
– अमेरिका के ऑपरेशन फ्रीडम के जवाब में ईरान ने खाड़ी के देशों पर किया हमला
– ईरानी हमलों के बाद अमेरिका जहाजों को पीछे हटना पड़ा
– अमेरिकी धमकी के जवाब में ईरान ने भी दी जवाबी हमले की धमकी
– सेंसेक्स 700 अंक लुढ़का, कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल
– हॉर्मूज में फंसे भारतीय नाविकों पर भोजन-पानी का भारी संकट
नई दिल्ली/ तेहरान। पश्चिम एशिया में युद्ध विराम के बीच ईरान के सऊदी अरब और यूएई में मिसाइल और ड्रोन हमले के बाद हॉर्मूज का संकट एक बार फिर गहरा गया है। जग का खतरा तब और बढ़ गया, जब सोमवार को ईरान ने यूएई और ओमान में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। यह हमला अमेरिका के ऑपरेशन फ्रीडम के जवाब में हुआ। इसके बाद ओमान और यूएई ने अपने हवाई क्षेत्र और सैन्य अड्डों का इस्तेमाल अमेरिकी हमले के लिए करने की इजाजत देने से मना कर दिया।
जवाब में अमेरिका ने ऑपरेशन फ्रीडम को खत्म करने का ऐलान किया। लेकिन अगले ही दिन अमेरिका से सुरक्षा की गारंटी मिलने पर ओमान और यूएई ने अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति दे दी।

अमेरिकी जहाजों पर ईरान के हमले
हालांकि, यूएई और ओमान के बदले रुख के बीच पश्चिम एशिया का संकट गहरा चुका था। ईरान ने हॉर्मूज में तीन अमेरिकी जहाजों पर हमले किए। मिसाइल और ड्रोन से किए गए इन हमलों से अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को नुकसान उठाना पड़ा और वे पीछे हट गए। उसके बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर परमाणु हमले की धमकी दी। जवाब में ईरान ने भी कह दिया कि वह मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर और तीखे हमले करेगा। गुरुवार को ईरान ने ऐसा करके दिखा दिया। पश्चिम एशिया में करीब दो हफ्ते की शांति के बाद एकाएक तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में फिर उछाल देखा गया है। तेल के दाम 150 से 175 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुके हैं। भारत के शेयर बाजार में सेंसेक्स शुक्रवार को 700 अंक नीचे रहा। माना जा रहा है कि अगर इस बार पश्चिम एशिया का संकट गहराता है तो दुनिया के बाजारों में भारी मंदी का दौर आ सकता है, जिससे उबरने में महीनों लगेंगे। तेल, गैस और खाद का संकट दुनिया के एक बड़े हिस्से को भुखमरी की ओर धकेल सकता है।
क्या है ऑपरेशन फ्रीडम?
अमेरिका ने हॉर्मूज को अंतरराष्ट्रीय जल परिवहन के लिए पूरी तरह से खोलने को ऑपरेशन फ्रीडम नाम दिया है। अमेरिका चाहता है कि यह रास्ते से वैश्विक कारोबार बिना किसी शुल्क के निर्बाध रूप से जारी रहे। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस बात का एक प्रस्ताव रखा है, जिस पर रूस और चीन के वीटो की आशंका जताई जा रही है। जिओ पॉलिटिकल विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा परिषद में अमेरिका के इस प्रस्ताव का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि इसमें यही नहीं लिखा है कि पश्चिम एशिया का समूचा संकट अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों से शुरू हुआ। यानी अमेरिका ने प्रस्ताव में संकट के मूल कारणों को छिपा दिया है। इसके अलावा सुरक्षा परिषद ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों को लेकर दो हिस्सों में बंटा हुआ है। एक ओर जहां अमेरिका के साथ मिडिल ईस्ट के देश, भारत और इजरायल हैं, वहीं रूस और चीन ईरान के साथ हैं।
खाड़ी देशों का पल-पल बदलता रुख
28 फरवरी को ईरान पर हमले के जवाब में पश्चिम एशिया का युद्ध मध्य-पूर्व के देशों तक इसलिए फैल गया, क्योंकि ईरान ने अपने मिसाइलों और ड्रोन हमलों का निशाना उन देशों को बनाया, जहां अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक ईरानी हमलों में अमेरिका की कम से कम 228 सैन्य संरचनाएं और उपकरण या तो नष्ट हो गए हैं या उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है। यह संख्या अमेरिकी सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से स्वीकार किए गए आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। ईरान ने इन हमलों में केवल इमारतों को ही निशाना नहीं बनाया, बल्कि अमेरिका के ‘डिजिटल नर्वस सिस्टम’ यानी संचार और सुरक्षा तंत्र पर सीधा हमला किया है। इन हमलों से अमेरिका को करीब 1.9 बिलियन डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा है। इन हमलों के बाद खाड़ी के देश अमेरिका से लगातार सुरक्षा की गारंटी मांग रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सोमवार के ईरानी हमले के बाद सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन कर उन्हें अपने देश के सैन्य अड्डों औा हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की इजाजत देने से मना कर दिया। कुछ देर बाद ओमान ने भी यही किया। असल में खाड़ी के देश बखूबी जानते हैं कि उनके इलाके के इस्तेमाल के बिना अमेरिका ईरान से जंग नहीं लड़ सकता है। बताया जाता है कि इसी बात को लेकर वे अमेरिका को ब्लैकमेल करते रहते हैं।
