
-भारत ने दोगुनी कीमत पर खरीदा 25 लाख टन यूरिया, आयात बिल में भारी इजाफा, अब 29 के बाद 30 रुपए तक बढ़ेंगी तेल की कीमतें
– जैसे ही चुनाव खत्म होगा, महंगाई में होगा चौतरफा इजाफा
– बीते साल 1 करोड़ टन यूरिया आया था, इस साल एक-तिहाई में ही पसीना छूटा
– तेल के दाम बढ़ने भारत का बिल बढ़कर 220 मिलियन डॉलर तक पहुंचा
– पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही खाने लगेगी महंगाई डायन
नई दिल्ली। आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए भारत एक ही टेंडर में दोगुनी कीमत पर 25 लाख टन यूरिया खरीदेगा। सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह फैसला ईरान-अमेरिका-इजरायल की जंग को देखते हुए सप्लाई लाइन प्रभावित होने को देखते हुए लिया गया है।
युद्ध से पहले यूरिया की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 490 डॉलर प्रति टन थी। लेकिन अब जो यूरिया भारत खरीदने जा रहा है, उसकी कीमत 940 डॉलर प्रति टन की पड़ रही है, यानी दोगुनी। भारत सरकार की कंपनी इंडियन पोटाश लि. ने दो महीने पहले इसी कीमत पर यूरिया की बुकिंग की है। बताया जाता है कि इंडियन पोटाश ने पहले 1.5 लाख टन यूरिया खरीदने के लिए भुगतान किया था, लेकिन बाद में मात्रा बढ़ाकर ढाई लाख टन कर दी गई। यूरिया खरीदने के लिए भारत को अब जो कीमत चुकानी पड़ रही है, वह देश के कुल यूरिया आयात का एक-तिहाई है। सप्लाई चेन प्रभावित होने से भारत का कच्चा तेल आयात अभी से 137 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। अब यूरिया की दोगुनी कीमत अदा करने से देश के व्यापार घाटे का खाई और चौड़ी होने की उम्मीद की जा रही है।

दुनिया का सबसे बड़ा आयातक है भारत
भारत यूरिया का दुनिया में सबसे बड़ा आयातक है। भारत ने इसी माह की शुरुआत में 25 लाख टन यूरिया मंगाने का ऑर्डर दिया था। भारत ने बीते साल 2025 में 1 करोड़ टन यूरिया का आयात किया था। सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत सरकार के टेंडर पर सबसे कम बोली 935 डॉलर प्रति टन की रही, जिसमें पश्चिमी तट तक का परिवहन भाड़ा भी शामिल है। लेकिन पूर्वी तट तक पहुंचाने का भाव 959 डॉलर प्रति टन लगाया गया। बाकी सभी निविदाएं 1000 डॉलर प्रति टन से ऊपर की रहीं। निविदा की शर्तों के अनुसार, सप्लायरों को समूचा ढाई लाख टन यूरिया 14 जून तक रवाना करना होगा। यह समयसीमा इसलिए दी गई है, क्योंकि उसके बाद से देश में मॉनसून का सीजन शुरू हो जाएगा। इससे पहले राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स ने पश्चिमी तट पर 508 डॉलर और पूर्वी तट पर 512 डॉलर प्रति टन के हिसाब से यूरिया मंगाया था। अब आयात की लागत बढ़ने खाद की सब्सिडी के बिल में भी इजाफा होना तय है। केंद्र सरकार उर्वरक कंपनियों को इसी सब्सिडी फंड में से घाटे की भरपाई करती है। बताया जाता है कि भारत जैसी बड़ी इकोनमी के पास दोगुने भाव के इस घाटे को सहने की क्षमता है। लेकिन पाकिस्तान, बांग्लादेश और सब-सहारा अफ्रीका के देश इतना महंगा यूरिया नहीं खरीद सकते। ऐसे में दुनिया के कई विकासशील देशों में इस साल खाद्यान्न संकट आना निश्चित है।
30 रुपए तक बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
