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आंध्रा के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने बिल गेट्स का तलवा लिया चाट,नए वैक्सीन ट्रायल से देश की खड़ी हो जाएगी खाट

एक और वैक्सीन ट्रायल के लिए भारत आए बिल गेट्स? चंद्रबाबू नायडू के जरिए मोदी पर दबाव बनाने का खेल!

– दुनियाभर में विरोध के बावजूद बिल गेट्स का आंध्रप्रदेश में जमकर स्वागत
– 2009 में गेट्स फाउंडेशन ने बिना अनुमति वैक्सीन का किया था ट्रायल, 7 की मौत हुई थी
– अब एक नए वैक्सीन के ट्रायल के लिए चंद्रबाबू नायडू को मनाने पहुंचे
– चंद्रबाबू के जरिए नरेंद्र मोदी को मनाने की रणनीति, एनडीए में साझेदार हैं तेलुगू देशम पार्टी
– लोगों को मारकर दुनिया की जनसंख्या कम करना चाहते हैं बिल गेट्स

नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट के नाम से पूरी दुनिया में कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बेचने वाले बिल गेट्स आजकल मच्छर पैदा करते हैं। जी हां। न केवल वे मच्छर पैदा करते हैं, बल्कि हर हफ्ते दुनिया के कई देशों को बेचते भी हैं। बिल गेट्स पर अब दुनियाभर में आरोप लग रहे हैं कि वे कोविड 19 की तरह पूरे विश्व को एक और वायरस के जरिए खत्म करने की प्लानिंग कर रहे हैं। अलबत्ता, दुनिया के सबसे अमीर शख्सों में से एक बिल गेट्स का 16 फरवरी को हैदराबाद के अमरावती पहुंचने पर जमकर स्वागत किया गया है।

बताया जाता है कि बिल गेट्स 2009 के कैंसर वैक्सीन ट्रायल की तरह भारत में एक और वैक्सीन का ट्रायल करना चाहते हैं। एआई समिट के इतर उनकी भारत के हैदराबाद की यात्रा इसी सिलसिले में हुई है। जानकार सूत्रों के अनुसार, गेट्स अपने गेट्स फाउंडेशन के माध्यम से भारत में अपने वैक्सीन ट्रायल की अनुमति दिलवाने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंध्रप्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू का इस्तेमाल करना चाहते हैं। चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी केंद्र की एनडीए सरकार का समर्थन कर रही है।

पहले वायरस फैलाया और फिर वैक्सीन से कमाया

गेट्स फाउंडेशन पर काफी पहले से आरोप लगते रहे हैं कि उसने पहले तो कोविड वायरस को पूरी दुनिया में फैलाया और फिर उसी वायरस के इलाज का वैक्सीन निकालकर खूब कमाई की। अकेले भारत में कोविड के शिकार होकर 53 लाख लोग जान गंवा बैठे थे। इस पूरे मामले में विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका भी संदेह में है, जिसने एक ऐसी बीमारी का हौवा खड़ा किया, जो महामारी थी ही नहीं। आरोप है कि यह सारा खेल इजरायल और अमेरिका के इशारे पर खेला गया। दोनों के निशाने पर चीन था, जहां की आबादी को कम करने की साजिश रची गई थी, लेकिन कोविड का सबसे ज्यादा असर अमेरिका और भारत जैसे देशों में देखा गया।

गेट्स ने भारत को बताया था प्रयोगशाला

पिछले साल दिसंबर में माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने एक पॉडकास्ट में कहा कि एक प्रयोगशाला की तरह है, जहां आप अलग-अलग प्रयासों पर काम कर सकते हैं और जब यह प्रयास सफल हो जाते हैं, तो उन्हें दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी ले जाया जा सकता है। आपको बता दें कि बिल गेट्स ने 2009 में भारत में वैक्सीन ट्रायल भी किया था। एनजीओ पाथ के द्वारा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के साथ मिलकर सर्वाइकल कैंसर के लिए बनी वैक्सीन का भारत में ट्रायल किया गया था। ये एनजीओ गेट्स फाउंडेशन द्वारा फंडेड था। ट्रायल के दौरान आंध्रप्रदेश और गुजरात के करीब 14 हजार आदिवासी स्कूली छात्राओं को वैक्सीन लगाई गई। लेकिन वैक्सीन लगने के कुछ महीनों बाद ही छात्राओं में इसके गंभीर साइड इफेक्ट देखने को मिले और 7 लोगों की मौत भी हो गई।

आंध्र सरकार के साथ किया समझौता

गेट्स फाउंडेशन ने पिछले साल आंध्रप्रदेश सरकार के साथ डिजिटल हेल्थ और संजीवनी प्रोजेक्ट को लेकर समझौता किया है, जिसमें न केवल स्वास्थ्य, बल्कि कृषि के क्षेत्र में भी दोनों मिलकर काम करेंगे। इसमें आंध्र के सभी स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य का रिकॉर्ड गेट्स फाउंडेशन को भेजा जाएगा। आंध्रप्रदेश सरकार के सूत्रों का कहना है कि गेट्स फाउंडेशन राज्य की कृषि को मजबूत बनाने के लिए क्लाइमेट स्मार्ट बीजों और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पर जोर देने वाला है। वहीं, जानकार लोगों का कहना है कि यह पिछले दरवाजे से राज्य में बीटी कॉटन को बढ़ावा देने की चाल है, जिसकी कोशिश पिछले 20 साल से हो रही है। हाल में ही आंध्र सरकार और माइक्रोसॉफ्ट के बीच किसानों के आंकड़े, उनकी जमीनों के रिकॉर्ड आदि देने का भी समझौता हुआ है। आंध्रप्रदेश की 60 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है और अब एप्स्टीन फाइल्स में बिल गेट्स के मंसूबों की पूरी जानकारी सामने आने के बाद गेट्स फाउंडेशन के साथ करार का जबर्दस्त विरोध होने की संभावना है।

भारत में फिर ट्रायल करने की तैयारी?

