
* एक तो 75 की उम्र और दूसरे बिहार में सुशासन को कायम नहीं रख पाए नितीश
* बाबू चला रहे थे बिहार की सरकार, इसी बात को लेकर अमित शाह हुए नाराज
* अब बेटा बनेगा डिप्टी सीएम और बाप राज्यसभा में, जबकि भाजपा की होगी सत्ता
* सम्राट चौधरी का सीएम बनना लगभग तय, 19 अप्रैल तक सीएम रह सकेंगे नितीश
नई दिल्ली/पटना। केवल साढ़े 3 महीने तक सीएम रहने के बाद नितीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा के लिए आवेदन किया और सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। अब बिहार में भाजपा का राज होगा और नितीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड अनाथ होकर या तो भाजपा का शिकार बनेगी या फिर बिहार की राजनीति में हमेशा के लिए हाशिए पर चली जाएगी। इसी को भांपकर जदयू पार्टी के कार्यकर्ता और नेता नितीश की रवानगी पर रो रहे हैं।
अब नितीश के कुर्सी छोड़ने के बाद राज्य के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, राज्य के उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल और दीघा के भाजपा विधायक संजीव चौरसिया के सीएम बनने के प्रबल आसार हैं। इनमें से जो भी सीएम बनेगा, उसे नितीश के बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाकर अहसान भी चुकाना होगा। सूत्रों का यह भी मानना है कि केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय को भी सीएम बनाया जा सकता है।

75 पार या फिर बेटे का दुलार?
बुधवार को जब यह खबर आई कि नितीश कुमार बिहार के सीएम पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा में जाने वाले हैं तो यह सुनकर सभी हैरान रह गए कि नितीश ऐसा क्यों कर रहे हैं। हालांकि, जदयू के एक नेता ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि भाजपा के भीतर ही इस बात की सुगबुगाहट चल रही थी कि नितीश कुमार की बिहार से जल्दी ही रवानगी होगी। उनका कहना है कि भाजपा ने नितीश को केवल बिहार के विधानसभा चुनाव तक के लिए ही प्रोजेक्ट किया था, क्योंकि पार्टी के पास उनके कद का और कोई नेता नहीं था। जदयू नेता यह भी मानते हैं कि नितीश के कारण ही बिहार में भाजपा को इतनी बड़ी जात हासिल हुई। अगर वे नहीं रहते तो न तो जदयू और न ही भाजपा को जीत मिल सकती थी। वे दावा कर रहे हैं कि भाजपा उनकी इसी मदद को राज्यसभा की सीट ऑफर कर कर्ज के रूप में चुका रही है। उन्होंनें इस बात को मानने से इनकार कर दिया कि नितीश को 75 साल की उम्र का हो जाने के कारण सीएम पद से हटा दिया गया है। नितीश के इस तरह अचानक सीएम पद से हटने का एक और कारण उनका पुत्र मोह भी बताया जा रहा है। हालांकि इस दावे में काफी दम है, क्योंकि नितीश अब उम्रदराज हो गए हैं। उन्हें आने वाली पीढ़ी के लिए रास्ता खोलना ही था। ऐसे में उन्होंने निशांत कुमार के लिए भाजपा से डील ही और अगर सारा गणित ठीक बैठे तो बेटे को डिप्टी सीएम के रूप में आगे काम करने के लिए पांच साल मिलेंगे और इससे उनका राजनीतिक भविष्य सध जाएगा।
क्या जदयू टूटेगी?
