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दिवालिया जेपी एसोसिएट्स को नियमो की अनदेखी कर अदानी के माथे सजाया,ज्यादा बोली लगाने की बाद भी वेदांता को खाली लौटाया

सुप्रीम कोर्ट में पहली बार घिरे अदानी, वेदांता ने लगाया घपले का आरोप, दांव पर लगी कंपनी

  •  दिवालिया हो चुकी जेपी एसोसिएट्स की नीलामी का मामला
  •  वेदांता ने अदानी से ज्यादा बोली लगाई, लेकिन कंपनी मिली अदानी को
  •  वेदांता के मुखिया बोले- हिम्मत रखो और कर्म किए जाओ
  •  जेपी को कर्ज देने वाले बैंक मोदी के, फैसला अदानी के हक में जाना ही था
  •  सुप्रीम कोर्ट में पहली बार आया दिवालिया कंपनी की नीलामी का मामला

नई दिल्ली। भारत के दूसरे सबसे बड़े अमीर गौतम अदानी के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि वे बिना कुछ उत्पादन के एक के बाद एक कंपनी खरीदते हैं और वह भी औने-पोने दाम पर, क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी से उनकी निकटता है। इसी के कारण देश की सभी संस्थाएं अदानी की फरमाइश को बिना कोई सवाल किए पूरा करती है। अब सुप्रीम कोर्ट इसका फैसला करने वाला है कि क्या वाकई यह सच है या फिर अदानी अपनी किस्मत से अमीर बन रहे हैं।

मुकाबले में अदानी के खिलाफ खड़े हैं वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल। उन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड की नीलामी पर ज्यादा बोली लगाने के बाद भी पिछले दरवाजे से कंपनी की मिल्कीयत अदानी समूह को दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने श्रीमद्भगवत गीता का उद्धरण देते हुए कहा है- हिम्मत रखो। विनम्र रहो और बिना किसी फल के अपना कर्म किए जाओ।

यह है पूरा मामला

जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड 57 हजार करोड़ के कर्ज में फंसी है। उसने 3 जून 2024 को दीवालिएपन के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में याचिका लगाई है। याचिका आईसीआईसीआई बैंक की एक याचिका के जवाब में लगाई गई है, जिसमें 57 हजार करोड़ की देनदारी का दावा किया गया है। नीलामी की प्रक्रिया में 28 कंपनियों ने बोली लगाई। इनमें से 6 कंपनियों- अदानी इंटरप्राइजेस, वेदांता, डालमिया सीमेंट, जिंदल पावर, पीएनसी इन्फ्रा और जेपी इन्फ्राटेक शामिल हैं। इन सभी कंपनियों ने दिवालिएपन से उबरने का अपना प्लान पेश किया। बोली लगाने वाली इन सभी कंपनियों में अदानी और वेदांता सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उभरे। इनमें भी अदानी का दावा सबसे बेहतर था, क्योंकि न केवल उसने पेशगी के रूप में बड़ी रकम पेश की, बल्कि उसकी बोली की कीमत भी ज्यादा थी। नवंबर 2025 को जयप्रकाश एसोसिएट्स में पैसा लगाने वाले निवेशकों की बैठक हुई। यह निवेशकों का मतलब है, वे बैंक जिन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स को कर्ज दिया था। इन सभी ने अदानी के प्रस्ताव को 93.81 फीसदी वोट दिए। उसके बाद एनसीएलटी ने 17 मार्च 2026 को अदानी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

वेदांता की बोली अधिक

वेदांता कंपनी ने पहली बार में 14, 535 करोड़ और दूसरी बार में 16,726 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी, जिसमें 6563 करोड़ एडवांस में दिए जाने थे। वहीं, अदानी ने 14,535 करोड़ की बोली लगाई और 6000 करोड़ एडवांस में देने की पेशकश की। अदानी ने केवल 2 साल में पूरा पैसा लौटाने का प्रस्ताव रखा, जबकि वेदांता ने 5 साल का समय मांगा। कर्जदारों ने वेदांता की दोबारा लगाई बोली को खारिज कर दिया। बोली खारिज होने के तुरंत बाद वेदांता ने एनसीएलटी में अपील की, लेकिन उस अपील पर यह कहकर राहत नहीं दी गई कि इसमें सभी पक्षों को लेकर लंबी सुनवाई होनी है। ऐसे में कंपनी की खरीद प्रक्रिया जारी रहेगी। यानी सुनवाई के डर से एनसीएलटी ने अपील को खारिज कर दिया और अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक भी नहीं लगाई। इसे देखते हुए ही वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट की दरवाजा खटखटाया है। वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल ने एनसीएलटी के आदेश पर कहा कि उन्होंने इमानदारी से बोली लगाई, लेकिन बाद में नतीजा बदल दिया गया। उनके उसूलों की जीवन ने एक बार फिर परीक्षा ली है। अग्रवाल ने जेपी समूह के संस्थापक जयप्रकाश गौर से लंदन में हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट से कंपनी के अधिग्रहण पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने एनसीएलटी की नीलामी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। यहां गौरतलब है कि वेदांता की पहली बोली और अदानी इंटरप्राइसेस की बोली बिल्कुल एक-समान थी। लेकिन बाद में वेदांता ने जो दूसरी बोली लगाई, वह अदानी से ज्यादा थी, जिसे निवेशकों ने खारिज कर दिया। यानी निवेशकों ने दोनों बोलियों को एक-समान मानकर केवल उनके मेरिट के आधार पर खरीदने वाले का चुनाव किया।

सुप्रीम कोर्ट में पहली बार आया मामला

इस तरह का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहली बार आया है, क्योंकि नीलामी की प्रक्रिया में निवेशकों के चुनाव को व्यावसायिक बुद्धिमत्ता माना जाता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से निकलने वाले फैसले को इस तरह की नीलामी प्रक्रिया के लिए दूरगामी माना जा रहा है।

क्या होगा कोर्ट का फैसला

अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में वेदांता के पक्ष में स्थगन आदेश देता है तो इससे अदानी की जेपी एसोसिएट्स को खरीदने का ख्वाब अधूरा रह सकता है। ऐसे में एनसीएलटी को एक बार फिर नीलामी प्रक्रिया शुरू कर सभी पक्षों से नए सिरे से बातचीत करनी पड़ सकता है। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट कर्जदारों के फैसले का समर्थन कररता है तो इससे आने वाले दिनों में एनसीएलटी के आदेश को चुनौती देने पर रोक लग सकती है।

वेदांता के वकीलों की दलील

एनसीएलएटी में वेदांता के वकीलों ने दलील रखी कि कंपनी के हस्तांतरण का प्लान प्रचलित कानूनों और दस्तावेजों के आधार पर ही मंजूरी किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि नीलामी की प्रक्रिया पारदर्शी और सभी प्रतिभागियों को समान अवसर देने वाला होना चाहिए। एक बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद परदे के पीछे से बातचीत की कोई अनुमति नहीं होनी चाहिए। सूत्रों ने बताया कि इस दलील के साथ वेदांता ने कहीं न कहीं यह कहने की कोशिश भी की है कि अदानी ने केंद्र सरकार के आरबीआई समर्थित कर्जदार बैंकों के साथ जेपी एसोसिएट्स को खरीदने के लिए परदे के पीछै से दबाव बनाया। वेदांता के वकील अगर इसे कोर्ट में साबित कर सकें तो देश में पहली बार कंपनियों की नीलामी की प्रक्रिया में घोटाले को साबित किया जा सकेगा।

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