ईरान बनेगा मिडिल ईस्ट का नया बॉस
इधर, रूस और चीन यह चाहते हैं कि ईरान अब मिडिल ईस्ट का नया बॉस बने और हॉर्मूज इसका रिमोट कंट्रोल हो। दुनिया की 20 फीसदी तेल और गैस की आवाजाही का रास्ता हॉर्मूज करीब 80 प्रतिशत व्यापारिक जहाजों के लिए व्यावसायिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल होता है। ईरान इस रास्ते पर टोल वसूलकर युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई करना चाहता है। चीन और रूस दोनों के आर्थिक हित ईरान से जुड़े हुए हैं। ऐसे में दोनों चाहते हैं कि चूंकि ईरान ने अमेरिका से टकराकर पश्चिम एशिया में एक बड़ी ताकत का दर्जा हासिल किया है, इसलिए वह मिडिल ईस्ट के देशों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाए और उन्हें चीनी युआन में व्यापार की तरफ धकेले। सऊदी अरब ने इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चीन के शंहाई में युआन में व्यापार के लिए एक बैंक भी खोल दिया है। खाड़ी के देश केवल तेल और गैस ही नहीं, पेट्रोकेमिकल्स भी पैदा करते हैं। वे दुनिया में खाद के सबसे बड़े उत्पादक भी हैं। ऐसे में वैश्विक व्यापार में उनकी अनदेखी नहीं की जा सकती है।
परमाणु हमला केवल धमकी ?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को साफ चेतावनी दी है कि अगर वह हॉर्मूज को नहीं खोलता है और अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे नहीं हटता है तो वह जवाबी कार्रवाई के रूप में उस पर परमाणु हमला करेंगे। हालांकि, जिओ पॉलिटिक्स के जानकार इसे अमेरिका की कोरी धमकी मानते हैं। उनका कहना है कि ट्रंप की धमकी केवल ईरान को डराने के लिए है। ट्रंप इसी महीने चीन की यात्रा पर जाएंगे। अगर वे एशिया-प्रशांत और दक्षिणी चीन सागर में शांति बहाली चाहते हैं तो वे इस तरह की कोई भी उकसावे की कार्रवाई नहीं कर सकते, जो तीसरे विश्व युद्ध का कारण बने। ईरान भी इस बात को बखूबी जानता है, इसलिए उसने भी अमेरिका को जवाबी हमले की धमकी दी है। ईरान पहले ही यह कह चुका है कि अगर उस पर परमाणु हमला हुआ तो इजरायल भी परमाणु हमले से तबाह हो जाएगा। चीन ने भी ईरान का साथ देते हुए यही बात कही है।
ईरान ने ऑयल टैंकर ‘ओशन कोई’ जब्त किया
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ‘ओशन कोई’ नाम के एक तैल टैंकर जब्त किया है। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक टैंकर पर ईरान के तेल निर्यात में बाधा डालने की कोशिश का आरोप है। हालांकि टैंकर के झंडे, मालिकाना हक और चालक दल की जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि स्ट्रेट में एक चीनी तेल टैंकर पर हमला हुआ है। जहाज पर चीनी नागरिक भी मौजूद हैं, हालांकि अब तक किसी क्रू मेंबर के हताहत होने की खबर नहीं है। अरबी मीडिया चैनल अल जजीरा के मुताबिक, मंत्रालय ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव से बड़ी संख्या में जहाज प्रभावित हो रहे हैं, जिसे लेकर वह बेहद चिंतित है। साथ ही चीन ने घोषणा की है कि देश में 9 मई से पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी। देश की सरकारी योजना एजेंसी के मुताबिक, पेट्रोल की कीमत 320 युआन यानी करीब ₹4,440 प्रति मीट्रिक टन बढ़ाई जाएगी। वहीं, डीजल के दाम 310 युआन यानी करीब ₹4,302 प्रति मीट्रिक टन बढ़ेंगे।
भारतीय नाविकों का खाना-पानी खत्म
करीब 10 हफ्तों से ईरानी बंदरगाह पर फंसे भारतीय नाविक अनीश बोले, “हमने यहां पूरा हाल देखा है। युद्ध, मिसाइलें, सब कुछ। हमारा दिमाग पूरी तरह परेशान हो चुका है।” अल जजीरा से बात करते हुए उन्होंने बताया कि वह युद्ध शुरू होने से कुछ दिन पहले एक कार्गो जहाज से शत्त अल अरब जलमार्ग पहुंचे थे। तब से वह उसी जहाज पर फंसे हुए हैं। अनीश ने बताया कि कुछ भारतीय नाविक ईरान और आर्मेनिया की 44 किलोमीटर लंबी जमीनी सीमा पार करके घर लौटने में सफल रहे, लेकिन कई लोग अब भी फंसे हुए हैं क्योंकि उन्हें सैलरी नहीं दी जा रही। उन्होंने बताया कि फिलहाल वह आलू, प्याज, टमाटर और रोटी खाकर गुजारा कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें खबर मिली है कि कई दूसरे जहाजों पर खाना और पानी तेजी से कम हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी आईएमओ के मुताबिक करीब 20 हजार नाविक अब भी फंसे हुए हैं।




