डीजीपी राजीव कृष्णा ने ATS टीम को दिया सम्मान,30 लाख के इनामी नक्सली को आतंकवाद निरोधी ने पहुँचा दिया श्मशान
रामनगर में ATS का ऑपरेशन बना बड़ी कार्रवाई—बृजेश गंझू ढेर, डीजीपी ने टीम के लिए घोषित किया 2 लाख का पुरस्कार

- वाराणसी में 30 लाख के इनामी नक्सली कमांडर का खात्मा, ऑपरेशन के बाद DGP राजीव कृष्ण का बड़ा फैसला—बहादुर ATS टीम को 2 लाख रुपये का इनाम
वाराणसी/लखनऊ/ उत्तर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए विगत सप्ताह की सुबह एक बड़ी कार्रवाई लेकर आई। वाराणसी के रामनगर इलाके में उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड यानी यूपी ATS और 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस के मुताबिक मुठभेड़ के बाद बृजेश गंझू को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने ऑपरेशन में शामिल ATS टीम के लिए दो लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा की। डीजीपी का यह फैसला उस टीम के सदस्यों के लिए प्रोत्साहन के रूप में सामने आया, जिसने पुलिस के अनुसार खुफिया सूचना पर कार्रवाई करते हुए वांछित नक्सली को घेरने का ऑपरेशन अंजाम दिया।

रामनगर में घेराबंदी, सामने आया 30 लाख का इनामी
खुफिया सूचना पर सक्रिय हुई ATS, मुगलसराय की ओर जाने की थी सूचना
पुलिस के अनुसार यूपी ATS को सूचना मिली थी कि झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी यानी TPC से जुड़ा बृजेश गंझू अपने साथी के साथ वाराणसी के रामनगर इलाके से होकर मुगलसराय की ओर जा सकता है।
सूचना मिलते ही ATS की टीम ने संभावित रास्तों पर निगरानी बढ़ाई। रविवार तड़के संदिग्ध बाइक नजर आने के बाद टीम ने उसे रोकने का प्रयास किया।
पुलिस के अनुसार खुद को घिरता देख बृजेश ने टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद जवाबी कार्रवाई हुई। इस दौरान पुलिस टीम के सदस्यों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी गोलियां लगीं।
दो पुलिसकर्मियों की जैकेट पर लगी गोली
DSP विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण बाल-बाल बचे
पुलिस के मुताबिक मुठभेड़ के दौरान डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लगी। जैकेट ने दोनों पुलिसकर्मियों को गंभीर नुकसान से बचाया।
जवाबी कार्रवाई में बृजेश गंझू घायल हुआ। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मौके से हथियार और कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है। बृजेश के साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी है।
ऑपरेशन के बाद DGP राजीव कृष्ण का बड़ा ऐलान
ATS जवानों की कार्रवाई को सम्मान, टीम के लिए 2 लाख रुपये पुरस्कार
ऑपरेशन पूरा होने के बाद पुलिस मुख्यालय से आया फैसला भी खास रहा। DGP राजीव कृष्ण ने मुठभेड़ में शामिल ATS टीम के लिए दो लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा की।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब पुलिस टीम ने एक ऐसे आरोपी के खिलाफ अभियान चलाया था, जिस पर अलग-अलग एजेंसियों की ओर से कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
डीजीपी के इस फैसले को ऑपरेशन में शामिल अधिकारियों और जवानों के प्रयास को मान्यता देने के तौर पर देखा जा रहा है।
30 लाख — बृजेश गंझू पर कुल घोषित इनाम
25 लाख — झारखंड सरकार की ओर से
5 लाख — NIA की ओर से
2 लाख — ATS टीम के लिए DGP राजीव कृष्ण का पुरस्कार
50+ — कुछ रिपोर्टों में दर्ज मुकदमों की संख्या
कौन था बृजेश गंझू?
