पुनः आया संघियो का नीचतापूर्ण किरदार,बड़े “हरामी” है ये इनका नही कोई चरित्र है बरखुरदार
ज्योतिषी के वेश में नेता बन गया रेपिस्ट, लोगों ने कहा- एप्स्टीन; महाराष्ट्र की सियासत में आया भूचाल, जांच के घेरे में आए कई नामचीन

– 200 करोड़ की जायदाद, पुलिस को मिले 100 से ज्यादा अश्लील वीडियो
– नाशिक से अरेस्ट हुआ अशोक खरात, राज्य महिला आयोग की मुखिया भी बनी शिकार
– महायुति का था करीबी, टूटने से बचाया- विपक्ष ने लगाए संगीन आरोप
– विधानसभा में गूंजा मामला, कई पुलिस अफसरों के फंसे होने के आसार
पुणे। अशोक खरात- यही नाम है उस ढोंगी व्यक्ति का, जिसे भारत में सोशल मीडिया पर इस समय जेफ्री एप्स्टीन के नाम से शोहरत मिल रही है। कभी मर्चेंट नेवी के कैप्टन रहे अशोक को इस साल मार्च में तब गिरफ्तार किया गाय, जब उस पर एक श्रद्धालु महिला ने रेप, गर्भपात के लिए मजबूर करने और करोड़ों रुपए के फ्रॉड का आरोप लगाया। अशोक खरात पर आरोप है कि उसने ज्योतिषी के भेष में महिलाओं को कालू जादू और वशीकरण से फंसाया और उनका शोषण किया। अशोक के बारे में बताया जाता है कि वह भाजपा की महायुति का एक कट्टर समर्थक था, जिसने इस गठबंधन को टूटने से बचाया। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद महाराष्ट्र में भाजपा रक्षात्मक हो गई है। भाजपा के तमाम आला नेता इससे कन्नी काटने की कोशिश में जुट गए हैं।

एनसीपी नेता का इस्तीफा
इससे पहले कैप्टन अशोक खरात विवाद में फंसी एनसीपी नेता रूपाली चाकणकर ने शुक्रवार को महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशों के बाद उन्होंने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से उनके सरकारी आवास ‘देवगिरी’ पर मुलाकात की और उसके कुछ ही देर बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया। अशोक खरात को नाशिक शहर से पुलिस ने मंगलवार को अरेस्ट किया था। यह गिरफ्तारी रूपाली और खरात के एक अश्लील सीडी के सामने आने के बाद की गई थी। इस्तीफा पत्र में रूपाली चाकणकर ने लिखा, “मैं, रूपाली निलेश चाकणकर, उपरोक्त विषय के संदर्भ में आपको विनम्रतापूर्वक सूचित करना चाहती हूं कि, दिनांक 15 अक्टूबर 2024 को मेरी महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति हुई थी। मेरे व्यक्तिगत कारणों से मैं स्वेच्छा से इस पद का इस्तीफा इस पत्र द्वारा आपको सादर कर रही हूं।” चाकणकर नासिक ज़िले के सिन्नर में स्थित ‘श्री शिवनिका संस्थान’ की ट्रस्टी हैं, जिसके अध्यक्ष खरात हैं। मुख्यमंत्री का यह निर्देश तब आया जब एक वीडियो सामने आने के बाद काफी विरोध हुआ, जिसमें वह खरात के पैर धोते हुए दिखाई दे रही थीं।
पहले से जारी थी एआईटी की जांच
अशोक खरात के खिलाफ एसआईटी की जांच काफी पहले से जारी थी, लेकिन सरकारी दबाव और बाबा के रसूख के कारण गिरफ्तारी नहीं हो पा रही थी। खरात के पास 200 करोड़ रुपए की संपत्ति होने का अनुमान है। उसके घर से 58 अश्लील वीडियोज, महाराष्ट्र सरकार के कई आला मंत्रियों की तस्वीरें और सिद्ध क्षेत्र के एक मंदिर का कर्ता-धर्ता होने के प्रमाण भी मिले हैं। यह सब शुरू हुआ, एक महिला की शिकायत से, जिसमें उसने शरात पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। बाद में खरात के खिलाफ पुलिस की जांच में एक के बाद एक कई रेप, यौन उत्पीड़न और बाबा के काले कारनामों के सबूत मिले। यह सारे कारनामे खरात ने बीते कई सालो में किए, लेकिन वह पुलिस से बचता रहा, क्योंकि उसकी पहुंच सीएम फडणवीस तक थी।
इस तरह सामने आया सारा मामला
