
- यूपी को चला रहे हैं नौकरशाह- चुनाव से पहले बड़ा सबक
- 50 लाख की औकात वाली पुच एआई से 25 हजार करोड़ का करार पड़ा भारी
- दिल्ली के द्वारका स्थित फ्लैट में कंपनी का दफ्तर, फर्जी कंपनियों का लगा है पैसा
- भौकाल के लिए कंपनी ने प्रायोजित इंटरव्यू और फोटोबाजी करवाई
- अठन्नी की हैसियत नहीं, लेकिन कंपनी चली थी गूगल को खरीदने
- अखिलेश का वार- फाइव परसेंटिया घूसखोर अफसरों से बचें सीएम योगी

नई दिल्ली/मुंबई/ लखनऊ। यह बीते साल दिसंबर की बात है। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियत में दुनिया के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी का एक शो आयोजित था। तभी स्टेडियम के एलईडी स्क्रीन पर 30 हजार दर्शकों के सामने एक विज्ञापन आता है- पुच एआई, केवल दो शब्द। उसी स्टेडियम की वीआईपी दीर्घा में एक शख्स बैठा है। नाम है सिद्धार्थ भाटिया, जो पुच एआई का सह संस्थापक है। वह बॉलीवुड स्टार टाइगर श्रॉफ के साथ बैठकर बात कर रहा है।
इस घटना के चार दिन बाद एक शीर्ष अंग्रेजी अखबार में 18 दिसंबर 2025 को पहले पेज पर एक विज्ञापन छपता है। करीब 20 लाख के उस विज्ञापन में दो ही शब्द होते हैं- पुच एआई। लोग कौतूहल से पूछने लगते हैं- यहपुच एआई क्या बला है? बाद में पता चलता है कि यह तो एक एआई आधारित एप्लीकेशन है, जो व्हाट्सएप के साथ जुड़ा है और यह यूजर्स को आवाज आधारित सहायता प्रदान करता है। यही पुच एआई 22 मार्च 2026 को अचानक यूपी सरकार से आकर जुड़ जाता है और आनन-फानन में इस कंपनी के साथ योगी सरकार 25 हजार करोड़ रुपए का एमओयू कर लेती है। जबकि कागजों में इस कंपनी की हैसियत 50 लाख रुपए की भी नहीं है। सीएम योगी के ट्विटर हैंडल पर बाकायदा इस एमओयू का ऐलान भी हो जाता है।

क्या लिखा था एमओयू में
यूपी सरकार के साथ हुए एमओयू में पुच एआई को उत्तरप्रदेश में व्यापक निवेश लेकर आना था, जिससे कंपनी को एआई के एक बड़े ढांचे को बनाने में मदद मिले, साथ ही कंपनी डेटा सेंटर, रिसर्च के लिए केंद्र और अपनी खुद की एक एआई यूनिवर्सिटी भी बना सके। इससे पहले पुच एआई ने अपना कोई मॉडल एआई पर नहीं बनाया था। हालांकि, इससे पहले दिल्ली में हुई एआई इम्पैक्ट समिट में पुच का एक स्टॉल जरूर लगा था। इसी को देखकर यूपी में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने तंज कसा और सरकार के एमओयू की यह कहते हुए आलोचना कर दी कि राज्य के अफसरों ने सीएम को भरमाया है। उन्होंने अपने फायदे के लिए पुच एआई जैसे स्टार्टअप की हैसियत को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और उससे एमओयू करवाने पर मजबूर किया। उसके बाद तो गलतियों की ऐसी श्रृंखला चली कि सभी एक के बाद एक बेनकाब होते चले गए। सीएम योगी ने इसकी शुरुआत करते हुए ट्विटर एक्स पर लिखा- अगर कोई निवेशक अनुबंध की शर्तों के आधार पर आंकलन में कमतर पाया जाता है तो उसके साथ किया गया अनुबंध रद्द माना जाएगा। उन्होंने पुच एआई के साथ अनुबंध के रद्द होने के फैसले को पारदर्शिता और जिम्मेदारी वाला बताया।
ऐसे बना पुच एआई