TPC कमांडर, लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की तलाश में
बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता झारखंड के चतरा जिले का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के अनुसार वह प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) से जुड़ा था और संगठन में कमांडर की भूमिका निभाता था।
उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, आपराधिक षड्यंत्र, पुलिस तथा सुरक्षा बलों पर हमले और अन्य गंभीर आरोपों से जुड़े कई मामले दर्ज होने की बात सामने आई है।एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश के अनुसार बृजेश के खिलाफ 45 से अधिक मुकदमे दर्ज थे और इनमें दो मामलों की जांच NIA कर रही थी। वहीं अन्य रिपोर्टों में 50 से अधिक मुकदमों का उल्लेख किया गया है।
झारखंड और NIA ने घोषित किया था 30 लाख का इनाम
25 लाख झारखंड सरकार के, 5 लाख NIA की ओर से
बृजेश गंझू लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। उसके खिलाफ घोषित इनाम की कुल राशि 30 लाख रुपये थी।
इसमें झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख रुपये और NIA की ओर से पांच लाख रुपये शामिल थे। NIA की वांटेड सूची में भी उसका नाम दर्ज रहा है।
यानी जिस व्यक्ति की तलाश झारखंड से लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी तक कर रही थी, उसका वाराणसी में पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण इनपुट था।
DGP राजीव कृष्ण के फैसले ने बढ़ाया पुलिस बल का मनोबल
ऑपरेशन के बाद तुरंत पुरस्कार की घोषणा, जवानों के प्रयास को मिला सम्मान
किसी भी हाई-रिस्क ऑपरेशन में सिर्फ कार्रवाई ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसमें शामिल जवानों का मनोबल भी उतना ही अहम होता है।
रामनगर ऑपरेशन के बाद DGP राजीव कृष्ण द्वारा दो लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। पुलिस नेतृत्व की ओर से ऐसे फैसले जवानों को यह संदेश देते हैं कि कठिन परिस्थितियों में निभाई गई जिम्मेदारी और पेशेवर कार्रवाई को वरिष्ठ स्तर पर पहचान मिलती है।
इस पूरे घटनाक्रम में DGP की भूमिका ऑपरेशन के बाद टीम को सम्मान देने और उसके मनोबल को बढ़ाने के फैसले के रूप में सामने आई है।
ATS की खुफिया कार्रवाई बनी ऑपरेशन की कुंजी
इनपुट से घेराबंदी तक, टीम ने संभावित रास्ते पर बढ़ाई निगरानी
पुलिस के अनुसार इस अभियान की शुरुआत खुफिया सूचना से हुई। सूचना थी कि बृजेश गंझू वाराणसी के रास्ते आगे जा सकता है।
ATS ने सूचना को आधार बनाकर संभावित मार्ग पर टीम सक्रिय की। इसके बाद रामनगर इलाके में संदिग्ध बाइक को रोकने का प्रयास किया गया।
पुलिस के मुताबिक इसके बाद फायरिंग हुई और जवाबी कार्रवाई में बृजेश घायल हुआ। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
यह कार्रवाई इस बात को भी सामने लाती है कि किसी वांछित आरोपी तक पहुंचने के लिए खुफिया सूचना, निगरानी, स्थानीय पुलिस से समन्वय और मौके पर त्वरित निर्णय कितने महत्वपूर्ण होते हैं।
बृजेश का वाराणसी कनेक्शन अब जांच का विषय
फरार साथी की तलाश के साथ संभावित नेटवर्क की भी होगी पड़ताल
बृजेश गंझू की मौत के बाद भी जांच का एक बड़ा हिस्सा बाकी है। पुलिस के अनुसार उसके साथ मौजूद व्यक्ति मौके से फरार हो गया।
अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि बृजेश वाराणसी क्यों आया था और यहां उसका कोई स्थानीय संपर्क या नेटवर्क था या नहीं।
