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छात्रशक्ति का भारतमाला परियोजना के नाम पर छलावा ,ओवरलोड वाहनों को कम्पनी दे रही बढ़ावा

ओवरलोड डंपरों ने गांवों को बनाया मौत का गलियारा, रात में सड़कों पर उतरता है मौत का साम्राज्य

खनन माफिया के कब्जे में चकिया – स्लग

  • लगातार ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से मकानों में दरारें पड़ने की शिकायत
  • भारतमाला परियोजना की आड़ में अवैध मिट्टी खनन
  • ‘छात्र शक्ति’ नाम बना डर का प्रतीक ग्रामीणों में भय का माहौल
  • बिना वैध दस्तावेजों के सड़कों पर दौड़ रहे डंपर
  • हादसों के बाद भी प्रशासन नहीं जागा
  • खनन और परिवहन विभाग पर मिलीभगत के आरोप
  • ग्रामीणों ने दी आर-पार की लड़ाई की चेतावनी

चंदौली। चकिया क्षेत्र इन दिनों अवैध खनन, ओवरलोड परिवहन और प्रशासनिक निष्क्रियता की त्रासदी से कराह रहा है। चकिया, सिकंदरपुर, लेवा, बबुरी और आसपास के संपर्क मार्गों पर भारी वाहनों का ऐसा आतंक कायम हो चुका है कि ग्रामीणों का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। भारतमाला परियोजना और ‘छात्र शक्ति’ के नाम पर सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड डंपर और बोगा ट्रैक्टर अब विकास नहीं, बल्कि भय और विनाश के प्रतीक बन चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रात होते ही पूरा इलाका अवैध परिवहन के कब्जे में चला जाता है, जहां कानून का नहीं बल्कि खनन माफियाओं का राज चलता है। सूत्रों के अनुसार शाम ढलते ही चकिया से सिकंदरपुर और लेवा मार्ग पर सैकड़ों की संख्या में डंपर और भारी वाहन तेज रफ्तार से दौड़ने लगते हैं। रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक सड़कों पर ऐसा माहौल बन जाता है मानो किसी युद्ध क्षेत्र में खनन अभियान चल रहा हो। गांवों के घर कांपने लगते हैं, बच्चों की नींद टूट जाती है और बुजुर्ग रातभर दहशत में जागते रहते हैं। लोगों का कहना है कि इन वाहनों की रफ्तार इतनी अधिक होती है कि यदि कोई राहगीर, साइकिल सवार या बाइक चालक सामने आ जाए तो उसकी जान बचना लगभग असंभव हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश वाहन ओवरलोड हैं और नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे हैं। कई वाहनों के पास न वैध परमिट है, न फिटनेस प्रमाणपत्र और कई मामलों में चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं होता। कुछ डंपर बिना नंबर प्लेट के चलते देखे गए हैं, जबकि कई वाहनों में फर्जी नंबर का इस्तेमाल किए जाने की भी चर्चा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह कोई सामान्य लापरवाही नहीं बल्कि एक संगठित अवैध नेटवर्क है, जो प्रशासनिक तंत्र की कमजोरी या मिलीभगत के सहारे फल-फूल रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भारतमाला परियोजना के नाम पर अवैध मिट्टी खनन और परिवहन का खेल खुलेआम चल रहा है। परियोजना के लिए मिली छूट का इस्तेमाल निर्धारित सीमा से अधिक सामग्री ढोने और अन्य स्थानों से अवैध मिट्टी परिवहन के लिए किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि दिन में विकास कार्य का दिखावा किया जाता है, जबकि रात में वही वाहन अवैध कारोबार में लग जाते हैं। सरकारी परियोजनाओं की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में छात्र शक्ति नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ वाहन इस नाम का उपयोग प्रशासनिक कार्रवाई से बचने और प्रभाव दिखाने के लिए करते हैं। कई वाहनों पर बड़े अक्षरों में ‘छात्र शक्ति’ लिखा देखा गया है, जिससे आम लोग भयभीत रहते हैं। हालांकि इस नाम के पीछे कौन लोग हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन क्षेत्र में यह धारणा तेजी से फैल रही है कि इसके पीछे प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है। सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक चुप्पी को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन विभाग और परिवहन विभाग को कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि अधिकारी फोन तक नहीं उठाते और यदि कभी बात हो भी जाए तो केवल देखते हैं कहकर मामला टाल दिया जाता है। वहीं परिवहन विभाग की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है। पुलिस समय-समय पर अभियान चलाने का दावा करती है, लेकिन अवैध परिवहन का नेटवर्क इतना मजबूत है कि कार्रवाई से पहले ही रास्ते बदल दिए जाते हैं। चकिया क्षेत्र में अब यह मुद्दा केवल सड़क सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आम लोगों के जीवन और अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है। अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। महिलाएं और बुजुर्ग सड़क पार करने में भय महसूस कर रहे हैं। कई बार ग्रामीणों ने सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन भी किया, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। अब लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है और क्षेत्र में बड़े जन आंदोलन की चेतावनी भी दी जाने लगी है।

