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चन्दौली का खनन निरीक्षक प्रदीप राज मौत का सौदागर, अवैध मिट्टी खनन से भर रहा अपने तिजोरी का गागर

नवागत शहाबगंज थाना प्रभारी कृपेंद्र प्रताप सिंह ने भी खड़े किए हाथ

  • अवैध लदे मिट्टी ट्रैक्टर और डंपर से कई मौतें और हो चुके हैं हादसा फिर भी संबंधित विभाग के अधिकारी कुम्भकरणीय निद्रा में सोए
  • शहाबगंज में अवैध खनन को लेकर बढ़ी शिकायतें, ग्रामीणों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
  • बिना परमिट वाहनों के संचालन और विभागीय निष्क्रियता के आरोपों से क्षेत्र में चर्चा तेज
  • भारत माला परियोजना की आड़ में अवैध मिट्टी खनन का खेल? शहाबगंज क्षेत्र में उठ रहे गंभीर सवाल
  • बिना परमिट और ओवरलोड वाहनों की शिकायतें, खनन विभाग ने जांच का दिया आश्वासन

चंदौली। शहाबगंज क्षेत्र में इन दिनों मिट्टी खनन और ओवरलोड डंपरों के संचालन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भारत माला परियोजना के नाम पर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर मिट्टी खनन किया जा रहा है तथा बड़ी संख्या में डंपरों के माध्यम से मिट्टी का परिवहन किया जा रहा है।सबसे बड़ी बात खनन निरीक्षक प्रदीप कुमार राज ही इस अवैध खनन का आका बन बैठा है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई बार ऐसे वाहन देखे गए हैं जिनके संबंध में स्थानीय स्तर पर वैध दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले में संबंधित विभागों द्वारा अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई जा रही है, जिससे अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।
लगातार सुर्खियों में शहाबगंज
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहाबगंज क्षेत्र पिछले कुछ समय से खनन गतिविधियों को लेकर लगातार चर्चा में रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिखाई दी। इससे लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कों पर दबाव बढ़ रहा है। कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त होने तथा दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

खनन विभाग ने जांच का दिया आश्वासन

जब इस विषय में खनन विभाग के अधिकारी प्रदीप कुमार राज से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है और शिकायतों की जांच कराई जाएगी। ये इस घूसखोर व बेईमान अधिकारी का तकिया कलाम है बाकी यही लुटेरा अवैध मिट्टी खनन का जिम्मेदार है।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में भी कई बार जांच और कार्रवाई की बात कही गई, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम देखने को नहीं मिले। इसी कारण लोगों में असंतोष बना हुआ है।

थाना प्रभारी शहाबगंज कृपेंद्र प्रताप सिंह ने क्या कहा

थाना प्रभारी कृपेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि भारत माला परियोजना से जुड़े डंपरों को ओवरलोडिंग न करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
जब क्षेत्र में कथित मिट्टी खनन और जेसीबी मशीनों के संचालन के संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस मामले में राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों की भी भूमिका है तथा संबंधित सक्षम अधिकारियों से संपर्क किया जाना चाहिए और आप उनसे कार्यवाही के लिए बात कर लीजिए।

ग्रामीणों की प्रमुख शिकायतें
ग्रामीणों द्वारा उठाए जा रहे प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं—

मिट्टी खनन की शिकायतें।
भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही।
ओवरलोड डंपरों से दुर्घटना की आशंका।
ग्रामीण सड़कों की क्षति।
पर्यावरणीय प्रभाव।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी।
पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंता
पर्यावरण से जुड़े जानकारों का कहना है कि अनियंत्रित मिट्टी खनन से भूमि कटान, जल संरक्षण व्यवस्था पर असर तथा कृषि भूमि को नुकसान पहुंच सकता है। यदि किसी क्षेत्र में निर्धारित मानकों का पालन किए बिना खुदाई की जाती है तो भविष्य में पर्यावरणीय चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि खनन गतिविधियों की नियमित निगरानी और समय-समय पर निरीक्षण आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।

सड़क सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा

स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की तेज रफ्तार आवाजाही के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल जाने वाले बच्चों, किसानों और आम राहगीरों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लोगों की मांग है कि परिवहन, खनन और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर वाहनों की जांच करें तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें।

संयुक्त जांच की मांग

सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, खनन विभाग, पुलिस विभाग तथा परिवहन विभाग से संयुक्त जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सभी विभाग मिलकर कार्रवाई करें तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

प्रशासन से अपेक्षाएं

स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें हैं—
क्षेत्र में विशेष जांच अभियान चलाया जाए।
खनन से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो।
ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की जाए।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
ग्रामीण सड़कों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन कराया जाए।

शहाबगंज क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर उठ रहे सवाल प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती के रूप में उभर रहे हैं। खनन विभाग ने जांच का आश्वासन दिया है और पुलिस ने ओवरलोड वाहनों पर निगरानी की बात कही है। अब क्षेत्र की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायतों की जांच कितनी जल्दी पूरी होती है और उसके आधार पर क्या कार्रवाई सामने आती है।
यदि शिकायतों में सच्चाई पाई जाती है तो संबंधित विभागों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई करें। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो प्रशासन को स्पष्ट रूप से स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि क्षेत्र में फैली आशंकाओं और चर्चाओं पर विराम लग सके।

यह मसौदा आरोपों को आरोप के रूप में प्रस्तुत करता है और बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करता, जिससे यह पत्रकारिता के मानकों के अधिक अनुरूप रहता है।

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