उसके आने-जाने के रास्ते, संभावित ठिकाने, स्थानीय संपर्क और फरार साथी की पहचान जैसे सवाल जांच का हिस्सा होंगे।
इस जांच से यह भी स्पष्ट हो सकता है कि 30 लाख का इनामी नक्सली वाराणसी में किस उद्देश्य से पहुंचा था।
नक्सली नेटवर्क पर ATS की नजर
स्लीपर सेल और संभावित संपर्कों की निगरानी को बताया गया महत्वपूर्ण
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर एवं यूपी ATS प्रमुख अमिताभ यश के मुताबिक उत्तर प्रदेश में नक्सली गतिविधियां खत्म हो चुकी हैं, हालांकि कुछ स्लीपर सेल की मौजूदगी पर ATS नजर बनाए हुए है। बृजेश गंझू के मामले में भी उसके संभावित संपर्कों और नेटवर्क की जांच की जा रही है।
यही कारण है कि रामनगर की कार्रवाई को केवल एक मुठभेड़ के रूप में देखने के बजाय उसके बाद होने वाली जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
DGP की रणनीति में ऑपरेशन के साथ जवानों का सम्मान भी
राजीव कृष्ण का संदेश—सुरक्षा अभियान में आगे रहने वाली टीम की पहचान जरूरी
पुलिस नेतृत्व की कार्यशैली का एक अहम हिस्सा सिर्फ अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अभियान में शामिल पुलिसकर्मियों का मनोबल बनाए रखना भी है।
बृजेश गंझू के खिलाफ कार्रवाई के बाद ATS टीम के लिए दो लाख रुपये का पुरस्कार घोषित करके DGP राजीव कृष्ण ने इसी पहलू को सामने रखा है।
मुठभेड़ के दौरान दो पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लगने की जानकारी बताती है कि ऑपरेशन में जोखिम मौजूद था। ऐसे में टीम के लिए पुरस्कार की घोषणा पुलिस बल के भीतर साहस और कर्तव्यनिष्ठा को प्रोत्साहित करने वाला कदम है।
अब अगली चुनौती—फरार साथी और नेटवर्क तक पहुंचना
एक्शन के बाद इन्वेस्टिगेशन का दौर, बृजेश के संपर्कों की होगी पड़ताल
रामनगर में ऑपरेशन पूरा होने के बाद अब ATS और स्थानीय पुलिस के सामने अगला लक्ष्य बृजेश के फरार साथी तक पहुंचना है।
इसके साथ ही उसके वाराणसी आने की वजह, स्थानीय संपर्कों और संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटाना भी महत्वपूर्ण होगा।
बरामद हथियारों और अन्य साक्ष्यों की जांच से भी आगे की कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
एक ऑपरेशन, दो संदेश
30 लाख के इनामी नक्सली पर कार्रवाई और ATS टीम के लिए DGP का 2 लाख का पुरस्कार
वाराणसी के रामनगर में हुई यह कार्रवाई दो अलग-अलग संदेश देती है। पहला—सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से वांछित और गंभीर आरोपों वाले नक्सली नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं। दूसरा—ऐसे ऑपरेशन को अंजाम देने वाली पुलिस टीम के साहस और जिम्मेदारी को पुलिस नेतृत्व की ओर से सम्मान दिया जा रहा है।
बृजेश गंझू पर झारखंड सरकार और NIA की ओर से कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के मुताबिक वाराणसी में ATS के साथ मुठभेड़ के बाद उसकी मौत हुई। इसके बाद DGP राजीव कृष्ण ने ऑपरेशन में शामिल ATS टीम को दो लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा की।
वाराणसी के रामनगर से शुरू हुआ यह ऑपरेशन अब आगे की जांच में कहां तक पहुंचता है, यह देखना अहम होगा। फरार साथी की गिरफ्तारी और संभावित नेटवर्क का खुलासा इस कार्रवाई की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।
और इस पूरे ऑपरेशन में DGP राजीव कृष्ण का वह फैसला भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कार्रवाई करने वाली ATS टीम के लिए दो लाख रुपये का पुरस्कार घोषित कर जवानों के प्रयास को सार्वजनिक रूप से सम्मान दिया।




