वाराणसी

वाराणसी के मुख्य चिकित्साधिकारी का गोल-माल: डॉ.सन्दीप चौधरी बन रहे मौत के सौदागर,डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक इनके गॉडफादर

काशी में स्वास्थ्य नहीं, मौत की दुकानें!

पीएम के संसदीय क्षेत्र में झोला छाप डॉक्टरों, फर्जी नर्सिंग होम और सीएमओ ऑफिस की मिलीभगत का गोरखधंधा,सीएमओ बने अंधा

गली-कूचों से लेकर हाइवे किनारे तक अवैध क्लिनिकों की बाढ़, सिस्टम मौन

बिना प्रशिक्षित चिकित्सक, बिना पंजीकरण चल रहे नर्सिंग होम, मरीज बन रहे मोहरा

लैब टेक्नीशियन चला रहे पैथोलॉजी सेंटर, रिपोर्ट के आधार पर इलाज तय!

काशी में स्वास्थ्य सेवाएं नहीं, लूट और मौत का सज गया है बाजार

स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से हो रही खुलेआम मरीजों की सौदाबाजी

डिप्टी सीएमओ डॉ.पीयूष राय पर अवैध संरक्षण और पैसे के खेल के गंभीर आरोप

सीएम हेल्पलाइन दर्ज शिकायतों पर कार्रवाई की जगह खानापूर्ति

सीएम योगी के ‘जीरो टॉलरेंस’ की हवा निकाल रहे बनारस के मुख्य चिकित्साधिकारी

 

 

― सजंय पटेल, अचूक संघर्ष

 

वाराणसी। काशी में बाबा के नाम से नहीं, अब झोला छाप डॉक्टरों के इंजेक्शन और फर्जी पैथोलॉजी रिपोर्ट से मोक्ष मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्वास्थ्य विभाग खुद बीमार है इस कदर कि गली-गली बिना डिग्रीधारी डॉक्टर, बिना लाइसेंस वाले नर्सिंग होम, और बिना विशेषज्ञों वाली पैथोलॉजी लैब धड़ल्ले से मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। हैरत की बात ये नहीं कि ये सब सीएमओ महा घूसखोर डॉक्टर सन्दीप चौधरी की छत्रछाया में फल-फूल रहा है। डिप्टी सीएमओ डॉ.पीयूष राय पर इस पूरे नेटवर्क को ‘संरक्षण शुल्क’ लेकर चलवाने के आरोप हैं, और सीएम योगी के ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को ठेंगा दिखाया जा रहा है।

  • झोला छाप डॉक्टरों की संख्या सैकड़ों में, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र दोनों में सक्रिय
  • शहर से बाहर ग्रामीण इलाकों में 200 से अधिक बिना रजिस्ट्रेशन अवैध नर्सिंग होम और क्लिनिक
  • कई नर्सिंग होम में बिना प्रशिक्षित स्टाफ के ऑपरेशन थिएटर
  • पैथोलॉजी सेंटर बिना एमडी पैथोलॉजिस्ट, तकनीशियन ही रिपोर्ट बना रहे
  • डिप्टी सीएमओ डॉ. पीयूष राय पर वसूली और संरक्षण का आरोप
  • मेडिकल काउंसिल और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का सरेआम उल्लंघन

 

झोला छाप डॉक्टरों का काशी मॉडल: राम भरोसे इलाज, रुपयों का सज रहा साज

वाराणसी में कोई वार्ड, कोई मोहल्ला, कोई ब्लॉक ऐसा नहीं बचा जहां गली के नुक्कड़ पर झोला लटकाए कोई ‘डॉक्टर’ बैठा न मिल जाये। इन झोला छाप डॉक्टरों में से अधिकतर के पास न कोई मेडिकल डिग्री है, न कोई लाइसेंस। फिर भी पैरासिटामोल से लेकर स्टेरॉयड इंजेक्शन तक देना आम बात है। कई बार तो टीबी, डेंगू या वायरल जैसी गंभीर बीमारियों का भी इलाज इन्हीं के भरोसे हो रहा है। बात किसी एक क्षेत्र की नहीं हर इलाके में ऐसे 15–20 झोला छाप सक्रिय हैं, जो दिनभर मरीजों की कतार लगाए रहते हैं। ग्रामीण इलाकों में तो ये ‘डॉक्टर’ भगवान का रूप माने जाते हैं क्योंकि सरकारी अस्पताल या योग्य चिकित्सक वहां हैं ही नहीं।

 

नर्सिंग होम नहीं, मौत का अड्डा

बिना पंजीकरण, बिना योग्य स्टाफ और बिना बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के खुले हैं दर्जनों नर्सिंग होम। कुछ तो तिरपाल टांगकर ‘हॉस्पिटल’ चला रहे हैं, जिनके पास न ऑक्सीजन सिलेंडर हैं, न आपातकालीन उपकरण।
सूत्रों के मुताबिक, वाराणसी जिले में सैकड़ों नर्सिंग होम व क्लिनिक बिना क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश का संचालन रिटायर्ड कंपाउंडर, आयुर्वेद या होम्योपैथी डिग्रीधारी कर रहे हैं, लेकिन दावा एमबीबीएस का होता है।

पैथोलॉजी सेंटर – लैब असिस्टेंट – ‘रोग का फैसला’

