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एबीवीपी का गोरक्ष प्रांत सम्मेलन: सुरेश खन्ना,दयाशंकर व डॉ .राकेश ने एबीवीपी के कार्यकर्ताओं का किया हौसलाफजाई,विभिन्न जनपदों से आये लोगो मे विश्वास की अलख जलाई

●  एबीवीपी का गोरक्ष प्रांत सम्मेलन

●  सुरेश खन्ना, दयाशंकर व डॉ .राकेश ने एबीवीपी के कार्यकर्ताओं का किया हौसलाफजाई, विभिन्न जनपदों से आये लोगो मे विश्वास की अलख जलाई

●  अभाविप गोरक्ष प्रांत में नई ऊर्जा का उदय, बलिया की क्रांतिकारी धरती से मिली प्रेरणा

●  डॉ.राकेश अध्यक्ष, शशिकांत मंगलम मंत्री युवाओं के नेतृत्व का नया अध्याय प्रारंभ

●  विविधता में शक्ति, अनुशासन में ऊर्जा, और राष्ट्र भावना में दिशा

 

कंचन सिंह

 

बलिया। वह भूमि जिसने 1942 में नेतृत्व को अवसर नहीं, संघर्ष में जन्म देना चाहिए का मंत्र पूरे देश को दिया था। सच्चिदानंद सिंह से लेकर चित्तू पांडेय तक, इस धरती ने हमेशा ऐसे युवाओं को जन्म दिया जिन्होंने देश के आगे खड़े होकर कहा कि शासन जनता का, और भविष्य युवाओं का। इसी परंपरा को आज की पीढ़ी में पुनर्जीवित करने का कार्य जिस संगठन ने सबसे अधिक प्रभावी ढंग से किया है, वह है अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद। यही कारण है कि गोरक्ष प्रांत का 65 वां प्रांत अधिवेशन जब गूंजा, तो उसकी प्रतिध्वनि बलिया की क्रांतिकारी ताकत के समान पूरे पूर्वांचल में महसूस की गई। गोरखपुर के डॉ. राकेश प्रताप सिंह प्रांत अध्यक्ष निर्वाचित हुए और मऊ के शशिकांत मंगलम गुप्ता ने प्रांत मंत्री का दायित्व संभाला तो इस ऐतिहासिक अधिवेशन ने खुद को ‘नई ऊर्जा, नए नेतृत्व और नए संकल्प’ का उद्घाटन समारोह साबित कर दिया।

● बलिया से गोरखपुर तक युवा नेतृत्व की क्रांतिकारी परंपरा का विस्तार

● अभाविप का अधिवेशन 17 जिलों के 1000 से अधिक युवाओं का जनसंघर्ष सम्मेलन

● राष्ट्र भावनाओं के जागरण का सबसे बड़ा मंच : सुरेश खन्ना

● मैं भी अभाविप का कार्यकर्ता रहा हूं : दयाशंकर सिंह

● रक्तदान से राष्ट्र सम्मान तक अभाविप की सेवा-यात्रा पर राष्ट्रीय स्तर की मुहर

● चरित्र, क्षमता और संस्कार, नए नेतृत्व की तीन आधारशिलाएं

● गोरक्ष प्रांत में संगठनात्मक मजबूती का नया अध्याय

● अभाविप के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति 15 साल बाद उत्साह चरम पर चरम पर

● 65 वां प्रांत अधिवेशननए नेतृत्व का जन्मस्थल

बलिया के मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्थापित मंगल पांडेय नगर में रविवार को जब 65 वें प्रांत अधिवेशन का उद्घाटन हुआ, तो मंच पर उत्साह, संगठनात्मक तेज और युवाओं की ऊर्जा एक साथ दिखाई दी। अधिवेशन स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी से लेकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक, हर विधा में पूर्वांचल की समृद्ध परंपरा और अभाविप के अनुशासन की झलक साफ दिखी। उद्घाटन से पहले ही घोषणा हुई कि प्रांत अध्यक्ष डॉ.राकेश प्रताप सिंह, प्रांत मंत्री शशिकांत मंगलम गुप्ता का नाम सुनते ही तालियों की आवाज जैसे पूरी सभा में एक नया उत्साह भर गई।

17 जिलों के 1000 से अधिक कार्यकर्ता रहे मौजूद

गोरक्ष प्रांत के 17 संगठनात्मक जिलों से लगभग 1000 विद्यार्थी अधिवेशन में पहुंचे। बस्ती, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, कुशीनगर, मऊ हर जिले से छात्रों का कारवां इस रूप में आया कि मानो पूर्वांचल के युवाओं ने एक साथ संकल्प उठा लिया हो कि आने वाला दशक राष्ट्रनिर्माण के नाम है। शहर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी प्रतिष्ठित बनाया।

