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उत्तर प्रदेश में कटे भाजपाइयों के वोट,एसआईआर ने भगवा ब्रिगेड को दे दी करारी चोट

– काटना था वोट विपक्ष के, चुनाव आयोग ने काटे भाजपा के; अब बूथ स्तर पर जारी मंथन, योगी से लेकर मायावती तक कर       रहे चिंतन
– यूपी की 13 फीसदी से ज्यादा आबादी वोटर लिस्ट से बाहर
– 2 करोड़ नाम काटे और 84 लाख नए जोड़े, फर्स्ट टाइमर बढ़े
– 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले भाजपा के 15%, तो सपा-कांग्रेस के 12% वोट कटे
– वाराणसी कैंट इलाके में 20 फीसदी वोटरों के नाम लिस्ट में गायब

नई दिल्ली/लखनऊ। देश के 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) का काम पूरा हो गया है। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटरों की संख्या 58.87 करोड़ से घटकर अब 53.28 करोड़ रह गई है। राज्य में SIR के प्रकाशित अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, 2 करोड़ 5 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, जबकि एसआईआर के दौरान 84 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े भी गए हैं।

यूपी देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, जहां की 13.23 प्रतिशत आबादी वोटर लिस्ट से बाहर हो गई है। इन सभी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट डाला था। यूपी में SIR की प्रक्रिया में दो बातें प्रमुख रूप से सामने आई हैं- पहला यह कि प्रदेश में पहली बार वोट डालने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके कारण राज्य में नए नाम जोड़ने की जरूरत नहीं है। दूसरी बात यह है कि जैसा कि माना जा रहा था कि यूपी में बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या नाममात्र की है और इसीलिए इस बार की प्रक्रिया में घुसपैठियों के नाम हटाने काम काम बहुत कम हुआ है।

सबसे ज्यादा भाजपा वोटरों के नाम कटे

उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक्सरसाइज के बाद फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश हो गई है। नई वोटर लिस्ट के विश्लेषण के अनुसार समाजवादी पार्टी की तुलना में भाजपा के प्रभाव वाले लोकसभा क्षेत्रों में अधिक वोटर कम हुए हैं। भाजपा के पांच सबसे जाने-माने चेहरों के लोकसभा क्षेत्रों में वोटरों की संख्या में सपा के यादव परिवार और कांग्रेस के गांधी परिवार के गढ़ की तुलना में ज़्यादा कटौती दर्ज की गई। गोरखपुर और महाराजगंज को छोड़कर उत्तर प्रदेश के ज़्यादातर हाई-प्रोफाइल संसदीय क्षेत्रों के विधानसभा क्षेत्रों में 2022 के विधानसभा चुनावों में जीत के औसत मार्जिन से ज़्यादा नामों की कटौती हुई है। भाजपा की पांच सीटों पर औसत 15.28 फीसदी (2022 के वोटर लिस्ट की तुलना में) नाम कटे। जबकि सपा की पांच सीटों पर 12.06 फीसदी नाम हटाए गए हैं। वहीं कांग्रेस के दो निर्वाचन क्षेत्रों में औसत 12.1% नामों की कमी दर्ज की गई।

यूपी में 16.12 करोड़ युवा वोटर

साल 2024 के चुनाव में उत्तरप्रदेश में 15.44 करोड़ पंजीकृत वोटर थे, जबकि 18 साल की उम्र पार कर चुके वोटरों की संख्या 15.58 करोड़ थी। लेकिन SIR की प्रक्रिया के बाद अब यूपी में वोटरों की संख्या 13.40 करोड़ है। इनके अलावा 18 साल से अधिक उम्र के 16.12 करोड़ युवा वोटर हैं, जो पहली बार वोटिंग करेंगे। इस तरह यूपी में केवल 83% ही ऐसे वयस्क लोग हैं, जिन्हें वोटर माना जा सकता है। ऐसे में राज्य में मनाधिकार के लायक वयस्क आबादी और पंजीकृत वोटरों की संख्या में 17% का अंतर है। SIR की प्रक्रिया के बाद राज्य में लिंग दर बिगड़ गया है। अब यह 943 पुरुषों के मुकाबले 834 के स्तर पर है।