अब बात करें पैथोलॉजी सेंटरों की। इनका हाल और भी भयावह है। शहर के लगभग 70 फीसदी पैथोलॉजी सेंटर बिना किसी एमडी पैथोलॉजिस्ट के चल रहे हैं। अधिकांश स्थानों पर लैब टेक्नीशियन खुद रिपोर्ट तैयार करता है और ‘डॉक्टर’ उसी रिपोर्ट के आधार पर दवा लिखते हैं, उन्हें इससे मतलब नहीं कि मरीज ठीक हो जाये। उनका उद्देश्य मरीज मात्र पैसा उगलने वाली एटीएम मशीन से ज्यादा कुछ नहीं होता। सूत्रों की मानें तो जनपद में लाइसेंस प्राप्त पैथोलॉजी की संख्या लगभग 300 के आसपास है, जबकि हकीकत ने मौजूद सेंटर 500 से ज्यादा हैं। यानी अधिकतर फर्जी हैं।

सीएमओ डॉक्टर सन्दीप चौधरी का ‘संरक्षण तंत्र’ पैसा दो, क्लिनिक चलाओ

इस पूरे गोरखधंधे की जड़ें सीएमओ डॉक्टर सन्दीप चौधरी है, जहां इनकी जिम्मेदारी है अवैध अस्प्ताल संचालित न होने पाए,वही दुसरीं ओर इन्ही की शह पर ये गोरखधंधा फल-फूल रहा है। सूत्रों के अनुसार, डिप्टी सीएमओ डॉ.पीयूष राय पर झोला छाप डॉक्टरों और अवैध नर्सिंग होम संचालकों से वसूली के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ताओं ने बयान दिए हैं कि कुछ नर्सिंग होम बिना किसी जांच के 20 से 50 हजार रुपए देकर महीनों से चल रहे हैं। डॉ.राय के कार्यकाल में अनेकों फर्जी नर्सिंग होमों को मंजूरी मिली, जिनका कोई फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं हुआ। यह भी सामने आया कि कई शिकायतों पर न तो जांच होती है न ही कोई कार्रवाई।

शिकायतों पर साजिश, कार्रवाई की जगह धमकी

सूत्रों के अनुसार सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई और अन्य माध्यमों से 2023-24 में झोला छाप डॉक्टरों और अवैध अस्पतालों के खिलाफ सैकड़ों शिकायतें हुईं, परन्तु इनका परिणाम शून्य रहा। शिकायत करने वालों को या तो फोन करके चुप रहने की सलाह दी गई, या स्थानीय पुलिस से थोड़ा शांत रहो जैसी चेतावनी मिली।डॉ.पीयूष राय और उनके स्टाफ पर कई शिकायतकर्ताओं ने ‘पैसे देकर मामला सुलझाने’ का दबाव बनाए जाने का भी आरोप लगाया है।

योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति फेल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और व्यवस्था को मजबूत करने का दावा कई बार किया। मगर काशी में उनकी ही सरकार के अधिकारी, सीएमओ और डिप्टी सीएमओ सरकारी नीति की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इसलिए अब लोग यह कहने से नहीं हिचक रहे हैं कि काशी को विश्वस्तरीय शहर बनाने के दावे तब खोखले लगने लगे हैं। यहां का स्वास्थ्य विभाग खुद मृत्यु का दूत बन गया है। मरीज लुटते हैं, मरते हैं तो भगवान की मर्जी। डॉक्टरों की मिलीभगत से हर किसी की जेब भरती है। फिर वह झोला छाप हो या डिप्टी सीएमओ। अगर इसपर कार्रवाई नहीं हुई, तो पीएम का संसदीय क्षेत्र मौत का शहर कहलाने लगेगा, न कि प्रधानमंत्री का ‘विकास मॉडल’।

 

डिप्टी सीएमओ का ‘कमीशन चैप्टर’

डॉ. पीयूष राय का नाम इलाके में डर से नहीं, पैसे के खेल से लिया जाता है। जिन फर्जी अस्पतालों में सील लगनी चाहिए, वे चालू हैं। जिन डॉक्टरों पर केस होना चाहिए, वे ‘ऑपरेशन’ कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, महीने का बंधा-बंधाया पैसा ऊपर तक पहुंचता है—इसलिए न कोई जांच होती है, न बंदी। जो आवाज़ उठाए, उसे या तो झूठे केस में फंसाया जाता है या धमकी देकर चुप करा दिया जाता है। इसलिए अब कहा जाने लगा है कि वाराणसी अब आध्यात्म की नगरी नहीं, ‘मेडिकल माफिया’ की राजधानी बन गई है। यहां डॉक्टर नहीं, मौतें तय करने वाले बैठे हैं। जो लोग इलाज के लिए आते हैं, वो घर नहीं, सीधे श्मशान लौटते हैं। और इस सबके पीछे जो सबसे बड़ा सच छिपा है। वो है सीएमओ कार्यालय की छत्रछाया, जहां पैसा बोलता है और इंसानियत दम तोड़ती है। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में झोला छाप डॉक्टरों, फर्जी नर्सिंग होमों और पैथोलॉजी माफियाओं का इतना गहरा जाल बिछा है कि लगता है, वाराणसी में अब न भगवान बचा है, न प्रशासन केवल कमीशनखोरी का ‘क्लीनिक तंत्र’ शेष है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button