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पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के कार्यकारी अधिकारी रमाशंकर पाल,काट रहा माल

एमडी शम्भू कुमार का इस भृष्टाचारी के के सिर पर हाथ,पोस्टिंग, संरक्षण और पावर गेम: PUVVNL में किसका राज?

कौन बचा रहा रमाशकर पाल को? पत्नी के नाम से ठेकेदारी एवं अन्य कई वित्तीय अनियमितताओं के सवालों के घेरे में एमडी कार्यालय !

वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार भले ही भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करती हो, लेकिन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, वाराणसी में चल रहे तबादलों, पोस्टिंग और विभागीय संरक्षण के खेल ने शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार्यकारी अधिकारी श्री रमाशकर पाल को लेकर उठ रहे विवाद अब केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि पूरा विभागीय तंत्र सवालों के घेरे में आ गया है। आरोप हैं कि विभाग में तबादला उद्योग, संरक्षण राजनीति और प्रभावशाली नेटवर्क के जरिए मनमानी का खेल लंबे समय से चल रहा है।

एमडी कार्यालय तक पहुंचा संरक्षण का नेटवर्क

विभागीय सूत्रों के अनुसार, स्थानांतरण और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में श्री रमाशंकर पाल को विभाग के भीतर से मजबूत संरक्षण प्राप्त रहा। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में प्रबंध निदेशक कार्यालय से जुड़े कुछ प्रभावशाली चेहरे सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि एमडी के “सारथी” माने जाने वाले श्री राम शरण यादव, जो वर्षों से प्रबंध निदेशक कार्यालय से संबंध हैं और वाराणसी में ही तैनात हैं, पाल के करीबी माने जाते हैं। इसी तरह मुख्य अभियंता अनिल वर्मा (मुख्य अभियंता, वाराणसी क्षेत्र-द्वितीय) का नाम भी चर्चा में है। आरोप है कि नजदीकी संबंधों के चलते पाल को विशेष सुविधा और संरक्षण दिया गया।
चर्चा यह भी है कि अनिल वर्मा पूर्व में अधीक्षण अभियंता नगरी विद्युत वितरण मंडल-द्वितीय, वाराणसी में तैनात रहे और वर्तमान में वाराणसी क्षेत्र-द्वितीय के मुख्य अभियंता हैं। इतना ही नहीं, विभागीय गलियारों में यह चर्चा तेज है कि उन्हें वाराणसी क्षेत्र-प्रथम, वाराणसी का अतिरिक्त प्रभार देने का आश्वासन भी प्रबंध निदेशक स्तर से दिया गया है।
यदि यह सच है तो सवाल उठता है कि क्या विभाग में पद और जिम्मेदारियां योग्यता के आधार पर तय हो रही हैं या फिर “करीबी नेटवर्क” के आधार पर?

ट्रांसफर के बाद भी खेल जारी, ईआरपी सिस्टम तक पर सवाल

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, स्थानांतरण आदेश के बाद रमाशंकर पाल को मिर्जापुर से कार्यमुक्त होकर चंदौली में कार्यभार ग्रहण करना था।
आरोप है कि मिर्जापुर के अधीक्षण अभियंता ने उन्हें ऑफलाइन कार्यमुक्त कर दिया और चंदौली के अधीक्षण अभियंता ने ऑफलाइन ज्वाइन भी करा दिया। लेकिन इसी दौरान ऑनलाइन ईआरपी सिस्टम में उनकी रिलीविंग जानबूझकर रोकी गई।
विभागीय चर्चाओं के अनुसार, इसी अवधि में मिर्जापुर में ट्रांसफर-पोस्टिंग का खेल चलता रहा और कई मनमाने तबादले किए गए। आरोप यह भी है कि रमाशंकर पाल द्वारा कथित रूप से “पोस्टिंग मैनेजमेंट” का संचालन जारी रखा गया।
जब यह मामला मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हुआ और खबरें फैलने लगीं, तब जाकर उन्हें ईआरपी सिस्टम में ऑनलाइन रिलीव किया गया। अब सवाल उठ रहा है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार था तो ऑनलाइन रिलीविंग रोकने की जरूरत क्यों पड़ी?

तबादला उद्योग या प्रशासनिक प्रक्रिया?

पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में पिछले कुछ महीनों के भीतर लगातार तबादले, पुनः तैनाती और संवेदनशील पदों पर नियुक्तियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि विभाग में “कुर्सी बचाओ” और “पोस्टिंग मैनेजमेंट” की संस्कृति इस कदर हावी हो चुकी है कि शिकायतों पर कार्रवाई के बजाय अधिकारियों को नई जगहों पर एडजस्ट किया जाता है।
सूत्र बताते हैं कि कई मामलों में प्रशासनिक आवश्यकता, स्वास्थ्य कारण और विशेष परिस्थिति जैसे बहाने देकर विवादित अधिकारियों को बचाया जाता रहा।

योगी सरकार के दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करते हैं। लेकिन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम से सामने आ रहे आरोप सरकार के दावों की गंभीर परीक्षा लेते दिखाई दे रहे हैं।
यदि विभाग में वास्तव में प्रभावशाली नेटवर्क के जरिए ट्रांसफर-पोस्टिंग और संरक्षण का खेल चल रहा है, तो यह केवल विभागीय अनियमितता नहीं बल्कि शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा हमला है।
यह सवाल उठ रहा है कि
क्या पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में तबादले अब “नीति” नहीं बल्कि “नेटवर्क” से तय होते हैं?
आखिर ईआरपी सिस्टम में ऑनलाइन रिलीविंग रोकने के पीछे किसका संरक्षण था?
क्या विभागीय अधिकारियों के करीबी संबंध प्रशासनिक फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं?
और सबसे बड़ा सवाल- क्या योगी सरकार के “भ्रष्टाचार मुक्त शासन” का दावा सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गया है?
अब निगाहें शासन, ऊर्जा विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय पर टिक गई हैं। जनता जानना चाहती है कि कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों और प्रभावशाली संरक्षण के बीच दबा दिया जाएगा।

* मात्र 7 महीने में बनारस में 25 साल से ऊपर अपने गृह जनपद वाराणसी की तैनाती के के बाद गंभीर वित्तीय अनियमितता जैसे पत्नी के नाम फर्म बनाकर ठेकेदारी करना एवं अपनी पद धारिता की गलत रिपोर्ट प्रेषित करने का आरोप लगने के बाद स्थानांतरण किया गया और मात्र 07 महीने में ( मन माफिक तीन स्थानांतरण ) नजदीक ( विद्युत वितरण मंडल- मिर्जापुर) से और नजदीक वितरण मंडल( विद्युत वितरण मंडल -चंदौली) में सीधे तैनाती करदी गई बाद ERP सिस्टम में ऑनलाइन रिलीविंग रोककर मिर्जापुर क्षेत्र मिर्जापुर में चलता रहा पोस्टिंग मैनेजमेंट का खेल
* एमडी कार्यालय से जुड़े करीबी चेहरों पर संरक्षण और विशेष सुविधा देने के आरोप
* विवादों के बावजूद मलाईदार तैनाती, विभागीय कार्रवाई न होने पर उठे गंभीर सवाल
* ऑफलाइन ज्वाइनिंग, ट्रांसफर दलाली और प्रभावशाली नेटवर्क की चर्चाओं से गर्म गलियारे
* योगी सरकार के भ्रष्टाचार-मुक्त दावों के बीच पूर्वांचल विद्युत निगम की कार्यशैली कठघरे में

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