बूथ वार मंथन शुरू

वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में 2009 के बाद पांच विधानसभा क्षेत्रों में 15.63% नामों की कटौती हुई। वाराणसी संसदीय सीट के अंदर वाराणसी कैंट विधानसभा क्षेत्र भी आता है। यहां 19.87% नामों की कटौती हुई। 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को इस क्षेत्र में 58,277 वोटों की भारी बढ़त मिली थी। एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपने वोट अपने गृह गांवों में ट्रांसफर कर दिए। सियासी नजरिए से देखें तो वोटों में आने वाली यह कमी हार-जीत का गणित बिगाड़ सकती है। लिहाजा सूची आते ही प्रमुख राजनैतिक दलों ने मंथन शुरू कर दिया है तो क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को भी दौड़ा दिया है। सबसे पहले इन क्षेत्रों में देखा जा रहा है कि कितने वोट कट गए हैं तथा इनमें से अगर कोई मतदाता क्षेत्र में है तो उनका वोट बनवाया जा सके। इसके साथ में यह भी देखा जा रहा है कि बूथ पर कुल कम होने वाले वोटों में विपक्षी पार्टी से जुड़े कितने वोट हैं, ताकि पार्टी द्वारा रणनीति बनाई जा सके।

सपा की पांच सीटों पर 12 प्रतिशत वोट कटे

लखनऊ लोकसभा सीट के अंतर्गत पांच विधानसभा आते हैं और यहां औसतन 28.73% वोटर कम हुए। सबसे ज़्यादा 34.18% नाम लखनऊ कैंट में कटे। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक इस सीट से बीजेपी विधायक हैं। बीजेपी ने लगातार नौ चुनाव जीते हैं और लखनऊ को पार्टी का गढ़ माना जाता है। यहां ऊंची जाति और शिया मुस्लिम वोटरों की अच्छी-खासी आबादी है। बांसगांव में औसत 12.32%, महाराजगंज में 10.04% और गोरखपुर में 9.71% नाम हटाए गए हैं। गोरखपुर लोकसभा सीट के पांच विधासनभा क्षेत्रों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर शहरी क्षेत्र में सबसे 6.88 फीसदी नाम कटे। सपा के यादव परिवार की सीटों में अध्यक्ष अखिलेश यादव कन्नौज से सांसद हैं, जबकि उनकी पत्नी डिंपल यादव मैनपुरी से सांसद हैं। वहीं अखिलेश के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव आजमगढ़, अक्षय यादव फिरोजाबाद से और आदित्य यादव बदायूं से सांसद हैं। इन सीटों पर यादव वोटर्स का दबदबा है और यहां मुस्लिम आबादी भी काफी है। इन पांच सीटों पर औसत 12.06 फीसदी वोटर कम हुए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा 16.65 फीसदी औसत नाम बदायूं में कम हुए। उसके बाद कन्नौज आंकड़ा 14.47 फीसदी है। कन्नौज का छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र भाजपा ने 2022 के चुनावों में 1,111 वोटों के मामूली अंतर से जीता था, वहां 20.6% वोटर कम हुए। सपा ने 1999 से कन्नौज लोकसभा सीट छह बार जीती है।

काटे गए वोटरों की सूची दें: सपा

समाजवादी पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन देकर मांग की है कि नो-मैपिंग तथा लॉजिकल एरर के 3,50,436 मतदाता जिनको सुनवाई अधिकारी ने अपने फैसले में अयोग्य मतदाता घोषित कर दिया है, उनकी सूची दी जाए। ऐसे मतदाताओं को डीएम के यहां अपील करने की अंतिम समय सीमा 25 अप्रैल 2026 से 15 दिन और आगे तक बढ़ाई जाए, जिससे अपील के माध्यम से पात्र मतदाता बनकर आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान कर सके। ज्ञापन में कहा गया कि ऐसे मतदाता 2003 से पहले और उसके बाद से अभी तक मतदान करते आ रहे हैं। यह सभी वैध मतदाता है और भारत के नागरिक हैं। नो-मैपिंग तथा लॉजिकल एरर के मतदाताओं को सुनवाई में अयोग्य मतदाता घोषित करने के फैसले की जानकारी कारण सहित मतदाताओं को उपलब्ध नहीं कराई गयी है। ज्ञापन देने वालों में केके श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चंद्र सिंह और राधेश्याम सिंह शामिल थे।

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