Newsई-पेपरउत्तर प्रदेशलखनऊ

योगिराज में जल जीवन मिशन मिशन में 254 करोड़ को गोल – माल,सीएम बस भ्र्ष्टाचार पर बजाते रहे गाल

यूपी में जल जीवन मिशन का हाल- 230 गांवों में देना था पीने का पानी, आधा काम छोड़कर पूरा पैसा डकारकर भागी कंपनियां, अभी प्यासे खड़े सैंकड़ों गांव

  •  शामली जिले का है मामला, काम अधूरा छोड़ा पर पैसे पूरे बंट गए
  •  कहीं पाइपें बिछीं तो कहीं टंकियां ही नहीं बनीं, काम भी घटिया निकला
  •  डीएम ने जांच बिठाई, नोटिस का जवाब नहीं दे रही हैं कंपनियां
  •  जल जीवन मिशन में केंद्र को मिली यूपी से 86 फीसदी शिकायतें
  •  बिना थर्ड पार्टी जांच कराए भुगतान कर दिया, माने पैसों का खुला खेल

लखनऊ। केंद्र सरकार के बेहद महत्वाकांछी जल जीवन मिशन के अमल में लावरवाही और भ्रष्टाचार का एक और मामला यूपी के शामली से आया है। यहां 230 गांवों में नल से पीने के पानी की सप्लाई के लिए आगे आई दो कंपनियां 254 करोड़ रुपए की रकम डकारकर फरार हो गई हैं। दोनों कंपनियों को पानी की ओवरहेड टंकियां बनानी थीं। लेकिन चार साल में इन कंपनियों ने केवल 56 गांवों में ही टंकियां बनाईं और अब वे गायब हो गई हैं। इन टंकियों के लिए यूपी सरकार ने 254 करोड़ रुपए भी जारी किए थे, लेकिन कंपनियों के ही गायब होने से अब आम जनता की गाढ़ी कमाई के रुपए भी डूबते दिख रहे हैं। जिस कलेक्टर ने इस संबंध में जांच बिठा दी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मिशन के तहत जिन 174 गांवों में पानी की ओवरहेड टंकियां बन नहीं पाई हैं, उनका क्या होगा। आपको बता दें कि जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार के पास पहुंची 1879 शिकायतों में से 586 फीसदी शिकायतें केवल यूपी की हैं। इसके बावजूद लापरवाही का यह अलम है कि न तो योजना के अमल पर किसी का ध्यान है और न ही ठेकेदार कंपनियों के भ्रष्टाचार की कोई सुध लेने वाला है।

आधा बजट घपले की भेंट चढ़ा

शामली में जल जीवन मिशन का यह प्रोजेक्ट 2022 में शुरू हुआ था। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 500 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था। इसमें से 254 करोड़ रुपए का बजट जारी भी हो चुका है। इस पर भी आरोपी दोनों कंपनियों ने कम की गुणवत्ता इस कदर हल्की की है कि उनके द्वारा बनाई गईं ओवरहेड टंकियां अभी जर्जर होने लगी हैं। चूंकि दोनों कंपनियों को काम पूरा होने से पहले ही पैसा आवंटित कर दिया गया है, इससे सरकारी विभाग में भी करप्शन की आशंका पक्की हो जाती है। जल जीवन मिशन में यह प्रावधान हैं कि सभी नल जल कनेक्शनों को आधार से जोड़ा जाता है और परिसंपत्तियों की जियो टैगिंग की जाती है। भुगतान से पहले एजेंसियां निर्माण कार्य, उपयोग की गई सामग्री और मशीनरी की जांच करती हैं। ऐसे में अब सवाल उठता है कि किन एजेंसियों ने निर्माण कार्यों की जांच की और उन्हें प्रमाणित किस आधार पर किया, जबकि या तो वे पूरी ही नहीं हुईं या फिर उनका निर्माण घटिया हुआ है। इससे मामले में पैसे का लेन-देन व्यापक होने की आशंका और गहरा जाती है।

