डीजी एनएसजी भृगु श्रीनिवासन व सीपी मोहित अग्रवाल की अगुवाई में चला एंटी टेरोरिस्ट अभियान, काशी सुरक्षित रहे इसका रख रहे ध्यान
गंगा किनारे ऑपरेशन सुरक्षित काशी, एनएसजी, एटीएस की शानदार मॉकड्रिल

● डीजी एनएसजी भृगु श्रीनिवासन व सीपी मोहित अग्रवाल की अगुवाई में चला एंटी टेरोरिस्ट अभियान, काशी सुरक्षित रहे इसका रख रहे ध्यान
● गंगा किनारे ऑपरेशन सुरक्षित काशी, एनएसजी, एटीएस की शानदार मॉकड्रिल
● 46 लोगों की सुरक्षित ‘रिहाई’, सुरक्षा तंत्र का प्रदर्शन
◆ सजंय पटेल
वाराणसी। दिल्ली में कार ब्लास्ट जैसी हृदय विदारक घटना के बाद देशभर में सुरक्षा चिंताएं गहराई थीं, लेकिन वाराणसी के रविदास घाट पर 14 नवंबर 2025 शुक्रवार की सुबह कुछ ऐसा हुआ जिसने लोगों के मन में भरोसा दोबारा जगा दिया। एनएसजी और यूपी एटीएस के कमांडोज ने गंगा में जल और वायुमार्ग से उतरकर जिस तरह क्रूज हाईजैक की आशंकित स्थिति का ‘जीवंत’ ऑपरेशन किया, वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। लेकिन इसकी असली शक्ति इसी में थी कि यह फिल्म नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा क्षमता की सजीव मिसाल थी। 46 बंधकों को सुरक्षित निकालने और चार काल्पनिक आतंकियों को ढेर करने का यह दो घंटे का अति-व्यावहारिक अभ्यास सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता, तकनीकी दक्षता और समन्वय की परिशुद्धता का उजला प्रमाण बन गया। लोगों ने अपनी आंखों के सामने कमांडोज को हेलीकॉप्टर से रस्सियों पर उतरते, गंगा की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ते और क्रूज में सफलतापूर्वक घुसकर ऑपरेशन पूरा करते देखा और इस दृश्य ने काशी के कलेजे में ठंडक भर दी कि शहर सुरक्षित हाथों में है।
भोर की ख़ामोशी तोड़ता ‘ऑपरेशन अलर्ट’ कंट्रोल रूम को मिली हाईजैक की सूचना
एनएसजी एटीएस की संयुक्त छलांग हवा और पानी से घेराबंदी की अनोखी रणनीति
रविदास घाट पर सिहरन और सुकून जनता बोली, ये है असली सुरक्षा का भरोसा
जवानों का 120 सेकेंड का ‘रैपिड एंट्री’ क्रूज में घुसते ही बना दबदबा
एनडीआरएफ और जल पुलिस की अहम भूमिका मुख्य घेरे ने बचाई उम्मीद की सांस
डीजी एनएसजी और पुलिस कमिश्नर ने की ब्रीफिंग कमांडोज की शाबाशी से गूंजी घाट की हवा
लाउडस्पीकर पर घोषणा घबराएं नहीं, यह मॉकड्रिल है जनता का सहयोग शानदार
सुरक्षित काशी की नई परिभाषा मॉकड्रिल ने दिखाई तैयारियों की असली ताकत