रक्तदान से राष्ट्रनिर्माण का सबसे बड़ा विद्यालय : सुरेश खन्ना

मुख्य अतिथि, उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि अभाविप की पहचान और कार्य के इतिहास का विस्तृत घोषणापत्र जैसा रहा। यह संगठन केवल छात्र राजनीति नहीं करता, यह राष्ट्रभक्ति, नेतृत्व, अनुशासन और संवेदनशीलता के गुणों को विकसित कर विद्यार्थियों को राष्ट्र की शक्ति में बदलता है। उन्होंने विशेषतया अभाविप के रक्तदान अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि अनगिनत जीवन बचाने वाला यदि कोई छात्र संगठन है, तो वह केवल अभाविप है। सभा तालियों से गूंज उठी क्योंकि यह भावनात्मक स्वीकृति केवल प्रशंसा नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अभाविप के प्रभाव की मान्यता थी।

मैं भी अभाविप का सदस्य रहा : दयाशंकर सिंह

विशिष्ट अतिथि, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने अपनी ही छात्र जीवन की यादें साझा कर सभा को भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि आज जो दायित्व हम राज्य स्तर पर निभा रहे हैं, उसकी बुनियाद अभाविप ने ही रखी थी। अभाविप ने चरित्र, क्षमता और नेतृत्व की ऐसी फौज तैयार की है जिस पर देश को गर्व है। उनके इस वक्तव्य ने यह संदेश दिया कि अभाविप न केवल नेतृत्व गढ़ता है, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करता है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन के दूत बनते हैं।

राष्ट्रीय और प्रांतीय पदाधिकारियों की प्रभावशाली उपस्थिति

कार्यक्रम में राष्ट्रीय मंत्री अंकित शुक्ल, संघ सह प्रांत प्रचारक सुरजीत, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, पूर्वी उत्तर प्रदेश घनश्याम शाही, प्रो. उमा श्रीवास्तव, निवर्तमान प्रदेश मंत्री मयंक राय, ऋषभ सिंह विशेन, अर्पित कसौधन, किशन मिश्रा की उपस्थिति ने अधिवेशन को संगठनात्मक गंभीरता और रणनीतिक महत्व का कार्यक्रम बना दिया।

राष्ट्र भावना, छात्र हित और सेवा

चुने गए नए प्रांत अध्यक्ष और मंत्री के सामने कई बड़ी चुनौतियां और अवसर हैं। उनकी कार्ययोजना के तीन मुख्य स्तंभ हैं पहला छात्र हितों की रक्षा, फीस वृद्धि, पारदर्शी परीक्षाएं, छात्रावास व्यवस्था। दूसरा समाज सेवा अभियान रक्तदान, स्वच्छता, पर्यावरण अभियान।
तीसरा राष्ट्र भावना युवाओं को देश की प्रगति से जोड़ने वाले कार्यक्रम।

बलिया मॉडल साहस, त्याग और नेतृत्व की विरासत

अधिवेशन का भावनात्मक हिस्सा वह क्षण था जब बलिया के स्वतंत्रता संग्राम की यादें मंच पर दोहराई गईं।
सभा में यह कहा गया कि बलिया ने नेतृत्व को सिद्ध किया, गोरखपुर उसे दिशा देगा। यह वाक्य केवल भाषण का हिस्सा नहीं था, बल्कि पूरे अधिवेशन का संदेश था कि पूर्वांचल का युवा देश की राजनीति, समाज और राष्ट्रसेवा के केंद्र में होगा।

15 वर्षों बाद युवाओं का जोश

स्थानीय प्रशासन से लेकर शहरवासियों तक ने इस आयोजन की प्रशंसा की। कई वरिष्ठ नागरिकों का कहना था कि अभाविप ने 15 साल बाद ऐसा ऊर्जा से भरा, व्यवस्थित और विराट अधिवेशन दिखाया है। युवाओं के बीच संगठन की स्वीकार्यता और लोकप्रियता स्पष्ट दिखाई दे रही थी।

* गोरखपुर में अभाविप गोरक्ष प्रांत का 65 वां अधिवेशन भव्य रूप से सम्पन्न।
* बलिया की क्रांतिकारी परंपरा को जोड़ते हुए युवाओं का नेतृत्व पर जोर।
* डॉ.राकेश प्रांत अध्यक्ष और शशिकांत मंगलम गुप्ता प्रांत मंत्री निर्वाचित।
* 17 जिलों से 1000 से अधिक कार्यकर्ताओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति।
* अभाविप राष्ट्र भावना और सेवा का सबसे बड़ा मंच।
* मैं भी अभाविप का कार्यकर्ता रहा हूं इस पर गर्व है। दयाशंकर सिंह
” रक्तदान, सेवा, नेतृत्व और चरित्र निर्माण—अभाविप के चार स्थायी स्तंभ।
* नए कार्यकाल में छात्र हित, राष्ट्र भावना और सेवा अभियान को शीर्ष प्राथमिकता।

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