एक महिला को संतान न होने की समस्या थी। उसका पति उसे खरात के पास लेकर गया। खरात ने उससे कहा कि वह महिला को संतान दिला देगा। फिर उसने महिला के पति को बाहर बिठाकर महिला को केबिन के अंदर लेकर गया। केबिन की बत्तियां बुझा दी गईं। महिला को एक मंत्र का उच्चारण करने को कहा गया। इसके बाद खरात ने महिला को बदनियती के साथ छुआ और उसका रेप करने की कोशिश करने लगा। महिला ने पुलिस को शिकायत में कहा है कि थोड़े ही देर में पूरी प्रक्रिया यौन उत्पीड़न में बदल गई। खरात उससे जबर्दस्ती करने लगा। महिला डरकर चीखी और किसी तरह खुद को छुड़ाकर कमरे से बाहर निकल भागी। बाद में उसने अपने पति को सारी कहानी बताई, जो उसे लेकर पुलिस में शिकायत करने पहुंचा।
पति ने पहले भरोसा नहीं किया
महिला के पति को पहले तो पत्नी की बात पर यकीन नहीं हुआ, क्योंकि खरात से मिलने संभ्रांत परिवारों की कई महिलाएं जाती थीं। खरात का इलाके में खासा रसूख भी था। लेकिन महिला ने भी खरात के कुकर्मों को उजागर करने की ठान ली थी। उसने अपने पति से खरात के केबिन में एक छिपा हुआ कैमरा लगवाया। बस उस एक कैमरे ने खरात की करतूतों की सारी पोल खोल दी। पुलिस ने खरात के केबिन से 100 से ज्यादा अश्लील वीडियो क्लिप बरामद की है। कई वीडियो में तो महिलाओं के साथ बार-बार रेप होने की पुष्टि हुई है, जिससे कहीं न कहीं मामला ब्लैकमेल का भी सामने आ रहा है।
छह साल तक किया रेप
पुलिस को एक अन्य महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसके साथ 2020 स 2026 तक खरात ने बार-बार रेप किया। महिला के परिजनों ने ही वैवाहिक समस्याओं को सुलझाने के लिए खरात से 2013 में संपर्क किया था। खरात ने महिला के परिजनों को सब-कुठ ठीक होने का यकीन दिलाया। इससे पवह परिवार के लिए विश्वासपात्र बन गया। सालों के बाद जब वैवाहिक समस्या और बिगड़ीं तो महिला ने खरात से संपर्क साधा। लेकिन खरात ने महिला को केबिन में बुलाकर उसे भरोसा दिलाया कि वह तो उसी के लिए बनी है। इसके बाद उसने महिला के साथ रेप करने की कोशिश की, लेकिन महिला किसी तरह वहां से भाग निकली। साल 2021 में तलाक के बाद महिला ने फिर खरात से संपर्क किया। खरात उसे फिर अपने केबिन में ले गया। महिला का आरोप है कि खरात ने उसे नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ जबर्दस्ती की। बार-बार संबंध बनने से महिला गर्भवती हो गई तो खरात ने उसे गोलियां दीं, जिससे उसका गर्भपात हो गया। इन सबके बाद महिला ने पुलिस से शिकायत की।
इमली के बीजों को रत्न बताकर लूटा
एक शिकायतकर्ता का आरोप है कि खरात ने इमली के बीजों को पॉलिश कर उन्हें रत्न बताकर कई लाख रुपए में बेचा। उसने लोगों को डराने के लिए अपने घर में नकली सांप भी रखे थे। पुलिस जब इन मामलों की जांच कर रही थी, तभी उसके सामने जमीन घोटाले का एक बड़ा मामला आया। नाशिक के ही एक जाधव परिवार ने खरात पर परिवार की जमीन हड़पने का आरोप लगाया था। विलास जाधव के अनुसार उसके भाई कैलाश जाधव ने शहर के पठारी क्षेत्र में 45 लाख रुपए की जमीन खरीदी थी। बाद में जमीन की मिल्कीयत को लेकर विवाद निकल आया, जिससे डील पूरी नहीं हो पाई। खरात की जमीन पास ही थी। उसने जमीन के मालिक पर दबाव बनाया और जमीन अपने नाम कर ली। कोर्ट ने 2022 में मामले पर स्टे लगा दिया। मामले का फैसला आने से दो दिन पहले विलास का भाई मर गया। अब विलास का कहना है कि खरात ने ही उसके भाई को मार दिया और मामले को हादसा बता दिया। अब मामला एक बार फिर कोर्ट में लटका है।
आव्हाड के आरोपों से हड़कंप