रविदास घाट की सुबह आम दिनों की तरह शांत नहीं थी। गंगा की लहरें जरूर वैसी ही थीं, लेकिन उनके ऊपर मंडरा रहा था एक हेलीकॉप्टर, किनारे तैनात थे जवान, और क्रूज को घेरे खड़ी थीं स्पीड बोटें। शुक्रवार सुबह पांच बजे से शुरू हुआ यह मॉक ऑपरेशन देखते ही देखते ऐसा दृश्य बन गया जिसने हजारों की भीड़ को स्तब्ध कर दिया। क्योंकि यह ‘ड्रिल’ नहीं लग रही थी, बल्कि आतंकवादियों के खिलाफ एक वास्तविक युद्ध जैसी तैयारी थी। तड़के पांच बजे जल पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि 4 आतंकियों ने गंगा में चल रहे एक क्रूज को हाईजैक कर लिया है। क्रूज में 16 पैसेंजर और 30 क्रू मेंबर सहित कुल 46 लोग आतंकियों की गिरफ्त में बताए गए। सूचना मिलते ही जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें क्रूज के चारों तरफ एक सुरक्षा घेरा बनाकर खड़ी हो गईं, ताकि कोई भी संदिग्ध गतिविधि या बच निकलने का रास्ता आतंकियों को न मिल सके। यह वही क्षण था जब ऑपरेशन में ‘स्पेशलिस्ट फोर्सेज’ की एंट्री होनी थी। कुछ ही मिनटों में आसमान में एनएसजी और एटीएस का हेलीकॉप्टर दिखाई दिया। इसके बाद जो दृश्य लोगों ने देखा, वह असाधारण था। रस्सियों के सहारे हवा से कमांडो उतर रहे थे, ठीक उसी समय जलमार्ग से दूसरी टीम क्रूज की ओर बढ़ रही थी। वायु और जल दोनों दिशाओं से घेराबंदी का यह तरीका अपने आप में आधुनिक आतंकवाद-रोधी रणनीति का शानदार प्रदर्शन था।
ऑपरेशन की पहली सफलता आतंकियों को बाहर निकलने का एक भी मौका नहीं
एनडीआरएफ और जल पुलिस ने जैसे ही क्रूज के चारों ओर अपना घेरा मजबूत किया, आतंकियों के लिए दहशत फैलाने का कोई रास्ता नहीं बचा। यह वही क्षण था जब एनएसजी और एटीएस की टीमों ने एंट्री पॉइंट तलाशना शुरू किया और हवा से उतरते ही क्रूज के ऊपरी डेक पर कब्जा कर लिया। मौके पर मौजूद लोग दंग थे। हेलीकॉप्टर से उतरते ही कमांडो जिस तेजी से आगे बढ़े, वह अविश्वसनीय था, लगता ही नहीं था कि यह अभ्यास है।
120 एनएसजी और 45 एटीएस कमांडो रहे ऑपरेशन की रीढ़
पूरे ऑपरेशन में कुल 165 कमांडोज में 120 एनएसजी और 45 यूपी एटीएस के जवान शामिल थे। इनका समन्वय ही इस मॉक ऑपरेशन की असली सफलता था। हर कमांडो अपने तय सेक्शन में, तय हथियारों के साथ, तय लक्ष्य पर केंद्रित था। इस ड्रिल में दिखी अनुशासन की यह परत दरअसल इस बात का प्रमाण थी कि देश की सुरक्षा एजेंसियां वास्तविक संकट में इससे कहीं बड़े ऑपरेशन को सफलता से अंजाम दे सकती हैं।
दो घंटे का काउंट डाउन और आतंकियों का सफाया
जैसे ही कमांडोज क्रूज में दाखिल हुए, दो घंटे का काउंट डाउन शुरू हो गया। यह समय इसलिए तय था ताकि यह पता लगे कि ‘असली हालात’ में कितनी तेजी से बंधकों को बचाया जा सकता है। ड्रिल में चार आतंकियों को ‘मार गिराने’ का लक्ष्य था और यह पूरा हुआ। कमांडोज की ‘क्लोज-कॉम्बैट’ एंट्री प्रक्रिया, सीढ़ियां पार करते हुए नीचे के डेक तक पहुंचना और हर सेक्शन को सुरक्षित घोषित करना यह सब उस तकनीकी दक्षता का हिस्सा था जिसने इस अभ्यास को असाधारण बना दिया।
भीड़ में नहीं दिखी दहशत संदेश बार-बार दोहराया गया यह मॉकड्रिल है
रविदास घाट पर मौजूद लोगों की सुरक्षा और मानसिक शांति बनाए रखने के लिए लगातार लाउडस्पीकर पर घोषणा की जाती रही कि कृपया घबराएं नहीं, यह एक मॉक ड्रिल है। सुरक्षा एजेंसियों का अभ्यास चल रहा है।
