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दागी आईएएस नरेश पाल गंगवार के हाथ शिक्षा सचिव का प्रभार,बेईमानी का है इसका किरदार

जेन जी ने मांगा शिक्षा में सुधार तो मोदी सरकार ने ‘दागी’ को बनाया शिक्षा सचिव, विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप, मंत्री पर भी सब्सिडी खाने का दाग

  •  नए शिक्षा सचिव ने पूरे परिवार के नाम पर सरकारी सहायता हड़पी
  •  राजस्थान कैडर के आईएएस हैं नरेश पाल गंगवार
  •  कुल 1.16 करोड़ रुपए की सब्सिडी हड़पने का है आरोप
  •  कांग्रेस बोली- क्या देश में इमानदार अफसरों की कमी है?
  •  केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री ने भी अपने नाम सब्सिडी डकारी

नई दिल्ली। एक ओर जहां देशभर में जेन जी पेपर लीक के विरोध में और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक ऐसे आईएएस को शिक्षा सचिव बनाया है, जिस पर सरकार की ही खीरा सब्सिडी का लाभ लेने का दाग लगा है।

इस आईएएस अधिकारी का नाम है नरेश पाल गंगवार। डेरी और पशुपालन मंत्रालय में पोस्टेड नरेश पर राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड में रहते हुए अपने परिवार के लोगों के नाम पर 1.16 करोड़ रुपए की सब्स‍िडी लेने का आरोप है। ये सब्सिडी खीरे की पैदावार के लिए लिए मंजूर की गई थी। इस पूरे फायदे को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की ‘संरक्षित खेती योजना’ के जरिए भुनाया गया था। उच्च शि‍क्षा सचिव रहे विनीत जोशी को हटाकर पंचायती राज मंत्रालय भेजा गया है।

कौन है ये नरेश पाल गंगवार ?

नरेश पाल गंगवार का जन्म 21 अक्टूबर 1970 को हुआ था। वे 1994 बैच के राजस्थान कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। उन्होंने रुड़की विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक, आईआईटी दिल्ली से कम्युनिकेशन में एमटेक और राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से इकोनॉमिक्स में एमए की डिग्री हासिल की है। उन्होंने 22 अगस्त 2025 से मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, नई दिल्ली के तहत पशुपालन और डेयरी विभाग में सचिव के रूप में कार्य किया। इससे पहले नरेश पाल गंगवार पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी रहे। वे राजस्थान सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी रहे और 2010 से 2014 के बीच राष्ट्रीय सौर मिशन के शुरुआती चरण में सौर ऊर्जा के विकास के लिए प्रमुख नीतियां शुरू करने में अहम भूमिका निभाई।

पूरे परिवार के नाम पर सब्सिडी खाई

राजस्थान कैडर के 1994 बैच के वरिष्ठ आईएएस नरेश गंगवार को लेकर एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की सब्सिडी योजना के तहत गंगवार की पत्नी, बेटे और मां को पांच वर्षों में 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली थी, जिससे संभावित हितों के टकराव को लेकर बहस छिड़ गई। विपक्ष अब सरकार से इस नियुक्ति पर जवाब और सफाई की मांग कर रहा है। गंगवार की नियुक्ति के बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। विपक्ष का कहना है कि जिस अधिकारी का नाम पहले से विवादों में रहा हो, उसे देश के उच्च शिक्षा विभाग जैसी अहम जिम्मेदारी देना कई सवाल खड़े करता है। विपक्ष सरकार से इस फैसले के पीछे की वजह सार्वजनिक करने और पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग कर रहा है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि, मोदी का नया हीरा तो खीरा चोर है। मोदी जी आपके दिमाग़ पर भ्रष्टाचार का कैसा भूत सवार हो गया है? ‘मंदिर से लेकर शिक्षा के मंदिर तक हर जगह चोर बिठा रहे हो’ खीरा सब्सिडी कांड वाले आईएएएस नरेश पाल गंगवार देश के नए शिक्षा सचिव बनाए गए !द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दिनों आईएएएस नरेश पाल गंगवार की पत्नी, पुत्र और माता को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना के तहत लगभग 1.16 करोड़ रुपए की सब्सिडी मिली। इससे गंगवार पर सवाल उठे, क्योंकि वह उस वक्त पशुपालन/डेयरी मंत्रालय में सचिव थे।

इमानदारों की कमी है क्या?

