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वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा का 75 बीघा पर चला बुलडोजर का डंडा,अवैध प्लाटिंग करने वालो का मिजाज किया ठंडा

  • अवैध प्लाटिंग पर बड़ा एक्शन 75 बीघा में चला बुलडोजर, पारदर्शी विकास का संदेश
  • जोन-5 में 30 स्थानों पर बड़ी कार्रवाई, अवैध कॉलोनाइजरों पर शिकंजा
  • 75 बीघा भूमि पर ध्वस्तीकरण, बिना लेआउट प्लाटिंग पर सख्त रुख
  • उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा के निर्देश पर प्रवर्तन टीम का बड़ा अभियान
  • रामनगर-मुगलसराय क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग माफिया के खिलाफ कार्रवाई तेज
  • पहले अनुमति, फिर निर्माण वीडीए ने दिया स्पष्ट संदेश
  • अज्ञात प्लाटिंग कर्ताओं पर भी कार्रवाई, प्रशासन का कड़ा रुख
  • जनता को चेतावनी।केवल स्वीकृत प्लॉट ही खरीदें
  • 7 दिन में लेआउट स्वीकृति का दावा

वाराणसी। वीडीए ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि शहर के विकास के नाम पर अवैध प्लाटिंग और नियमों की अनदेखी अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा के निर्देश पर जोन-5 की प्रवर्तन टीम द्वारा चलाया गया व्यापक अभियान इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ज़मीनी स्तर पर सख्ती के साथ नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा। रामनगर और मुगलसराय क्षेत्र में 30 अलग-अलग स्थानों पर फैली अवैध प्लाटिंग के खिलाफ की गई कार्रवाई में लगभग 75 बीघा भूमि पर बुलडोज़र चलाया गया। यह केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक संदेश है उन तमाम कॉलोनाइज़र और भू-माफियाओं के लिए जो बिना किसी स्वीकृति, बिना लेआउट पास कराए, लोगों की गाढ़ी कमाई को जोखिम में डालकर अवैध प्लॉटिंग का कारोबार चला रहे हैं। शहर के तेजी से विस्तार के बीच अवैध कॉलोनियों का जाल भी उतनी ही तेजी से फैल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों और शहर की सीमा से लगे इलाकों में बिना किसी बुनियादी सुविधा, बिना सड़क, बिना जल निकासी व्यवस्था के प्लॉट काटकर बेचने का खेल लंबे समय से जारी है। ऐसे में वीडीए की यह कार्रवाई न केवल अवैध निर्माण पर रोक लगाने की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि आम नागरिकों को भी सचेत करने का प्रयास है कि वे अपनी मेहनत की कमाई निवेश करते समय सतर्क रहें। कार्रवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर प्लाटिंग कर्ता अज्ञात हैं, जो यह दर्शाता है कि यह धंधा कितनी संगठित और गुप्त तरीके से संचालित हो रहा है। वहीं कुछ मामलों में नाम सामने आए हैं, जिन पर सीधी कार्रवाई की गई है। धारा 27 के अंतर्गत की गई इस ध्वस्तीकरण कार्रवाई ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। पूरे अभियान में वीडीए ने केवल कार्रवाई ही नहीं की, बल्कि आम जनता के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किया। भूमि खरीदने से पहले लैंडयूज की जांच, आंतरिक सड़कों की न्यूनतम चौड़ाई और लेआउट स्वीकृति की अनिवार्यता जैसे बिंदु इस बात की ओर इशारा करते हैं कि प्रशासन अब विकास को व्यवस्थित और योजनाबद्ध बनाने के लिए गंभीर है। हालांकि यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि क्या यह कार्रवाई स्थायी समाधान बन पाएगी या फिर यह केवल एक अस्थायी अभियान बनकर रह जाएगी। क्योंकि अतीत में भी कई बार ऐसे अभियान चले हैं, लेकिन कुछ समय बाद अवैध प्लाटिंग का सिलसिला फिर शुरू हो जाता है। ऐसे में इस बार की कार्रवाई की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन इस सख्ती को कितनी निरंतरता के साथ बनाए रखता है।

अवैध प्लाटिंग के समानांतर ‘अघोषित शहर’ पर प्रहार

वाराणसी का विस्तार जितनी तेजी से हो रहा है, उतनी ही तेजी से उसके आसपास अवैध प्लाटिंग का एक समानांतर ‘अघोषित शहर’ भी खड़ा होता जा रहा है। यह शहर नक्शों में नहीं दिखता, लेकिन जमीन पर उसकी मौजूदगी हर उस व्यक्ति को दिखाई देती है, जिसने कभी सस्ते प्लॉट के लालच में अपनी पूंजी लगाई हो। वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा जोन-5 में की गई ताज़ा कार्रवाई इसी ‘अघोषित शहर’ पर प्रहार है। 30 स्थानों पर एक साथ की गई ध्वस्तीकरण कार्रवाई यह बताने के लिए काफी है कि समस्या कितनी व्यापक है और प्रशासन अब इसे नजरअंदाज करने की स्थिति में नहीं है।

