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बीते 12 साल से चूना लगा रही थीं 3 कंपनियां,मोदी राज में हर जगह केवल गड़बड़ियां ही गड़बड़ियां

ओएनजीसी ने इस एक अंक से पकड़ा मामला, सीसआई ने 5 साल में साबित किया पूरा घोटाला

* कागजों में अलग तीनों कंपनियों ने बिल्कुल एक जैसी रकम के टेंडर भरे
* घोटालेबाजों ने ओएनजीसी में लगा रखी थी सेंध, मिलती थीं सभी जानकारियां
* पुलिस ने मिलकर कंपनियों ने रची साजिश, अब होंठ सिल रखे हैं
* अगर साजिश सफल रहती तो कमजोर बनते ओएनजीसी के तेल के कुएं

नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी ओएनजीसी को सीमेंट बनाने वाली तीन बड़ी कंपनियां बीते 12 साल से चूना लगा रही थीं। लेकिन इस बार टेंडर के सिर्फ एक अंक के कारण पकड़ में आ गईं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि भारत की जांच एजेंसी को यह मामला साबित करने में पांच साल का लंबा वक्त लगा। अब तक तो ये तीन आरोपी कंपनियों ने न जाने कितनी ही कंपनियों को चूना लगा दिया होगा।
असल में ओएनजीसी को 2018 में तेल इकट्ठा करने के लिए कुएं बनाने थे। उसने सीमेंट कंपनियों से आपूर्ति के लिए टेंडर बुलवाए। भारत की तमाम सीमेंट बनाने वाली कंपनियों ने टेंडर भरे। लेकिन जब इन टेंडरों को खोला गया तो पता चला कि तीन कंपनियों ने एक समान टेंडर डाले हैं और तीनों के रेट समान हैं। तीनों ही कंपनियों ने 7350 रुपए के भाव 17 सेक्टर्स में सप्लाई के लिए लगाए थे। ओएनजीसी ने घोटाले की आशंका से मामला कंपटीशन कमेटी और इंडिया यानी सीसीआई के हवाले कर दिया। लेकिन सीसीआई को भी यह मामला साबित करने में पूरे पांच साल लगे, क्योंकि बीच में मामले को रफा-दफा करने के लिए भारी दबाव बना।

कौन हैं ये तीन कंपनियां

इस मामले का सबसे पहली बार पर्दाफोश करने वाले ओएनजीसी के एक अधिकारी कहते हैं, ‘’मेरा लकी नंबर 7 है और इसीलिए मुझे टेंडर की रकम देखकर शक हुआ। ऐसा कैसे हो सकता है कि भारत की तीन बड़ी सीमेंट उत्पादक कंपनियां एक ही भाव पर टेंडर भरे। मुझे इसमें घोटाले की आशंका हुई तो बड़े अफसरों को सूचना दी’’। जब ओएनजीसी के आला अधिकारियों ने मामले को सीसीआई को दिया तो इसकी जांच में पूरे पांच साल लगे। जांच की रिपोर्ट इस साल जनवरी में ही सामने आई है। एक विदेशी समाचार एजेंसी के पास रिपोर्ट की कॉपी हाथ लगी तो उसने इसे खबर के रूप में प्रकाशित किया। रिपोर्ट में साफ है कि किस तरह घोटालेबाज कंपनियों ने पुलिस के साथ मिलकर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की, जिससे पूरी प्रक्रिया में पांच साल का लंबा वक्त लग गया। रिपोर्ट में तीन कंपनियों- डालमिया सीमेंट, जो कि भारत में सीमेंट बनाने वाली चौथी सबसे बड़ी कंपनी है। दूसरी कंपनी दिग्विजय कंपनी है, जबकि तीसरी कंपनी इंडिया सीमेंट है। जांच रिपोर्ट साफ कहती है कि इन तीनों कंपनियों ने 2007 से 2018 तक लगातार ओएनजीसी को चूना लगाया और हर बार पकड़ में आने से बचती रहीं। रिपोर्ट यह भी कहती है कि भले ही कागजों में तीनों कंपनियां अलग-अलग दिखती हों, लेकिन तीनों का गिरोह इस घोटाले में मिलकर काम कर रहा था। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सीमेंट के इस चोरी-छिपे कारोबार में तीनों कंपनियों की पहचान इसलिए छिपी रही, क्योंकि इसका सभी को बराबर फायदा, यानी दलाली मिलती रही। इसीलिए सीसीआई को यह घोटाला सामने लाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

कितना गंभीर है यह घोटाला

वर्तमान में भारत समेत दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की कमी से हाहाकार मचा है। इस हालात में सवाल उठाए जा रहे हैं कि भारत में केवल 25 दिन के लिए ही तेल का भंडार क्यों हैं? वहीं जापान जैसे छोटे से देश में तेल के तीन महीने के भंडार हैं, जिससे इस तरह की आपात स्थितियों में, जबकि युद्ध के कारण हॉर्मूज का रास्ता बंद होने के कारण तेल आयात पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हो, तेल का लंबा सुरक्षित भंडार भारत को स्थिति से उबारने के लिए मददगार होता। ओएनजीसी ने इस हालात को टालने के लिए तेल भंडारण के कुएं बनवाने के लिए टेंडर बुलवाए थे। लेकिन इसमें तीन सीमेंट कंपनियों का बिल्कुल एक ही रेट कोड करना एक बड़े और गंभीर घोटाले की ओर इशारा करता है। तीनों कंपनियों ने टेंडर प्रक्रिया से छेड़छाड़ की, सीमेंट की सप्लाई के पैटर्न के बारे में जानकारी ली और टेंडर प्रक्रिया से विदेशी कंपनियों को बाहर रखने के लिए मिलकर एक ही तरह का रेट कोड किया। सीसीआई की 90 पेज की रिपोर्ट कहती है कि इन कंपनियों ने आपस में बैठकों, ईमेल और गोपनीय बातों की जानकारी भी आपस में साझा की। इससे साफ है कि तीनों कंपनियों ने ठेका उठाने के लिए सीमेंट की गुणवत्ता से समझौता करने की गहरी साजिश रची। यह साजिश अगर कामयाब हो जाती है तो ओएनजीसी के तेल के कुओं की क्वालिटी तेल के रिसाव को बढ़ाने वाली हो सकती थीं।

डालमिया ने चुप्पी साधी

यह मामला सामने आने के बाद डालमिया सीमेंट ने चुप्पी साध ली है। कंपनी का कहना है कि चूंकि यह मामला अभी सीसीआई के पास लंबित है, इसलिए वे अभी कुछ नहीं कहेंगे। कंपनी अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है। वहीं, इंडिया सीमेंट, जिसकी अल्ट्राटेक सीमेंट के साथ भागीदारी है ने भी चुप्पी साध ली है। यही हाल दिग्विजय सीमेंट का भी है। अब अगले कुछ महीनों में सीसीआई का आदेश आएगा, लेकिन उससे पहले घोटालेबाज कंपनियों को जांच रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। सीसीआई उनके बयान के आधार पर किसी आरोप को लंबित भी कर सकता है, लेकिन इन तीनों कंपनियों ने आपस में मिलकर बीते 12 साल में जिस तरह से ओएनजीसी को चूना लगाया है, उसे देखते हुए उनके खिलाफ तीन गुना या तीनों कंपिनयों के मुनाफ का 10 फीसदी जुर्माना लगाया जा सकता है। साल 2024-25 में डालमिया ने 1.5 बिलियन डॉलर, दिग्विजय सीमेंट ने 79 मिलियन डॉलर और इंडिया सीमेंट ने 444 मिलियन डॉलर की कमाई की है।

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