पहले तो मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज बढ़ाकर लाखों करोड़ रुपए लूट लिया,10 रुपल्ली घटाकर जनता को फायदा नही दिया

* चुनाव बाद बढ़ेंगी 30 रुपए कीमतें, जनता बताएगी कानून-कायदा
* एक्साइज में 10 रुपए की कटौती का मोदी सरकार उठाना चाहती है फायदा
* कोविड के नाम पर विशेष आबकारी टैक्स लगाकर लूटे लाखों करोड़
* रूस से सस्ता तेल खरीदकर बचाए 115 अरब डॉलर, पैसा कहां गया?
* राज्यों को मुसीबत में डालकर अपने सांसदों की वाहवाही कैसे लूट सकती है सरकार?
नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल पर लूट के बावजूद अगर कोई सरकार आम जनता से वाहवाही लूटना चाहे तो ऐसा इस दुनिया में केवल भारत की सरकार ही कर सकती है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सत्ता ने शुक्रवार 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज, यानी आबकारी दर 10 रुपए घटा दी। मोदी सत्ता ने हालांकि, यह सोचा था कि इस कदम से लोगों में यह संदेश जाएगा कि सरकार ने तेल कंपनियों को घाटे में जाने से रोका है, ताकि वे दाम न बढ़ाएं। लेकिन केंद्र सरकार के लिए यह पांसा पूरी तरह से उल्टा पड़ गया है। ईरान युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से खड़े संकट को देखते हुए मोदी सरकार ने तेल कंपनियों को राहत जरूर दी है, लेकिन उस लूट को कम करके, जो कोविड-19 महामारी की आड़ में अभी तक जारी थी।
जी हां, मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 13 रुपए के उस विशेष आबकारी शुल्क में ही 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की है, जो कोविड महामारी के दौरान लगाई गई थी। इसमें से भी 3 रुपए प्रति लीटर की लूट अभी भी जारी है। यानी अगर ईरान युद्ध का संकट नहीं आता तो कोविड 19 महामाहरी के नाम पर भारत में तेल की लूट बदस्तूर जारी रहती।
सालाना 1.6 लाख करोड़ रुपए की लूट
केंद्र की मोदी सरकार ने आम जनता से पेट्रोल-डीजल पर यह कहकर आबकारी टैक्स बढ़ाया था कि इससे जमा हुए पैसे का उपयोग भारत में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने और कोविड के शिकार हुए लोगों को राहत सहायता देने में किया जाएगा। लेकिन कोविड के बाद इसी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में कह दिया कि भारत में ऑक्सीजन की कमी से किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा कि कोविड महामारी के कारण देश में कहीं भी सड़क पर किसी विस्थापित की मौत नहीं हुई और सरकार ने सभी प्रवासी मजदूरों को घर तक वापस पहुंचने के लिए बस और रेल सुविधा उपलब्ध कराई थी। अब सवाल यह उठता है कि फिर केंद्र सरकार ने सुविधाओं के नाम पर लोगों से पेट्रोल-डीजल की लूट के 1.6 लाख करोड़ रुपए कहां खर्च किए, जबकि इस दौरान महामारी के कारण 45 लाख लोगों की मौत हो गई? उसके बाद केवल भारत में ही नहीं, पूरी दुनिया को कोविड महामारी से निजात मिलने के बाद भी पेट्रोल-डीजल पर आबकारी टैक्स बजाय घटने के लगातार बढ़ता ही गया।
कुर्सी पर बैठते ही सरकार ने बढ़ाया एक्साइज
नरेंद्र मोदी सरकार के कुर्सी संभालने से पहले 2014 में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज, यानी आबाकरी टैक्स पेटोल पर प्रति लीटर 9.2 और डीजल पर 3.46 रुपए था। दिसंबर 2017 में मोदी सरकार ने पेट्रोल पर आबकारी टैक्स बढ़ाकर 21.48 रुपए और डीजल पर 17.33 रुपए कर दिया। 20 जून को कोविड महामारी के दौर में आबकारी टैक्स बढ़कर पेट्रोल पर 32.98 रुपए और डीजल पर 31.83 रुपए कर दिया गया। मोदी सरकार ने इसे विशेष आबकारी टैक्स बताकर बढ़ाया। नवंबर 2021 में आबकारी टैक्स घटाकर पेट्रोल पर 27.98 और डीजल पर 21.8 रुपए कर दिया गया, लेकिन तब भी तेल पर कोविड का विशेष आबकारी टैक्स बरकरार रहा। मार्च 2022 में आबकारी टैक्स घटाकर पेट्रोल पर 19.98 और डीजल पर 15.8 रुपए किया गया। यानी कोविड काल के दौरान आबकारी टैक्स की लूट के 7 रुपए तब भी बाकी रहे और अगले चार साल तक, यानी मार्च 2026 तक लूट जारी रही। अब केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपए आबकारी टैक्स कम किए हैं। लेकिन सरकार यह बता नहीं रही है कि उसने 2020 से 2026 तक के 6 साल में कोविड के विशेष आबकारी टैक्स के नाम से जो लाखों करोड़ रुपए की लूट की है, उस पैसे का क्या हुआ?
