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मोदी के खास सांसद नवीन जैन ने किया हजारों करोड़ का सड़क निर्माण में घोटाला,पीएम सीएम का मुंह किया काला

जब सैयां भए कोतवाल तो डर काहे का? भाजपा सांसद की कंपनी ने बनाई घटिया सड़क, उद्घाटन के बाद 17 दिन में 3 बार धंसी, अब भाजपा की गर्दन फंसी

  •  लखनऊ-कानपुर के बीच 63 किमी के एक्सप्रेसवे का है मामला
  •  13 जुलाई को राजनाथ, गडकरी और योगी के रहते हुआ था उद्घाटन
  •  भाजपा सांसद नवीन जैन का बड़ा भाई है सड़क का ठेकेदार
  •  मामले को दबाने के लिए केंद्र और योगी सरकार ने लगाया था पूरा जोर

लखनऊ। लखनऊ और कानपुर को जोड़ने वाले 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस वे का एक हिस्सा उद्घाटन के 17 दिन बाद ही टूट गया। लगभग 4700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर उन्नाव के बेगमखेड़ा गांव के पास सड़क धंसने से एक ट्रक पलट गया। भाजपा सांसद नवीन जैन के भाई की जिस कंपनी ने इस हाईवे को बनाया है, उस पर बीते साल सीबीआई जांच बैठ चुकी है। कंपनी के 4 कर्मियों को एनएचएआई को 10 लाख रुपए की घूस देने के आरोप में गिरफ्तार भी किया जा चुका है। लेकिन भाजपा सांसद और पीएम नरेंद्र मोदी के करीबी होने के नाते सड़क के ठेकेदार पीएनसी इन्फ्राटेक को लगातार ठेके मिलते रहे, जबकि कंपनी का 2018 से ही रिकॉर्ड गड़बड़ है। इस मामले को दबाने की केंद्र और यूपी सरकार से जबर्दस्त कोशिश की, लेकिन सच्चाई फिर भी सामने आ ही गई।

इस घटना में किसी को चोट नहीं आई। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने सड़क की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। एक्सप्रेसवे के शुरू होने के 17 दिन में सड़क के टूटने की यह तीसरी घटना है। इससे सड़क की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

हम सड़क सुधार रहे हैं- एनएचएआई की दलील

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने दावा किया है कि वे सड़क के रखरखाव पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। सड़क बनाने वाले ठेकेदार की 15 साल तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मरम्मत करने की जिम्मेदारी है। एनएचएआई ने निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वाले तीन अधिकारियों को परियोजना से हटाने के साथ ही अगले दो वर्षों तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की किसी भी परियोजना में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया है। इनमें विवेक कुमार गुप्ता (प्रोजेक्ट मैनेजर-सह-डीजीएम हाईवे), सुरेंद्र कुमार (टीम लीडर, इंडिपेंडेंट इंजीनियर), यतेंद्र कुमार (रेसिडेंट इंजीनियर) शामिल है।

भाजपा सांसद की कंपनी ने बनाई घटिया सड़क

करीब 63 किलोमीटर लंबे छह-लेन एक्सप्रेसवे की निर्माण लागत लगभग 4,700 करोड़ रुपये बताई गई है। परियोजना का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को किया गया था। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड ने किया है। कंपनी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप कुमार जैन हैं, जो आगरा व उत्तर प्रदेश के सबसे अमीर व्यक्ति बताये जाते हैं। प्रदीप कुमार जैन ने 1989 में पीएनसी कंस्ट्रक्शंस की स्थापना आगरा में की थी। साल 2000 में उन्होंने इस कंपनी का नाम पीएनसी इन्फ्रा कर दिया। इसके बाद यूपी और केंद्र में भाजपा की सरकारों के आने के बाद से पीएनसी इन्फ्रा को सड़क, हाईवे, रेल्वे और एयरपोर्ट बनाने के ठेके मिलते गए और कंपनी बड़ी होती गई। बाद में प्रदीप कुमार जैन के भाई नवीन कुमार जैन भाजपा के राज्यसभा सांसद बने और फिर तो कंपनी पर लगे सारे दाग मानों धुलते चले गए।

