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‘देश के दुश्मन’ जॉर्ज सोरोस ने हरदीप पुरी की बेटी को 1600 करोड़ का नजराना,संघियो का खुल गया राष्ट्र प्रेम का फ़साना

कांग्रेस पर गद्दारी का आरोप लगाने वाली भाजपा के पास जवाब नहीं

– मामला 2010 से 2012 तक का, पैसा लेने कंपनी खोली गई
– सोरोस के प्रवक्ता ने माना कि हरदीप की बेटी हिमासनी की कंपनी ने ली फंडिंग
– पैसा लेने से पहले पिता हरदीप सिंह पुरी ने सोरोस के साथ किया था डिनर
– मार्च में राहुल गांधी ने लोकसभा में उठाना चाहा था यह मामला, अनुमति नहीं मिली थी

नई दिल्ली। भाजपा की केंद्र सरकार विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी पर लगातार यह आरोप लगाती है कि वह अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस से पैसा लेकर पीएम नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाती है, ताकि देश में लोकतंत्र को कमजोर किया जा सके। यहां तक कि संसद में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के भी कई मंत्रियों ने नेता प्रतिपख राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में संगीन आरोप लगाए। लेकिन अब एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि सोरोस से पैसा राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी ने नहीं, बल्कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी की बेटी ने लिया था।

आपको बता दें कि जॉर्ज सोरोस का एक ओपन सोसायटी फंड है। केंद्र की भाजपा सरकार का आरोप है कि पीएम मोदी पर निशाना साधने के लिए विपक्ष के राजनेता और जनसंगठन उसी फंड से पैसा लेते हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियों ने भी सरकार के इशारे पर कई जनसंगठनों पर छापे मारकर विदेशी फंडिंग से जुड़ी जानकारियां तलाशने की कोशिश की, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला।

सोरोस ने हरदीप पुरी की बेटी को सौंपा फंड

वेबसाइट न्यूजलॉन्ड्री ने अमेरिकी प्रतिभूति और एक्सचेंज आयोग में दाखिल जानकारियों और केमैन द्वीप के रजिस्ट्री रिकॉर्ड के आधार पर यह दावा किया है कि हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को जॉर्ज सोंरोस की फंड मैनेजमेंट कंपनी ने 200 मिलियन डॉलर, यानी 1600 करोड़ रुपए का फंड सौंपा था। यह पैसा फरवरी 2010 से सितंबर 2012 तक हिमायनी पुरी की उस कंपनी को मैनेजमेंट के लिए दिया गया था, जिसकी वह सह-संस्थापक थीं। इस खोजपूर्ण रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तब तक भाजपा ने विपक्ष पर सोरोस फंड से पैसा लेने के आरोप नहीं लगाए थे। जॉर्ज सोरोस के प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की है कि हिमायनी पुरी को इतनी बड़ी रकम सौंपे जाने की बात तो तो पिता हरदीप पुरी और न ही उनकी बेटी ने कभी सार्वजनिक रूप से कबूली है। इसी साल मार्च में जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को संसद में उठाना चाहा तो लोकसभा के सभापति ने इसकी इजाजत नहीं दी और भारी हंगामे के बीच राहुल गांधी के भाषण में काट-छांट की गई। हालांकि, भाजपा ने इस मामले में अभी तक आधिकारिक रूप से अपना मुंह नहीं खोला है।

