दयाशंकर सिंह उवाच:कटहल नाला की बदलेगी पहचान,बढ़ जाएगी बलिया की शान
इतिहास से आधुनिकता की ओर बलिया कटहल नाला बनेगा जूही चौपाटी, शहर को मिलेगी नई पहचान

- इतिहास से आधुनिकता की ओर बलिया
- कटहल नाला बनेगा जूही चौपाटी, शहर को मिलेगी नई पहचान
- 18.07 करोड़ रुपये की विकास एवं सौंदर्यीकरण परियोजना का भूमि पूजन
- प्राचीन राजाओं की जल-प्रबंधन धरोहर को मिलेगा नया जीवन
- सुरहा ताल-गंगा जल तंत्र को मजबूती, बाढ़ व जलभराव से राहत
- दोनों दिशाओं में बहने वाले अद्वितीय नाले का संरक्षण
सोलर लाइटिंग, लैंडस्केपिंग, मायावकी फॉरेस्ट से हरित स्वरूप - शहर के बीचों-बीच स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरणीय कॉरिडोर
- बलिया के नागरिक जीवन और शहरी छवि में ऐतिहासिक बदलाव की पहल

बलिया। शहरों की पहचान केवल इमारतों, सड़कों और बाजारों से नहीं बनती, बल्कि उनकी पहचान उस इतिहास, उस जल-संरचना और उस विरासत से बनती है, जो पीढ़ियों तक समाज को जीवन देती रही है। बलिया का ऐतिहासिक कटहल नाला ऐसा ही एक जीवंत उदाहरण है। जो अब उपेक्षा, गंदगी और अतिक्रमण के दौर से निकलकर विकास, सौंदर्य और पर्यावरणीय संतुलन की नई कहानी लिखने जा रहा है।
विगत सप्ताह परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने 18.07 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले कटहल नाला विकास एवं सुंदरीकरण परियोजना का विधिवत भूमि पूजन एवं शिलान्यास कर बलिया को एक नई सौगात दी। यह सिर्फ एक नाले का विकास नहीं, बल्कि शहर की आत्मा से जुड़े उस ऐतिहासिक जलमार्ग का पुनर्जागरण है, जिसे कभी प्राचीन राजाओं ने वैज्ञानिक सोच और दीर्घकालिक दृष्टि से निर्मित कराया था।
कटहल नाला, जो एशिया के प्रसिद्ध सुरहा ताल से जुड़ा हुआ है और गंगा नदी तक जल प्रवाह का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है, अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण पूरे क्षेत्र में अलग पहचान रखता है। यह देश का ऐसा दुर्लभ नाला है जो दोनों दिशाओं में बहने की क्षमता रखता है—कभी बाढ़ के पानी को बाहर निकालने में सहायक तो कभी जल संरक्षण का माध्यम। वक्त के साथ जैसे-जैसे शहर बढ़ा, आबादी फैली और योजनाबद्ध विकास की जगह अव्यवस्था ने ली, वैसे-वैसे कटहल नाला भी अतिक्रमण, गंदगी और उपेक्षा का शिकार होता चला गया। बरसात के मौसम में यही नाला जलभराव, दुर्गंध और बीमारियों का कारण बनने लगा। लेकिन अब वही स्थान शहर के लिए जूही चौपाटी के रूप में विकसित होकर सामाजिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने भूमि पूजन के अवसर पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि जहां गंदगी है, वहीं से विकास की शुरुआत होगी और इसी संकल्प के साथ कटहल नाला को संवारने का निर्णय लिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि सरकार ने नाले के सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 19 करोड़ रुपये और सिंचाई विभाग द्वारा सफाई कार्य के लिए 2 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। यह परियोजना केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जल निकासी, बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक सुविधा और शहरी सौंदर्य इन सभी पहलुओं को समग्र रूप से शामिल किया गया है। प्रबंधापुर पुल से रामपुर महावल बैराज तक लगभग 2 किलोमीटर लंबाई में होने वाला यह कार्य आने वाले वर्षों में बलिया की पहचान को नई ऊंचाई देगा। कटहल नाला का यह कायाकल्प उस सोच का प्रतीक है, जिसमें विरासत को मिटाने के बजाय उसे आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालकर संरक्षित किया जाता है। यह परियोजना बलिया के लिए केवल एक विकास कार्य नहीं, बल्कि इतिहास, प्रकृति और भविष्य के बीच संतुलन का प्रयास है। बलिया जिले के इतिहास में महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हुआ, जब वर्षों से उपेक्षित पड़े ऐतिहासिक कटहल नाला के कायाकल्प की औपचारिक शुरुआत हुई। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह द्वारा भूमि पूजन और शिलान्यास के साथ यह स्पष्ट संकेत मिला कि अब विकास केवल कागजों या घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धरातल पर दिखाई देगा।