महाराष्ट्र विधानसभा में जितेंद्र आव्हाड ने अशोक खरात मामले पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने खरात की जान को खतरा बताते हुए उसे लगातार सीसीटीवी में रखने की मांग की है। आव्हाड का दावा है कि खरात के पास 20 सालों की राजनीतिक अंदरूनी जानकारी है, जिसमें 38 विधायकों के नाम शामिल हैं। आव्हाड ने दावा किया कि राज्य के 38 विधायक अशोक खरात के संपर्क में थे और कथित तौर पर उसके पास अनुष्ठान कराने जाते थे। उन्होंने वहां जाकर अपनी उंगलियां भी काटी. उन्होंने कहा कि उनके पास इन सभी विधायकों की सूची है और समय आने पर वह इसे सार्वजनिक करेंगे। आव्हाड ने आरोप लगाया कि इस मामले में कुछ पुलिस अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं और पैसे के लेन-देन की आशंका है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इस बारे में पूरी जानकारी है, तो वह केवल देवेंद्र फडणवीस को हो सकती है।
एकनाथ शिंदे की भी होगी जांच!
विधानसभा में मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट कहा था कि खरात को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद करने वाले किसी भी व्यक्ति, चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या राजनेता, उसे बख्शा नहीं जाएगा। अब विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता सवाल कर रहे हैं कि क्या यह नियम उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी लागू होगा? अहिल्यानगर के पालक मंत्री विखे पाटिल ने भी शुरुआत में स्वीकार किया था कि वे और शिंदे उस मंदिर में गए थे, जिससे अब राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की राज्य सचिव एडवोकेट रंजना गवांदे के अनुसार, अक्टूबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नासिक के ईशान्येश्वर मंदिर का दौरा किया था। उनके साथ कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और दीपक केसरकर भी मौजूद थे। अनिस का तर्क है कि रसूखदार नेताओं के ऐसे दौरों से ही अशोक खरात जैसे पाखंडी बाबाओं का मनोबल बढ़ा और उन्हें समाज में ‘वैधता’ मिली।
महाराष्ट्र विधानसभा में जितेंद्र आव्हाड ने अशोक खरात मामले पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने खरात की जान को खतरा बताते हुए उसे लगातार सीसीटीवी में रखने की मांग की है। आव्हाड का दावा है कि खरात के पास 20 सालों की राजनीतिक अंदरूनी जानकारी है, जिसमें 38 विधायकों के नाम शामिल हैं। आव्हाड ने दावा किया कि राज्य के 38 विधायक अशोक खरात के संपर्क में थे और कथित तौर पर उसके पास अनुष्ठान कराने जाते थे। उन्होंने वहां जाकर अपनी उंगलियां भी काटी. उन्होंने कहा कि उनके पास इन सभी विधायकों की सूची है और समय आने पर वह इसे सार्वजनिक करेंगे। आव्हाड ने आरोप लगाया कि इस मामले में कुछ पुलिस अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं और पैसे के लेन-देन की आशंका है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इस बारे में पूरी जानकारी है, तो वह केवल देवेंद्र फडणवीस को हो सकती है।
विधानसभा में मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट कहा था कि खरात को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद करने वाले किसी भी व्यक्ति, चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या राजनेता, उसे बख्शा नहीं जाएगा। अब विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता सवाल कर रहे हैं कि क्या यह नियम उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी लागू होगा? अहिल्यानगर के पालक मंत्री विखे पाटिल ने भी शुरुआत में स्वीकार किया था कि वे और शिंदे उस मंदिर में गए थे, जिससे अब राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की राज्य सचिव एडवोकेट रंजना गवांदे के अनुसार, अक्टूबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नासिक के ईशान्येश्वर मंदिर का दौरा किया था। उनके साथ कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और दीपक केसरकर भी मौजूद थे। अनिस का तर्क है कि रसूखदार नेताओं के ऐसे दौरों से ही अशोक खरात जैसे पाखंडी बाबाओं का मनोबल बढ़ा और उन्हें समाज में ‘वैधता’ मिली।


