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डीजीपी राजीव कृष्णा की कड़ाई, यूपी में रेलवे सुरक्षा नही होगी ढिलाई

उत्तर प्रदेश में रेलवे सुरक्षा का हाई-टेक कवच जीरो टॉलरेंस से सुरक्षित यात्रा का संकल्प

  • डीजीपी राजीव कृष्ण की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय मंथन
  • रेलवे नेटवर्क को अभेद्य बनाने की रणनीति तैयार
  • पत्थरबाजी और आतंकी खतरों पर कड़ा प्रहार
  • जीआरपी, आरपीएफ और सिविल पुलिस के बीच समन्वय पर जोर
  • महाकुंभ-2025 मॉडल से प्रेरित सुरक्षा ढांचा
  • हाई-टेक निगरानी और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर फोकस
  • छोटी घटनाओं को भी गंभीरता से जांचने के निर्देश
  • जीरो टॉलरेंस नीति से अपराधियों पर शिकंजा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में रेलवे सुरक्षा को लेकर अब एक निर्णायक और अचूक संघर्ष की शुरुआत हो चुकी है। प्रदेश सरकार और पुलिस महकमा इस दिशा में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। यही कारण है कि रेलवे नेटवर्क, जो देश की जीवन रेखा माना जाता है, उसकी सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक व्यापक और अत्याधुनिक रणनीति तैयार की गई है। शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय रेलवे सुरक्षा समिति की बैठक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने एकजुट होकर भविष्य की चुनौतियों से निपटने का रोडमैप तैयार किया। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने की, जिसमें रेलवे, आरपीएफ, जीआरपी और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य था रेलवे सुरक्षा को और मजबूत बनाना, ट्रेनों पर हो रही पत्थरबाजी की घटनाओं पर रोक लगाना और संभावित आतंकी खतरों को समय रहते निष्क्रिय करना। डीजीपी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय रेलवे केवल एक परिवहन माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की लाइफलाइन है। इसकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। यही कारण है कि अब सुरक्षा एजेंसियां जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करेंगी, जहां किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि बदलते समय के साथ सुरक्षा के तौर-तरीकों में बदलाव लाना जरूरी है। बढ़ते रेल ट्रैफिक और यात्रियों की संख्या के कारण सुरक्षा चुनौतियां भी जटिल होती जा रही हैं। ऐसे में पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना समय की मांग बन गया है। महाकुंभ-2025 के दौरान रेलवे सुरक्षा के सफल प्रबंधन का उदाहरण देते हुए डीजीपी ने कहा कि उस दौरान लगभग 6 करोड़ यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना एक बड़ी उपलब्धि थी। यह मॉडल अब पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा ताकि हर यात्री सुरक्षित और निर्बाध यात्रा कर सके। बैठक में पुलिस महानिदेशक रेलवे प्रकाश डी. द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया गया, जिसमें रेलवे सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर गहराई से चर्चा की गई। इसमें ट्रैक पेट्रोलिंग, स्टेशनों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और अपराध रोकथाम के आधुनिक तरीकों को शामिल किया गया। इसके साथ ही अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्कता का नया मंत्र दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि रेलवे नेटवर्क पर होने वाली छोटी से छोटी घटनाओं को भी नजरअंदाज न किया जाए, बल्कि उन्हें संभावित आतंकी गतिविधियों के एंगल से भी जांचा जाए। इस बैठक का सार यही रहा कि उत्तर प्रदेश में रेलवे सुरक्षा अब एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। जहां तकनीक, सतर्कता और समन्वय के जरिए अपराध और खतरे दोनों पर निर्णायक प्रहार किया जाएगा। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक संकल्प है हर यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने का।

सुरक्षा एजेंसियों का संयुक्त मोर्चा

उत्तर प्रदेश में रेलवे सुरक्षा को लेकर जिस तरह से व्यापक रणनीति तैयार की गई है, वह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं बल्कि प्राथमिकता बन चुकी है। राज्य स्तरीय रेलवे सुरक्षा समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में रेलवे नेटवर्क पर किसी भी प्रकार की आपराधिक या संदिग्ध गतिविधि के लिए कोई स्थान नहीं होगा। रेलवे सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय है। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जीआरपी, आरपीएफ और सिविल पुलिस के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज और प्रभावी होना चाहिए। अब तक कई मामलों में देखा गया है कि एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी के कारण अपराधी बच निकलते हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए एक संयुक्त कमांड सिस्टम विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे हर एजेंसी एक ही दिशा में काम करेगी।

पत्थरबाजी की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई

ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाएं लंबे समय से रेलवे सुरक्षा के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। इससे न केवल यात्रियों की जान को खतरा होता है, बल्कि रेलवे संपत्ति को भी नुकसान पहुंचता है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई जाएगी और स्थानीय पुलिस को भी जिम्मेदारी दी जाएगी कि वह ऐसे तत्वों पर नजर रखे।

हाई-टेक निगरानी प्रणाली

अब रेलवे सुरक्षा को तकनीक से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन सर्विलांस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली को लागू करने की योजना है। स्टेशनों और ट्रैक पर होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। इससे संदिग्ध गतिविधियों का तुरंत पता लगाया जा सकेगा।

ट्रैक पेट्रोलिंग को सघन बनाना

रेलवे ट्रैक की सुरक्षा को लेकर भी व्यापक योजना बनाई गई है। जीआरपी और आरपीएफ द्वारा संयुक्त रूप से ट्रैक पेट्रोलिंग को बढ़ाया जाएगा। विशेषकर रात के समय और संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग को और अधिक सघन बनाया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या तोड़फोड़ को रोका जा सके।

भीड़ नियंत्रण और स्टेशन सुरक्षा

बड़े स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण एक बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए नई रणनीति तैयार की गई है, जिसमें एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स को व्यवस्थित करना, टिकट चेकिंग को सख्त करना और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करना शामिल है। इसके अलावा, रेलवे स्टेशनों पर तैनात सुरक्षा बलों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

महाकुंभ मॉडल का विस्तार

महाकुंभ-2025 के दौरान जिस तरह से सुरक्षा व्यवस्था को संभाला गया, वह एक मिसाल बन चुका है। इस मॉडल को अब पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना है।
इसमें भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक कंट्रोल और सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल को प्रमुखता दी जाएगी।

आतंकी खतरों पर विशेष नजर

अपर पुलिस महानिदेशक अमिताभ यश ने स्पष्ट किया कि अब छोटी से छोटी घटनाओं को भी हल्के में नहीं लिया जाएगा। कई बार छोटी घटनाएं बड़े खतरे का संकेत होती हैं। इसलिए हर घटना की गहराई से जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर एटीएस और खुफिया एजेंसियों की मदद ली जाएगी। रेलवे सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार भी जरूरी है। पुराने उपकरणों को बदलकर आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे और सुरक्षा बलों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पूरी रणनीति इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश अब रेलवे सुरक्षा के मामले में एक नई दिशा में आगे बढ़ चुका है।

* रेलवे सुरक्षा के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति लागू
* जीआरपी, आरपीएफ और सिविल पुलिस के बीच बेहतर समन्वय
* ट्रेनों पर पत्थरबाजी रोकने के लिए सख्त निगरानी
* हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम का उपयोग
* ट्रैक पेट्रोलिंग को सघन बनाने का निर्णय
* स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण के लिए नई रणनीति
* छोटी घटनाओं की भी गहराई से जांच
* महाकुंभ मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना

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