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योगी के स्वजातीयों ने अफसरों को मौत के घाट उतारा,ठाकुरवाद का आरोप सीएम पर लगता है ढ़ेर सारा

हर्षित मिश्रा की मां ने कहा- पुलिस ने हत्यारे को संरक्षण दिया, बदायूं में दो पुलिसकर्मी निलंबित

* डीजीएम सुधीर गुप्ता की एफआईआर पर एक्शन नहीं लिया पुलिस ने
* आरोपी का चचेरा भाई भाजपा नेताओं का करीबी, गांव में रसूख से डरी पुलिस
* सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पुलिस-प्रशासन को घेरा, बोले- धृतराष्ट्र बनी सरकार
* यूपी में लगातार खराब हो रही है भाजपा की छवि, नेता भी परेशान

बदायूं/लखनऊ । उत्तरप्रदेश में सनातन पर वार और ठाकुरवाद का संरक्षण देने के आरोपों से जूझती योगी आदित्यनाथ की सरकार एक और झमेले में फंस गई है। गुरुवार 12 मार्च को एचपीसीएस के बदायूं एथेनॉल प्लांट में कंपनी के असिस्टेंट जनरल मैनेजर हर्षित मिश्रा और डिप्टी जीएम सुधीर कुमार गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हालांकि, यह बात सही है कि हत्यारे ठेकेदार अजय सिंह उर्फ रामू के निशाने पर डीजीएम सुधीर कुमार गुप्ता थे, लेकिन उनका बचाव करने आए हर्षित भी गोलियों का निशाना बन गए। अब राजनीतिक हल्कों में इस हत्याकांड को भाजपा के ठाकुरवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि आरोपी अजय सिंह के भाजपा के नेताओं से करीबी रिश्ते थे। पुलिस पर आरोप है कि करीब तीन महीने पहले आरोपी के खिलाफ डीजीएम सुधीर गुप्ता की एफआईआर के बाद भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इस मामले में पुलिस के दो अधिकारियों को निलंबित कर खानापूर्ति कर दी गई है।

आरोपी अजय सिंह ने घटना के बाद थाने आकर आत्मसमर्पण किया, लेकिन उसके अगले ही दिन पुलिस ने उसे बेहद विवादास्पद परिस्थितियों में एनकाउंटर के बाद घायल बताया। अजय सिंह के पैरों में पुलिस ने गोली मारी है।

पुलिस पर उठे गंभीर सवाल

पुलिस के अनुसार, आरोपी ठेकेदार अजय प्रताप सिंह ने जिस हथियार से अफसरों की हत्या की थी, उसे वारदात के बाद जंगल में छिपा दिया था। शुक्रवार तड़के पुलिस हथियार की बरामदगी के लिए जंगल में ले गई थी। इसी दौरान आरोपी ने झाड़ियों के बीच से लोडेड तमंचा निकालकर पुलिस टीम पर फायर कर दिया। जवाबी फायरिंग में वह जख्मी हो गया। हालांकि, पुलिस का यह तर्क किसी के गले नहीं उतर रहा है। अभी तक की जांच में यह सामने आया है कि आरोपी संजय सिंह बीते 6 माह से सुधीर गुप्ता को जान से मारने की धमकी दे रहा था। गुप्ता ने 4 फरवरी 2026 को पुलिस में इस बात की एफआईआर भी दर्ज कराई थी। संजय सिंह को पुलिस ने एक हफ्ते के लिए जेल भेज दिया था। वहां से छूटकर आने के बाद उसने प्लांट की गाड़ी को अगवा कर जबरन घुसा और वारदात कर दी। इससे पहले उसने इसी साल जनवरी में एथेनॉल प्लांट में घुसकर हंगामा खड़ा किया था। इसे भी पुलिस ने नजरअंदाज किया। बताया जाता है कि आरोपी अजय सिंह का अपने पैतृक गांव सहजनी में भारी रसूख था। गांव में उसकी आधा दर्जन दुकानें थीं। काफी जमीन भी थी। उसका चचेरा भाई जिला पंचायत सदस्य रह चुका है और स्थानीय भाजपा नेताओं के करीब माना जाता है। बताया जाता है कि ठाकुर होने और गांव का रसूखदार व्यक्ति होने के कारण पुलिस भी उसके खिलाफ कोई सख्त एक्शन नहीं ले पाई।

हर्षित मिश्रा की मां ने योगी सरकार को घेरा

मारे गए एजीएम हर्षित मिश्रा की मां रानी देवी ने योगी सरकार के ठाकुरवाद को इस हत्याकांड का प्रमुख रूप से जिम्मेदार बताते हुए कहा कि उनके बेटे ने पहले ही डीएम, एसपी, विधायक से जान पर खतरे की शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मीडिया के सामने रोते हुए कहा, ‘’ सब ठाकुर हैं… सब उनके ही आदमी हैं… मेरे बच्चे की बात किसी ने नहीं सुनी…’’। अब इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा- सत्ता सजातीयों के पक्षपाती मोह ने सत्ताधीशों को धृतराष्ट्र बना दिया है। सपा प्रमुख ने इस ट्वीट के साथ हर्षित मिश्रा की मां का वह वीडियो भी साझा किया, जिसमें वह पुलिस और प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगा रही हैं। साफ है कि राज्य की राजनीति में यह मुद्दा एक बार फिर ठाकुरवाद बनाम ब्राह्मणवाद का मसला बनने जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव को अब महज एक साल से भी कम समय बचा है और इस बीच प्रदेश में एक के बाद ठाकुरों को सत्ता से संरक्षण मिलने और एक खास वर्ग के लोगों में कानून-व्यवस्था का खौफ खत्म हो जाने से भाजपा की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं।

