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सूबे के डीजीपी राजीव कृष्ण जीरो टॉलरेंस को दे रहे धार,आदेश की नाफरमानी पर करेंगे वार

अपराध पर प्रहार, तकनीक और संकल्प के दम पर सुरक्षित हुआ उत्तर प्रदेश

  • मिशन शक्ति से महिलाओं में बढ़ा सुरक्षा का भरोसा, अपराधों में आई उल्लेखनीय कमी
  • साइबर ठगों पर डिजिटल प्रहार, 450 करोड़ रुपये बचाकर बनी राष्ट्रीय मिसाल
  • एआई तकनीक से अपराधियों की पहचान आसान, फरार बदमाशों की गिरफ्तारी तेज
  • माफिया और संगठित अपराध के आर्थिक नेटवर्क पर पुलिस का निर्णायक हमला
  • नए आपराधिक कानूनों और ई-समन व्यवस्था से न्याय प्रक्रिया हुई अधिक प्रभावी
  • पुलिस कल्याण, आतंकवाद विरोधी अभियान और जवाबदेही पर विशेष फोकस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बीते एक वर्ष में कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण, आतंकवाद विरोधी अभियान और पुलिस कल्याण के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन्हें प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में इन उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को धरातल पर उतारने के लिए पुलिस ने बहुआयामी रणनीति के तहत कार्य किया है। उनका कहना था कि बदलते अपराध स्वरूप, साइबर चुनौतियों और सामाजिक सुरक्षा के नए आयामों को ध्यान में रखते हुए पुलिसिंग की कार्यप्रणाली में तकनीक, प्रशिक्षण और जवाबदेही को केंद्र में रखा गया। डीजीपी ने बताया कि बीते एक वर्ष के दौरान पुलिस विभाग ने दस प्रमुख प्राथमिकताओं पर विशेष फोकस किया। इनमें महिला सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण, संगठित अपराध के विरुद्ध कार्रवाई, पुलिस कल्याण, आतंकवाद विरोधी अभियान तथा नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन प्रमुख रहे। उन्होंने दावा किया कि पिछले सात से आठ वर्षों में अपराध के विभिन्न मानकों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जबकि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 9.5 प्रतिशत से लेकर 33 प्रतिशत तक कमी आई है। कहा कि मिशन शक्ति अभियान के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान की गई है। दूसरी ओर साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए, जिनके तहत 62 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। साइबर ठगी के मामलों में 450 करोड़ रुपये की धनराशि बचाकर यूपी पुलिस ने राष्ट्रीय स्तर पर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राजीव कृष्ण ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग अब केवल पारंपरिक जांच तक सीमित नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकों का उपयोग कर अपराधियों की पहचान, निगरानी और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया गया है। साथ ही पुलिस कर्मियों के कल्याण को भी प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत शहीद एवं दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिवारों को आर्थिक सहायता, चिकित्सा सुविधाएं तथा आवासीय योजनाएं उपलब्ध कराई गई हैं।।प्रेसवार्ता में डीजीपी का संदेश स्पष्ट था कि उत्तर प्रदेश पुलिस केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि तकनीकी रूप से सशक्त, संवेदनशील और जवाबदेह पुलिसिंग के माध्यम से आम नागरिकों के विश्वास को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में संगठित अपराध और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि अपराध की जड़ों पर निर्णायक प्रहार किया जा सके।

जीरो टॉलरेंस की धार से अपराध पर प्रहार, तकनीक और संकल्प के दम पर सुरक्षित हुआ उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए बीता एक वर्ष केवल प्रशासनिक उपलब्धियों का कालखंड नहीं रहा, बल्कि यह आधुनिक पुलिसिंग, तकनीकी नवाचार और अपराध के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष का वर्ष भी साबित हुआ। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में प्रदेश की कानून-व्यवस्था की तस्वीर प्रस्तुत करते हुए कहा कि पुलिस विभाग ने दस प्रमुख प्राथमिकताओं पर केंद्रित होकर कार्य किया और कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना निरंतर चुनौतीपूर्ण कार्य है। बढ़ती आबादी, बदलते अपराध स्वरूप, डिजिटल अपराधों की चुनौतियां तथा संगठित अपराध के नए नेटवर्क पुलिस के सामने लगातार नई परिस्थितियां उत्पन्न कर रहे हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पुलिस ने पारंपरिक कार्यशैली से आगे बढ़कर तकनीक, प्रशिक्षण और जवाबदेही को आधार बनाया।

महिला सुरक्षा बनी सर्वोच्च प्राथमिकता

डीजीपी ने कहा कि महिला सुरक्षा को पूरे वर्ष सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। मिशन शक्ति अभियान को प्रभावी रूप से संचालित करते हुए महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास को मजबूत करने के लिए व्यापक प्रयास किए गए। पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया ताकि महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, छेड़खानी, साइबर उत्पीड़न और यौन अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान संचालित किए गए। दावा किया कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 9.5 प्रतिशत से लेकर 33 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। यह कमी केवल सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं बल्कि समाज में बढ़ते विश्वास और पुलिस की सक्रियता का भी संकेत है।