डीएम ने तलब किया ब्योरा, दिए सख्त निर्देश

डीएम अरविंद कुमार चौहान ने सवाल उठाया है कि जब 500 करोड़ में से 254 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं तो निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हुआ। दोषी कंपनियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जल निगम के कार्यपालन इंजीनियर फूल कुमार का कहना है कि ठेका लेने वाली दोनों कंपनियों जेएमसी लक्ष्मी और गायत्री को कई बार नोटिस जारी करने के बाद भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है। अब सवाल यह है कि अगर डीएम के कहने पर सरकार बाकी के 714 गांवों में दोाबारा काम शुरू करती है तो उसका पैसा कहा से आएगा। कंपनियों को दोबारा नोटिस जारी करने का अब कोई मतलब नहीं है। बेहतर है कि उनसे वसूली की जाए। गिरफ्तारियां हों। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कंपनियों को राजनीतिक संरक्षण होने के डर से विभाग भी पुलिस कार्रवाई करने से बच रहे हैं।

लोगों को हो रही है परेशानी

गांवों का आलम यह है कि आरोपी कंपनियों ने जहां-तहां पाइपलाइन डालने के लिए सड़कों को खोद रखा है। लंबे समय से काम पूरा न होने के कारण वहां अब गड्ढे हो गए हैं। लोगों का पैदल चलना तक दूभर हो गया है। उन्हीं सड़कों पर वाहन चलाते समय हादसों का खतरा बना हुआ है। अगले 3 महीने में बरसात के दौरान हालत और खस्ता हो जाएगी। ठेकेदार कंपनियों ने मजदूरों का भुगतान भी नहीं किया है, जिससे वे काम करना नहीं चाहते। कुछ गांवों में पानी की पाइपें बिछी हैं तो उनमें भी रिसाव हो रहा है, वहीं कुछ अन्य गांवों में जहां पाइपें तो बिछ गई हैं, लेकिन पानी की ओवरहेड टंकी नहीं बनने से नलों में पानी नहीं आ रहा है। कैराना, गढ़ीपुख्ता, कांधला, थानाभवन, चौसाना, बिडौली, बाबरी क्षेत्र में भी कार्य अधूरा पड़ा है।

इन गांवों में पूरा हुआ काम

आदमपुर, अहाता गोसगढ़, असदपुर, औरंगाबाद, बाबरी, बाधुपुरा, बहावड़ी, बरनावी, बरखंडी, भैंसवाल, भैंसानी, भनेड़ा, भारसी, भोगी मजारा, बीबीपुर हटिया, बुटराड़ा, चढ़ाव, चौसाना, डांगरौल, धनेना समेत 56 गांव।

इन गांवों में अधूरा पड़ा काम

लिसाढ़, लिलौन, गढ़ी, कुड़ाना, सोंटा, फतेहपुर, गढ़ी अब्दुल्ला खान, गढ़ी पुख्ता, जलालपुर, जसाला, काबौत, कादरपुर, कैरी, काजपुरा, खेड़ा गदाई, खेड़ा मस्तान, खेड़ी बैरागी, खंवादा, मलकपुर, मुंडेटकलां, नाला, नौनागली समेत 174 गांव।

सबसे ज्यादा शिकायतें यूपी से

जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में सर्वाधिक शिकायतें उत्तर प्रदेश को लेकर है। देशभर से आई कुल शिकायतों में से 86 फीसदी अकेले उत्तर प्रदेश से जुड़ी हैं। लोकसभा में केंद्र सरकार ने स्वीकार किया कि राज्य में 16 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें परियोजना में देरी, गड़बड़ी, घटिया निर्माण, ठेकेदारों की लापरवाही और अधूरे कनेक्शन जैसे मामले शामिल हैं। दूसरे स्थान पर आसाम है, जहां केवल 1226 शिकायतें ही प्राप्त हुईं। यूपी सरकार के अनुसार सभी शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की गई। इनमें से 15,553 मामलों में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी गई है, जबकि शेष मामलों में जांच जारी है। गड़बड़ियों के मद्देनजर राज्य सरकार ने 120 ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की है और कार्य में देरी के कारण 340 करोड़ रुपये का दंड लगाया गया है।

थर्ड पार्टी की जांच जरूरी

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि जल जीवन मिशन में योजनाओं का क्रियान्वयन राज्यों की जिम्मेदारी है, जबकि केंद्र वित्तीय और तकनीकी सहयोग देता है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मिशन में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए थर्ड पार्टी निरीक्षण को अनिवार्य किया गया है। भुगतान से पहले एजेंसियां निर्माण कार्य, उपयोग की गई सामग्री और मशीनरी की जांच करती हैं। इसके साथ ही केंद्र ने राज्यों को सख्त निर्देश दिया है कि अनियमितताओं के मामलों में शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जाए और हर शिकायत की गंभीर जांच कर दोषियों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button