मोदी अडानी पर कृपा बरसाए हजार,बंगाल में अडानी की कम्पनी करेगी हजारों करोड़ का व्यापार
बंगाल में चुनाव खत्म होते ही अदानी की एंट्री, केंद्र की मोदी सरकार ने सौंपे बड़े प्रोजेक्ट्स, सड़क-बंदरगाह से लेकर बिजली तक, सब उनके हवाले

- हुगली नदी के नीचे सुरंग बनाएगा अदानी ग्रुप
- बिजली उत्पादन और वितरण में भी दिखाई दिलचस्पी
- डेटा सेंटर और बंदरगाहों पर पहले ही है अदानी ग्रुप का कब्जा
- अब डीप-सी पोर्ट परियोजना भी शुरू करने की फिराक में

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को हराकर जैसे ही भाजपा राज्य की सत्ता में आई, गौतम अदानी की राज्य में एंट्री हो गई है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जिस स्पीड से अदानी के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे रही है, उसे देखकर लगता है कि सड़क से लेकर बिजली सप्लाई तक- तमाम प्रोजेक्ट्स का ठेका अदानी को ही मिलने जा रहा है। अदानी ने बंगाल में निवेश का मंसूबा बीते अक्तूबर में ही पाल लिया था।पश्चिम बंगाल में अडानी समूह ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट कोलकाता के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें कोलकाता की ऐतिहासिक कुम्हारटुली घाट का पुनरुद्धार किया जाएगा। कुम्हारटुली के लोग कई पीढ़ियों से मूर्ति बनाने की अपनी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। दस करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का काम इस साल की दुर्गा पूजा से पहले पूरा हो जाएगा। इस पहल का मकसद हुगली नदी के किनारे के सांस्कृतिक रूप से अहम हिस्से को फिर से जीवंत करना और साथ ही बुनियादी ढांचे, आने-जाने की सुविधा और पर्यटकों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाना है।