साइबर अपराध के खिलाफ निर्णायक लड़ाई

राजीव कृष्ण ने साइबर अपराध को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद डिजिटल लेन-देन में हुई वृद्धि के साथ साइबर अपराधों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाया। 62 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध की पहचान, जांच और रोकथाम के लिए प्रशिक्षित किया गया। डीजीपी के अनुसार साइबर ठगी से जुड़े मामलों में अब तक लगभग 450 करोड़ रुपये की धनराशि बचाई या रोकवाई गई है। यह उपलब्धि देश में सबसे बड़ी कार्रवाइयों में शामिल है। कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई, डिजिटल फॉरेंसिक जांच और बैंकिंग संस्थाओं के साथ समन्वय के कारण यह सफलता संभव हुई।

एआई तकनीक से मजबूत हुई पुलिसिंग

आधुनिक अपराधों से निपटने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विशेष बल देते हुए डीजीपी ने कहा कि पुलिस विभाग ने एआई आधारित तकनीकों का प्रभावी उपयोग शुरू किया है। चेहरा पहचान प्रणाली, डेटा विश्लेषण और डिजिटल निगरानी तंत्र के माध्यम से कई फरार अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इससे अपराध नियंत्रण की प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी बनी है। आने वाले समय में तकनीक आधारित पुलिसिंग को और मजबूत किया जाएगा ताकि अपराधियों को कानून से बच निकलने का अवसर न मिल सके।

संगठित अपराध के खिलाफ लगातार कार्रवाई

उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत संगठित अपराध के विरुद्ध लगातार अभियान चलाए गए। डीजीपी ने कहा कि अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति पर विशेष बल दिया गया।
माफिया, गैंगस्टर और उनके सहयोगियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ उनकी अवैध संपत्तियों की पहचान और जब्ती की कार्रवाई भी की गई। इससे अपराध जगत में स्पष्ट संदेश गया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। आगामी समय में सफेदपोश अपराधियों और संगठित अपराध से जुड़े आर्थिक तंत्र पर और अधिक प्रभावी प्रहार किया जाएगा।

आतंकवाद और कट्टरपंथी नेटवर्क पर पैनी नजर

डीजीपी ने आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सीमा पार बैठे तत्व सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एटीएस और एसटीएफ लगातार सक्रिय हैं। हाल के दिनों में 12 से 13 संदिग्ध व्यक्तियों की गिरफ्तारी की गई है, जो राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोपों में जांच के दायरे में आए। उत्तर प्रदेश पुलिस किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधि या कट्टरपंथी नेटवर्क को जड़ जमाने का अवसर नहीं देगी।

नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन पर विशेष फोकस

देश में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस विभाग व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को नए कानूनी प्रावधानों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के महत्व और समयबद्ध विवेचना की प्रक्रिया से अवगत कराया जा रहा है। डीजीपी ने बताया कि आरोप पत्र समय पर दाखिल कराने तथा तकनीकी साक्ष्यों को सुरक्षित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि अदालतों में अभियोजन अधिक प्रभावी हो सके।

डिजिटल न्याय व्यवस्था की ओर बड़ा कदम

न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए ई-समन व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। अब अदालतों से जारी समन सीधे डिजिटल माध्यम से थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। लगभग 90 प्रतिशत मामलों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी।

पुलिस कल्याण योजनाओं को मिली गति

राजीव कृष्ण ने कहा कि पुलिस बल की मजबूती केवल हथियारों और संसाधनों से नहीं बल्कि कर्मियों के मनोबल से भी तय होती है। इसी सोच के तहत पुलिस कल्याण योजनाओं को प्राथमिकता दी गई। ड्यूटी के दौरान शहीद अथवा दुर्घटना में मृत पुलिसकर्मियों के परिजनों को 137 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त 51 हजार पुलिसकर्मियों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। पुलिस परिवारों के लिए छात्रावास और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

जवाबदेही पर सख्त रुख

डीजीपी ने स्पष्ट कहा कि पुलिस विभाग में किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जवाबदेही और पारदर्शिता ही जनता के विश्वास की आधारशिला है।

* महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता, अपराधों में 9.5 से 33 प्रतिशत तक कमी का दावा
* साइबर ठगी के 450 करोड़ रुपये बचाकर देश में मिसाल बनी यूपी पुलिस
* 62 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध से निपटने का प्रशिक्षण
* एआई तकनीक से अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में मिली बड़ी सफलता
* शहीद व दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिजनों को 137 करोड़ रुपये की सहायता
* नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर
* संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क की आर्थिक कमर तोड़ने की तैयारी
* आतंकवाद और कट्टरपंथी नेटवर्क पर एटीएस, एसटीएफ की लगातार कार्रवाई

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