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- कंपोजिट विद्यालय ठेकहा पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप: एमडीएम, कंपोजिट ग्रांट, डीबीटी और नामांकन में गड़बड़ी की शिकायत, निष्पक्ष जांच की उठी मांग
- 2021 से 2024 तक की योजनाओं की जांच कराने की मांग, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
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शहाबगंज/चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के कंपोजिट विद्यालय ठेकहा एक बार फिर शिकायतों और आरोपों को लेकर चर्चा में है। ग्रामीणों और कुछ अभिभावकों द्वारा जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग को दिए गए शिकायत पत्र में विद्यालय के संचालन, मध्याह्न भोजन (एमडीएम), कंपोजिट ग्रांट, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, यूथ क्लब, इको क्लब, आंगनबाड़ी, छात्र नामांकन तथा अन्य सरकारी योजनाओं में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
कंपोजिट ग्रांट और अन्य मदों में वित्तीय अनियमितता का आरोप
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2021 से अब तक विद्यालय को कंपोजिट ग्रांट, खेल सामग्री, यूथ क्लब, इको क्लब, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब सहित विभिन्न मदों में धनराशि प्राप्त हुई, लेकिन उसका उपयोग नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं, इसकी जांच आवश्यक है। मांग की गई है कि सभी खरीद संबंधी बिल, वाउचर, स्टॉक रजिस्टर और भुगतान अभिलेखों का सत्यापन कराया जाए।

एमडीएम योजना को लेकर गंभीर शिकायतें
शिकायत में कहा गया है कि मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में भी कई प्रकार की अनियमितताएं हुई हैं। आरोप है कि बच्चों की वास्तविक उपस्थिति से अधिक संख्या दर्ज कर भोजन का विवरण तैयार किया गया। शिकायतकर्ताओं का यह भी दावा है कि वर्ष 2021 से 2024 तक बच्चों को दूध वितरण नियमित रूप से नहीं किया गया, जबकि इसके लिए बजट उपलब्ध था।
इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि विद्यालय में गैस सिलेंडर उपलब्ध होने के बावजूद भोजन लकड़ी और उपलों पर बनाया जाता है। निर्धारित मेन्यू का पालन नहीं किया जाता तथा कई बार भोजन समय पर नहीं वितरित होता।



प्रधानाध्यापक अच्युतानंद त्रिपाठी और ग्राम प्रधान की मिलीभगत का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मध्याह्न भोजन सहित कई योजनाओं में प्रधानाध्यापक अच्युतानंद त्रिपाठी और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से अनियमितताएं की गईं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
समय से पहले विद्यालय बंद होने की शिकायत
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक अच्युतानंद त्रिपाठी नियमित समय से विद्यालय नहीं पहुंचते तथा कई अवसरों पर विद्यालय निर्धारित समय से पहले बंद कर दिया जाता है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस संबंध में कई बार मौखिक एवं लिखित शिकायतें भी की गईं।
विद्यालय परिसर में पान-गुटखा सेवन का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि विद्यालय परिसर में पान एवं गुटखा का सेवन किया जाता है, जिससे बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि यह शिकायत सही पाई जाती है तो यह विद्यालय की गरिमा और शिक्षा विभाग के नियमों के विपरीत माना जाएगा।
आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास के उपयोग पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में स्थापित आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास का उपयोग बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रभावी ढंग से नहीं किया जाता। अधिकांश समय लैब बंद रहती है, जबकि इन सुविधाओं का उद्देश्य डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना है।
विद्यालय भवन और स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं के अनुसार विद्यालय भवन, शौचालय और परिसर की साफ-सफाई संतोषजनक नहीं है। रंगाई-पुताई, मरम्मत, दरवाजे और खिड़कियां भी लंबे समय से जर्जर अवस्था में हैं। इससे विद्यार्थियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
खेल सामग्री और डीबीटी लाभ वितरण की जांच की मांग
शिकायत में कहा गया है कि बच्चों को खेल सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराई गई। साथ ही कई पात्र छात्र-छात्राओं को ड्रेस, बैग, जूते तथा डीबीटी के तहत मिलने वाली ₹1200 की सहायता समय पर नहीं मिली। शिकायतकर्ताओं ने लाभार्थियों की सूची और भुगतान अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
एसएमसी बैठकों पर भी उठे सवाल
विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) की बैठकों को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि कई बैठकों का आयोजन वास्तविक रूप से नहीं हुआ और केवल अभिलेखों में दर्शाया गया। शिकायतकर्ताओं ने बैठक रजिस्टर और हस्ताक्षरों के सत्यापन की मांग की है।
नामांकन और उपस्थिति में गड़बड़ी का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2021 से 2024 तक ऐसे बच्चों के नाम भी विद्यालय में दर्ज रहे, जो वास्तव में अन्य विद्यालयों में अध्ययनरत थे। आरोप है कि उनके नाम पर सरकारी योजनाओं का लाभ भी दर्शाया जाता रहा। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि आधार आधारित सत्यापन प्रणाली लागू होने के बाद अनेक नाम सूची से हटाए गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
खंड शिक्षा अधिकारी अजय कुमार की भूमिका पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कई शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि—
वर्ष 2021 से अब तक की सभी योजनाओं का वित्तीय ऑडिट कराया जाए।
एमडीएम, कंपोजिट ग्रांट, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, यूथ क्लब एवं इको क्लब की जांच कराई जाए।
लाभार्थियों, उपस्थिति रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर और भुगतान अभिलेखों का सत्यापन कराया जाए।
विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण कराया जाए।
यदि जांच में अनियमितता सिद्ध हो तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल विद्यालय से संबंधित ये सभी आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब यह मामला प्रशासन और शिक्षा विभाग की जांच पर निर्भर करेगा। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है, जबकि आरोप असत्य पाए जाने पर संबंधित पक्ष को भी राहत मिलेगी। निष्पक्ष जांच ही इस पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है।
खंड शिक्षा अधिकारी अजय कुमार का कारनामा अगले अंक में क्रमशः………