पुच एआई की एक स्टार्टअप के रूप में स्थापना जून 2025, यानी पिछले साल ही हुई थी। कंपनी ने खुद को एक लोकतांत्रिक एआई के रूप में घोषित किया और उसने एक ऐसी तकनीक लाने का भरोसा दिलाया, जो उनकी अपनी भाषा में सभी तरह की समस्याओं का समाधान कर सके। कंपनी ने इसके बाद अंग्रेजी अखबार में फुल पेज विज्ञापन दिया। अभी यह पता नहीं है कि महज 50 लाख की जमा पूंजी से स्थापित इस कंपनी के पास 20 लाख रुपए के विज्ञापन का पैसा कहां से आया। यूपी सरकार ने अनुबंध रद्द होने के बाद पुच एआई के सह संस्थापक सिद्धार्थ भाटिया से कंपनी की कमाई, इनकम टैक्स रिटर्न, वित्तीय दस्तावेजों की जानकारी मांगी थी, जो सरकार के साथ इतने बड़े अनुबंध को पूरा कर सके, लेकिन भाटिया यह सभी जानकारी देने में नाकाम रहे। लिहाजा अनुबंध रद्द हो गया।
पूरी तरह से जाली कंपनी
यह जानकारी अचूक संघर्ष पहली बार अपने पाठकों को दे रहा है। यह जानकारी इसलिए भी दी जा रही है, ताकि लोग जान सकें कि यूपी में योगी की सरकार किस तरह केवल नौकरशाहों के भरोसे चल रही है, जो उन्हें मूर्ख बनाकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। सिद्धार्थ भाटिया और अरिजित जैन ने मिलकर पुच एआई को स्टार्टअप के रूप में बनाया था। उन्होंने इसके लिए केवल एक फोन नंबर और वेबसाइट का उपयोग किया। उनके बाकी सारे दावे फर्जी थे। यहां तक कि कंपनी की तकनीकी क्षमता भी फर्जी थी। सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी और बिट्स पिलानी से पढ़े भाटिया असल में इस फर्जी कंपनी का चेहरा थे। इस चेहरे को चमकाने के लिए भाटिया के टीवी पर प्रायोजित इंटरव्यू करवाए गए और मुकेश अंबानी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, आईटी मंत्री पीयूष गोयल और बाकी बड़ी हस्तियों के साथ उनके फोटो खिंचवाए गए। कंपनी के लिंक्डइन पेज पर बताया गया कि पुच एआई के करीब 11 कर्मचारी हैं, लेकिन कंपनी का न तो कोई पंजीकृत ऑफिस है और न कोई अता-पता। ठिकाने के रूप में केवल एक वेबसाइट ही है।
सरकारी डेटाबेस में भी कोई जिक्र नहीं
पुच एआई केंद्र की मोदी सरकार के कंपनी मंत्रालय की वेबसाइट में भी दर्ज नहीं है। यही हाल अमेरिरका, सिंगापुर और दुबई सरकार का भी है, जहां पुच एआई का कोई नामलेवा नहीं है। लेकिन पुच एआई के दोनों संस्थापकों- भाटिया और जैन का नाम भारत में कंपनी मामलों के मंत्रालय और अमेरिका में डेलावेयर के सरकारी डेटाबेस में बतौर डायरेक्टर दर्ज है। दोनों ने इससे पहले 2022 में मिलकर टर्बोएमएल नाम की कंपनी बनाई थी, जो कि सैनफ्रांसिस्को में मशीन लर्निंग प्लैटफॉर्म है। यह डेटा साइंटिस्ट के लिए एआई टूल्स और सॉफ्टवेयर को सिस्टम से जोड़ती है। यही टर्बोएमएल कंपनी दिल्ली के एक बाहरी इलाके द्वारका के फ्लैट के पते पर पंजीकृत है और इस कंपनी में एक फर्जी शेल कंपनी ने निवेश किया हुआ है। बीते 3 साल के कंपनी के वित्तीय दस्तावेजों का अवलोकन करने से पता चलता है कि कैसे टर्बोएमएल को बाद में ठिकाने लगा दिया गया और अचानक पुच एआई को आगे लाया गया। इसमें हाथ से ऑफिस का जो पता लिखा है, वह एक रहवासी फ्लैट का है। कंपनी का 2024-25 का सालाना रिटर्न 5.2 करोड़ रुपए का है, जो कि 2023-24 से 127 फीसदी ज्यादा है। कंपनी का मुनाफा 51 लाख करोड़ रुपए का बताया गया है। कंपनी ने अपने दस्तावेजों में कुल 9 कर्मियों और दो निदेशकों का जिक्र किया है। टर्बोएमएल ने 2022 में शुरू होने के बाद से 2.3 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया है। लेकिन कंपनी के दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल करने पर पता चलता है कि या तो कंपनी को लोग प्रोजेक्ट नहीं दे रहे थे या फिर उनका पेमेंट लंबे समय से रूका हुआ था। भाटिया और जैन के डीआईएन से पता चलता है कि दोनों के पास टर्बोएमएल के अलावा और कोई कंपनी नहीं है।
