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परिवहन मंत्री दयाशंकर ने लिया दृढ़ संकल्प,परिवहन विभाग का कर देंगे कायाकल्प

आधुनिक, सुरक्षित और पारदर्शी परिवहन की ओर यूपी बस बेड़ा दोगुना, हर जिले तक ई-बस का लक्ष्य

  • 8 हजार से 14 हजार बसें यूपीएसआरटीसी का तेज विस्तार
  • 43 जिलों में इलेक्ट्रिक बसें, लक्ष्य सभी 75 जिलों तक विस्तार
  • 23 बस अड्डे एयरपोर्ट मॉडल पर विकसित, आधुनिक टर्मिनल की तैयारी
  • हर बस में जीपीएस, महिलाओं के लिए 1090 से जुड़ा पैनिक बटन
  • सड़क सुरक्षा पर त्रैमासिक समीक्षा, हर जिले में समर्पित एआरटीओ
  • नाबालिग ड्राइविंग पर सख्ती, 16 वर्ष के युवाओं के प्रशिक्षण का प्रस्ताव
  • 49 सेवाएं सीएससी से जुड़ीं, लर्निंग लाइसेंस पूरी तरह ऑनलाइन
  • वन-टाइम टैक्स से सरल कर प्रणाली, पारदर्शिता पर जोर

लखनऊ। विकसित भारतसमृद्ध यूपी कॉन्क्लेव के मंच से उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने जिस आत्मविश्वास के साथ प्रदेश के परिवहन तंत्र की उपलब्धियों का खाका रखा, वह केवल विभागीय रिपोर्ट का औपचारिक पाठ नहीं था, बल्कि एक ऐसे बदलाव की कहानी थी जो सड़कों, बस अड्डों और आरटीओ दफ्तरों से निकलकर आम नागरिक के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश का परिवहन विभाग अब पारंपरिक ढर्रे से निकलकर आधुनिक, सुरक्षित और तकनीक-आधारित मॉडल की ओर बढ़ रहा है—जहां लक्ष्य केवल बसों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि यात्री अनुभव, सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को नई पहचान देना है।
मंत्री ने याद दिलाया कि जब उन्होंने कार्यभार संभाला था, तब उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के पास लगभग 8 हजार बसें थीं। सीमित संसाधनों, पुराने बेड़े और परिचालन चुनौतियों के बीच निगम की छवि अक्सर ‘खटारा बसों’ वाले विभाग के रूप में देखी जाती थी। आज वही संख्या बढ़कर 14 हजार तक पहुंच चुकी है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों की छलांग नहीं, बल्कि बेड़े के औसत आयु, मेंटेनेंस सिस्टम और संचालन क्षमता में सुधार का संकेत है। मंत्री का दावा है कि प्रदेश का बस बेड़ा अब देश के सबसे नए औसत बेड़ों में शामिल हो चुका है—एक ऐसा परिवर्तन जो यात्रियों के विश्वास को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर भी प्रदेश ने निर्णायक कदम उठाए हैं। पहले जहां इलेक्ट्रिक बसें केवल चुनिंदा महानगरों तक सीमित थीं, अब 43 जिलों में उनका संचालन हो रहा है और लक्ष्य है कि जल्द ही सभी 75 जिलों में ई-बस सेवा उपलब्ध हो। यह विस्तार केवल पर्यावरणीय प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि भविष्य की परिवहन नीति का संकेत है। पेट्रोल पंपों, कम्युनिटी सेंटरों और बड़ी आवासीय कॉलोनियों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आधारभूत ढांचा मजबूत हो सके। इससे न केवल प्रदूषण में कमी की उम्मीद है, बल्कि ईंधन पर निर्भरता भी घटेगी।
यात्री सुविधाओं के मोर्चे पर भी बदलाव की तस्वीर पेश की गई। प्रदेश के 23 बस अड्डों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। लखनऊ के गोमतीनगर, चारबाग और अमौसी जैसे प्रमुख स्थलों पर आधुनिक टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं, जहां डिजिटल टिकटिंग, एस्केलेटर, लाउंज, फूड कोर्ट, महिलाओं के लिए अलग प्रतीक्षालय और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह प्रयास बस अड्डों की पारंपरिक छवि को बदलने का दावा करता है। जहां अब केवल प्रतीक्षा नहीं, बल्कि व्यवस्थित और सम्मानजनक यात्री अनुभव देने की बात हो रही है।
सुरक्षा को विभाग की प्राथमिकता बताते हुए मंत्री ने कहा कि सभी बसों में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य किया गया है, जिससे रीयल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सके। महिलाओं की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन की सुविधा दी गई है, जो 1090 हेल्पलाइन से जुड़ी है। दावा है कि आपात स्थिति में कुछ ही मिनटों में सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। यह कदम सार्वजनिक परिवहन में महिला यात्रियों के भरोसे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सड़क सुरक्षा के सवाल पर भी मंत्री ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जनसंख्या और वाहन संख्या के अनुपात में उत्तर प्रदेश दुर्घटनाओं में 18वें स्थान पर है, लेकिन सरकार का लक्ष्य दुर्घटनाओं में ठोस और स्थायी कमी लाना है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हर तीन महीने पर समीक्षा बैठक होती है और प्रत्येक जिले में सड़क सुरक्षा के लिए समर्पित एआरटीओ नियुक्त किए जा रहे हैं। नाबालिग ड्राइविंग पर 25 हजार रुपये तक का चालान और हेलमेट अनिवार्यता जैसे सख्त कदम भी इसी रणनीति का हिस्सा हैं। आरटीओ विभाग में सुधारों को लेकर उन्होंने पारदर्शिता का दावा किया। 49 सेवाओं को कॉमन सर्विस सेंटर से जोड़ा गया है और लर्निंग लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। अब विभागीय दफ्तर से लर्निंग लाइसेंस जारी नहीं होता, जिससे बिचौलियों की भूमिका सीमित हुई है। सात लाख रुपये तक की कीमत वाले दोपहिया और तिपहिया वाहनों पर वन-टाइम टैक्स लागू कर कराधान प्रणाली को सरल बनाने का प्रयास किया गया है।
स्पष्ट है कि परिवहन विभाग केवल प्रशासनिक दावों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि संरचनात्मक बदलाव के जरिए एक नई पहचान गढ़ने की कोशिश में है। हालांकि इन योजनाओं की असली परीक्षा जमीनी अमल और आम नागरिक के अनुभव में दिखाई देगी। विकसित भारत समृद्ध यूपी का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब बसों की संख्या के साथ उनकी नियमितता, समयपालन और ग्रामीण अंचलों तक पहुंच भी सुनिश्चित हो। फिलहाल, कॉन्क्लेव के मंच से प्रस्तुत खाका यह संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश का परिवहन तंत्र बदलाव के एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है।