कोटक महिंद्रा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने गुरुवार को बताया कि आगामी पांच राज्यों में 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव खत्म होते ही कभी भी पेट्रोल-डीजल के दाम में 30 रुपए तक का इजाफा हो सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि खाड़ी में ईरान के साथ जंग के कारण तेल विपणन कंपनियों को हर महीने 270 बिलियन का घाटा उठाना पड़ रहा है, क्योंकि सप्लाई लाइन बंद पड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं। सरकारी सूत्रों का कहना है कि तेज कंपनियों को जिस भाव पर कच्चा तेल पड़ रहा है और जिस कीमत पर लोगों को पेट्रोल पंपों पर तेल मिल रहा है, उसमें जमीन-आसमान का फर्क है। ऐसे में न तो तेल कंपनियां और न ही केंद्र सरकार इतना बड़ा बोझ लंबे समय तक झेल सकती है। इसीलिए सरकार के लिए दाम बढ़ाना एक मजबूरी है। बीते दिनों केंद्र सरकार ने लोगों को कच्चे तेल के बढ़ते दाम से राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को 10 रुपए प्रति लीटर घटा दिया था। लेकिन उसका फायदा उपभोक्ताओं को नहीं मिला, लेकिन तेल कंपनियों को जरूर राहत मिली।
हॉर्मूज ने रास्ता रोका
अंतरराष्ट्रीय आजार में कच्चे तेल के दाम इसलिए बढ़े हुए हैं, क्योंकि तेल उत्पादक देशों से आने वाले रास्ते में हॉर्मूज जलडमरूमध्य अभी पूरी तरह से बंद है। ईरान के हमलों के बीच तेल कंपनियां अपने जहाजों को वहां भेजने में जोखिम को देखते हुए ज्यादा पैसा मांग रही हैं। इससे दुनियाभर में तेल की आपूर्ति कम हो गई है। कोटक का यह भी कहना है कि तेल के वायदा भाव और बाजार भाव में अंतर से यह साफ है कि आपूर्ति में अभी भी रुकावट बनी हुई है और यह अभी आने वाले समय में भी बनी रहेगी। इस संकट से भारत में तेल का आयात 15 फीसदी तक कम हुआ है। भारत में तेल का आयात बिल मार्च-अप्रैल के दौरान 210 मिलियन डॉलर प्रतिदिन तक आ पहुंचा है।
कीमतें और भी बढ़ सकती हैं
कोटक ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 28 से 30 रुपए तक की बढ़ोतरी का अनुमान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के आधार पर लगाई है। लेकिन उसका यह भी कहना है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट और भी गहराया तो तेल की कीमतें इससे भी अधिक हो सकती हैं। भारत में अभी पेट्रोल 94-96 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। अगर सरकार 29 अप्रैल या उसके बाद पेट्रोल-डीजल के दाम 120 रुपए प्रति लीटर बढ़ाती है तो महंगाई भी चौतरफा बढ़ेगी। ऐसे में भारत में तमाम जरूरी चीजों की कीमतों में इजाफा हो सकता है, क्योंकि परिवहन भाड़ा बढ़ जाएगा। इससे ऑटोमोइल सेक्टर में मांग में कमी आने और ग्रामीण स्तर पर उपभोक्ताओं के खर्च में कटौती से भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट पैदा होने की आशंका है। पड़ोसी देशों के मुकाबले भारत में सबसे सस्ता पेट्रोल भारत में है। नेपाल में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 137.12 रुपये तक पहुंच गई है। बंग्लादेश में भी पेट्रोल 106.85 रुपये लीटर है। जबकि, म्यांमार में 147.54 रुपये। भूटान में पेट्रोल 102.78 रुपये लीटर पर पहुंच गया है। पाकिस्तान में 123.05 और चीन में 131.13 रुपये लीटर है। श्रीलंका में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 134.60 रुपये पर पहुंच गई है।




