Newsई-पेपरमुंबई

1 लाख करोड़ की जमीन महज 2200 करोड़ में मुकेश अम्बानी के नाम,फडणवीस सरकार ने पारदर्शिता का किया काम तमाम

महाराष्ट्र का सबसे बड़ा जमीन घोटाला- नवी मुंबई में प्राइम लोकेशन पर अंबानी ने बाजार दर से 5 गुना कम में हड़पी 5286 एकड़ जमीन, तमाशा देखती रही भाजपा सरकार

  •  एक लाख करोड़ की जमीन केवल 2200 करोड़ में मिल गई
  •  शेयर बाजार को सूचना देने पर सामने आया इतना बड़ा मामला
  •  जमीन है नवी मुंबई सेज की, बगल में है अटल सेतु और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे
  •  अब यहां पर प्लॉट काटकर अरबों कमाएंगे मुकेश अंबानी

मुंबई। महाराष्ट्र में भाजपा की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने एक और बड़ी जमीन का टुकड़ा एशिया के सबसे अमीर और रिलायंस समूह के चेअरमैन मुकेश अंबानी के सुपुर्द कर दी है। महाराष्ट्र के इतिहास के इस सबसे बड़े जमीन घोटाले में फडणवीस सरकार ने एक लाख करोड़ की जमीन रिलायंस के प्रवर्तित समूह को केवल 2200 करोड़ रुपए में दे दी है।

इसे महाराष्ट्र का सबसे बड़ा औद्योगिक भूमि का हस्तांतरण माना जा रहा है। यह मामला नवी मुंबई का है, जहां की 5286 एकड़ जमीन फडणवीस की भाजपा सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को केवल 2200 करोड़ रुपए में दी है। नवी मुंबई एयरपोर्ट के पास स्थित यह जमीन शहर में ट्रांस हार्बर लिंक प्रोजेक्ट के भी बेहद नजदीक है।

बंदरबांट का ऐसे पता चला

जमीन की इस सौदेबाजी को खुलासा तब हुआ, जब आनंद जैन के जय कॉर्प लिमिटेड ने बांबे स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग्स प्रा. लि. को यह जमीन बेची गई है और कंपनी इस सौदे की मंजूरी के लिए अपने शेयर धारकों की एक असामान्य बैठक बुलाना चाहती है। जय कॉर्प लिमिटेड का अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग्स प्रा. लि. में 32 फीसदी शेयर है। कंपनी ने सूचित किया कि अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग्स प्रा. लि. में सहायक द्रोणागिरी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. ने अपने 74 फीसदी शेयर बेच दिए हैं। यानी कंपनी अपने शेयर बेचकर अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग्स प्रा. लि. से निकल रही है। ये शेयर 1628 करोड़ रुपए में बेचे गए हैं। इन शेयरों को रिलायंस कंपनी ने 2200 करोड़ रुपए में खरीद लिया है। इससे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 13 दिसंबर 2024 को स्टॉक एक्सचेंज को बताया था कि चूंकि महाराष्ट्र सरकार के सिडको ने कोई आपत्ति नहीं जताई, इसलिए वह नवी मुंबई आईआईए प्रा. लि. के 57.12 प्रतिशत शेयर खरीद रहा है। ये शेयर 28.50 रुपए प्रति शेयर के इक्विटी के भाव से खरीदे गए हैं।

इस तरह बंट गई 5286 एकड़ जमीन

नवी मुंबई आईआईए प्रा. लि. को इससे पहले नवी मुंबई सेज कहा जाता था। असल में रिलायंस ने सेज की ही जमीन का औने-पौने में सौदा किया है। इसका मतलब यह निकला कि पहले तो अंबानी ने नवी मुंबई के सेज पर कब्जा किया और फिर उसमें सबसे ज्यादा जमीन वाली कंपनी को अपने शेयर बेचकर वहां से निकल जाने दिया। उसके बाद अंबानी ने उन्हीं शेयर्स को इक्विटी के साथ खरीदकर 5286 एकड़ जमीन हथिया ली। केवल इक्विटी के हिसाब से रिलायंस को जमीन 2200 करोड़ में पड़ी, वरना जमीन की बाजार में कीमत एक लाख करोड़ रुपए की थी। इसका मतलब यह हुआ कि अंबानी ने बाजार भाव से करीब 5 गुना कम कीमत पर सेज की इतनी बड़ी जमीन हथिया ली। इसमें फडणवीस सरकार का रोल यही रहा कि यह सारी बंदरबांट होते सिडको, जो कि सरकारी उपक्रम है, चुपचाप देखता रहा।

अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर में अंबानी के 35 प्रतिशत शेयर

अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रायवेट लिमिटेड में मुकेश अंबानी के 33 फीसदी शेयर हैं। उनके अलावा इसमें आनंद जैन के जय कॉर्प के 32 प्रतिशत शेयर और स्किल इन्फ्रा के 35 प्रतिशत शेयर हैं। जमीन की लोकेशन मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के नजदीक है। यह अटल सेतु के भी एकदम पास है। अब अंबानी इसे विकसित कर अरबों रुपए कमाएंगे। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के अनुसार, बीते कुछ सालों से नवी मुंबई के इस इलाके में जमीनों के दाम में भारी इजाफा हुआ है, क्योंकि यह एक्सप्रेसवे के नजदीक होने के साथ ही अटल सेतु के भी पास है। नरेंद्र मोदी सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने नवी मुंबइ्र सेज को पर्यावरणीय मंजूरी दे रखी है। इसके अलावा इस जमीन पर अभी और ज्यादा पूंजीगत निवेश की जरूरत भी नहीं है। इसीलिए इस जगह इतनी बड़ी जमीन का बाजार भाव एक लाख करोड़ रुपए बताया जा रहा है।

रिलायंस से 1757 करोड़ नहीं वसूल पाई बीएसएनएल

नरेंद्र मोदी सरकार की कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड को जानबूझकर लगातार कमजोर किया जा रहा है। असल में इसी के कंधे पर चढ़कर आज रिलायंस जिओ और एयरटेल देश की टॉप दूरसंचार कंपनी बने हुए हैं, जबकि बीएसएनएल की हालत दिनों-दिन खस्ता होती जा रही है। अब भारत के महालेखाकार (सीएजी) ने रिलायंस जिओ से मई 2014 से लेकर अभी तक 1757 करोड़ रुपए का बिल न वसूल पाने के लिए बीएसएनएल की जमकर खिंचाई की है। मंगलवार को जारी एक बयान में सीएजी ने कहा कि बीएसएनएल को इस मामले में 38.36 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, क्योंकि वह रिलायंस के हिस्से का लाइसेंस फीस नहीं वसूल पाया। असल में बीएसएनएल के मोबाइल टॉवर पर अपना नेटवर्क लगाने पर सभी दूरसंचार कंपनियों को लाइसेंस फीस देना होता है। यह फीसदी सभी नेटवर्क प्रोवाइडर्स पर एक समान रूप से आमद होती है। सीएजी ने बयान में कहा है कि बीएसएनएल अपने प्रतिद्वंद्वी रिलायंस जिओ के साथ मास्टर सर्विस एग्रीमेंट को लागू नहीं करवा पाया। इससे केंद्र सरकार को 1757.76 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। बीएसएनएल मई 2014 से मार्च 2024 तक यह पैसा जिओ से नहीं वसूल पाया है। ऐसे में जिओ पर बीते 10 साल का ब्याज भी बनता है। अगर बीएसएनएल मय ब्याज के यह रकम जिओ से नहीं वसूल पाता है तो सरकार को राजस्व का नुकसान उठाना होगा। रिपोर्ट में सीएजी ने यह भी पाया कि रिलायंस जिओ से बिल वसूलने में बीएसएनएल ने हमेशा ढिलाई बरती है। अगर कंपनी जिओ को अपना ढांचा साझा करने दे रही है तो उससे उसका किराया वसूलने में हिचक क्यों होनी चाहिए? कैग का कहना है कि जब मास्टर एग्रीमेंट में सारी शर्तें और नियम लिखे हैं तो जिओ को पैसा देने में दिक्कत क्या है। बयान के अनुसार बीएसएनएल की ढिलाई के कारण सरकार को जीएसटी मिलाकर 29 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button