वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने मातहतो को चेताया,शासकीय कार्यो में लापरवाही करने वालो का बिगाड़ देंगे काया
नियोजित विकास की ओर सख्त कदम, अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस, मानचित्र स्वीकृति में तेजी

- वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक
- मानचित्र स्वीकृति में तेजी पर जोर
- कम्पाउंडिंग मानचित्रों अवैध निर्माण को वैध बनाने का हथियार नहीं बनने दिया जाएगा
- अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई के निर्देश
- जोनल अधिकारियों और अवर अभियंताओं को स्पष्ट कि वे फाइलों तक सीमित न रहें
- वाराणसी का विकास केवल इमारतें खड़ी करने से नहीं, बल्कि संतुलित, सुरक्षित और नियोजित शहरी ढांचे से

अमित मौर्य
वाराणसी। काशी जैसे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले शहर में शहरी विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रह सकता। यहां हर ईंट, हर सड़क और हर लेआउट के पीछे नियोजन, संतुलन और नियमों का पालन अनिवार्य हो जाता है। बीते कुछ वर्षों में वाराणसी विकास प्राधिकरण के सामने सबसे बड़ी चुनौती अवैध प्लाटिंग, नियमविरुद्ध निर्माण और मानचित्र स्वीकृति में अनावश्यक विलंब को लेकर रही है। इन्हीं तमाम मुद्दों को लेकर वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा की अध्यक्षता में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसने आने वाले समय के लिए प्राधिकरण की कार्यशैली और प्राथमिकताओं को स्पष्ट संकेत दिया है। समीक्षा बैठक में सभी जोन के जोनल अधिकारी और अवर अभियंता मौजूद रहे। बैठक का एजेंडा साफ था, नियोजित विकास, पारदर्शिता और नागरिक सुविधा। उपाध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास प्राधिकरण का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है जिससे अवैधता पनपने का अवसर ही न मिले। इसी क्रम में कम्पाउंडिंग मानचित्रों, जमा धनराशि की स्थिति, लेआउट स्वीकृति और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों की गहन समीक्षा की गई। काशी में बढ़ती आबादी, तेजी से हो रहा शहरी विस्तार और रियल एस्टेट के बढ़ते दबाव ने अवैध प्लाटिंग की समस्या को और गंभीर बना दिया है। कई इलाकों में बिना स्वीकृति कॉलोनियां विकसित हो गईं, जिससे न केवल बुनियादी सुविधाओं पर असर पड़ा बल्कि भविष्य में सड़क, सीवर, जलापूर्ति और अग्निशमन जैसी व्यवस्थाएं भी संकट में पड़ गईं। ऐसे में इस बैठक को केवल एक औपचारिक समीक्षा के रूप में नहीं, बल्कि प्रशासनिक सख़्ती और जवाबदेही की नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने यह भी रेखांकित किया कि मानचित्र और लेआउट स्वीकृति की प्रक्रिया यदि समयबद्ध और सुचारु होगी तो आम नागरिक अनावश्यक चक्कर नहीं लगाएंगे और भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी स्वतः कम होंगी। उन्होंने सभी जोनल अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें और तय समय-सीमा में उनका निस्तारण सुनिश्चित करें। बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने, नियमित निरीक्षण करने और अवैध गतिविधियों की प्रारंभिक अवस्था में ही कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। संदेश साफ था अब केवल फाइलों में नोटिंग से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर उपस्थिति और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
समीक्षा बैठक का एजेंडा और प्रशासनिक दृष्टिकोण
वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा की अध्यक्षता में आयोजित इस समीक्षा बैठक को प्रशासनिक कैलेंडर की एक सामान्य बैठक मानना भूल होगी। इसमें न केवल आंकड़ों की समीक्षा की गई, बल्कि नीतिगत स्पष्टता और भविष्य की रणनीति भी तय की गई। बैठक में प्रत्येक जोन से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें स्वीकृत मानचित्रों की संख्या, लंबित प्रकरण, कम्पाउंडिंग के मामले और जमा धनराशि की स्थिति शामिल थी। उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा। यदि किसी जोन में अवैध प्लाटिंग या निर्माण पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। यह निर्देश केवल चेतावनी नहीं बल्कि प्रशासनिक सख़्ती का संकेत माना जा रहा है।
मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति
बैठक के दौरान सबसे अधिक जोर मानचित्र और लेआउट स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर दिया गया। उपाध्यक्ष ने कहा कि आम नागरिक जब अपने घर या व्यवसाय के लिए मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन करता है, तो उसे महीनों तक दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए ऑनलाइन सिस्टम के बेहतर उपयोग, समय-सीमा तय करने और जिम्मेदार अधिकारी नामित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई फाइल अनावश्यक रूप से लंबित पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। इससे स्पष्ट है कि प्राधिकरण अब केवल नियमों की बात नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी फोकस कर रहा है।
कम्पाउंडिंग मानचित्र और जमा धनराशि की समीक्षा
बैठक में कम्पाउंडिंग मानचित्रों से संबंधित मामलों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। उपाध्यक्ष ने निर्देश दिया कि कम्पाउंडिंग केवल नियमों के दायरे में ही की जाए और इसे अवैध निर्माण को वैध बनाने का आसान रास्ता न बनने दिया जाए। जमा धनराशि की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने पारदर्शी लेखा-जोखा और समय पर अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
अवैध प्लाटिंग और निर्माण पर सख्त रुख
अवैध प्लाटिंग और निर्माण को लेकर उपाध्यक्ष का रुख बेहद सख़्त दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी जोन में अवैध कॉलोनी विकसित हो रही है, तो यह प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी। इसके लिए नियमित निरीक्षण, ड्रोन सर्वे और स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध निर्माण के मामलों में कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित न रहे, बल्कि नियमानुसार ध्वस्तीकरण और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जोनल अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही
बैठक में जोनल अधिकारियों और अवर अभियंताओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। उपाध्यक्ष ने कहा कि फील्ड स्तर पर यही अधिकारी प्राधिकरण की आंख और कान होते हैं। यदि वे समय रहते कार्रवाई करेंगे तो बड़ी समस्याएं अपने आप नियंत्रित हो जाएंगी। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक जोन में मासिक समीक्षा बैठक अनिवार्य रूप से की जाए और उसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाए।
नियोजित और संतुलित शहरी विकास का विज़न
उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने कहा कि वाराणसी का विकास केवल ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि संतुलित और नियोजित ढांचे से होगा। सड़क, जलनिकासी, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधाओं का समुचित विकास ही शहर को रहने योग्य बनाएगा। इसके लिए नियमों का सख़्ती से पालन अनिवार्य है। कहा कि विकास प्राधिकरण का उद्देश्य नागरिकों को सुविधा देना है, न कि उन्हें परेशान करना। लेकिन इसके लिए नागरिकों को भी नियमों का पालन करना होगा। समीक्षा बैठक केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है कि अब विकास के नाम पर अराजकता नहीं चलेगी। अवैध प्लाटिंग, नियमविरुद्ध निर्माण और अफसरशाही की सुस्ती तीनों पर एक साथ प्रहार करने की तैयारी है। यदि यह निर्देश कागजों से निकलकर जमीन पर लागू होते हैं, तो वाराणसी का शहरी परिदृश्य आने वाले वर्षों में बदलता नजर आ सकता है।
* वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा की अध्यक्षता में सभी जोन की समीक्षा बैठक
* मानचित्र व लेआउट स्वीकृति प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के निर्देश
* कम्पाउंडिंग मामलों में नियमों का सख़्त पालन
* अवैध प्लाटिंग और निर्माण पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति
* नियमित निरीक्षण और कड़ी कार्रवाई के निर्देश
* जोनल अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का संकेत
* नियोजित और संतुलित शहरी विकास पर जोर