सीबीआई का छापा और ब्लैकलिस्टेड हुई कंपनी

जून 2024 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने रिश्वतखोरी के मामले में पीएनसी इन्फ्रा के दफ्तरों पर छापेमारी की, जिसके बाद कंपनी पर एक साल का टेंडर प्रतिबंध लगा दिया गया। यह कार्रवाई केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अक्टूबर 2024 में की थी, जिसमें पीएनसी इंफ्राटेक और उसकी दो सहायक कंपनियों को एक साल के लिए नए सरकारी ठेकों और टेंडरों में भाग लेने से रोक दिया गया था। असल में पीएनसी इन्फ्रा ने एनएचएआई के ठेके लेने के लिए बड़े अफसरों को 10 लाख रुपए की घूस दी थी। सीबीआई ने अपनी जांच के बाद एनएचएआई के अधिकारियों को 10 लाख रुपये की रिश्वत लेने-देने के आरोप में कंपनी के 4 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था। जून 2024 में आगरा, दिल्ली और मध्य प्रदेश समेत कई ठिकानों पर तलाशी ली गई। सीबीआई ने घूसखोरी के मामले में एनएचएआई के महाप्रबंधक एवं परियोजना निदेशक को गिरफ्तार किया था। इनका नाम पुरुषोत्तम लाल चौधरी है, जो पहले मध्यप्रदेश के छतरपुर में पोस्टेड थे। सीबीआई की एफआईआर में पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के निदेशक योगेश जैन और टीआर राव नामजद हैं।

पीएनसी इन्फ्रा पर लगे आरोप

आरोप है कि पीएनसी इन्फ्रा ने ठेका पाने के लिए एनएचएआई अधिकारियों को रिश्वत दी। सीबीआई को जानकारी मिली थी कि पीएनसी इन्फ्रा कंपनी एनएचएआई के झांसी-खजुराहो प्रोजेक्ट के संबंध में एनओसी जारी करने और अंतिम बिल की प्रोसेसिंग के साथ साथ अंतिम हैंडओवर प्राप्त करने के के लिए कथित तौर पर रिश्वत दे रहे थे। सीबीआई ने आरोपियों से जुड़े छतरपुर (मध्य प्रदेश), लखनऊ, कानपुर, आगरा एवं गुरुग्राम (हरियाणा) स्थित परिसरों पर भी छापा मारा। इस दौरान डिजिटल डिवाइस समेत आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए थे। पीएनसी इंफ्रा लिमिटेड के चार कर्मचारियों सत्य नारायण अंगुलुरी, बृजेश मिश्रा, अनिल जैन व शुभम जैन को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया गया था। भाजपा से राज्यसभा सांसद नवीन जैन के बड़े भाई प्रदीप कुमार जैन, पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड में अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के पद पर हैं। नवीन जैन के भाई योगेश जैन निदेशक हैं, जिन पर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया है।

 

2018 में भी लगे थे आरोप

कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के जल्द पूरा होने के लिए पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को 58 करोड़ रुपये का बोनस देने के आरोप लगाए थे। एक्सप्रेस वे का एक हिस्सा बोनस दिए जाने के छह महीने के भीतर ही ढह गया था। आगरा के मेयर रहे नवीन जैन के भाई की स्वामित्व वाली इस फर्म ने आगरा से फिरोजाबाद तक एक्सप्रेसवे के 56 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण किया था।

 

 हकीकत दिखाने आए पत्रकार को रोका

ग्राउंड रिपोर्टिंग करने पहुंचे एक निजी यूट्यूब चैनल के पत्रकार रंजन बाजपेई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें मौके पर मौजूद कुछ लोग उनके हाथ से माइक आईडी छीनने की कोशिश करते और उन्हें रोकते हुए नजर आ रहे हैं। कवरेज के लिए मौके पर पहुंचे पत्रकार रंजन बाजपेई का वीडियो सामने आया है। वीडियो में कुछ लोग उनका माइक आईडी पकड़कर उन्हें आगे बढ़ने से रोकते दिखाई दे रहे हैं। इस घटना के बाद पत्रकारों की ग्राउंड रिपोर्टिंग और निर्माण कार्यों की कवरेज के दौरान मीडिया को रोकने के प्रयासों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

 

सपा नेता ने जारी किया वीडियो

एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। रिपोर्ट के अनुसार, 25 जुलाई को बारिश के बाद उन्नाव के कोरारी गांव के पास एक्सप्रेसवे का करीब 5 से 7 मीटर लंबा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। समाजवादी पार्टी नेता मधुसूदन यादव द्वारा साझा किए गए वीडियो में सड़क पर दरारें और धंसे हुए हिस्से दिखाई दिए। घटना के बाद एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और परियोजना की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मधुसूदन यादव ने दावा किया कि बारिश के बाद सड़क में दरारें आईं और उन्होंने इसे लेकर सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

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