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ईरान के युद्ध पीड़ितों के लिए कश्मीरियों का उमड़ा प्यार, समर्थन में जुटाए बेशकीमती उपहार

  • घर-घर जाकर लोगों के मांगा चंदा, सुरक्षा एजेंसियां हुई चौकस
  • बच्चे, बूढ़े, महिलाएं सभी इस अभियान में हुए शामिल, ईरानी दूतावास को भेजा चंदा
  • ईरानी दूतावास ने कहा- थैंक्यू, बदले में जारी किया क्यूआर कोड
  • सुरक्षा एजेंसियों ने फंडिंग का स्रोत पूछा, सत्ता और विपक्ष इस मामले में ईरान के साथ, कहा- बस, दिखावा न करें

श्रीनगर। कश्मीरियों का आजकल ईरान के प्रति प्यार उमड़ रहा है। अमेरिका अैर इजरायल के साथ युद्धरत ईरान की सहायता के लिए श्रीनगर में कई स्थानों पर दान लेने स्टॉल लगे हैं। लोग नकदी से लेकर भेड़-बकरी और यहां तक कि सोने-चांदी के गहने तक दे रहे हैं। भारत स्थित ईरान के दूतावास ने हालांकि, इस दयालुता के लिए कश्मीरियों का धन्यवाद कहा है कि लेकिन माना जा रहा है कि शिया बहुल कश्मीर घाटी में लोगों के इस समर्थन पर गृह मंत्रालय से जुड़ी खुफिया एजेंसियां खास नजर रख रही हैं।

 

यह है इस सतर्कता की वजह

पहली बात तो यह है कि कश्मीर घाटी में 85 फीसदी मुसलमान हैं और इनमें से अधिकतर शिया बहुल हैं। ईरान भी शिया बहुल देश है। यही कारण है कि कश्मीर की आबादी का ईरान के प्रति हमेशा से सहानुभति भरा रवैया रहा है। इससे पहले भी बीते फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद कश्मीरियों ने राज्य के कई हिस्सों में विरोध में मोर्चा निकाला था। पुतले जलाए गए और अमेरिका और इजरायल के विरोध में नारेबाजी की गई। माना जाता है कि इजरायल और अमेरिका के हमले में शहीद हुए अयातुल्लाह खुमैनी ने बरसों पहले कश्मीर की यात्रा की थी। तभी से कशमीरियों का दिल उन पर कुर्बान हो गया। लेकिन भारत के लिए चिंता की बात यह है कि ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद भारत के किसी भी हिस्से में इस कदर विरोध नहीं हुआ, जितना कि कश्मीर में। इसीलिए भारत की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए है। चूंकि पाकिस्तान भी ईरान के साथ है, इसलिए भारत की एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं।

बच्चों ने पिगी बैंक भी तोड़े

कश्मीर घाटी के हसनाबाद और जादिबल जैसे शिया बहुल इलाकों में बच्चों ने ईरान में घायल और बीमार लोगों की मदद के लिए अपने पिगी बैंक से भी पैसे निकालकर दान में दिए हैं। लोगों के पास जो भी था-नकदी, सोने के जेवर, गाड़ी और यहां तक कि पालतू पशु भी लाकर दान में दिए गए। माना जा रहा है कि भारत स्थित ईरानी दूतावास ने भी कश्मीर में लोगों के इस जनसमर्थन से प्रभावित होकर अपने दूतावास से एक क्यूआर कोड जारी किया है, जिसे स्कैन कर लोग ईरान में पीड़ितों की मदद कर सकते हैं।

ईद के बाद घर-घर जाकर चंदा मांगा

इस साल ईद के बाद कश्मीर के युवाओं ने लोगों के घर जाकर ईरान के युद्ध पीड़ितों के लिए चंदा मांगा। एक सरकारी अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि बच्चे, महिलाएं, बूढ़े सभी मिलकर इस अभियान का हिस्सा बने। महिलाओं ने अपने घर में रखे तांबे के बर्तन और अन्य महंगी चीजें दान में दी हैं। रैनावाड़ी के एक रहवासी ऐजाज अहमद ने कहा कि एक सभ्यता दूसरे के लिए इतना तो कर ही सकती है। एक कश्मीरी महिला ने तो 28 साल पहले गुजरे अपने पति की स्मृति में रखा सोने का स्मृति चिन्ह तक ईरान के लोगों पर न्योछावर कर दिया।

जम्मू के पुंछ में भी चंदा बटोरा

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में बुधवार को सिख समुदाय के लोगों ने घर-घर जाकर चंदा बटोरा और बदले में जो भी पैसा मिला, उसे भारत स्थित ईरानी दूतावास तक पहुंचाया। इस अभियान में नकद राशि, सोने के जेवर और अन्य बेशकीमती चीजें शामिल हैं। उत्तरी कश्मीर के पाटन के माटीपुरा इलाके में चंदा जुटाने के इस सामुदायिक अभियान में पांच लाख रुपए इकट्ठा हुए, जिसे ईरानी दूतावास को दिया गया। कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इम्तियाज हुसैन का कहना था कि वे सीधे तौर पर नहीं, लेकिन ईरान का समर्थन जरूर करते हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा- हुसैन, तुम नहीं हो, तुम्हारा घर भी नहीं है। लेकिन तुम्हें अपने पीछे आततायीयों से डरने की भी कोई जरूरत नहीं है।

फंडिंग पर एजेंसियों की नजर

शिया समुदाय के एक बड़े नेता इमरान रजा ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां इस सामुदायिक फंडिंग पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। फंडिंग जुटाने वाले कई लोगों को एजेंसियों की तरफ से फोन आए, जिसमें उनसे फंडिंग का स्रोत, जुटाई गई धनराशि और फंड देने वाले लोगों के बारे में पूछा गया। बताया जाता है कि सुरक्षा एजेंसियां इसलिए भी चौकस हैं, क्योंकि इस तरह की फंडिंग में आतंकी संगठनों का भी कई बार हाथ हो सकता है। रजा ने कहा कि इस संवेदनशील घड़ी में सभी लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दान की राशि केवल मानवीय कार्यों के लिए उपयोग में लाई जाए, ताकि यह पैसा उन लोगों तक पहुंच सके, तो वास्तव में पीड़ित हैं। रजा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट में पोस्ट किया कि ईरान के लोगों के प्रति कश्मीरियों की संवेदनशीलता और भीतर से जुड़ी भावनाओं को आघात न लगे, हमें इसके लिए पूरी कोशिश करनी चाहिए। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता तनवीर सादिक ने भी ईरान में पीड़ितों के लिए पैसा जमा कराने के अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि इसे दिखावे से दूर रखा जाना चाहिए। यह काम मानवता के दायरे में हो, ताकि लोग जात, पंथ और संप्रदाय से ऊपर उठकर पीड़ितों की मदद के लिए आगे आएं, लेकिन दिखावे से दूर रहें।

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