वीडीए के जेई,जोनल सील भवन में दे रहे अवैध निर्माण को बढ़ावा,भवन स्वामी से ले रहे चढ़ावा
सील बिल्डिंग में हो जारी "डील"लक्ष्मी कृपा से कर रहे गुड फील

- वीडीए के जेई,जोनल सील भवन में दे रहे अवैध निर्माण को बढ़ावा,भवन स्वामी से ले रहे चढ़ावा
- सील बिल्डिंग में हो जारी “डील”लक्ष्मी कृपा से कर रहे गुड फील
- जीरो टॉलरेंस का ढोल, रात के अंधेरे में अवैध निर्माण का खेल
- वीडीए में नियम नहीं, ‘रिश्वत’ से बनते हैं शील भवन
- दिन में सील, रात में निर्माण यही है वीडीए का असली सच
- कागजों में सख्ती, जमीन पर खुला अवैध निर्माण का बाजार
- मानचित्र जमा कराने का खेल, अवैध निर्माण को मिलता संरक्षण
- कम्पाउंडिंग बना अवैध इमारतों को वैध करने का हथियार
- जोनल अधिकारियों और जेई की मिलीभगत से खड़े हो रहे बहुमंजिला भवन
- सील भवनों में रात के अंधेरे में चलता निर्माण कार्य
- शिकायतों के बावजूद वीडीए प्रशासन की चुप्पी सवालों में
- अवैध वसूली में मस्त अधिकारी, शहर की योजना हो रही ध्वस्त

वाराणसी। वीडीए में अवैध निर्माण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात भले ही मंचों और प्रेस विज्ञप्तियों में बड़े जोर-शोर से कही जाती हो, लेकिन जमीन पर हकीकत बिल्कुल उलट नजर आती है। कागजों में सख्ती का दावा करने वाला वाराणसी विकास प्राधिकरण आज खुद सवालों के घेरे में है। आरोप है कि वीडीए के कुछ अधिकारी और अवर अभियंता नियमों को लागू करने के बजाय उन्हें तोड़ने का कारोबार चला रहे हैं। शहर में स्थिति इतनी विचित्र हो चुकी है कि दिन में जिन भवनों को अवैध बताकर सील किया जाता है, उन्हीं भवनों में रात के अंधेरे में धड़ल्ले से निर्माण कार्य चलता रहता है। सील की कार्रवाई महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है और उसके पीछे का असली खेल कथित तौर पर अवैध वसूली का बताया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि कई मामलों में पहले मानचित्र जमा कराने का खेल खेला जाता है। भवन स्वामी प्राधिकरण में एक सामान्य मानचित्र दाखिल करता है, लेकिन निर्माण उस मानचित्र से कई गुना बड़ा और अलग तरीके से किया जाता है। जब अवैध निर्माण की शिकायत सामने आती है तो प्राधिकरण के अधिकारी उसे रोकने के बजाय कम्पाउंडिंग के रास्ते वैध करने की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं। यानी पहले अवैध निर्माण होने दिया जाता है, फिर उसी को नियमों के नाम पर वैध कर दिया जाता है। इस पूरे खेल में प्राधिकरण के कुछ जोनल अधिकारी और अवर अभियंता की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फाइलों में कार्रवाई दिखाने और जमीन पर अवैध निर्माण को संरक्षण देने का दोहरा खेल लंबे समय से चल रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि शहर के कई इलाकों में बहुमंजिला भवन बिना उचित अनुमति के खड़े हो गए हैं। सड़कें संकरी हैं, पार्किंग की व्यवस्था नहीं है, लेकिन इमारतें लगातार ऊपर की ओर बढ़ती जा रही हैं। इसका सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था, जल निकासी और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वीडीए के उपाध्यक्ष द्वारा कई बार अवैध निर्माण पर सख्ती की बात कही गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर नगण्य नजर आता है। सवाल यह उठता है कि यदि शीर्ष स्तर से सख्ती के निर्देश दिए जाते हैं तो फिर निचले स्तर पर उनका पालन क्यों नहीं हो रहा। क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर इसके पीछे एक संगठित तंत्र काम कर रहा है। शहर के कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो वाराणसी की शहरी संरचना पूरी तरह अव्यवस्थित हो जाएगी। अवैध निर्माण न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह भविष्य में बड़े हादसों का कारण भी बन सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि वीडीए केवल कागजों में कार्रवाई दिखाने के बजाय वास्तविक रूप से अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाए। क्योंकि यदि कानून लागू करने वाली संस्था ही नियमों के साथ समझौता करने लगे तो शहर की नियोजित विकास की अवधारणा ही खतरे में पड़ जाती है।


कागजों में सख्ती, जमीन पर ढील
वाराणसी विकास प्राधिकरण का गठन शहर के नियोजित विकास के लिए किया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि शहर में भवन निर्माण निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार हो।
लेकिन समय के साथ स्थिति बदलती नजर आ रही है। आज वही संस्था जिस पर शहर की संरचना को व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी है, उसी पर अवैध निर्माण को संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं।
रात के अंधेरे में चलता निर्माण
शहर के कई इलाकों में यह शिकायत लगातार सामने आ रही है कि जिन भवनों को प्राधिकरण ने सील किया है, उनमें रात के समय निर्माण कार्य जारी रहता है।
दिन में सील की गई इमारतें रात होते ही फिर से निर्माण स्थल में बदल जाती हैं। मजदूर काम करते हैं, सामग्री पहुंचती है और इमारत धीरे-धीरे ऊपर उठती रहती है।
मानचित्र का खेल
सूत्र बताते हैं कि कई मामलों में पहले एक छोटा या सामान्य मानचित्र प्राधिकरण में जमा कराया जाता है।
लेकिन निर्माण उस मानचित्र से कई गुना बड़ा और अलग तरीके से किया जाता है। जब शिकायत होती है तो अधिकारी कहते हैं कि मामला विचाराधीन है या कम्पाउंडिंग की प्रक्रिया चल रही है।
कम्पाउंडिंग बना हथियार
कम्पाउंडिंग का उद्देश्य मामूली निर्माण विचलन को नियमित करना होता है। लेकिन आरोप है कि इसे बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण को वैध बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पूरे खेल में जोनल अधिकारियों और अवर अभियंताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। क्योंकि निर्माण कार्य की निगरानी और रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों पर होती है।
शहर पर बढ़ता खतरा
अवैध निर्माण का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इससे शहर की बुनियादी संरचना पर दबाव बढ़ जाता है।
संकरी सड़कों पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो जाती हैं, पार्किंग की व्यवस्था नहीं होती और ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ जाती है। स्थानीय लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि नियमों का पालन नहीं कराया जा सकता तो फिर प्राधिकरण की जरूरत ही क्या है। यह मामला केवल अवैध निर्माण का नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही का भी प्रश्न है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
* अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस सिर्फ कागजों में
* सील भवनों में रात के समय निर्माण कार्य जारी
* मानचित्र जमा कराकर अवैध निर्माण को मिल रहा संरक्षण
* कम्पाउंडिंग को बनाया गया अवैध निर्माण को वैध करने का माध्यम
* जोनल अधिकारियों और जेई की भूमिका पर गंभीर सवाल
* बहुमंजिला भवन बिना पर्याप्त पार्किंग और अनुमति के बन रहे
* शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
* शहर की नियोजित विकास योजना पर संकट