रात ढलते ही सड़कों पर उतर आता है ‘मौत का कारवां’

चकिया क्षेत्र इन दिनों अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों की भयावह मार झेल रहा है। चकिया, सिकंदरपुर, लेवा, बबुरी और आसपास के संपर्क मार्गों पर रात होते ही ऐसा दृश्य बन जाता है मानो पूरा इलाका किसी अवैध परिवहन सिंडिकेट के कब्जे में हो। ग्रामीणों का आरोप है कि भारतमाला परियोजना और छात्र शक्ति के नाम पर सैकड़ों ओवरलोड डंपर और बोगा ट्रैक्टर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। इन भारी वाहनों की रफ्तार इतनी तेज होती है कि गांव की गलियों से गुजरते समय धरती तक कांप उठती है। घरों की दीवारों में दरारें पड़ने लगी हैं और बच्चों की नींद तक भय में बदल चुकी है। सूत्रों का कहना है कि रात 7 बजे के बाद से सुबह 6 बजे तक सड़कें आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि अवैध खनन कारोबारियों के लिए आरक्षित हो जाती हैं। हालात इतने खतरनाक हो चुके हैं कि लोग रात में घर से निकलने से डरते हैं। बाइक सवारों और स्कूली बच्चों के अभिभावकों में लगातार भय बना हुआ है। लोगों का आरोप है कि यदि कोई व्यक्ति अचानक सामने आ जाए तो इन तेज रफ्तार डंपरों के सामने उसकी जान बचना लगभग असंभव हो जाता है। अधिकतर वाहनों के पास न वैध परमिट है, न फिटनेस प्रमाणपत्र और कई मामलों में ड्राइवरों के पास लाइसेंस तक नहीं होता। कुछ डंपरों पर नंबर प्लेट तक नहीं लगी होती, जबकि कई पर फर्जी नंबरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह कोई सामान्य लापरवाही नहीं बल्कि एक संगठित अवैध नेटवर्क है, जिसे प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त होने की आशंका जताई जा रही है।

भारतमाला परियोजना की आड़ में अवैध मिट्टी कारोबार का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि भारतमाला परियोजना के नाम पर नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। परियोजना के लिए निर्धारित मात्रा से कहीं अधिक मिट्टी और निर्माण सामग्री ढोई जा रही है। आरोप है कि परियोजना के नाम पर मिली प्रशासनिक छूट का इस्तेमाल अवैध खनन और निजी परिवहन के लिए किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई वाहन दिन में निर्माण कार्य से जुड़े दिखते हैं, लेकिन रात में वही वाहन अवैध मिट्टी ढुलाई में लग जाते हैं। इससे सरकारी परियोजना की साख भी सवालों के घेरे में आ गई है।

