Newsई-पेपरउत्तर प्रदेश

मोदी एम्बुलेंस पासिंग के नाम पर मत बनाइये उल्लू,देश की जनता को समझ रखा है लल्लू

प्रधानमंत्री के काफिले में एंबुलेंस का इमोशनल अत्याचार, ये है मोदी का नाटकीय किरदार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यही बात मुझे बहुत पसंद है कि वह अपने काफिले में आ रही एंबुलेंस को पास दे देते हैं….यह वाकई महान काम है।

1-30 सितंबर 2022 को गुजरात के अहमदाबाद से गांधीनगर जाते समय 2- 9 नवंबर 2022 को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में रैली के लिए जाते समय , 3-1 दिसंबर 2022 को गुजरात के अहमदाबाद में रोड शो के दौरान , 4-17 दिसंबर 2023 को वाराणसी में रोड शो के दौरान 5- 20 जून 2025 को ओडिशा के भुवनेश्वर में रोड शो के दौरान और 6- कल 11 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में रोड शो के दौरान नरेंद्र मोदी ने सायरन सुनते ही काफिला रुकवाया और एंबुलेंस को रास्ता दिया।

यह पुण्य काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अभी तक कुल 6 बार किया है…..

इससे महत्वपूर्ण यह है कि SPG – Special Protection Group सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई बाहरी एंबुलेंस काफिले के अंदर या बीच में घुस ही नहीं सकती। ऐसे कैसे घुस जाएगी ? उसमें कुछ भी हो सकता है? इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का उदाहरण हमारे सामने है…

और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोई ऐसे ही भीड़ में तो जा नहीं रहें हैं कि पीछे से कोई एंबुलेंस सायरन बजाते हुए आ जाए और वह काफिले को किनारे कर के उस एंबुलेंस को रास्ता दे दें, जैसे हम लोग देते हैं..

प्रधानमंत्री के काफिले की सुरक्षा में लगी SPG दुनिया के सबसे सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल में से एक को फालो करती है।

प्रधानमंत्री जब कार से यात्रा करते हैं, तो सुरक्षा “Blue Book” नामक गाइडलाइंस पर आधारित होती है, जो गृहमंत्रालय द्वारा जारी की गई है।

इसके तहत यात्रा से 3 दिन पहले SPG Advance Security Liaison (ASL) मीटिंग आयोजित करता है। इसमें Intelligence Bureau (IB), राज्य पुलिस और जिलाधिकारी आदि शामिल होते हैं।

प्रधानमंत्री जिस रूट से जाने वाले होते हैं उसे पूरी तरह सैनिटाइज किया जाता है, ब्रिज, नाले, भीड़भाड़ वाले इलाके आदि चेक होते हैं और रास्ते में पड़ने वाले घर घर , दुकान की तलाशी ली जाती है।

किसी अनहोनी को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक रूट,आपातकालीन योजना, प्रधानमंत्री के लिए सुरक्षित घर और अस्पताल पहले से तय होते हैं और यह एलर्ट मोड में रहते हैं।

चेतावनी देते हुए सायरन बजाती पायलट कार प्रधानमंत्री के काफिले से 10-15 मिनट आगे चलती है। राज्य पुलिस और लोकल फोर्स रूट क्लियर करती है और, ट्रैफिक कंट्रोल करके Sterile Zone बनाया जाता है जिससे कोई अनधिकृत व्यक्ति/वाहन काफिले में नहीं आ सकता , भले एंबुलेंस हो।

कुल मिलाकर दर्जनों Toyota Fortuner, Range Rover, BMW आदि वाहन में SPG कमांडो प्रधानमंत्री की कार के बहुत करीब रहते हैं। यहां तक कि NSG शार्पशूटर भी साथ होते हैं। जो किसी भी अनिधिकृत वाहन या व्यक्ति को पास आने की कोशिश में रोकते हैं या उड़ा देते हैं।

मगर इसकी ज़रूरत नहीं पड़ती क्योंकि Outer Security के तहत राज्य पुलिस और लोकल फोर्स ट्रैफिक कंट्रोल करते हैं और उस रूट पर किसी को नहीं जाने देते। रूट पर ट्रैफिक बैरियर लगाकर एक तरफ बंद कर दिया जाता है।

प्रधानमंत्री का काफिला इतनी तेज स्पीड से चलता है कि कोई भी बाहरी वाहन यहां तक कि एंबुलेंस भी सामान्य रूप से काफिले को पास नहीं कर सकती , इसे सुरक्षा breach माना जा सकता है।

फिर यह कौन सी एंबुलेंस है तो बिना सुरक्षा जांच और SPG की क्लियरेंस के हमारे प्रधानमंत्री तक 6 बार पहुंच चुकी है….

यह ग़लत है , इसकी जांच होनी चाहिए

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button