देश मे मोदी सरकार ने शिक्षा प्रणाली का कर दिया कबाड़ा,युवाओ के भविष्य का निकाल दिया दिवाला
NEET के बाद अब CBSE परीक्षा में गड़बड़ी- ‘’अपने’’ को ठेका दिलाने के लिए हजारों छात्रों का कर दिया बेड़ा गर्क, अब पोल खुली तो शिक्षा मंत्री लगे हांफने

– ठेके की दौड़ में थी टाटा कंसल्टेंसी सर्विस, लेकिन ठेका नहीं मिला
– भाजपा की करीबी कोएंप्ट एजुटेक प्रा. लि. को मिले ठेके को छिपाया
– 2019 में 20 बच्चों की जान ले चुकी है कोएंप्ट एजुटेक
– न ट्रायल, न पायलट- दो महीने में लागू कर दिया ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के बाद भारत की सबसे बड़ी परीक्षा एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला कॉपियों की जांच से जुड़ा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए सीधे आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने बिना पारदर्शिता बरते और ट्रायल किए बिना हैदराबाद की कंपनी कोएंप्ट एजुटेक प्रा. लि. को बच्चों की कॉपियां जांचने का ठेका दे दिया। अब 90 से 95% स्कोर करने वाले बच्चों को भी 10वीं और 12वीं में 40 और 50 के बीच नंबर आए हैं।
नीट पेपर लीक की तरह फिलहाल हजारों बच्चे अपने परिजनों के साथ इस धांधली के खिलाफ सड़कों पर हैं। सोशल मीडिया पर बच्चे दोबारा जांच के बाद भी अपने परचों को सार्वजजनिक कर रहे हैं। उनका दावा है कि सीबीएसई बोर्ड से मिल रहा रीवैल्यूएशन का परचा उनका है ही नहीं। जिन बच्चों को उनके मूल परर्च जांच के बाद मिले हैं, उनका कहना है कि उनके द्वारा लिखे सवालों को बिना जांचे छोड़ दिया गया है, या फिर नंबर कम दिए गए हैं।


कैसे हुई यह सारी गफलत?
सबसे पहली बात तो यह कि राहुल गांधी ने कोएंप्ट एजुटेक प्रा. लि. के प्रबंधन पर भाजपा से जुड़े होने का आरोप लगाया है और इसके बाद से ही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार बैकफुट पर है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल के आरोपों को सिरे से खारजि तो किया है, लेकिन गुरुवार को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की नीट पेपर लीक और सीबीएसई एक्जाम को लेकर दिल्ली में की गई बैठक यह बताती है कि सरकार डैमेज कंट्रोल में जुट गई है, क्योंकि छात्रों का गुस्सा अब बढ़ता ही जा रहा है। जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार से गफलत तो हुई है, क्योंकि सीबीएसई ने बिना जांचे-परखे ही ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लागू कर दिया, जिसमें बच्चों की आंसर शीट को मूल्याकंन केंद्रों से स्कैन्ड कॉपी के तौर पर बच्चों को अब ऑनलाइन उपलब्ध कराने का नया सिस्टम लागू किया गया है। सीबीएसई का दावा था कि इस नए सिस्टम से मानवीय भूल खत्म होगी, टोटल करने में गलतियां भी कम होंगी और बच्चों को रिजल्ट जल्दी मिलेगा। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को लागू करते हुए सीबीएसई ने पारदर्शिता और काबिलियत को ध्यान में नहीं रखा और अब राहुल गांधी का आरोप है कि ऐसा इसलिए भी किया गया, क्योंकि सरकार को अपने चहेते को ठेका देना था।