लुभावने पैकेज का जाल
सोशल मीडिया में पुच एआई के बारे में कहा जाता है कि कंपनी अपने कर्मियों, खासकर इंटर्न को महीने का एक लाख रुपए पैकेज देती है। कोडिंग करने वाले को महीने के 10 लाख तक मिलते हैं। यह दावा ट्विटर एक्स और लिंक्डइन दोनों में किया गया है। इसके अलावा युवाओं को लुभाने के लिए कंपनी फ्री आईफोन और टेस्ला ट्रक जैसे ऑफर भी दे रही है। इसी पुच एआई के सहसंस्थापक भाटिया ने परप्लेक्सिटी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास को उनकी कंपनी और गूगल को खरीदने के लिए 50 बिलियन डॉलर देने तक की पेशकश की थी। यहजानते हुए भी कि अरविंद 50 मिलियन डॉलर वाली कंपनी के सीईओ हैं। लेकिन मार्च में यही कंपनी बिना किसी डेटा के यूपी सरकार के साथ 25 हजार करोड़ रुपए का अनुबंध कर फंस जाती है।
घूसखोरों से बचें योगी: अखिलेश की नसीहत
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी 50 लाख रुपए से भी कम पूंजी वाली एक कंपनी से अनुबंध पर सवाल उठाए है। सपा प्रमुख अखिलेश ने कहा कि योगी सरकार अनुबंध करने से पहले एआई से ही ‘पूछ’ लेती। अपने आस-पास के ऐसे ‘फ़ाइव परसेंटिया’ घूसखोर व ख़ुदगर्ज़ लोगों से बचना चाहिए जो आपकी अनभिज्ञता या अज्ञान का दुरुपयोग करते हैं। इससे आपकी ‘कृत्रिम छवि’ पर भी बहुत ख़राब प्रभाव पड़ता है, साथ ही आपके समय में धूमिल हुई प्रदेश की असली छवि और भी अधिक बद से बदहाल होती है। इन भ्रष्ट कांडों के उजागर होने से अच्छे, सच्चे और ईमानदार निवेशक हतोत्साहित भी होते हैं और प्रदेश में निवेश करने से विमुख भी होते हैं। अखिलेश ने योगी पर तंज कसते हुए कहा कि आप तो लौट जाएंगे लेकिन प्रदेश को तो जनता का ख़्याल रखना है। यही सोचकर कम-से-कम एक तो अच्छा काम करते जाइए।
कंपनी के को-फाउंडर की सफाई
इस पूरे विवाद पर कंपनी के को-फाउंडर सिद्धार्थ भाटिया का कहना है कि यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप है। इसमें कोई सरकारी पैसा नहीं लगेगा। राजस्व हानि की खबरें पूरी तरह से निराधार हैं। लेकिन असल में पुच एआई कंपनी ने तो अपने वित्तीय दस्तावेज दिखा पाई और न ही यह बता सकी कि उसके पास इतने बड़क ठेके को उठा पाने की तकनीकी योग्यता क्या है? इसी से साबित हो जाता है कि यूपी में योगी सरकार लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए हजारों-लाखों करोड़ का एमओयू साइन कर रही है। इससे लोगों का तो कोई भला नहीं हो रहा, लेकिन नेताओं और नौकरशाही के जरूर वारे-न्यारे हो रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी 50 लाख रुपए से भी कम पूंजी वाली एक कंपनी से अनुबंध पर सवाल उठाए है। सपा प्रमुख अखिलेश ने कहा कि योगी सरकार अनुबंध करने से पहले एआई से ही ‘पूछ’ लेती। अपने आस-पास के ऐसे ‘फ़ाइव परसेंटिया’ घूसखोर व ख़ुदगर्ज़ लोगों से बचना चाहिए जो आपकी अनभिज्ञता या अज्ञान का दुरुपयोग करते हैं। इससे आपकी ‘कृत्रिम छवि’ पर भी बहुत ख़राब प्रभाव पड़ता है, साथ ही आपके समय में धूमिल हुई प्रदेश की असली छवि और भी अधिक बद से बदहाल होती है। इन भ्रष्ट कांडों के उजागर होने से अच्छे, सच्चे और ईमानदार निवेशक हतोत्साहित भी होते हैं और प्रदेश में निवेश करने से विमुख भी होते हैं। अखिलेश ने योगी पर तंज कसते हुए कहा कि आप तो लौट जाएंगे लेकिन प्रदेश को तो जनता का ख़्याल रखना है। यही सोचकर कम-से-कम एक तो अच्छा काम करते जाइए।