रूस से सस्ता तेल खरीदा और 115 अरब डॉलर बचाए
केवल इतना ही नहीं, बल्कि मोदी सरकार ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले रूस से तेल खरीद में 11 रुपए प्रति बैरल की छूट हासिल की, जबकि उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव कम थे। इस छूट का फायदा मोदी सरकार को तब तक मिला, जब तक कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीद पर पाबंदी नहीं लगा दी। यह बीते साल की बात है, जब अमेरिका ने भारत पर रूस तेल खरीद पर रोक लगाई थी। इस तरह भारत सरकार ने करीब 115 अरब डॉलर का मुनाफा हासिल किया, लेकिन भारत के लोगों को उसका लाभ नहीं दिया गया। अगर मोदी सरकार को इसका लाभ आम जनता को नहीं देना था तो कम से कम सरकार देश में पेट्रोल-डीजल का भंडारण ही बढ़ा सकती थी, लेकिन यह काम भी नहीं किया गया। इसका नतीजा आज यह है कि लोगों को तेल के लिए कतार में खड़े होकर अपना समय बर्बाद करना पड़ रहा है। अभी भी मोदी सरकार से कोई यह नहीं पूछ रहा है कि उन 115 अरब डॉलर का क्या हुआ और उन्हें कहां खर्च किया गया?
पांच राज्यों के चुनाव के बाद दाम बढ़ेंगे
ईरान युद्ध के कारण हॉर्मूज स्ट्रेट के बंद होने से भारत की तेल कंपनियों पर हर माह 14000 करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है। इसी की भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर आबकारी टैक्स कम किया है। लेकिन इससे पेट्रोल और डीजल के दाम न बढ़ने को कोई गारंटी नहीं है। यह तय हो गया है कि केंद्र सरकार के इस कदम के बाद अप्रैल के अखिरी हफ्ते में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया खत्म होने के फौरन बाद तेल के दाम में 30 रुपए प्रति लीटर तक का इजाफा हो सकता है। अगर केंद्र सरकार शुक्रवार को आबकारी टैक्स नहीं घटाती तो तेल कंपनियों को मजबूरन दाम बढ़ाने पड़ते और इसका राजनीतिक नुकसान भाजपा को उठाना पड़ता। यूएस-इजराइल के साथ ईरान की जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इससे तेल कंपनियों को 30 रुपए प्रति लीटर तक घाटा हो रहा था। घाटा कवर करने के लिए तेल कंपनियां दाम बढ़ा सकती थीं।
कच्चे तेल के दाम में इजाफा
ब्रेंट क्रूड फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा है। अगर वेस्ट एशिया में तनाव और बढ़ता है और सप्लाई चेन बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। पेट्रोलिमय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक तेल कंपनियां फिलहाल पेट्रोल पर 24 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर का घाटा सह रही हैं। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण तेल कंपनियां महंगा क्रूड खरीद रही थीं, लेकिन उन्होंने घरेलू बाजार में दाम नहीं बढ़ाए थे। कंपनियां अब इस टैक्स कटौती का इस्तेमाल मार्जिन को स्थिर रखने में करेंगी।
डीजल-पेट्रोल चोरी करते 2 आरोपी गिरफ्तार
कानपुर में रेलवे की संपत्ति को निशाना बनाने वाले ‘तेल चोर’ गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। सीआईबी ग्वालियर और कानपुर की संयुक्त टीम ने भीमसेन आरपीएफ पोस्ट क्षेत्र में छापेमारी कर ट्रेनों से डीजल-पेट्रोल चोरी करने वाले दो आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। भीमसेन क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से ट्रेनों से ईंधन चोरी की शिकायतें मिल रही थीं। इस पर कार्रवाई करते हुए सीआईबी ग्वालियर और कानपुर टीम ने संयुक्त रणनीति बनाई। मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी कर दो शातिर चोरों को पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सागर गौतम और शिवम गौतम के रूप में हुई है। दोनों सचेंडी थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे काफी समय से रेलवे यार्ड और खड़ी ट्रेनों से ईंधन चोरी कर रहे थे।
लोग बर्तन लेकर आ रहे तेल खरीदने
यूपी के देवरिया में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की अफवाह ने आम जनता के बीच भारी अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो अलग-अलग वीडियो इस पैनिक की गंभीरता को दर्शा रहे हैं। हालात यह हैं कि लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली में खाना पकाने के बड़े बर्तन लेकर तेल लेने पहुंचने लगे हैं। प्रशासन लगातार कह रहा है कि तेल का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन लोग अपनी गाड़ियों के साथ-साथ घरों के बर्तनों में भी तेल जमा करने के लिए उतावले नजर आ रहे हैं।
लखनऊ में लगी लंबी कतारें
राजधानी लखनऊ समेत आसपास के जिलों में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की किल्लत को लेकर फैली अफवाहों ने लोगों के बीच भारी चिंता पैदा कर दी है। इसी के चलते शहर के कई पेट्रोल पंपों पर गुरुवार को वाहनों की लंबी कतारें और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। यूपी सरकार ने कहा कि पेट्रोल डीजल की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। पेट्रोल पंपों पर अनावश्यक भीड़ न लगाएं। पेट्रोल-डीजल के लिए पैनिक माहौल न बनाए। मांग के अनुसार समय पर आपूर्ति की जा रही है। अफवाह फैलाने वालों पर एक्शन लिया जाएगा। हजरतगंज, अलीगंज, गोमतीनगर और चिनहट जैसे प्रमुख इलाकों में बड़ी संख्या में लोग ईंधन भरवाने पहुंचे। कई स्थानों पर लोगों को अपनी बारी के लिए आधे-आधे घंटे तक कतारों में लगकर इंतजार करना पड़ा। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब स्थानीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। इसके चलते एलपीजी के बाद अब पेट्रोल और डीजल की किल्लत की खबरें सामने आने लगी हैं। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद में कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने की अफवाह के बाद लोगों ने डीजल-पेट्रोल स्टोर करना शुरू कर दिया है। शहर के प्रमुख शंभू बाबू पेट्रोल पंप पर ‘पेट्रोल उपलब्ध नहीं है’ का नोटिस चस्पा कर दिया गया है।