अजय सिंह इसलिए नाराज था

आरोपी अजय सिंह प्लांट में पराली का लेन-देन करता था। प्लांट में उसके मर्जी के बिना कोई नौकरी नहीं कर सकता था। जो रुपये नहीं देता था, उसकी शिकायतें कराकर वह नौकरी से बाहर निकलवा देता था। लेकिन, उसके आचरण और घोटालों को देखते हुए डीजीएम सुधीर गुप्ता ने उसे ब्लैकलिस्टेड कर दिया था। उसी समय से वह गुप्ता से नाराज चल रहा था। उसने गुप्ता को परिवार समेत जान से मारने की धमकी देने और उनका पीछा करने की भी कोशिशें कीं। ये सारी शिकायतें गुप्ता ने खुद वादी बनकर पुलिस में दर्ज एफआईआर में की हैं। इन हालात में पुलिस को सख्त कार्रवाई करते हुए अजय सिंह को गिरफ्तार कर उसे जेल भेजना चाहिए था। लेकिन आरोपी के भाजपा नेताओं के साथ करीबी रिश्तों को देखकर पुलिस मारे डर के ऐसा नहीं कर पाई। प्रदेश भाजपा संगठन के एक आला नेता मानते हैं कि राज्य में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और पार्टी से जुड़े एक खास वर्ग के नेताओं में पुलिस का खौफ खत्म हो जाने से उन्हें भी जनता के सवालों का सामना करने में मुश्किलें पेश आ रही हैं। उन्होंने माना कि सीएम योगी की स्वच्छंद कार्यशैली से प्रदेश में भाजपा की छवि को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, सपा सांसद आदित्य यादव ने दोहरे हत्याकांड पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि दिन के उजाले में औद्योगिक परिसर के अंदर इस तरह की वारदात होना बेहद दुखद और शर्मनाक है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। उन्होंने स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

31 मार्च को रिटायर होना था गुप्ता को

डीजीएम सुधीर गुप्ता खुद अजय सिंह की दबंगई से इतना डर गए थे कि उन्होंने रिटायरमेंट के 5 साल पहले ही वीआरएस का आवेदन दे दिया था, जो मंजूर भी हो गया था। 31 मार्च को नौकरी का आखिरी दिन था। वहीं, हर्षित मिश्रा ने भी अपने ट्रांसफर के लिए एप्लिकेशन दी थी। गुरुवार को सुधीर की जगह नए डीजीएम लोकेश भी मुंबई से जॉइन करने के लिए प्लांट पहुंचे थे। उनके सामने ही वारदात हुई। इसके बाद वह इतना डर गए कि पुलिस उन्हें बरेली एयरपोर्ट तक छोड़कर आई। वह मुंबई स्थित अपने घर लौट गए।

पॉक्सो एक्ट: सुनवाई होना मुश्किल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के केस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिनलेकिन वकीलों की हड़ताल को देखते हुए सुनवाई मुश्किल लग रही है। सुनवाई कर रहे जज की भी व्यवस्तताएं हैं। उधर, केस दर्ज कराने वाले आशुतोष महाराज अब यूपी पुलिस पर ही नाराजगी जताते हुए हमलावर हो रहे हैं। यहां तक की आशुतोष महाराज ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष नहीं रखा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक और अग्रिम जमानत दिए जाने के मामले में आशुतोष महाराज को 12 मार्च तक हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखना था, सबूत पेश करना था और जरूरी दस्तावेज दाखिल करने थे। आशुतोष महाराज ने कोर्ट में अपना पक्ष नहीं रखा। बल्कि इसका सारा इल्जाम प्रशासन पर लगा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई। उनकी जान को खतरा है। आपको बता दें कि आशुतोष महाराज पर बीते दिनों ट्रेन में हमला हुआ है और तभी से वे किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं।

संगठनात्मक बदलावों की चर्चा

यूपी में ठाकुरवाद और ब्राह्मणवाद के बीच आरोप-प्रत्यारोपों से परे राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए हाशिए पर पड़े नेताओं के माध्यम से वोटरों को साधने के लिए संगठनात्मक बदलावों की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के सियासी हल्कों में इस बात की चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की अगुवाई में यह बदलाव प्रक्रिया चल रही है। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश कार्यकारिणी में 30 से 40 प्रतिशत तक नए चेहरों को जगह मिल सकती है। क्षेत्रीय अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, महामंत्रियों और अन्य पदों पर नए नियम लागू किए जा रहे हैं, जिसमें दो बार एक ही पद पर रह चुके पदाधिकारियों को दोबारा वही जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। यह फेरबदल जिला स्तर से शुरू होकर प्रदेश स्तर तक देखने को मिल सकता है। हाल ही में कई जिलों में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां हो चुकी हैं और मंडल स्तर पर भी बदलाव जारी हैं। होली के बाद प्रदेश कमेटी में बड़े ऐलान की संभावना है। पार्टी का मकसद संगठन को चाक-चौबंद करना और चुनावी तैयारियों को मजबूत करना है, ताकि क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ नई ऊर्जा का संचार हो सके।

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