होने में देरी क्यों हुई।
सिर्फ शिक्षकों की संख्या पर्याप्त होने से शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए नियमित उपस्थिति, समयबद्ध कक्षाएं, बच्चों की सीखने की प्रगति और अधिकारियों की प्रभावी निगरानी भी जरूरी है।

खंड शिक्षा अधिकारी अजीत पाल ने दिया जांच का आश्वासन

प्राथमिक विद्यालय तलरा से संबंधित शिकायत पर खंड शिक्षा अधिकारी अजीत पाल ने जांच कराने और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।
उनका यह आश्वासन महत्वपूर्ण है, लेकिन अब ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच कब होती है, उसमें किन तथ्यों को शामिल किया जाता है और उसके निष्कर्षों के आधार पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
जांच के दौरान विद्यालय खुलने का निर्धारित समय, शिक्षकों की उपस्थिति, संबंधित दिन की परिस्थितियां और बच्चों के शिक्षण कार्य पर पड़े प्रभाव की पड़ताल की जानी चाहिए। यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
साथ ही, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना भी विभाग की जिम्मेदारी है। निष्पक्ष जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति को पहले से दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाकर जवाबदेही तय करना होना चाहिए।

ग्रामीणों की मांग—विद्यालय समय पर खुले, नियमित पढ़ाई हो

ग्रामीण चाहते हैं कि विद्यालय में ऐसी व्यवस्था लागू हो, जिससे बच्चों को समय पर शिक्षा मिल सके और अभिभावकों को बार-बार शिकायत करने की आवश्यकता न पड़े।

उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं—

– विद्यालय खुलने के समय की जांच: निर्धारित समय पर मुख्य गेट खुलने और शिक्षण कार्य शुरू होने की स्थिति का सत्यापन कराया जाए।
– शिक्षकों की उपस्थिति की पड़ताल: सभी तैनात शिक्षकों की उपस्थिति पंजिका और वास्तविक उपस्थिति का मिलान किया जाए।
– निष्पक्ष विभागीय जांच: प्रधानाध्यापक पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोनों पक्षों की बात सुनी जाए।
– नियमों के अनुसार कार्रवाई: आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
– नियमित निरीक्षण: विद्यालय में शिक्षण कार्य और समयपालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की निगरानी मजबूत की जाए।
– बच्चों की पढ़ाई की भरपाई: यदि जांच में पढ़ाई प्रभावित होने की पुष्टि होती है, तो आवश्यक शैक्षिक उपाय किए जाएं।

सवाल सिर्फ एक विद्यालय का नहीं, बच्चों के भविष्य का है

प्राथमिक शिक्षा किसी भी बच्चे के भविष्य की बुनियाद होती है। इसी स्तर पर बच्चों में पढ़ने-लिखने की क्षमता, अनुशासन और सीखने की आदत विकसित होती है। यदि शुरुआती कक्षाओं में नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है, तो आगे चलकर बच्चों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए प्राथमिक विद्यालय तलरा में समय से स्कूल नहीं खुलने की शिकायत को केवल स्थानीय विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यह शिक्षा व्यवस्था की निगरानी, कर्मचारियों की जवाबदेही और सरकारी संसाधनों के सही उपयोग से जुड़ा विषय है।
सरकार और शिक्षा विभाग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जो भी योजनाएं चलाते हों, उनका वास्तविक लाभ तभी बच्चों तक पहुंचेगा, जब विद्यालय नियमित रूप से खुलेंगे, शिक्षक समय पर उपस्थित होंगे और कक्षाओं में पढ़ाई होगी।

अब देखना होगा, आश्वासन कार्रवाई में कब बदलेगा

प्राथमिक विद्यालय तलरा के मामले में फिलहाल ग्रामीणों के आरोपों और खंड शिक्षा अधिकारी के जांच संबंधी आश्वासन के आधार पर ही स्थिति सामने आई है। आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में आवश्यक है कि विभाग बिना किसी पक्षपात के जांच पूरी करे और उसके निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे।
यदि लापरवाही साबित होती है, तो कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं मिलते, तो इसकी जानकारी भी सामने आनी चाहिए। यही पारदर्शिता सरकारी विद्यालयों के प्रति जनता का भरोसा मजबूत करेगी।

 

आखिर बच्चों की पढ़ाई से बढ़कर क्या हो सकता है?

नौनिहालों का भविष्य किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए सवाल सीधा है—क्या प्राथमिक विद्यालय तलरा में समयबद्ध शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित होगी, या बच्चों को स्कूल के गेट पर इंतजार करने की शिकायतों का सामना करना पड़ता रहेगा?
अब सबकी निगाहें खंड शिक्षा अधिकारी अजीत पाल की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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