सूबे के पुलिस प्रमुख ने कावंड़ यात्रा से पूर्व की गहन समीक्षा, रोड पर न हो दुर्घटना यह है इनकी इच्छा
संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल, ड्रोन-सीसीटीवी से निगरानी, लंबित जघन्य अपराधों के जल्द खुलासे और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश

महत्वपूर्ण बिंदु बैठक के
- कांवड़ यात्रा और पर्वों के लिए व्यापक सुरक्षा योजना
- संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती।
- कांवड़ मार्ग, शिविर, घाट और प्रमुख स्थलों पर बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था और यातायात प्रबंधन।
- ड्रोन, सीसीटीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से 24 घंटे निगरानी।
- सांप्रदायिक सौहार्द और अपराध नियंत्रण पर जोर
- स्थानीय स्तर पर समन्वय और निरोधात्मक कार्रवाई के निर्देश।
- डीजे की ऊंचाई और ध्वनि शासन एवं न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप रखने के निर्देश।
- हत्या, डकैती, लूट, चेन स्नैचिंग समेत जघन्य अपराधों के लंबित मामलों का शीघ्र खुलासा।
- सक्रिय अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई।
- तकनीक से होगी विवेचनाओं की निगरानी
- 60 और 90 दिनों में निस्तारित होने वाली विवेचनाओं की समीक्षा।
- केस डायरी मॉनिटरिंग डैशबोर्ड के जरिए विवेचकों को 15 दिन पहले अलर्ट मिलेगा।
- समयबद्ध विवेचना पूरी कराने और पर्यवेक्षण को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने कांवड़ यात्रा और आगामी पर्वों के मद्देनजर प्रदेशभर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को व्यापक और कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांवड़ यात्रा को “जीरो इंसीडेंट-जीरो एक्सीडेंट” के लक्ष्य के साथ शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराया जाए, ताकि कहीं भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना या दुर्घटना न हो।
उच्चस्तरीय ऑनलाइन अपराध समीक्षा बैठक में डीजीपी ने सभी एडीजी जोन, पुलिस आयुक्तों, आईजी, डीआईजी, एसएसपी और एसपी को निर्देश दिए कि पिछले वर्षों में कांवड़ यात्रा और अन्य पर्वों के दौरान हुई घटनाओं की समीक्षा कर संवेदनशील स्थानों की पहचान की जाए तथा वहां अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए।

कांवड़ यात्रा और पर्वों के लिए व्यापक सुरक्षा योजना
डीजीपी ने कहा कि कांवड़ मार्गों, शिविरों, घाटों और अन्य प्रमुख स्थलों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, प्रभावी बैरिकेडिंग, समुचित प्रकाश व्यवस्था तथा सुचारु यातायात प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सीमावर्ती जिलों और पड़ोसी राज्यों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने के भी निर्देश दिए, ताकि किसी भी संभावित चुनौती से समय रहते निपटा जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय और शासन के निर्देशों के अनुरूप ही कांवड़ यात्रा में उपयोग होने वाले डीजे की ऊंचाई और ध्वनि का स्तर निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही टेथर्ड ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
सांप्रदायिक सौहार्द और अपराध नियंत्रण पर विशेष जोर

राजीव कृष्ण ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कांवड़ यात्रा और आगामी पर्वों के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर समन्वय समितियों को सक्रिय किया जाए तथा आवश्यकता अनुसार निरोधात्मक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने हत्या, डकैती, लूट, चेन स्नैचिंग और अन्य जघन्य अपराधों के लंबित मामलों का शीघ्र अनावरण करने के निर्देश देते हुए कहा कि सक्रिय अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही आवश्यकतानुसार गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट के तहत भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
तकनीक से होगी विवेचनाओं की प्रभावी निगरानी
बैठक में डीजीपी ने 60 और 90 दिनों में निस्तारित होने वाली विवेचनाओं की भी समीक्षा की। इस दौरान एसपी औरैया अभिषेक भारती की पहल पर तकनीकी सेवाएं मुख्यालय द्वारा विकसित केस डायरी मॉनिटरिंग डैशबोर्ड पोर्टल का प्रस्तुतीकरण डीआईजी तकनीकी सेवाएं आशीष तिवारी ने किया।
अधिकारियों को बताया गया कि इस पोर्टल के माध्यम से पर्यवेक्षक अधिकारियों और विवेचकों को लंबित विवेचनाओं के संबंध में निर्धारित समय-सीमा से 15 दिन पहले ही अलर्ट प्राप्त हो जाएगा। इससे मामलों की समयबद्ध मॉनिटरिंग संभव होगी और विवेचनाओं को निर्धारित अवधि में पूरा कराने में सहायता मिलेगी।
डीजीपी ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ अपराध नियंत्रण और समयबद्ध विवेचना भी पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने सभी अधिकारियों से निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और कांवड़ यात्रा सहित आगामी पर्वों को शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के लिए पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करने को कहा।