भाजपा सूत्रों का दावा है कि बीते साल नवंबर में सीएम पद की शपथ लेने से पहले ही नितीश कुमार का मानना था कि उम्र और सेहत को देखते हुए उनके लिए राज्य में नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाना मुश्किल होगा। लेकिन चूंकि भाजपा ने नितीश के चेहरे पर भी सारा चुनावी दांव खेला था, इसलिए पार्टी ने उनसे आग्रह किया कि वे कुछ महीने बिहार का नेतृत्व संभालें, ताकि उस दौरान कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके। अनितीश के इस्ताफे और राज्यसभा में जाने के बाद यह साफ नजर आ रहा है कि बिहार का भावी सीएम भाजपा से ही किसी को बनाया जाएगा। हालांकि, बुधवार देर राज तक जदयू के आला नेता नितीश को यह समझाते रहे कि वे सीएम पद से इस्तीफा न दें, वरना पार्टी टूटकर बिखर जाएगी। लेकिन सीएम नहीं माने। जदयू के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने साफ कहा- यह सही है कि नितीश के राज्यसभा में जाने की चर्चा चल रही थी, लेकिन हमारे लिए यह मानना बहुत मुश्किल था कि वे इतनी जल्दी कुर्सी छोड़ देंगे। आखिर में फैसला पार्टी से उन पर ही छोड़ दिया था। उन्होंने बताया कि नितीश और जदयू के शुभचिंतकों के अनुसार, निशांत अब राजनीति में आ रहे हैं और वे अपने पिता की विरासत को बिहार में आगे ले जाएंगे। बिहार से ही भाजपा की सीट पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष निनतीन नबीन को भी राज्यसभा में नामांकित किया जाना है और इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पटना आए हुए हैं। बीते नवंबर मं हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीती थीं। इनमें जदयू ने 85 सीटें जीती थीं, जो कि पार्टी के लिए 42 सीटों की बढ़त रही और इसका पूरा श्रेय नितीश कुमार को दिया गया था। अब नितीश के जाने के बाद जदयू का क्या होगा- यह सवाल पूछे जाने पर पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की ओर से अभी तक कोई टिप्पणी नहीं आई है।
बिहार को बाबू चला रहे थे
यह भी माना जा रहा है कि बिहार में कानून-व्यवस्था और सुशासन के मुद्दे पर चल रहे कामकाज से गृह मंत्री अमित शाह काफी नाराज थे। उनका कहना था कि पिछले 4 महीनों में भाजपा ने राज्य में सुशासन के जो भी दावे किए, उन्हें नितीश कुमार के राज में खोखला साबित होना पड़ रहा है, क्योंकि खराब सेहत के कारण नितीश की कोई बात वे बाबू मान नहीं रहे थे, जो असल में बिहार में राज कर रहे हैं। ऐसे में बिहार को नए सीएम की सख्त जरूरत है। अमित शाह चाहते हैं कि बिहार में एक जवाबदेह सरकार बने और उन्होंने इसके लिए नितीश को राज्यसभा में भेजने का रास्ता चुना।
विपक्ष बोला- ये तो मादुरो जैसा मामला हो गया
नितीश के इस्तीफे और उनके राज्यसभा जाने को बिहार में विपक्षी दल राजद ने वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को अमेरिकी सैनिकों द्वारा अपहरण कर लिए जाने और वहां हुए सत्ता परिवर्तन की संज्ञा दी है। राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि अब जदयू के लिए हर दिन भारी पड़ेगा। नितीश का जाना और कुछ नहीं, भाजपा का सीएम का अपहरण कर सत्ता परिवर्तन करना है और इससे भाजपा को ही फायदा मिलेगा। एक और बात, जो विपक्ष के गलियारों में गूंज रही है वह यह कि नितीश ने चार राज्यों के आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही अपनी कुर्सी क्यों छोड़ी? बिहार मं सबसे लंबे समय तक राज करने वाले सीएम को पिछले विधानसभा चुनाव में महिलाओं के कंधे पर सवार होकर सत्ता में आना पड़ा और वह भी भाजपा की मेहरबानी पर। अब वही सीएम कुर्सी छोड़कर राज्यसभा का सदस्य बनने चल पड़ा है। ऐसे में जदयू के लिए जनता के सामने सीएम के इस्तीफे का कारण बता पाना आने वाले दिनों में काफी मुश्किल होने वाला है।
अभी 9 अप्रैल तक सीएम बने रहेंगे नितीश
दिल्ली में राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों ने बताया कि संद के उच्च सदन के लिए सदस्यों का चुनाव 9 अप्रैल को है, इसलिए नितीश के अभी सीएम बने रहने की संभावना है। 9 अप्रैल को उनके राज्यसभा की सीट पर चुने जाने के बाद उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देना होगा। तब तक वे मुख्यमंत्री बने रहे सकते हैं। सीएम के पद के लिए कुशवाहा समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी की दावेदारी सबसे मजबूत लग रही है। सम्राट इससे पहले बिहार में भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बिहार भाजपा के एक आला नेता का कहना है कि असल में दावेदारी सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के बीच है, जो अमित शाह की पसंद हैं। नित्यानंद को बिहार में भाजपा के सगठनात्मक मुद्दों की खासी समझ है।