सीबीएसई ने कंपनी का नाम जाहिर नहीं किया
ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के लिए सीबीएसई ने नवंबर 2025 में निविदा जारी की थी। दो कंपनियों- कोएंप्ट एजुटेक प्रा. लि. और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने तकनीकी योग्यता की शर्तों का पालन किया था। सीबीएसई ने आज तक यह नहीं बताया कि आखिर किस कंपनी को ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का ठेका मिला और यह भी नहीं बताया गया कि आखिर सरकार को कोएंप्ट एजुटेक प्रा. लि. में ऐसी क्या खूबी दिखी कि ठेका उसे ही दिया गया। असल में केंद्र सरकार ने कोएंप्ट एजुटेक प्रा. लि. का नाम इसलिए छिपाया, क्योंकि 2019 में तेलंगाना की इंटर परीक्षा के दौरान कोएंप्ट एजुटेक प्रा. लि. की पुरानी कंपनी ग्लोबारेना टेक्नोलॉजीस प्रा. लि. लाखों बच्चों का रिजल्टी जारी करते समय गंभीर गलतियां की थीं। इसका नतीजा यह हुआ कि उसी साल करीब 20 बच्चों ने राज्य में खुदकुशी कर ली। उस समय कंपनी के सीईओ वीएसएन राजू के भाजपा से तगड़े कनेक्शन थे तो वे बच गए। उन्होंने बाद में एक बयान में कहा कि परीक्षा के दौराप ऐसी छोटी-मोटी घटनाएं तो हर साल होती ही रहती हैं। इन पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। अब सवाल यह उठता है कि इतनी दागदार कंपनी को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई जैसी देशव्यापी बड़ी परीक्षा के मूल्यांकन का ठेका क्यों दिया? दूसरा सवाल सीबीएसई की हड़बड़ी से जुड़ा है। नवंबर 2025 में ठेका बांटने के बाद फरवरी में सीबीएसई ने ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को देशभर में लागू करने का ऐलान कर दिया। बताया जाता है कि सीबीएसई की संचालन समिति के सदस्यों ने इस सिस्टम का देश के कुछ हिस्सों में ट्रायल करने और इसे पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने की सलाह दी थी, लेकिन बोर्ड ने इसे अनदेखा कर दिया। दिल्ली में केवल 100 शिक्षकों के बीच जनवरी में इस सिस्टम का छोटा साल पायलट किया गया था और उसके अगले ही महीने सिस्टम को पूरे देश में लागू कर दिया गया। बोर्ड ने फरवरी में दो लाख शिक्षकों को नए सिस्टम की ट्रेनिंग दी। ट्रेनिंग में ही शिक्षकों ने सिस्टम की खामियों और इसके उपयोग में आ रहीं कठिनाइयों की शिकायत की। फिर भी सीबीएसई ने उन्हें अनसुना कर दिया।
हैकर ने उसी समय दी थी चेतावनी
निसर्ग अधिकारी नाम के एक एथिकल हैकर ने उसी समय ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के आसानी से हैक होने की चेतावनी दी थी। उसने कहा कि इस सिस्टम में ओटीपी से बचा जा सकता है। पासवर्ड रीसेट किए जा सकते हैं, परीक्षा में बैठे बच्चे के आंसर शीट की नकल उतारी जा सकती है और उसे मिले नंबर भी बदले जा सकते हैं। निसर्ग का दावा है कि उसने उसी समय CERT- India नाम से देश के आपातकालीन रिस्पांस टीम को ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की कमजोरियों के बारे में बता दिया था। अब निसर्ग ने सीबीएसई परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद अपने ब्लॉग में इन कमजोरियों पर काफी कुछ लिखा है। लेकिन सीबीएसई ने यह कहकर निसर्ग के दावों को ठुकरा दिया कि उसने जिस कोड के सहारे ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की हैकिंग की है, वह कोड तो टेस्टिंग के दौरान उपयोग में लाया गया था। इतना सब होने के बाद भी सीबीएसई ने अभी तक ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में गड़बड़ी की जांच का ऐलान नहीं किया है। हालांकि, सीबीएसई 12वीं के रिजल्ट जारी होने के बाद से ही देशभर में शिकायतों की बाढ़ आ गई है।
अकाउंट्स में आए 47, मूल परचे में 92
भोपाल में 12वीं के स्टूडेंट जलज जैन ने बोर्ड की परीक्षा में अकाउंट्स सब्जेक्ट मंं 92 अंकों की उम्मीद की थी। लेकिन रिजल्ट में उसे केवल 47 नंबर मिले। उसने जब आंसर शीट मांगी तो उसके बजाय किसी और की आंसर शीट सीबीएसई ने भेज दी। हेल्पलाइन से भी कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद जलज तपती दोपहरी में सीबीएसई के भोपाल स्थित रीजनल ऑफिस गया और मूल आंसर शीट प्राप्त की। अब उसे 100 में से 92 अंक मिले हैं। मूल आंसर शीट में उसे यह देखकर हैरानी हुई कि प्रश्न संख्या 20 और 33 को जांचा भी नहीं गया और परीक्षक ने उसे खाली मान लिया।सीबीएसई का परसेंट गिरा
12वीं बोर्ड का रिजल्ट आने पर सीबीएसई का पास परसेंट पिछले साल के मुकाबले 3% गिरा है, क्योंकि फिजिक्स और केमिस्ट्री में हजारों बच्चों को कम नंबर मिले हैं। मोक्ष ने रिजल्ट में 80 में से 33 नंबर देखकर मूल आंसर शीट के लिए अप्लाई किया। वहीं संजना को भी किसी और की आंसर शीट मिली। फिर सोशल मीडिया पर वेदांत नाम के बच्चे ने बताया कि फिजिक्स की उसकी आंसर शीट किसी और की है। बाद में सीबीएसई ने भी गलती मानी और सही आंसर शीट भेजी, जिसके बाद वेदांत के नंबर भी बदल गए। अब युवाओं का कहना है कि आंसर शीट के लिए पैसा लेने के बाद भी सीबीएसई गलत आंसर शीट दे रहा है। हजारों बच्चों ने तो आंसर शीट भी नहीं मांगी, जिन्हें कम नंबर मिले। अब न तो उन्हें कॉलेज में एडमिशन मिलेगा और न ही वे प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठ पाएंगे। इस तरह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के हजारों बच्चों का पूरा साल ही खराब कर दिया है।