लोगों ने सहयोग किया कई लोग मोबाइल से वीडियो बनाते दिखे, कई सुरक्षा एजेंसियों को ताली बजाकर प्रोत्साहित कर रहे थे, और कई अपने बच्चों को समझा रहे थे कि देखो, देश के सैनिक कैसे काम करते हैं।
ऑपरेशन की रीढ़ एनडीआरएफ और जल पुलिस की त्वरित घेराबंदी
किसी भी आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन में शुरुआती प्रतिक्रिया ही सबसे निर्णायक होती है। इस मामले में जल पुलिस और एनडीआरएफ की भूमिका प्रशंसनीय रही। कमांडोज के आने तक उन्होंने क्रूज को पूरी तरह घेरकर आतंकियों को किसी भी दिशा से भागने या बंधकों को नुकसान पहुंचाने की गुंजाइश नहीं दी। बाद में खुद एनएसजी अधिकारियों ने इसकी सराहना की और कहा कि फर्स्ट रिस्पॉन्स सही होता है तो ऑपरेशन आधा वहीं सफल हो जाता है।
ऑपरेशन के बाद एक घंटे की ब्रीफिंग फील्ड में सीखे गए पाठों पर खुली चर्चा
ड्रिल समाप्त होते ही एनएसजी के डीजी भृगु श्रीनिवासन और वाराणसी पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने एक घंटे तक चली ब्रीफिंग में ऑपरेशन की बारीकियों, तकनीकी चुनौतियों और सुधार के बिंदुओं पर चर्चा की। हालांकि अधिकारियों ने खुलकर किसी भी ‘कमजोरी’ का खुलासा नहीं किया, पर उनके चेहरों की संतुष्टि देखकर साफ था कि कमांडोज ने हर स्तर पर मापदंड पूरे किए। रविदास घाट से जाते समय दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की मुस्कुराहट ही इस मॉकड्रिल के परीक्षा-परिणाम की घोषणा थी कि जवान पास हो गए।
कानून-व्यवस्था के शीर्ष अधिकारी रहे मौजूद
ड्रिल की मॉनिटरिंग में पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल , डीआईजी कानून-व्यवस्था शिवहरि मीणा, डीसीपी गौरव बंसवाल, डीसीपी सरवनन मौजूद रहे। इससे साफ था कि यह अभ्यास केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा था। रविदास घाट पर हुआ यह ऑपरेशन सिर्फ एक मॉकड्रिल नहीं था। यह संदेश था कि काशी सिर्फ आध्यात्मिक धड़कन ही नहीं, सुरक्षा के मामले में भी अडिग और सजग है। एनएसजी–एटीएस का यह संयुक्त अभ्यास दिखाता है कि आतंकवाद से निपटने में देश की तैयारी कितनी पेशेवर, कितनी तेज और कितनी मजबूत है। लाखों भक्तों और पर्यटकों की नगरी काशी को आज एक बार फिर भरोसा मिला कि देश की रक्षा केवल शब्दों से नहीं, ऐसी ही तैयारी से होती है।
* कुल 46 लोगों को सुरक्षित निकालने का मॉक ऑपरेशन
* 120 एनएसजी 45 एटीएस कमांडो शामिल
* जल और वायुमार्ग से एक साथ घेराबंदी
* दो घंटे में आतंकियों का निष्प्रभावीकरण
* जल पुलिस और एनडीआरएफ ने पहले घेरे को मजबूती दी
* जनता को लगातार बताया गया यह मॉकड्रिल है, घबराएं नहीं
* डीजी एनएसजी और पुलिस कमिश्नर वाराणसी की सीधी मॉनिटरिंग
* सफल ड्रिल ने ‘सुरक्षित काशी’ की रणनीति को नया आत्मविश्वास दिया