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास अब ‘ईमानदार चेहरों’ की कमी पड़ गई है। पार्टी का आरोप है कि शिक्षा सचिव विनीत जोशी को बचाने के लिए सरकार ने उनकी जगह ऐसे अधिकारी को नियुक्त किया है, जिनके परिवार को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना के तहत 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली थी। कांग्रेस ने इसे सरकार में गहरे भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं।

 

केंद्रीय कृषि मंत्री पर भी सब्सिडी खाने के आरोप

केंद्रीय मंत्री भगीरथ चौधरी को खीरा की खेती के लिए अपने ही मंत्रालय ने 99 लाख की सब्सिडी मिल गई। क अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, भगीरथ चौधरी को उनके ही मंत्रालय के अधीन चलने वाली योजना के तहत सरकारी सब्सिडी मिली है। इनके साथ ही एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के परिवार को भी 1.16 करोड़ की सब्सिडी मिली है। यह मामला सामने आने के बाद हितों के टकराव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामला राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव में मंत्री भगीरथ चौधरी के फार्म से जुड़ा है। अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार यहाँ लगे एक बोर्ड पर लिखा है कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की ओर से इस परियोजना के लिए 99.60 लाख रुपये की सहायता दी गई है। हालाँकि बोर्ड पर यह नहीं लिखा कि इस योजना का लाभ लेने वाले स्वयं केंद्र सरकार में कृषि राज्य मंत्री हैं। भगीरथ चौधरी ने अपने खेत में बड़े पैमाने पर खीरे की व्यावसायिक खेती के लिए पॉलीहाउस परियोजना शुरू की। इस परियोजना की कुल लागत करीब 1.99 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें क़रीब 49.80 लाख रुपये स्वयं लगाए गए। 1.49 करोड़ रुपये का बैंक से कर्ज लिया गया। परियोजना पूरी होने के बाद 99.03 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी सीधे बैंक ऋण खाते में जमा कर दी गई। यह सब्सिडी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना के तहत दी गई। यह सहायता ‘डेवलपमेंट ऑफ कमर्शियल हॉर्टिकल्चर थ्रू प्रोडक्शन एंड पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर क्रॉप्स’ योजना के तहत दी गई। यह योजना मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर का हिस्सा है, जिसे केंद्र सरकार 2014-15 से चला रही है। योजना के तहत खीरा, टमाटर और शिमला मिर्च जैसी सब्जियों की व्यावसायिक खेती पर सहायता मिलती है। फूलों की खेती भी इसमें शामिल है। परियोजना लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक सब्सिडी दी जाती है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड कृषि मंत्रालय के अधीन काम करता है और उसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में केंद्रीय कृषि मंत्री पदेन अध्यक्ष होते हैं, जबकि कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं। यानी जिस बोर्ड के माध्यम से यह योजना संचालित होती है, उसी बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष स्वयं भगीरथ चौधरी हैं। हालाँकि, नियमों के अनुसार परियोजनाओं की अंतिम मंजूरी एक अलग प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी देती है, जिसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते। इसके बावजूद सवाल उठ रहे हैं कि क्या मंत्री द्वारा अपने ही मंत्रालय की योजना का लाभ लेना हितों के टकराव की स्थिति पैदा करता है।

 

मंत्री हूं, लेकिन किसान भी हूं- सफाई में बोले भगीरथ

भगीरथ चौधरी ने सब्सिडी मिलने पर सफाई देते हुए कहा कि वह एक किसान हैं और उन्होंने सभी नियमों का पूरा पालन किया है। न्होंने ये बात मानी कि राजस्थान में पुष्कर के पास उनके निजी फार्म प्रोजेक्ट के लिए कृषि मंत्रालय की एक योजना के तहत उनको 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने सरकारी दिशानिर्देशों का पालन किया था। भगीरथ चौधरी ने कहा कि उन्होंने बैंक से 2 करोड़ रुपये का लोन लिया है, ये सब उन्होंने सरकारी गाइडलाइंस के आधार पर किया है। वे नई तकनीक से खेती करना चाहते हैं। छिपाकर उन्होंने कोई काम नहीं किया। उन्होंने तो सब्सिडी लेने वाला बोर्ड तक लगाया है। जिससे दूसरे किसान भी उन्नत खेती करने के लिए प्रेरित हों। बोर्ड में सबकुछ लिखा है कि प्रोजेक्ट की कितनी लागत है, इसमें कितनी सब्सिडी मिली। उन्होंने कहा कि जमीन उनके नाम पर है, सब्सिडी भी उन्होंने खुद के नाम पर ली है। ये सब्सिडी उनको रामनाथ ठाकुर के विभाग से मिली है। गाइडलाइंस के तहत बैंक से लोन लिया और उनको सब्सिडी मिली। छिपाकर कुछ भी नहीं किया। उन्होंने कहा कि डीएपी का बैग लेने जाने से लेकर यूरिया खरीदने तक, सब पर सब्सिडी मिलती है।

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