बड़े प्रोजेक्ट्स पर नजर
अडानी ग्रुप के एक वरिष्ठ रणनीतिकार के अनुसार, ग्रुप की गहरी दिलचस्पी राज्य के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (बुनियादी ढांचा परियोजनाओं) में है। अदानी समूह चाहता है कि राज्य की नई शुभेंदु अधिकारी सरकार निवेश की गति को बढ़ाने के लिए पारदर्शी और मजबूत नीतिगत ढांचा तैयार करे। अदानी ग्रुप ने कोलकाता को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए हुगली नदी के नीचे सुरंग की योजना बनाई है। ग्रुप के अधिकारियों के मुताबिक, कोलकाता शहर को सीधे राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने और मालवाहक वाहनों के सुगम आवागमन के लिए वे हुगली नदी के नीचे एक अंडर-रिवर टनल (जलमग्न सुरंग) परियोजना का निर्माण करना चाहते हैं। यह मेगा प्रोजेक्ट बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की समूह की मुख्य तकनीकी क्षमताओं के पूरी तरह अनुकूल है।
इसके अलावा अदानी समूह की दिलचस्पी बंगाल में बिजली उत्पादन और वितरण करने की है। यह अलग बात है कि उत्तरप्रदेश और भारत के बाकी राज्यों में अदानी समूह का बिजली उत्पादन और वितरण में निवेश अमूमन विवादों मेंरहा है। फिर भी कंपनी बंगाल में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का दावा करते हुए मैदान में उतरना चाहती है, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली मिल सकेगी। इसके अतिरिक्त, ग्रुप राज्य में गहरे समुद्र वाले बंदरगाह (डीप-सी पोर्ट) के विकास पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है, हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की विशाल तटीय परियोजनाओं के साथ पर्यावरण मंजूरी और केंद्र-राज्य के अधिकार क्षेत्रों जैसे कई नीतिगत विषय भी जुड़े हुए हैं।
बंगाल में बिजली के निजीकरण की तैयारी
इससे पहले बीते 15 साल तक बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने बिजली का निजीकरण नहीं होने दिया था, ताकि उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ न पड़े। अब भाजपा की सरकार में अदानी की एंट्री होते ही बिजली के निजीकरण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अडानी समूह पश्चिम बंगाल के बिजली क्षेत्र में भी अवसर तलाश रहा है। कंपनी का मानना है कि बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से प्रतिस्पर्धा और सेवा गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। अडानी समूह ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित डीप-सी पोर्ट परियोजना का अध्ययन कर रहा है। हालांकि कंपनी का कहना है कि ऐसे मेगा प्रोजेक्ट्स में पर्यावरणीय मंजूरी और केंद्र-राज्य समन्वय जैसी कई चुनौतियां होती हैं। बता दें कि पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले प्रस्तावित ताजपुर डीप-सी पोर्ट परियोजना का स्थान बदलकर पूर्वी मिदनापुर जिले के दादनपात्रा क्षेत्र में कर दिया है।
कोलकाता में डेटा सेंटर और पोर्ट कारोबार पहले से मौजूद
अडानी समूह की पश्चिम बंगाल में पहले से मौजूदगी है। कंपनी को हाल ही में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के कंटेनर टर्मिनल के संचालन और रखरखाव का पांच साल का ठेका मिला है। इसके अलावा अडानी ग्रुप सीमेंट कारोबार में सक्रिय है और कोलकाता में एक हाइपरस्केल डेटा सेंटर स्थापित करने की भी योजना बना रहा है।
अमेरिकी जज से पूछा- अदानी के खिलाफ केस वापस क्यों लिया
उद्योगपति गौतम अडानी को लेकर अमेरिका में चल रहे घूसखोरी के एक आपराधिक मामले में नया मोड़ आ गया है। दरअसल, अमेरिका के एक जज ने जस्टिस डिपार्टमेंट को आदेश दिया कि वह अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोप हटाने के अपने फैसले का कारण बताए। इसके साथ ही, उन्होंने अडानी के वकीलों की केस खारिज करने की अर्जी पर तुरंत कोई फैसला लेने से इनकार कर दिया। ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गाराउफिस ने कहा कि जस्टिस डिपार्टमेंट ने 18 मई को केवल यह बताया था कि वह अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता, लेकिन इसके पीछे पर्याप्त कानूनी कारण नहीं दिए गए। जज ने अपने आदेश में कहा कि सरकार का संक्षिप्त बयान अदालत को कोई ठोस आधार उपलब्ध नहीं कराता, जिसके आधार पर मामले को खारिज किया जा सके। उन्होंने जस्टिस डिपार्टमेंट को और जानकारी जमा करने के लिए 13 जुलाई तक का समय दिया। इसके बाद ही यह तय होगा कि अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोप औपचारिक रूप से समाप्त किए जाएं या नहीं।
2200 करोड़ की घूसखोरी का आरोप
अमेरिकी अधिकारियों ने नवंबर 2024 में गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने 265 मिलियन डॉलर यानी क़रीब 2200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की साजिश रची। आरोप है कि भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए अधिकारियों को रिश्वत दी गई और अमेरिकी निवेशकों से इसकी जानकारी छुपाई गई। अडानी ग्रुप ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा था कि अमेरिका में उन पर सिक्योरिटीज फ्रॉड का केस है, न कि रिश्वतखोरी का। डोनाल्ड ट्रंप सरकार के न्याय विभाग ने 18 मई को अदालत से कहा कि वे इस केस पर और पैसे और समय बर्बाद नहीं करना चाहते हैं। इसलिए व्यक्तिगत रूप से गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ आपराधिक केस बंद किया जाए।
एयरो सिटी में 20 हजार करोड़ का निवेश
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड ने एक बयान में कहा है कि भारत में छह प्रमुख एयरपोर्ट्स के आसपास 655 एकड़ से अधिक क्षेत्र में एकीकृत एयरपोर्ट सिटी बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके पहले चरण में 20,000 करोड़ रुपए निवेश करने की घोषणा की है। यह परियोजना मुंबई, नवी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर और गुवाहाटी एयरपोर्ट्स के आसपास 655 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इस प्रोग्राम के तहत हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, एंटरटेनमेंट, कन्वेंशन और कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर को आपस में अच्छी तरह से जुड़े हुए और पैदल घूमने लायक शहरी इलाकों में एक साथ लाया जाएगा। परियोजना में होटल, प्रीमियम ऑफिस स्पेस, शॉपिंग सेंटर, रेस्टोरेंट, एंटरटेनमेंट जोन, कन्वेंशन सेंटर और अन्य कमर्शियल सुविधाएं शामिल होंगी। इन एयरपोर्ट सिटीज को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि एयरपोर्ट, मेट्रो और शहर की परिवहन व्यवस्था आपस में सहज रूप से जुड़ी रहे। कुल निवेश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में लगाया जाएगा। अकेले मुंबई और नवी मुंबई में करीब 440 एकड़ भूमि पर एयरपोर्ट सिटी विकसित की जाएगी। कंपनी का मानना है कि यह क्षेत्र देश का सबसे बड़ा वाणिज्यिक और एविएशन हब बनने की क्षमता रखता है।