इस तरह लिया गया फंड

लेहमैन ब्रदर्स की कंपनी में काम कर चुकीं हिमाचनी पुरी ने जनवरी 2009 में रॉबर्ट मिलार्ड और एंथनी स्टोन के साथ मिलकर एक हेज फंड खोला। इसका नाम रीम पार्टनर्स रखा गया और इसके दफ्तर देलावेयर और केमैन द्वीप में खोले गए। यह फंड केवल रजिस्टर्ड खरीदारों से ही पैसा लेता था। इसके लिए फर्म को 50 लाख डॉलर का न्यूनतम निवेश करने की जरूरत होती है। हेज फंड में तीन में से प्रत्येक हिस्सेदार का हिस्सा 25 से 50 फीसदी तक था। फर्म खोलने के बाद तीनों पार्टनरों ने 74 निवेशकों से 441 मिलियन डॉलर का निवेश हासिल किया। इसमें से दो-तिहाई निवेश अमेरिका के बाहर से आया। एक समय है फर्म के पास 667 मिलियन डॉलर से ज्यादा पैसा था, जो कि अमेरिका में रजिस्टर्ड कंपनियों के पास से आया। फरवरी 2013 में कंपनी ने निवेश लेना बंद कर दिया और 2015 में पूरी कंपनी ही बंद हो गई। हिमायनी पुरी और उनके दोनों पार्टनरों के बनाए इस फंड को पैसा देने वालों में जॉर्ज सोरोस भी शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया है कि सोरोस की कंपनी ने 2010 से 2011 के बीच जिन 13 पोर्टफोलियो को मैनेजमेंट के लिए चुना था, उनमें रीम पार्टनर्स भी एक था।

प्रवक्ता ने पैसा देने की बात मानी

जॉर्ज सोरोस के प्रवक्ता माइकल वैकन ने न्यूजलॉन्ड्री से बात करते हुए माना कि
उनकी कंपनी के पास उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में यह पाया गया है कि फरवरी 2010 से सितंबर 2012 तक रीम पार्टनर्स ने पैसा लिाय। सोरोस की कंपनी से रीम पार्टनर्स को 200 मिलियन डॉलर दिए गए। सोरोस ने 2012 में वह पैसा वापस ले लिया। हरदीप सिंह पुरी ने सार्वजनिक रूप से यह माना है कि उन्होंने अक्तूबर 2009 में न्यूयॉर्क में जॉर्ज सोरोस से रात्रिभोज में एक ही बार मुलाकात की थी। अब अमेरिकी प्रतिभूति और एक्सचेंज आयोग की जानकारी कहती है कि इस मुलाकात के दो महीने बाद ही सोरोस की फर्म ने हिमायनी पुरी की कंपनी को पैसा दिया। हालांकि, हरदीप पुरी की सोरोस से मुलाकात का इस फंडिंग से संबंध के बारे में अभी कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं, लेकिन पिता की मुलाकात के दो महीने बाद ही फंडिंग मिलने से यह इशारा मिलता है कि कहीं न कहीं बातचीत में यह मुद्दा तो रहा ही होगा।

कथनी और करनी में अंतर

यह रिपोर्ट इसलिए भी बेहद अहम हो जाती है क्योंकि सत्ताधारी पार्टी का सोरोस को लेकर रुख हमेशा बेहद आक्रामक रहा है। मार्च महीने में ही भाजपा ने संसद भवन में सोरोस से कथित संबंधों को लेकर कांग्रेस पार्टी के खिलाफ पोस्टर लहराए थे और विरोध मार्च निकाला था। पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने उन तमाम सिविल सोसाइटी संगठनों पर ताबड़तोड़ छापे मारे हैं, जिन्हें सोरोस की ‘ओपन सोसायटी फाउंडेशन्स’ से किसी भी प्रकार की फंडिंग मिली थी। भाजपा का आधिकारिक संदेश हमेशा यही रहा है कि जॉर्ज सोरोस भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देने वाले एक खतरनाक विदेशी एजेंट हैं।

विवादित कंटेंट का मामला सिंगल बेंच को

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया, जिसमें हरदीप पुरी और उनकी बेटी हिमायनी पुरी से यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन के संबंधों को लेकर सोशल मीडिया कंटेंट हटाने पर आपत्ति जताई गई थी। हाईकोर्ट की ही सिंगल जज बेंच ने 17 मार्च को ऐसे कंटेंट को हटाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने याचिका को सुनने से इनकार करते हुए कहा कि बेहतर होगा कि याचिकाकर्ता उसी सिंगल बेंच जज को आवेदन देकर उन्हें अपने आदेश पर रोक लगाने के लिए मामले को दोबारा सुनने की अपील करें। हाईकोर्ट ने जज से अपील पर 23 अप्रैल को सुनवाई करने का आग्रह किया है।

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