अवैध प्लाटिंग का फैलता नेटवर्क

रामनगर, मुगलसराय और अदलहाट जैसे क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में अवैध प्लाटिंग का कारोबार तेजी से बढ़ा है। जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों को बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के काटकर बेचना एक ‘लो-रिस्क, हाई-प्रॉफिट’ बिजनेस मॉडल बन चुका है। इस मॉडल में सबसे बड़ा नुकसान उस आम आदमी का होता है, जो अपने सपनों का घर बनाने के लिए जमीन खरीदता है। उसे यह नहीं बताया जाता कि जिस जमीन पर वह निवेश कर रहा है, उसका लैंडयूज क्या है, वहां सड़क या सीवर की कोई योजना है या नहीं, और सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वह प्लॉट कानूनी रूप से वैध है भी या नहीं।

कार्रवाई का दायरा और प्रभाव

जोन-5 की इस कार्रवाई में जिन नामों पर कार्रवाई हुई, उनमें राज नारायण सिंह, रितेश पाण्डेय, विनोद यादव, मानसिंह, अखिलेश यादव, प्रदीप शर्मा, हरिद्वार सिंह, कार्तिकेय सिंह, संजय सिंह सहित कई अन्य शामिल हैं, जबकि कई मामलों में प्लाटिंग कर्ता अज्ञात पाए गए।
यह तथ्य अपने आप में गंभीर है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग हो रही थी और कई मामलों में जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान तक स्पष्ट नहीं है। यह न केवल प्रशासनिक निगरानी की चुनौती को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि इस पूरे नेटवर्क में कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

धारा 27 का सख्त इस्तेमाल

पूरी कार्रवाई में धारा 27 के अंतर्गत ध्वस्तीकरण किया गया। यह प्रावधान प्राधिकरण को यह अधिकार देता है कि वह बिना स्वीकृति के किए गए निर्माण या प्लाटिंग को तत्काल प्रभाव से हटाने की कार्रवाई कर सके।
इस बार प्रशासन ने इस प्रावधान का आक्रामक तरीके से इस्तेमाल किया है, जो यह दर्शाता है कि अब केवल नोटिस देकर इंतजार करने की नीति को पीछे छोड़ते हुए सीधे कार्रवाई की रणनीति अपनाई जा रही है।

जमीन के खेल में ‘अदृश्य खिलाड़ी’

अज्ञात प्लाटिंग कर्ताओं की बड़ी संख्या इस बात का संकेत है कि यह खेल अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। इसमें कई ऐसे ‘अदृश्य खिलाड़ी’ भी शामिल हो सकते हैं, जो पर्दे के पीछे रहकर इस पूरे कारोबार को संचालित करते हैं। ऐसे में केवल बुलडोज़र चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जाए और उन लोगों की पहचान की जाए जो इस अवैध कारोबार के असली संचालक हैं। वीडीए ने जनता से अपील की है कि वे केवल स्वीकृत प्लॉट ही खरीदें और निर्माण से पहले मानचित्र स्वीकृत कराएं। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या केवल अपील कर देने से समस्या हल हो जाएगी।
आम नागरिक के पास न तो इतनी जानकारी होती है और न ही संसाधन कि वह हर तकनीकी पहलू की जांच कर सके। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल चेतावनी देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे एक ऐसा तंत्र विकसित करना होगा जहां कोई भी व्यक्ति आसानी से यह जान सके कि कौन सा प्लॉट वैध है और कौन सा नहीं। क्योंकि अतीत में भी ऐसे अभियान चलाए गए हैं, लेकिन उनका असर कुछ समय बाद खत्म हो जाता है।
अगर इस बार भी कार्रवाई के बाद निगरानी कमजोर पड़ती है, तो अवैध प्लाटिंग का यह सिलसिला फिर शुरू हो जाएगा। इसलिए जरूरी है कि इस कार्रवाई को एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में देखा जाए, न कि एक ‘इवेंट’ के रूप में।

विकास बनाम अव्यवस्था

वाराणसी जैसे शहर के लिए नियोजित विकास बेहद जरूरी है। लेकिन जब विकास की रफ्तार नियमों से आगे निकल जाती है, तो वह अव्यवस्था में बदल जाती है। वीडीए की यह कार्रवाई इसी अव्यवस्था को नियंत्रित करने का प्रयास है। लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि वैध और सुलभ आवास की व्यवस्था को बढ़ाया जाए, ताकि लोग अवैध विकल्पों की ओर जाने के लिए मजबूर न हों।

* 30 स्थानों पर एक साथ कार्रवाई, 75 बीघा भूमि पर ध्वस्तीकरण
* जोन-5 रामनगर–मुगलसराय क्षेत्र में चला अभियान
* धारा 27 के तहत सख्त कार्रवाई, बिना लेआउट प्लाटिंग पर प्रहार
* कई प्लाटिंग कर्ता अज्ञात, नेटवर्क की गहराई पर सवाल
* जनता को चेतावनी केवल स्वीकृत प्लॉट ही खरीदें
* 7 दिन में लेआउट स्वीकृति का दावा
* प्रशासन ने पारदर्शी और नियोजित विकास का संदेश दिया
* अवैध प्लाटिंग के खिलाफ निरंतर कार्रवाई की जरूरत

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