बस बेड़े का विस्तार संख्या ही नहीं, गुणवत्ता भी

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि 8 हजार से 14 हजार बसों तक पहुंचना केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। नई बसों की खरीद, पुरानी बसों की चरणबद्ध विदाई और निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से बेड़े का विस्तार किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि आज यूपीएसआरटीसी का औसत बेड़ा देश में सबसे नया है। इससे ईंधन दक्षता बढ़ी है और मेंटेनेंस लागत में कमी आई है।

इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार हर जिले तक हरित परिवहन

प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों का दायरा तेजी से बढ़ा है। 43 जिलों में संचालन के बाद अब लक्ष्य 75 जिलों का है। चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।
ई-बसें न केवल प्रदूषण कम करेंगी, बल्कि शहरी यातायात को भी अधिक टिकाऊ बनाएंगी।

एयरपोर्ट मॉडल बस अड्डे यात्री अनुभव में बदलाव

23 बस अड्डों को आधुनिक टर्मिनल में बदलने की योजना पर काम चल रहा है। लखनऊ के गोमतीनगर, चारबाग और अमौसी बस अड्डों पर मॉल, फूड कोर्ट, लाउंज और डिजिटल टिकटिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यह मॉडल सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत तैयार हो रहा है, जिससे राजस्व सृजन भी होगा।

सुरक्षा पर फोकस जीपीएस और पैनिक बटन

हर बस में जीपीएस से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग संभव है। पैनिक बटन सीधे 1090 हेल्पलाइन से जुड़ा है। यह महिला यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवच है।

सड़क सुरक्षा समीक्षा और सख्ती

मंत्री ने कहा कि दुर्घटनाएं कम करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। त्रैमासिक समीक्षा बैठकों में आंकड़ों का विश्लेषण होता है। प्रत्येक जिले में सड़क सुरक्षा एआरटीओ नियुक्त किए जा रहे हैं। नाबालिग ड्राइविंग पर 25,000 रुपये तक का चालान और हेलमेट अनिवार्यता लागू की गई है।

16 वर्ष आयु प्रशिक्षण प्रस्ताव

16 वर्ष के युवाओं को प्रशिक्षण देकर दोपहिया लाइसेंस देने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। तर्क है कि बिना लाइसेंस वाहन चलाने से बेहतर है कि उन्हें विधिवत प्रशिक्षण दिया जाए।

आरटीओ सुधार डिजिटल पारदर्शिता

49 सेवाएं कॉमन सर्विस सेंटर से जुड़ी हैं। लर्निंग लाइसेंस पूरी तरह ऑनलाइन है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है। वन-टाइम टैक्स प्रणाली से सात लाख रुपये तक के दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए कर वसूली सरल हुई है। परिवहन विभाग के दावों के साथ-साथ चुनौती भी कम नहीं। बसों की संख्या बढ़ाना आसान है, लेकिन समय पालन, रखरखाव और ग्रामीण रूटों की नियमितता सुनिश्चित करना असली कसौटी होगी। एयरपोर्ट मॉडल बस अड्डों की चमक तभी सार्थक होगी जब गांव से शहर आने वाला यात्री भी सम्मानजनक सुविधा पा सके। डिजिटल सुधारों से पारदर्शिता बढ़ी है, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार पर अंकुश की निरंतर निगरानी जरूरी है। फिलहाल तस्वीर यह संकेत देती है कि यूपी का परिवहन विभाग बुनियादी ढांचे और तकनीक के सहारे एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

* 8 हजार से 14 हजार बसें
* 43 जिलों में इलेक्ट्रिक बसें, लक्ष्य 75
* 23 बस अड्डे एयरपोर्ट मॉडल पर
* सभी बसों में जीपीएस और 1090 से जुड़ा पैनिक बटन
* सड़क सुरक्षा पर त्रैमासिक समीक्षा
* नाबालिग ड्राइविंग पर 25,000 तक चालान
* 16 वर्ष आयु प्रशिक्षण प्रस्ताव केंद्र को भेजा
* 49 आरटीओ सेवाएं सीएससी से जुड़ी
* लर्निंग लाइसेंस पूरी तरह ऑनलाइन
* वन-टाइम टैक्स से सरल कर व्यवस्था

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