एप्स्टीन फाइल्स में यह राज खुलने के बाद कि गेट्स फाउंडेशन एक ऐसे वैक्सीन पर काम कर रहा है, जिसे लगाने पर न केवल लोगों की प्रजनन क्षमता कम हो जाती है, बल्कि मौत भी जल्दी हो जाती है। यह बात भारत में तकरीबन हर रोज सच हो रही है। आए दिन ऐसी खबरें आ रही हैं कि चलते-फिरते, स्वस्थ लोग गश खाकर गिरते हैं और हार्ट अटैक से उनकी मौत हो जाती है। कई शोध और अनुसंधानों में यह बात सामने आई है कि इन अकाल मौतों के पीछे कोविड की वैक्सीन जिम्मेदारी है, जिसका सच केंद्र सरकार ने लोगों से छिपाया है। यहां तक कि एम्स के डॉक्टरों ने भी बताया है कि कोविड की वैक्सीन लगवाने वालों में खून जमने का खतरा है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। भारत में कोविड की दो तरह की वैक्सीन लगवाई गई थी- जिनमें सबसे ज्यादा वैक्सीन कोविशील्ड और उसके अलावा कोवैक्सीन लोगों को लगवाई गई थी। बाद में यह सामने आया था कि कोविशील्ड वैक्सीन लगवाने वालों में खून के थक्के जमने की ज्यादा संभावना रहती है। लेकिन भारत सरकार ने वैक्सीन लगवाने वालों के मरने की घटनाओं की न तो कभी जांच करवाई और न ही ऐसी मौतों पर आधिकारिक रूप से कुछ कहा है।

क्या है गेट्स की मच्छर फैक्ट्री का राज?

अमेरिका के कोलंबिया राज्य के मेडेलिन में बिल गेट्स की एक मच्छर फैक्ट्री है। इस फैक्ट्री में गेट्स हर सप्ताह 3 करोड़ जेनेटिकली मॉडिफाइड मच्छर बनाकर ब्राजील, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया समेत 11 दिशों को बेचते हैं। इन मच्छरों को वोलबेचिया नाम के एक वायरस से पहले संक्रमित करवाया जाता है। फिर इन्हें 11 देशों को डेंगू और जीका नाम के वायरस फैलाने वाले एडीज मच्छरों को नष्ट करने के लिए बेचा जाता है। बिल गेट्स ने अपनी यह मच्छर फैक्ट्री विश्व मच्छर कार्यक्रम के तहत लगाई है। विश्व मच्छर कार्यक्रम को गेट्स फाउंडेशन भी पैसा देता है। फैक्ट्री में जिका, डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले खतरनाक एडीज मच्छरों को पहले वोलबेचिया नाम के वायरस से संक्रमित करवाया जाता है। फिर इन संक्रमित मच्छरों को बीमारी संक्रमित देशों को बेच दिया जाता है। वहां ये संक्रमित मच्छर बाकी एडीज मच्छरों में भी वोलबेचिया वायरस का प्रसार कर देते हैं, जिससे उन मच्छरों मं डेंगू और मलेरिया के वायरस को ढोने की ताकत कम हो जाती है। नतीजा, प्रभावित देशों में डेंगू और मलेरिया का फैलाव रुक जाता है या फिर बेहद कम हो जाता है। अभी तक के शोध से पता चला है कि मेडेलिन में डेंगू और जिका का खतरा शून्य हो गया है, जबकि इंडोनेशिया में इन वायरस के शिकार मरीजों की संख्या में 77 फीसदी कमी आई है।

लोगों को विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर यकीन नहीं

गेट्स फाउंडेशन की इस मच्छर फैक्ट्री की कामयाबी पर अभी तक जो आंकड़े निकले हैं, वे भले ही लोगों की सेहत को लेकर एक उम्मीद की किरण जगाते हों, लेकिन कई देशों में लोगों को प्रोजेक्ट की कामयाबी को लेकर खास भरोसा नहीं है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल में एप्स्टीन की जो फाइलें जारी की हैं, उनमें बिल गेट्स का नाम करीब 40 हजार बार आया है। इसमें बिल गेट्स की बाल यौन अपराधी और हत्यारे जेफ्री एप्स्टीन के बीच 2017 में हुई उस बातचीत का भी ब्योरा शामिल है, जिसमें गेट्स ने दुनिया की जनसंख्या को कम करने का उपाय पूछा था। इससे पहले यह सामने आया था कि कोविड 19 वायरस चीन के वूहान की प्रयोगशाला से निकलकर दुनिया में फैला, लेकिन अब पता चला है कि वायरस अमेरिका से फैला और इसके पीछे गेट्स फाउंडेशन का बड़ा हाथ एप्स्टीन फाइल्स में निकलकर सामने आया है।

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