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मंत्री रविंद्र जायसवाल का श्रीराम कालेज के महेंद्र जायसवाल पर वरदहस्त,वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट हुई पस्त

मंत्री के ‘वरदहस्त’ के आगे बौना कानून? पुलिस आयुक्त का आदेश कूड़ेदान में

  • हत्या के आरोपी का विद्यालय परिसर में चलता ‘लान’
  • पुलिस आयुक्त के सख्त आदेश के बावजूद लान संचालक के खिलाफ नहीं दर्ज नहीं हुई एफआईआर
  • आरोपी खुलेआम विद्यालय परिसर में चला रहा है लान और प्रशासन बना मूकदर्शक
  • लान संचालक पर मंत्री रविन्द्र का ‘वरदहस्त’ होने की चर्चा तेज
  • आरोपी खुद को मंत्री का रिश्तेदार बताकर कानून को चुनौती देता फिर रहा
  • एक भाई की हत्या का आरोप, दूसरे भाई की शादी रुकवाकर हड़पना चाहता है संपत्ति
  • पुलिस आयुक्त के आदेश को स्थानीय पुलिस ने किया नजरअंदाज
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न

अचूक सँघर्ष वाराणसी। काशी के सांसद व देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी को अक्सर प्रशासनिक अनुशासन और विकास का मॉडल बताया जाता है। केंद्र और राज्य सरकार के मंचों से बार-बार यह दावा किया जाता है कि काशी में कानून व्यवस्था मजबूत है, प्रशासन संवेदनशील है और आम नागरिक को न्याय दिलाने के लिए पूरी व्यवस्था तत्पर रहती है। लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों से बिल्कुल उलट दिखाई देती है। एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने न केवल स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि यह भी संकेत दिया है कि यदि किसी व्यक्ति को सत्ता का संरक्षण प्राप्त हो तो कानून के आदेश भी कूड़ेदान में फेंक दिए जाते हैं। स्थानीय पुलिस द्वारा मामला दर्ज न करना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर किस दबाव में कानून को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। बताया जा रहा है कि जिस व्यक्ति पर हत्या का आरोप हो, वह आज भी खुलेआम घूम रहा है। इतना ही नहीं, वह एक विद्यालय के परिसर में लान संचालित कर रहा है और पूरे इलाके में खुलेआम अपनी ताकत का प्रदर्शन भी करता फिर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी खुद को एक प्रभावशाली मंत्री रविन्द्र का रिश्तेदार बताता है और इसी ‘रिश्तेदारी’ के भरोसे कानून को चुनौती देता नजर आता है। आरोपी परिवार की पूरी संपत्ति हड़पने की साजिश में जुटा हुआ है। आरोप है कि उसने एक भाई की हत्या कर दी और अब दूसरे भाई की शादी नहीं होने दे रहा है ताकि भविष्य में संपत्ति पर उसका कब्जा आसान हो सके। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पुलिस आयुक्त के आदेश के बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हो रही है। यदि वास्तव में उच्च स्तर से निर्देश दिए गए हैं और फिर भी मामला दर्ज नहीं हो रहा, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि कानून व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उस शहर की है जिसे प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के कारण विशेष महत्व प्राप्त है। यदि यहां भी एक फर्जी तरीके से लॉन का संचालन करने वाले पर एफआईआर दर्ज नहीं हो रही है, तो यह पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। वाराणसी में पहले भी कई मामलों में यह आरोप लगते रहे हैं कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में स्थानीय पुलिस अक्सर हिचकिचाती है और उसमें भी प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी की जाए, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरे कानून व्यवस्था तंत्र की कमजोरी को उजागर करता है। यह मामला अब न्याय का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह उस व्यवस्था की परीक्षा भी बन गया है जो खुद को कानून का रक्षक बताती है। सवाल यह है कि क्या काशी में कानून का राज चलेगा या फिर सत्ता के प्रभाव से न्याय की राह हमेशा की तरह अवरुद्ध होती रहेगी।

         

हत्या का आरोप, लेकिन पुलिस की चुप्पी

सूत्रों के अनुसार यह मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें संपत्ति को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसी विवाद के चलते एक भाई की हत्या कर दी गई।
परिवार का दावा है कि हत्या के बाद उन्होंने पुलिस से कई बार शिकायत की, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

आदेश के बाद भी दर्ज नहीं हुई एफआईआर

आरोपी के खिलाफ सबसे गंभीर आरोप यह है कि वह एक विद्यालय परिसर में लान संचालित कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लान खुलेआम चल रहा है और प्रशासन इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। इलाके में यह भी चर्चा है कि आरोपी खुद को मंत्री रविन्द्र का रिश्तेदार बताता है।
इसी रिश्तेदारी के भरोसे वह पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश करता है। आरोपी की नजर उनकी पारिवारिक संपत्ति पर भी है। सूत्रों की मानें तो एक भाई की हत्या का आरोप के बाद अब आरोपी दूसरे भाई की शादी नहीं करवा रहा है ताकि भविष्य में संपत्ति पर उसका कब्जा आसान हो सके।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

पुलिस आयुक्त के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता तभी कायम रहती है जब उसका पालन बिना किसी भेदभाव के किया जाए। वाराणसी को अक्सर विकास और प्रशासनिक सुधारों के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन यदि यहां हत्या का आरोपी अवैध रूप से लॉन का खुलेआम संचालन कर रहा है और एफआईआर दर्ज नहीं हो रही है तो कानून की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगना लाजिमी है।

* पुलिस आयुक्त के आदेश की अनदेखी का आरोप
* हत्या का आरोपी खुलेआम विद्यालय परिसर में चला रहा लान
* मंत्री से रिश्तेदारी का दावा कर कानून को चुनौती
* संपत्ति हड़पने की साजिश का आरोप
* पुलिस की निष्क्रियता से न्याय व्यवस्था पर सवाल
* पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में कानून व्यवस्था की पोल

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