‘छात्र शक्ति’ के नाम पर दबाव और भय का माहौल

चकिया क्षेत्र में छात्र शक्ति नाम इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ वाहन इस नाम का उपयोग कर प्रशासनिक कार्रवाई से बचने की कोशिश करते हैं। कई डंपरों और ट्रैक्टरों पर बड़े अक्षरों में छात्र शक्ति लिखा देखा गया है। सूत्रों का कहना है कि इस नाम का इस्तेमाल भय पैदा करने और प्रभाव दिखाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि इस नाम से जुड़े लोगों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि इसके पीछे प्रभावशाली नेटवर्क सक्रिय है।

बिना नंबर, बिना फिटनेस, बिना लाइसेंस दौड़ रहे वाहन

ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन संचालित हो रहे हैं जिनके पास जरूरी दस्तावेज तक नहीं हैं। कई डंपर बिना नंबर प्लेट के चलते दिखाई देते हैं। कुछ वाहनों पर फर्जी नंबर अंकित होने का भी आरोप है। चिंताजनक बात यह है कि कई वाहन कम उम्र के चालकों द्वारा चलाए जा रहे हैं। यदि यह आरोप सही हैं तो यह सीधे तौर पर कानून और सड़क सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है।

हादसों के बाद भी नहीं जाग रहा प्रशासन

चकिया, सिकंदरपुर, लेवा और बबुरी मार्गों पर पिछले कुछ समय में कई गंभीर हादसे हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हादसों के बाद कुछ दिनों तक पुलिस और प्रशासन सक्रिय दिखाई देता है, लेकिन जल्द ही सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि सड़क पार करना भी जोखिम भरा बन गया है।

खनन विभाग पर उठ रहे गंभीर सवाल

ग्रामीणों ने खनन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि शिकायत करने पर अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। यदि कभी बात हो भी जाए तो केवल देखते हैं कहकर मामला टाल दिया जाता है। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग का इतना बड़ा नेटवर्क बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं हो सकता। यही कारण है कि लोगों का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था से उठता जा रहा है।

परिवहन विभाग की कार्रवाई सिर्फ फाइलों तक सीमित

ओवरलोडिंग, बिना परमिट और बिना फिटनेस वाले वाहनों पर कार्रवाई करना परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नहीं दिख रहा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग ईमानदारी से अभियान चलाए तो आधे से ज्यादा वाहन तुरंत जब्त हो सकते हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर रातभर चलने वाले इन भारी वाहनों को विभागीय टीमें क्यों नहीं देख पातीं। क्या कार्रवाई जानबूझकर टाली जा रही है?

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, बोले ‘अब आर-पार की लड़ाई होगी’

चकिया और आसपास के गांवों में अब लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द कठोर कार्रवाई नहीं की तो बड़ा जनआंदोलन खड़ा होगा। लोगों की मांग है कि रात में भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगे। ओवरलोड डंपरों की तत्काल जांच हो। बिना परमिट और फिटनेस वाले वाहन जब्त किए जाएं। अवैध खनन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि अब यह केवल सड़क सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि अस्तित्व और जीवन की लड़ाई बन चुकी है। यदि शासन-प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो आने वाले दिनों में चकिया क्षेत्र बड़े आंदोलन का गवाह बन सकता है।

* भारतमाला परियोजना के नाम पर अवैध परिवहन का आरोप
* रात में सैकड़ों ओवरलोड डंपरों का संचालन
* बिना परमिट, फिटनेस और नंबर प्लेट वाले वाहन
* कम उम्र और बिना लाइसेंस चालक चलाते हैं वाहन
* ‘छात्र शक्ति’ नाम का इस्तेमाल कर कार्रवाई से बचने का आरोप
* चकिया, सिकंदरपुर, लेवा और बबुरी क्षेत्र में दहशत
* हादसों के बावजूद नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई
* खनन और परिवहन विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में
* ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

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