कटहल नाला इतिहास और विज्ञान का संगम
कटहल नाला केवल एक जल निकासी मार्ग नहीं है, बल्कि यह उस प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली का हिस्सा है, जिसे तत्कालीन राजाओं ने प्राकृतिक ढाल, नदी-तालाबों के आपसी संबंध और मौसमी प्रवाह को समझते हुए विकसित किया था। यह नाला सुरहा ताल से जुड़कर गंगा नदी तक पानी पहुंचाने और आवश्यकता पड़ने पर विपरीत दिशा में जल प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों दिशाओं में बहने वाला यह नाला आज भी इंजीनियरिंग दृष्टि से एक अद्भुत संरचना है। बाढ़ के समय यह अतिरिक्त जल को बाहर निकालकर शहर को डूबने से बचाता है, जबकि सामान्य समय में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण में सहायक होता है।
परियोजना की संरचना और कार्य योजना
नगर पालिका परिषद बलिया की सीमा के अंतर्गत आने वाले कटहल नाला के लगभग 2 किलोमीटर हिस्से का विकास किया जाएगा। इस कार्य को यूपी जल निगम नगरीय की इकाई कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज आजमगढ़ द्वारा निष्पादित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत नाले के दोनों किनारों पर बोल्डर पिचिंग, जियो-सेल मेम्बरिंग सिस्टम से कटाव रोकथाम, नागरिकों के लिए सरफेस पार्किंग,सीहरियाली बढ़ाने हेतु लैंडस्केपिंग और हार्टिकल्चर,सीसुरक्षा के लिए बैरियर और फसाद निर्माण, ऊर्जा संरक्षण के लिए सोलर लाइटिंग, पर्यावरण संतुलन हेतु मायावकी फॉरेस्ट
जैसे कार्य शामिल हैं। यह सब मिलकर कटहल नाला को केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि एक अर्बन इको-फ्रेंडली स्पेस में बदल देंगे।
जलभराव से राहत और नागरिक सुविधा
शहर के कई मोहल्ले हर साल बरसात में जलभराव से जूझते हैं। नाले की सफाई और वैज्ञानिक ढंग से विकास होने के बाद जल निकासी व्यवस्था मजबूत होगी। इससे न केवल घरों और सड़कों पर पानी भरने की समस्या कम होगी, बल्कि मच्छर जनित बीमारियों और गंदगी से भी राहत मिलेगी।
जूही चौपाटी शहर को मिलेगा नया सार्वजनिक स्थल
कटहल नाला के किनारे विकसित होने वाली जूही चौपाटी बलिया के नागरिकों के लिए एक नया सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र बनेगी। यहां लोग सुबह की सैर, योग, बच्चों के साथ समय और सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे।
प्रशासन की सख्ती और गुणवत्ता पर जोर
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति और संदेश
भूमि पूजन कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, पूर्व मंत्री नारद राय सहित कई जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि यह परियोजना राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर जनहित का विषय है। कटहल नाला का विकास यह साबित करता है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो गंदगी और अव्यवस्था के बीच से भी विकास की रोशनी निकाली जा सकती है।

* 18.07 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक परियोजना
* कटहल नाला बनेगा जूही चौपाटी
* सुरहा ताल-गंगा जल तंत्र को मजबूती
* दोनों दिशाओं में बहने वाले नाले का संरक्षण
* जलभराव और बाढ़ से राहत
* सोलर लाइटिंग और हरित विकास
* शहर को मिलेगा नया सार्वजनिक स्थल
* बलिया की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान को मजबूती




